09 Aug जुलाई 31 तक सीमित समय: रैयलसीमा में फसल बीमा के लिए किसानों की अंतिम दौड़

✎ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम की घटनाओं से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन को…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। | GS Paper III — कृषि मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन तथा संबंधित विषय एवं बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।
- Prelims: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS), फसल बीमा, कृषि क्षेत्र, एल नीनो, जलवायु परिवर्तन
- Essay: कृषि क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन और किसानों की आय सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और भारतीय कृषि पर इसके प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम की घटनाओं से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
31 जुलाई की नामांकन समय-सीमा के कारण फसल बीमा योजनाओं में अंतिम समय में किसानों की भारी भीड़ देखी गई। आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र, विशेषकर श्री सत्य साई, चित्तूर और अन्नमय्या जिलों में, जहाँ कृषि मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, अधिकारियों ने किसानों को इन योजनाओं के तहत नामांकित करने के लिए विशेष प्रयास किए। यह क्षेत्र लगातार बदलते मौसम पैटर्न और एल नीनो के संभावित प्रभावों के कारण कृषि संकट का सामना कर रहा है, जिससे फसल बीमा किसानों के लिए एक अनिवार्य सुरक्षा उपाय बन गया है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय कृषि मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे यह सूखे, बाढ़ और बेमौसम बारिश जैसी मौसमी अनिश्चितताओं के प्रति संवेदनशील हो जाती है।
- जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में अप्रत्याशितता बढ़ी है, जिससे किसानों के लिए फसल का नुकसान एक नियमित चुनौती बन गया है।
- एल नीनो (El Niño) जैसी घटनाएँ भारत में मानसून को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे सूखे की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है और कृषि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- छोटे और सीमांत किसान, जो भारतीय कृषि का एक बड़ा हिस्सा हैं, प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल के नुकसान से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनके पास वित्तीय सुरक्षा के सीमित साधन होते हैं।
- फसल बीमा योजनाएँ किसानों को ऐसी अनिश्चितताओं से होने वाले वित्तीय नुकसान से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण तंत्र प्रदान करती हैं, जिससे उनकी आय और आजीविका सुरक्षित रहती है।
- सरकार किसानों को वित्तीय सहायता और जोखिम प्रबंधन उपकरण प्रदान करके कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाएँ लागू कर रही है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) क्या हैं?
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY) भारत सरकार द्वारा 2016 में शुरू की गई एक फसल बीमा योजना है।
- इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण फसल के नुकसान से पीड़ित किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
- इस योजना के तहत, किसानों को खरीफ फसलों के लिए 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5% की बहुत कम और समान प्रीमियम दर का भुगतान करना होता है। शेष प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है।
- यह योजना बुवाई से पहले से लेकर कटाई के बाद तक के जोखिमों को कवर करती है, जिसमें बुवाई/रोपण में बाधा, खड़ी फसल का नुकसान (गैर-रोकथाम योग्य जोखिम), और कटाई के बाद के नुकसान शामिल हैं।
- पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (Restructured Weather-Based Crop Insurance Scheme – RWBCIS) भी 2016 में PMFBY के साथ शुरू की गई थी।
- RWBCIS का उद्देश्य प्रतिकूल मौसम की घटनाओं जैसे वर्षा, तापमान, आर्द्रता, हवा की गति आदि के कारण फसल के नुकसान से किसानों को बीमा सुरक्षा प्रदान करना है।
- यह योजना उपज के नुकसान के बजाय अधिसूचित मौसम मापदंडों में भिन्नता के आधार पर क्षतिपूर्ति का भुगतान करती है। यदि मौसम का सूचकांक एक निश्चित सीमा से अधिक या कम होता है, तो किसान को सीधे क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाता है।
- दोनों योजनाएँ किसानों को अप्रत्याशित मौसमी घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले वित्तीय जोखिमों से बचाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में स्थिरता और किसानों की आय सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अंतिम तिथि पर नामांकन में वृद्धि | यह किसानों में फसल बीमा के प्रति बढ़ती जागरूकता और आवश्यकता को दर्शाता है, विशेषकर अनिश्चित मौसम पैटर्न वाले क्षेत्रों में। |
| मानसून पर निर्भरता | रायलसीमा जैसे क्षेत्रों में कृषि मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे फसल बीमा की आवश्यकता बढ़ जाती है। |
| एल नीनो का प्रभाव | एल नीनो जैसी मौसमी घटनाएँ कृषि संकट को बढ़ाती हैं, जिससे किसानों के लिए वित्तीय सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। |
| छोटे और सीमांत किसान | अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके लिए फसल क्षति से उबरना अधिक कठिन होता है, अतः बीमा एक महत्वपूर्ण सुरक्षा जाल है। |
| बागवानी फसलें | आम, टमाटर, केला जैसी बागवानी फसलें भी बीमा कवरेज के तहत आती हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- फसल बीमा किसानों को फसल क्षति के कारण होने वाले वित्तीय नुकसान से बचाता है, जिससे उनकी आय स्थिर रहती है।
- यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ कृषि आजीविका का मुख्य स्रोत है।
- यह किसानों को प्रतिकूल मौसम की स्थिति में भी कृषि गतिविधियों को जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे कृषि उत्पादन में निरंतरता बनी रहती है।
सामाजिक महत्व
- फसल बीमा किसानों के बीच आत्मविश्वास बढ़ाता है और उन्हें आत्महत्या जैसे चरम कदमों से बचाता है।
- यह छोटे और सीमांत किसानों को विशेष रूप से लाभान्वित करता है, जो मौसम की अनिश्चितताओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
शासनिक महत्व
- सरकार की फसल बीमा योजनाएँ कृषि क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत उपकरण हैं।
- यह कृषि क्षेत्र में सरकारी हस्तक्षेप को दर्शाता है ताकि किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाया जा सके।
पर्यावरणीय महत्व
- जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मौसम पैटर्न के बढ़ते प्रभावों के बीच, फसल बीमा एक अनुकूलन रणनीति के रूप में कार्य करता है।
- यह किसानों को बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य में भी अपनी आजीविका बनाए रखने में मदद करता है।
चुनौतियाँ
1. जागरूकता और पहुँच का अभाव
- कई किसानों को अभी भी फसल बीमा योजनाओं के लाभों और नामांकन प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है।
- दूरदराज के क्षेत्रों में बीमा एजेंटों और नामांकन केंद्रों तक पहुँच एक चुनौती बनी हुई है।
यूपीएससी लिंक: कृषि क्षेत्र में चुनौतियाँ
2. दावा निपटान में देरी
- फसल क्षति के आकलन और बीमा दावों के निपटान में अक्सर देरी होती है, जिससे किसानों को समय पर सहायता नहीं मिल पाती।
- दावा निपटान प्रक्रिया की जटिलता भी किसानों के लिए एक बाधा है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियों का कार्यान्वयन
3. मौसम डेटा की सटीकता
- मौसम आधारित फसल बीमा योजनाओं के लिए सटीक और स्थानीयकृत मौसम डेटा की आवश्यकता होती है, जिसमें अक्सर कमी देखी जाती है।
- गलत या अपर्याप्त डेटा के कारण किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल पाता।
यूपीएससी लिंक: कृषि में प्रौद्योगिकी का उपयोग
4. प्रीमियम भुगतान की क्षमता
- कुछ छोटे और सीमांत किसानों के लिए प्रीमियम का भुगतान करना एक वित्तीय बोझ हो सकता है, भले ही वह सब्सिडी वाला हो।
- फसल खराब होने की स्थिति में भी प्रीमियम का भुगतान करना होता है, जो किसानों के लिए मुश्किल होता है।
यूपीएससी लिंक: किसानों की आय बढ़ाना
5. योजनाओं की जटिलता
- विभिन्न फसल बीमा योजनाओं के नियम और शर्तें अक्सर जटिल होती हैं, जिससे किसानों को उन्हें समझना मुश्किल होता है।
- योजनाओं के बीच अंतर और पात्रता मानदंड को समझना भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी योजनाएँ और उनका प्रदर्शन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अंतिम समय में नामांकन की भीड़ | यह दर्शाता है कि किसान अक्सर अंतिम समय तक इंतजार करते हैं, जिससे नामांकन प्रक्रिया में दबाव बढ़ जाता है और संभावित रूप से कुछ छूट जाते हैं। |
| मानसून पर अत्यधिक निर्भरता | रायलसीमा जैसे क्षेत्रों में कृषि की मानसून पर अत्यधिक निर्भरता इसे जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। |
| एल नीनो का प्रभाव | एल नीनो जैसी घटनाएँ सूखे या अनियमित वर्षा का कारण बन सकती हैं, जिससे फसलें खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। |
| छोटे और सीमांत किसानों की संख्या | इन किसानों के पास वित्तीय सुरक्षा जाल कम होते हैं, जिससे फसल क्षति का उन पर अधिक गंभीर प्रभाव पड़ता है। |
| अनिश्चित मौसम पैटर्न | देरी से मानसून, सूखे और बेमौसम बारिश जैसी घटनाएँ कृषि को लगातार चुनौती दे रही हैं, जिससे बीमा की आवश्यकता बढ़ जाती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY)
- पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (Restructured Weather-Based Crop Insurance Scheme – RWBCIS)
आगे की राह
- जागरूकता अभियानों को मजबूत करना: किसानों को फसल बीमा योजनाओं के लाभों और नामांकन प्रक्रिया के बारे में शिक्षित करने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाएँ।
- नामांकन प्रक्रिया का सरलीकरण: नामांकन प्रक्रिया को और अधिक सरल और सुलभ बनाया जाए, विशेषकर डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके।
- दावा निपटान में तेजी लाना: फसल क्षति के आकलन और बीमा दावों के निपटान की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाए।
- मौसम डेटा की सटीकता में सुधार: स्थानीय स्तर पर सटीक मौसम डेटा संग्रह और विश्लेषण प्रणालियों को मजबूत किया जाए।
- प्रीमियम भुगतान में लचीलापन: छोटे और सीमांत किसानों के लिए प्रीमियम भुगतान के विकल्पों में अधिक लचीलापन लाया जाए।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग: रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का उपयोग फसल क्षति के आकलन और दावा निपटान में किया जाए।
- स्थानीय निकायों की भागीदारी: ग्राम पंचायतों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को बीमा योजनाओं के कार्यान्वयन और जागरूकता फैलाने में शामिल किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना · फसल बीमा · कृषि जोखिम प्रबंधन · जलवायु परिवर्तन · किसानों की आय · सूखा · बेमौसम बारिश · कृषि क्षेत्र · मौसम आधारित फसल बीमा योजना · वित्तीय सुरक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण को बढ़ावा देगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48’, ‘note’: ‘कृषि और पशुपालन का संगठन’}
अवधारणा प्रवाह
अनिश्चित मौसम पैटर्न (एल नीनो) → फसल क्षति का बढ़ता जोखिम → किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव → फसल बीमा की आवश्यकता → प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसे कार्यक्रम → किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण फसल के नुकसान से किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
2. इस योजना के तहत, सभी खाद्य और तिलहन फसलों तथा वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए बीमा कवरेज उपलब्ध है।
3. यह योजना केवल उन किसानों के लिए अनिवार्य है जो संस्थागत ऋण लेते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। PMFBY का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। कथन 2 भी सही है। योजना में विभिन्न प्रकार की फसलों को शामिल किया गया है। कथन 3 गलत है। यह योजना संस्थागत ऋण लेने वाले किसानों के लिए अनिवार्य है, लेकिन अन्य किसान भी स्वेच्छा से इसका लाभ उठा सकते हैं।
Q2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
- यह योजना कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रशासित है।
- यह योजना बुवाई से पहले से लेकर कटाई के बाद तक के जोखिमों को कवर करती है।
- किसानों द्वारा देय प्रीमियम की दर सभी खरीफ फसलों के लिए 2% और सभी रबी फसलों के लिए 1.5% है।
- बागवानी फसलों के लिए किसानों द्वारा देय प्रीमियम की दर 5% है।
उत्तर: किसानों द्वारा देय प्रीमियम की दर सभी खरीफ फसलों के लिए 2% और सभी रबी फसलों के लिए 1.5% है। — विकल्प C सही नहीं है। खरीफ फसलों के लिए किसानों द्वारा देय प्रीमियम 2% है, रबी फसलों के लिए 1.5% है, और वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5% है।
Q3. कथन (A): रायलसीमा जैसे क्षेत्रों में कृषि, बदलती मौसम प्रवृत्तियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
कारण (R): प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) किसानों को ऐसी अनिश्चितताओं से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
- कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
- कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
उत्तर: कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है। — कथन (A) सही है क्योंकि रायलसीमा क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से मानसून पर निर्भर है और सूखे, बेमौसम बारिश जैसी मौसमी अनिश्चितताओं का सामना करता है। कारण (R) भी सही है क्योंकि ये योजनाएँ किसानों को ऐसी प्रतिकूल मौसम स्थितियों से होने वाले नुकसान के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं। कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है क्योंकि ये योजनाएँ कृषि की संवेदनशीलता को कम करने में मदद करती हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से बचाने में फसल बीमा योजनाओं की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की प्रमुख चुनौतियों और सुधारों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत में कृषि की जलवायु संवेदनशीलता और फसल बीमा के महत्व को रेखांकित करें।
2. **फसल बीमा योजनाओं की भूमिका:**
* किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना।
* आय स्थिरता सुनिश्चित करना।
* कृषि में निवेश को बढ़ावा देना।
* आत्महत्याओं को कम करने में संभावित भूमिका।
* विशेष रूप से PMFBY और RWBCIS जैसी योजनाओं का उल्लेख।
3. **PMFBY की प्रमुख चुनौतियाँ:**
* कम नामांकन दर (विशेषकर गैर-ऋणी किसानों में)।
* दावों के निपटान में देरी और पारदर्शिता की कमी।
* फसल कटाई प्रयोगों (CCE) की सटीकता और समयबद्धता।
* राज्य सरकारों द्वारा प्रीमियम सब्सिडी के भुगतान में देरी।
* छोटे और सीमांत किसानों तक पहुँच का अभाव।
* मौसम डेटा की उपलब्धता और गुणवत्ता।
* योजना के बारे में जागरूकता की कमी।
4. **सुधार और आगे का रास्ता:**
* डिजिटलीकरण और प्रौद्योगिकी का उपयोग (जैसे ड्रोन, AI)।
* दावा निपटान प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना।
* जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ाना।
* राज्य सरकारों के साथ बेहतर समन्वय।
* प्रीमियम सब्सिडी के भुगतान में समयबद्धता।
* योजना को अधिक लचीला और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना।
* फसल कटाई प्रयोगों में सुधार।
5. **निष्कर्ष:** जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों के बीच फसल बीमा योजनाओं की अनिवार्यता को दोहराते हुए, उनके प्रभावी कार्यान्वयन और निरंतर सुधार की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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