09 Aug हिमाचल में 60 सुरंगों वाली बिलासपुर-मनाली-लेह रेल परियोजना: सर्वे शुरू
✎ बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन एक महत्वपूर्ण सामरिक परियोजना है जो लद्दाख तक हर मौसम में रेल संपर्क स्थापित करेगी और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा तथा आर्थिक विकास में सहायक होगी।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अवसंरचना (रेलवे, सड़क आदि) | GS Paper III — आर्थिक विकास (पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था) | GS Paper III — सुरक्षा (सीमावर्ती क्षेत्रों में अवसंरचना) | GS Paper I — भूगोल (हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियाँ)
- Prelims: बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन, सामरिक रेल परियोजनाएँ, हिमालयी क्षेत्र में रेलवे निर्माण, सुरंग निर्माण तकनीक, लद्दाख तक रेल संपर्क, ऑल-वेदर कनेक्टिविटी
- Essay: भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में अवसंरचना विकास: सुरक्षा और समृद्धि का संतुलन, पहाड़ी क्षेत्रों में विकास परियोजनाएँ: चुनौतियाँ, अवसर और पर्यावरणीय स्थिरता
त्वरित पुनरावृत्ति: बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन एक महत्वपूर्ण सामरिक परियोजना है जो लद्दाख तक हर मौसम में रेल संपर्क स्थापित करेगी और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा तथा आर्थिक विकास में सहायक होगी।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित 475 किलोमीटर लंबी बिलासपुर-मनाली-लेह ब्रॉडगेज रेललाइन के अंतिम लोकेशन सर्वे का कार्य सलापड़ से सरचू तक शुरू हो गया है। इस परियोजना में लगभग 60 सुरंगें बनाई जाएंगी, जिनके माध्यम से रेल दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों को पार करेगी। निजी कंपनी को 40 दिनों में सर्वे पूरा कर रिपोर्ट रेलवे को सौंपने का लक्ष्य दिया गया है, जिससे इस महत्वपूर्ण सामरिक परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि
- बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन को देश की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक रेल परियोजनाओं में से एक माना जाता है।
- यह परियोजना लद्दाख तक हर मौसम में रेल संपर्क स्थापित करेगी, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की आवाजाही के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- रेललाइन का निर्माण हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में सुरंगें और पुल शामिल होंगे।
- उत्तराखंड की पर्वतीय रेल परियोजनाओं में अपनाई गई सुरंग निर्माण तकनीक का उपयोग इस परियोजना में भी किया जाएगा।
- यह परियोजना पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में भी सहायक होगी।
- सर्वे के दौरान सुरंगों की लंबाई, भूगर्भीय स्थिति, ट्रैक की एलाइनमेंट और पुलों के संभावित स्थानों का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।
बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन परियोजना
- यह एक प्रस्तावित 475 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज रेललाइन है जो हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर को मनाली होते हुए लद्दाख के लेह से जोड़ेगी।
- परियोजना का मुख्य उद्देश्य लद्दाख क्षेत्र तक हर मौसम में (ऑल-वेदर) रेल संपर्क स्थापित करना है, जो वर्तमान में सड़क मार्ग से मौसमी रूप से ही संभव है।
- यह भारत की सबसे ऊंची रेललाइनों में से एक होगी और इसे अत्यधिक ऊंचाई वाले, दुर्गम पहाड़ी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरना होगा।
- परियोजना में लगभग 60 सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है, जो पहाड़ों की अधिक कटाई से बचाएंगी और भूस्खलन व बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में रेल संचालन को सुरक्षित व सुगम बनाएंगी।
- इसका सामरिक महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय सेना के जवानों और सैन्य साजो-सामान की त्वरित आवाजाही को सुनिश्चित करेगी।
- आर्थिक दृष्टिकोण से, यह परियोजना लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देगी, स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
- इस परियोजना के लिए अंतिम लोकेशन सर्वे (Final Location Survey) का कार्य प्रगति पर है, जो ट्रैक की सटीक संरेखण और इंजीनियरिंग चुनौतियों का आकलन करेगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| बिलासपुर-मनाली-लेह ब्रॉडगेज रेललाइन | देश की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक रेल परियोजनाओं में से एक। |
| लंबाई | लगभग 475 किलोमीटर। |
| सुरंगें | लगभग 60 सुरंगें प्रस्तावित, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों को पार करने के लिए। |
| सर्वेक्षण | सलापड़ से सरचू तक अंतिम लोकेशन सर्वे जारी। |
| तकनीक | उत्तराखंड की पर्वतीय रेल परियोजनाओं में अपनाई गई तकनीक का उपयोग। |
| मौसम | लद्दाख तक हर मौसम में रेल संपर्क स्थापित होगा। |
महत्व
सामरिक महत्व
- यह परियोजना सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की आवाजाही को सुगम बनाएगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।
- लद्दाख जैसे महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र तक हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी, जो सैन्य रसद और तैनाती के लिए महत्वपूर्ण है।
आर्थिक महत्व
- पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
- सामानों की ढुलाई आसान होगी, जिससे क्षेत्र में व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा।
सामाजिक महत्व
- दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बेहतर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे उनका जीवन स्तर सुधरेगा।
- स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।
पर्यावरणीय महत्व
- सुरंगों के माध्यम से रेललाइन का निर्माण पहाड़ों की अधिक कटाई से बचाएगा, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बना रहेगा।
- बर्फबारी और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में भी रेल संचालन सुरक्षित और सुगम बनाया जा सकेगा, जिससे प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव कम होगा।
चुनौतियाँ
1. कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ
- हिमालयी क्षेत्र की दुर्गम और अस्थिर भूगर्भीय स्थितियाँ सुरंगों और पुलों के निर्माण में बड़ी चुनौती पेश करती हैं।
- ऊंचाई, खड़ी ढलानें और भूकंपीय गतिविधियाँ निर्माण कार्य को जटिल बनाती हैं।
यूपीएससी लिंक: भूगोल: भारत का भौतिक भूगोल
2. जलवायु संबंधी बाधाएँ
- अत्यधिक बर्फबारी, भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी मौसमी घटनाएँ निर्माण कार्य में देरी और लागत वृद्धि का कारण बन सकती हैं।
- ठंड का मौसम और ऑक्सीजन की कमी श्रमिकों के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ पैदा करती हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
3. तकनीकी और इंजीनियरिंग चुनौतियाँ
- 60 सुरंगों और कई पुलों का निर्माण अत्याधुनिक इंजीनियरिंग कौशल और विशेष उपकरणों की मांग करता है।
- सुरंगों की भूगर्भीय स्थिति का विस्तृत अध्ययन और उपयुक्त निर्माण विधियों का चयन महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी: आधारभूत संरचना विकास
4. वित्तीय और समयबद्धता
- परियोजना की विशालता और जटिलता के कारण इसकी लागत बहुत अधिक होने की संभावना है।
- मौसम की अनिश्चितता और तकनीकी चुनौतियों के कारण परियोजना के समय पर पूरा होने में देरी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: आधारभूत संरचना वित्तपोषण
5. पर्यावरणीय प्रभाव आकलन
- हिमालयी पारिस्थितिकी के प्रति संवेदनशील होने के कारण, निर्माण गतिविधियों का पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का सावधानीपूर्वक आकलन और शमन आवश्यक है।
- स्थानीय वनस्पतियों और जीवों पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण: पर्यावरणीय प्रभाव आकलन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूगर्भीय अस्थिरता | सुरंगों और पुलों के निर्माण में भूस्खलन और भूकंप का खतरा। |
| अत्यधिक मौसम | बर्फबारी और हिमस्खलन से निर्माण कार्य में बाधा और रखरखाव की चुनौतियाँ। |
| उच्च लागत | दुर्गम क्षेत्र में निर्माण के कारण परियोजना की अनुमानित लागत में वृद्धि। |
| तकनीकी विशेषज्ञता | जटिल सुरंग निर्माण और पर्वतीय इंजीनियरिंग के लिए विशेष ज्ञान और अनुभव की आवश्यकता। |
| पर्यावरणीय संवेदनशीलता | हिमालयी पारिस्थितिकी पर निर्माण के संभावित नकारात्मक प्रभावों को कम करना। |
आगे की राह
- अत्याधुनिक भूगर्भीय सर्वेक्षण तकनीकों का उपयोग करके विस्तृत भूगर्भीय अध्ययन सुनिश्चित करना।
- पर्वतीय रेल परियोजनाओं में अनुभवी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की सलाह लेना।
- पर्यावरण-अनुकूल निर्माण विधियों और सामग्रियों को अपनाना ताकि हिमालयी पारिस्थितिकी पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
- परियोजना के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का आवंटन और प्रभावी लागत प्रबंधन रणनीतियाँ लागू करना।
- निर्माण श्रमिकों के लिए उच्च ऊंचाई और ठंडे मौसम में काम करने के लिए विशेष प्रशिक्षण और सुरक्षा उपाय प्रदान करना।
- परियोजना के विभिन्न चरणों में स्थानीय समुदायों को शामिल करना और उनके हितों का ध्यान रखना।
- मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिए आपातकालीन योजनाएं और लचीली कार्यप्रणाली विकसित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन · सामरिक महत्व · हिमालयी क्षेत्र में अवसंरचना विकास · सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास · ऑल-वेदर कनेक्टिविटी · सुरंग निर्माण तकनीक · पहाड़ी क्षेत्रों में रेल परियोजनाएं · पर्यटन संवर्धन · स्थानीय अर्थव्यवस्था · भूगर्भीय चुनौतियाँ
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में रेलवे का विषय’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ द्वारा राज्यों को अनुदान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 355’, ‘note’: ‘राज्य की बाहरी आक्रमण से रक्षा’}
अवधारणा प्रवाह
बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन परियोजना का प्रस्ताव → अंतिम लोकेशन सर्वे का संचालन → दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंगों और पुलों का निर्माण → लद्दाख तक हर मौसम में रेल संपर्क स्थापित → सामरिक, आर्थिक और सामाजिक लाभ प्राप्त
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन परियोजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह परियोजना लद्दाख तक हर मौसम में रेल संपर्क स्थापित करेगी।
2. इस रेललाइन का एक बड़ा हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा ताकि पहाड़ों की कटाई कम हो सके।
3. यह परियोजना केवल पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई जा रही है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि परियोजना का मुख्य उद्देश्य लद्दाख तक हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण रेललाइन का अधिकांश हिस्सा सुरंगों से गुजरेगा। कथन 3 गलत है क्योंकि यह परियोजना सामरिक महत्व के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगी, केवल पर्यटन इसका एकमात्र उद्देश्य नहीं है।
Q2. अभिकथन (A): बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन को देश की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक रेल परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।
कारण (R): यह परियोजना सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की आवाजाही को सुगम बनाएगी और लद्दाख तक हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में, निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि यह परियोजना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि सेना की आवाजाही और हर मौसम में कनेक्टिविटी ही इसके सामरिक महत्व के प्रमुख कारण हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ हिमालयी क्षेत्र में अवसंरचना विकास की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा कीजिए, विशेष रूप से बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन जैसी परियोजनाओं के संदर्भ में। इन परियोजनाओं का सामरिक और सामाजिक-आर्थिक महत्व भी स्पष्ट कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और अवसंरचना विकास की आवश्यकता का संक्षिप्त परिचय। बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन का उल्लेख।
2. **अवसंरचना विकास की चुनौतियाँ:**
* कठिन भूभाग और अस्थिर भूगर्भीय स्थितियाँ (भूस्खलन, भूकंप)।
* चरम मौसमी परिस्थितियाँ (भारी बर्फबारी, अत्यधिक ठंड)।
* पर्यावरणीय संवेदनशीलता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता।
* उच्च निर्माण लागत और तकनीकी जटिलताएँ (सुरंग, पुल निर्माण)।
* संसाधनों की उपलब्धता और परिवहन की समस्या।
3. **अवसंरचना विकास के अवसर:**
* आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकें (जैसे सुरंग निर्माण, ऑल-वेदर सड़कें)।
* स्थानीय रोजगार सृजन और कौशल विकास।
* पर्यटन और साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा।
* सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी में सुधार।
4. **बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन का सामरिक महत्व:**
* सेना और सैन्य साजो-सामान की त्वरित आवाजाही।
* लद्दाख जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों तक हर मौसम में कनेक्टिविटी।
* चीन के साथ सीमा पर भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना।
* आपदा राहत और बचाव कार्यों में सहायता।
5. **सामाजिक-आर्थिक महत्व:**
* स्थानीय लोगों के लिए बेहतर परिवहन सुविधाएँ।
* कृषि उत्पादों और हस्तशिल्प के लिए नए बाजार।
* पर्यटन उद्योग को बढ़ावा और संबंधित सेवाओं का विकास।
* शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुँच में सुधार।
* क्षेत्रीय असंतुलन को कम करना और समावेशी विकास।
6. **निष्कर्ष:** इन परियोजनाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए, सतत विकास और पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: amarujala.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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