09 Aug पीएम मोदी और निर्मला सीतारमण ने दिया 4597 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को मिला बड़ा तोहफा
✎ कर हस्तांतरण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित एक संवैधानिक व्यवस्था है, जो केंद्र द्वारा एकत्र किए गए कर राजस्व का एक हिस्सा राज्यों को वितरित करती है, जिससे राजकोषीय संघवाद मजबूत होता है और…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – संघ और राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, वित्त आयोग के कार्य। | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय।
- Prelims: कर हस्तांतरण, राजकोषीय संघवाद, वित्त आयोग, अनुच्छेद 280, राज्यों का राजकोषीय घाटा, पूंजीगत व्यय, संवर्धित कर
- Essay: सहकारी संघवाद: भारत के विकास का आधार, राज्यों का वित्तीय सशक्तिकरण: एक समृद्ध भारत की कुंजी
त्वरित पुनरावृत्ति: कर हस्तांतरण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित एक संवैधानिक व्यवस्था है, जो केंद्र द्वारा एकत्र किए गए कर राजस्व का एक हिस्सा राज्यों को वितरित करती है, जिससे राजकोषीय संघवाद मजबूत होता है और राज्यों को विकास के लिए वित्तीय संसाधन प्राप्त होते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
उपमुख्यमंत्री के. पवन कल्याण ने आंध्र प्रदेश को ₹4,597 करोड़ के कर हस्तांतरण के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री को धन्यवाद दिया है। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को जारी की गई ₹1,09,019 करोड़ की अग्रिम किस्त का हिस्सा है। इस कदम को राज्यों को समय पर वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने और उनके पूंजीगत व्यय को गति देने के लिए एक दूरदर्शी निर्णय बताया गया है।
पृष्ठभूमि
- भारत में, केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए कुछ करों का एक हिस्सा राज्यों के साथ साझा किया जाता है, जिसे कर हस्तांतरण (Tax Devolution) कहते हैं।
- यह व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत स्थापित वित्त आयोग (Finance Commission) की सिफारिशों पर आधारित है।
- वित्त आयोग हर पांच साल में केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण (Distribution of Net Proceeds of Taxes) के सिद्धांतों की सिफारिश करता है।
- कर हस्तांतरण का उद्देश्य राज्यों को उनके विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है, जिससे क्षेत्रीय असमानताओं को कम किया जा सके।
- यह राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जहां केंद्र और राज्य सरकारें वित्तीय जिम्मेदारियों और संसाधनों को साझा करती हैं।
- हाल ही में, केंद्र सरकार ने राज्यों को सामान्य अनुसूची से पहले कर हस्तांतरण की अग्रिम किस्त जारी करके उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने का प्रयास किया है।
कर हस्तांतरण (Tax Devolution) क्या है?
- कर हस्तांतरण वह प्रक्रिया है जिसके तहत केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए कर राजस्व का एक निश्चित हिस्सा राज्यों को वितरित किया जाता है।
- यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित एक संवैधानिक व्यवस्था है।
- वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण के लिए एक फार्मूला तय करता है, जिसमें जनसंख्या, क्षेत्रफल, आय असमानता, वन क्षेत्र और राजकोषीय प्रयास जैसे मानदंड शामिल होते हैं।
- इस हस्तांतरण का मुख्य उद्देश्य राज्यों को उनके विकासात्मक और कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त वित्तीय स्वायत्तता और संसाधन प्रदान करना है।
- यह केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देता है।
- कर हस्तांतरण के माध्यम से राज्यों को प्राप्त धन उन्हें बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में निवेश करने में सक्षम बनाता है।
- यह राज्यों के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने और उनकी वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने में भी मदद करता है।
- अग्रिम किस्त का जारी होना राज्यों को समय पर वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराकर पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देता है और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति देता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कर हस्तांतरण (Tax Devolution) | केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को केंद्रीय करों के हिस्से का हस्तांतरण, जो वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित होता है। |
| अग्रिम किस्त | सामान्य अनुसूची से पहले राज्यों को धनराशि जारी करना, जिससे उन्हें समय पर वित्तीय संसाधन प्राप्त हो सकें। |
| राज्यों को वित्तीय सुदृढ़ता | राज्यों को बुनियादी ढाँचे के विस्तार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कृषि जैसे प्रमुख विकास पहलों के लिए अतिरिक्त वित्तीय शक्ति प्रदान करना। |
| सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) | केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना, जिससे देश का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके। |
| पूंजीगत व्यय में तेजी | राज्यों को अग्रिम धन मिलने से वे अपनी पूंजीगत परियोजनाओं पर तेजी से खर्च कर सकते हैं, जिससे आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा मिलता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- राज्यों को समय पर वित्तीय संसाधन उपलब्ध होने से वे अपनी विकास परियोजनाओं को गति दे पाते हैं, जिससे समग्र आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
- पूंजीगत व्यय में वृद्धि से बुनियादी ढाँचे का विकास होता है, जो रोजगार सृजन और निवेश आकर्षित करने में सहायक होता है।
- कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में निवेश से मानव विकास सूचकांकों में सुधार होता है और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलते हैं।
शासनिक महत्व
- कर हस्तांतरण का अग्रिम जारी होना सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करता है, जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं।
- राज्यों को वित्तीय निश्चितता प्रदान करने से वे अपनी नीतियों और कार्यक्रमों की बेहतर योजना बना पाते हैं, जिससे शासन में दक्षता आती है।
- यह निर्णय राज्यों को सशक्त बनाता है और उन्हें अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार विकास पहलों को आगे बढ़ाने की स्वायत्तता देता है।
सामाजिक महत्व
- कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में तेजी आने से समाज के कमजोर वर्गों को लाभ मिलता है और सामाजिक समानता को बढ़ावा मिलता है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में निवेश से नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार होता है और मानव पूंजी का विकास होता है।
- ग्रामीण और शहरी परिवर्तन को बढ़ावा मिलने से क्षेत्रीय असमानताएं कम होती हैं और समावेशी विकास सुनिश्चित होता है।
चुनौतियाँ
1. राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline)
- राज्यों को अधिक धन मिलने पर राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना एक चुनौती हो सकती है, जिससे अनावश्यक व्यय या ऋण में वृद्धि हो सकती है।
- धन का प्रभावी और कुशल उपयोग सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है ताकि यह विकास लक्ष्यों के अनुरूप हो।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय नीति, केंद्र-राज्य संबंध
2. धन के उपयोग की निगरानी
- केंद्र सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है कि राज्यों को हस्तांतरित धन का उपयोग इच्छित उद्देश्यों के लिए ही हो रहा है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य संबंध, शासन
3. वित्त आयोग की सिफारिशों का पालन
- वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार कर हस्तांतरण का वितरण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, ताकि सभी राज्यों के साथ निष्पक्ष व्यवहार हो।
- अग्रिम किस्तों का वितरण वित्त आयोग के मूल सिद्धांतों से विचलित नहीं होना चाहिए।
यूपीएससी लिंक: वित्त आयोग, संवैधानिक निकाय
4. राज्यों की असमान क्षमताएँ
- सभी राज्यों की वित्तीय प्रबंधन और परियोजनाओं को लागू करने की क्षमता समान नहीं होती है, जिससे धन के प्रभावी उपयोग में अंतर आ सकता है।
- कमजोर राज्यों को तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण की आवश्यकता हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य संबंध, क्षेत्रीय असमानताएँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राजकोषीय अनुशासन | राज्यों द्वारा धन का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना। |
| निगरानी तंत्र | हस्तांतरित धन के प्रभावी और इच्छित उपयोग की निगरानी। |
| वित्तीय असमानता | राज्यों के बीच वित्तीय प्रबंधन क्षमताओं में अंतर। |
| जवाबदेही का अभाव | धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना। |
| योजना का अभाव | राज्यों द्वारा प्राप्त धन के लिए सुदृढ़ योजना का अभाव। |
आगे की राह
- राज्यों को प्राप्त धन के प्रभावी और कुशल उपयोग के लिए विस्तृत योजनाएँ तैयार करनी चाहिए।
- केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय प्रबंधन और व्यय की निगरानी के लिए एक मजबूत और पारदर्शी तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।
- राज्यों को राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने और अनावश्यक व्यय से बचने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- कमजोर वित्तीय प्रबंधन वाले राज्यों को क्षमता निर्माण और तकनीकी सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
- वित्त आयोग की सिफारिशों का सम्मान करते हुए कर हस्तांतरण की प्रक्रिया को और अधिक अनुमानित और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
- राज्यों को पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिले।
- सहकारी संघवाद की भावना को और मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच नियमित संवाद और समन्वय आवश्यक है।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राजकोषीय संघवाद · कर विचलन · राज्यों को वित्तीय हस्तांतरण · अनुच्छेद 280 · वित्त आयोग · सहकारी संघवाद · पूंजीगत व्यय · आर्थिक संवृद्धि · राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता · विकसित भारत
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 280’, ‘note’: ‘वित्त आयोग का गठन और कार्य’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 270’, ‘note’: ‘केंद्रीय करों का राज्यों को वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 275’, ‘note’: ‘राज्यों को संघ से अनुदान’}
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को कर हस्तांतरण की अग्रिम किस्त जारी करना। → राज्यों को समय पर अतिरिक्त वित्तीय संसाधन प्राप्त होना। → राज्यों द्वारा पूंजीगत व्यय और विकास परियोजनाओं में तेजी लाना। → बुनियादी ढाँचे का विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा। → सहकारी संघवाद को मजबूती और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 280 वित्त आयोग की स्थापना का प्रावधान करता है।
2. वित्त आयोग की सिफारिशें केंद्र सरकार के लिए बाध्यकारी होती हैं।
3. कर विचलन (Tax Devolution) केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के वितरण की एक प्रक्रिया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 280 वित्त आयोग के गठन का प्रावधान करता है। कथन 2 गलत है। वित्त आयोग की सिफारिशें केवल सलाहकार प्रकृति की होती हैं, बाध्यकारी नहीं। कथन 3 सही है। कर विचलन केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के वितरण का एक तंत्र है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. अभिकथन (A): केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को कर विचलन की अग्रिम किस्त जारी करने से राज्यों को समय पर वित्तीय संसाधन प्राप्त होते हैं।
कारण (R): यह कदम पूंजीगत व्यय को गति देने और बुनियादी ढांचे के विकास को तेज करने में सहायक होता है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि अग्रिम किस्त से राज्यों को समय पर वित्तीय संसाधन मिलते हैं। कारण (R) भी सही है क्योंकि ये संसाधन राज्यों को पूंजीगत व्यय और बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने में मदद करते हैं। R, A की सही व्याख्या भी है क्योंकि समय पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता ही पूंजीगत व्यय को गति देती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राज्यों को कर विचलन (Tax Devolution) के माध्यम से वित्तीय हस्तांतरण राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) का एक महत्वपूर्ण पहलू है। इस संदर्भ में, केंद्र द्वारा राज्यों को कर विचलन की अग्रिम किस्तों के महत्व का विश्लेषण करें। यह सहकारी संघवाद को कैसे बढ़ावा देता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: राजकोषीय संघवाद और कर विचलन की संक्षिप्त परिभाषा।
2. कर विचलन का महत्व: संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग की भूमिका, केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व साझाकरण का तंत्र।
3. अग्रिम किस्तों का महत्व:
क. राज्यों को वित्तीय स्थिरता और निश्चितता प्रदान करना।
ख. पूंजीगत व्यय में वृद्धि और बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी।
ग. कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी वितरण में सहायता।
घ. ग्रामीण और शहरी परिवर्तन को बढ़ावा देना।
ङ. रोजगार सृजन और निवेश आकर्षित करना।
च. आर्थिक संवृद्धि को बनाए रखना।
4. सहकारी संघवाद को बढ़ावा:
क. केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास और सहयोग में वृद्धि।
ख. राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करना।
ग. ‘टीम इंडिया’ की भावना को सुदृढ़ करना।
घ. ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में राज्यों की सक्रिय भागीदारी।
5. निष्कर्ष: राजकोषीय संघवाद और सहकारी संघवाद के बीच संबंध को रेखांकित करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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