सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु डीवीएसी मामले को सीबीआई को स्थानांतरित करने पर विचार किया

Supreme Court mulls transfer of Tamil Nadu DVAC case against ED officer to Central agency — labelled illustration

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु डीवीएसी मामले को सीबीआई को स्थानांतरित करने पर विचार किया

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3D cutaway: Supreme Court mulls transfer of Tamil Nadu DVAC case against ED officer to Central agency

✎ सर्वोच्च न्यायालय केंद्रीय और राज्य जाँच एजेंसियों के बीच भ्रष्टाचार के मामलों में क्षेत्राधिकार के जटिल प्रश्न पर विचार कर रहा है, विशेषकर जब केंद्रीय कर्मचारियों पर राज्य के भीतर आरोप लगते हैं और राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप लगाए…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा, भ्रष्टाचार
  • Prelims: सर्वोच्च न्यायालय, प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC), संघवाद, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC), न्यायिक समीक्षा
  • Essay: भारत में संघवाद की चुनौतियाँ और सहकारी संघवाद का महत्व, भ्रष्टाचार से निपटने में केंद्रीय और राज्य एजेंसियों की भूमिका और उनके बीच समन्वय

त्वरित पुनरावृत्ति: सर्वोच्च न्यायालय केंद्रीय और राज्य जाँच एजेंसियों के बीच भ्रष्टाचार के मामलों में क्षेत्राधिकार के जटिल प्रश्न पर विचार कर रहा है, विशेषकर जब केंद्रीय कर्मचारियों पर राज्य के भीतर आरोप लगते हैं और राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप लगाए जाते हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) के एक अधिकारी के खिलाफ तमिलनाडु के राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (Directorate of Vigilance and Anti-Corruption – DVAC) द्वारा दर्ज रिश्वतखोरी के मामले को किसी स्वतंत्र केंद्रीय जाँच एजेंसी को हस्तांतरित करने पर विचार किया है। न्यायालय ने इस मामले में आपराधिक कार्यवाही पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया है। ED ने तर्क दिया है कि यह मामला राज्य द्वारा बदले की भावना से दर्ज किया गया है, क्योंकि ED ने राज्य के प्रभावशाली राजनेताओं और पूर्व मंत्रियों के खिलाफ धन शोधन (money laundering) के मामले दर्ज किए हैं।

पृष्ठभूमि

  • ED अधिकारी अंकित तिवारी को तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में एक डॉक्टर से ₹20 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था।
  • इस मामले की जाँच तमिलनाडु के DVAC द्वारा की जा रही थी, जो राज्य सरकार के अधीन एक भ्रष्टाचार निरोधक इकाई है।
  • ED ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर इस मामले को CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी को हस्तांतरित करने की मांग की थी।
  • जनवरी 2024 में, सर्वोच्च न्यायालय ने DVAC मामले में कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
  • ED का तर्क है कि एक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी द्वारा किए गए कथित अपराध की जाँच CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए, न कि राज्य DVAC द्वारा।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी इस प्रश्न पर विचार करने का प्रस्ताव दिया था कि क्या केंद्रीय सरकारी कर्मचारी द्वारा अपनी आधिकारिक क्षमता का दुरुपयोग करके किए गए अपराध की जाँच CBI द्वारा की जानी चाहिए या उस राज्य द्वारा जिसके क्षेत्राधिकार में कथित अपराध हुआ है।
  • न्यायालय ने एक ऐसी व्यवस्था विकसित करने का भी सुझाव दिया था जिससे यह पता लगाया जा सके कि क्या विपक्षी शासित राज्यों में अधिकारियों और मंत्रियों पर ED की कार्रवाई के पीछे राजनीतिक प्रतिशोध या दुर्भावना तो नहीं है, और क्या राज्य केंद्रीय एजेंसी के स्थानीय अधिकारियों को गिरफ्तार करके इसका बदला तो नहीं ले रहे हैं।

भारत में जाँच एजेंसियों का क्षेत्राधिकार और संघवाद

  • भारत में कानून प्रवर्तन और जाँच का विषय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत केंद्र और राज्यों के बीच विभाजित है। ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य सूची के विषय हैं, जबकि ‘आपराधिक कानून’ समवर्ती सूची में है।
  • केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 (Delhi Special Police Establishment Act, 1946) के तहत कार्य करती है। यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों और गंभीर आर्थिक अपराधों की जाँच करती है। CBI को किसी राज्य में जाँच करने के लिए आमतौर पर संबंधित राज्य सरकार की सहमति की आवश्यकता होती है, जिसे ‘सामान्य सहमति’ (general consent) कहा जाता है।
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) एक बहु-अनुशासनात्मक संगठन है जो धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (Prevention of Money Laundering Act – PMLA) और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (Foreign Exchange Management Act – FEMA) के प्रावधानों को लागू करता है। यह मुख्य रूप से आर्थिक अपराधों की जाँच करता है।
  • राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) या राज्य पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक शाखाएँ राज्य सरकार के कर्मचारियों और राज्य के क्षेत्राधिकार में हुए भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच करती हैं।
  • जब केंद्रीय सरकारी कर्मचारी राज्य के क्षेत्राधिकार में अपराध करते हैं, तो जाँच के क्षेत्राधिकार को लेकर अक्सर विवाद उत्पन्न होता है। सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसे मामलों में निष्पक्षता और राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाव सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया है।
  • संघवाद (Federalism) के सिद्धांतों के अनुसार, केंद्र और राज्यों दोनों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्वायत्तता प्राप्त है। हालाँकि, भ्रष्टाचार जैसे अपराधों से निपटने में प्रभावी समन्वय और सहयोग आवश्यक है।
  • न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) सर्वोच्च न्यायालय को यह अधिकार देती है कि वह यह सुनिश्चित करे कि जाँच एजेंसियाँ कानून के दायरे में और निष्पक्ष तरीके से कार्य करें, विशेषकर जब राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप लगते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
केंद्रीय एजेंसी का स्थानांतरण यह सुनिश्चित करता है कि केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़े मामलों की जांच निष्पक्ष और बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के हो।
आपसी प्रतिशोध का आरोप केंद्र और राज्य के बीच संबंधों में तनाव को उजागर करता है, जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांतों को कमजोर कर सकता है।
न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को दर्शाता है कि वह कार्यपालिका के कार्यों की वैधता और निष्पक्षता की जांच करे।
संघीय ढांचे पर प्रभाव केंद्रीय और राज्य जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र और उनके बीच समन्वय के मुद्दों को सामने लाता है।
भ्रष्टाचार के मामले सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार से निपटने में विभिन्न एजेंसियों के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाता है।

महत्व

शासन और नैतिकता

  • यह मामला सार्वजनिक अधिकारियों द्वारा कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को उजागर करता है, जो सुशासन (Good Governance) और सार्वजनिक नैतिकता के सिद्धांतों के लिए खतरा है।
  • यह केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच जांच के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करने की आवश्यकता पर बल देता है, ताकि भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध

  • यह घटना केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बढ़ते तनाव और राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों को दर्शाती है, जो भारत के संघीय ढांचे (Federal Structure) के लिए चिंता का विषय है।
  • सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका केंद्र और राज्य के बीच शक्ति संतुलन बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण हो जाती है कि कोई भी पक्ष अपने अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग न करे।

कानून का शासन

  • यह मामला कानून के शासन (Rule of Law) के सिद्धांत को बनाए रखने के लिए एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के महत्व पर प्रकाश डालता है, चाहे आरोपी कोई भी हो।
  • न्यायिक हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि जांच प्रक्रिया में निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता बनी रहे, जिससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता मजबूत होती है।

चुनौतियाँ

1. केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच अधिकार क्षेत्र का टकराव

  • केंद्रीय और राज्य जांच एजेंसियों के बीच अक्सर अधिकार क्षेत्र को लेकर टकराव होता है, खासकर जब केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़े मामले सामने आते हैं।
  • यह टकराव जांच की गति और प्रभावशीलता को बाधित कर सकता है, जिससे न्याय मिलने में देरी हो सकती है।

2. राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप

  • विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई को अक्सर राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देखा जाता है, और राज्य भी केंद्रीय अधिकारियों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई कर सकते हैं।
  • यह आरोप जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं और जनता के विश्वास को कम करते हैं।

3. जांच की निष्पक्षता और स्वतंत्रता सुनिश्चित करना

  • यह सुनिश्चित करना एक चुनौती है कि जांच एजेंसियां राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष रूप से कार्य करें।
  • जांच के स्थानांतरण का मुद्दा इस बात पर केंद्रित है कि क्या राज्य एजेंसी केंद्रीय अधिकारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर सकती है।

4. भ्रष्टाचार से निपटना

  • सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार एक गंभीर चुनौती है, और विभिन्न स्तरों पर एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी इसे और जटिल बना सकती है।
  • भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है ताकि सार्वजनिक विश्वास बना रहे।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अधिकार क्षेत्र का विवाद केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच जांच के अधिकार क्षेत्र को लेकर अस्पष्टता, जिससे जांच में देरी और टकराव होता है।
राजनीतिक हस्तक्षेप जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव का आरोप, जिससे उनकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
सहकारी संघवाद का क्षरण केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते तनाव और प्रतिशोध के आरोप, जो संघीय ढांचे को कमजोर करते हैं।
जांच की विश्वसनीयता यह सुनिश्चित करना कि जांच एजेंसियां बिना किसी पूर्वाग्रह या राजनीतिक एजेंडे के कार्य करें।
भ्रष्टाचार पर अंकुश सार्वजनिक अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी और समय पर न्याय सुनिश्चित करना।

आगे की राह

  • केंद्रीय और राज्य जांच एजेंसियों के बीच अधिकार क्षेत्र और सहयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल स्थापित किए जाएं।
  • जांच एजेंसियों की स्वायत्तता और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत सुधार किए जाएं, ताकि वे राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर कार्य कर सकें।
  • सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों की जांच के लिए एक तंत्र विकसित किया जाए।
  • भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाए।
  • जांच एजेंसियों के कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाए ताकि वे जटिल भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के मामलों को प्रभावी ढंग से संभाल सकें।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संवाद और समन्वय को बढ़ावा दिया जाए ताकि संघीय ढांचे को मजबूत किया जा सके और अनावश्यक टकराव से बचा जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

संघवाद · जांच एजेंसियों की स्वायत्तता · राज्य-केंद्र संबंध · भ्रष्टाचार निवारण · न्यायिक समीक्षा · अनुच्छेद 136 · अनुच्छेद 256 · CBI की भूमिका · ED की शक्तियाँ · राजनीतिक प्रतिशोध · आपराधिक न्याय प्रणाली · सरकारी कर्मचारी के विरुद्ध जांच

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 136’, ‘note’: ‘सर्वोच्च न्यायालय की विशेष अनुमति याचिका’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 142’, ‘note’: ‘सर्वोच्च न्यायालय की पूर्ण न्याय की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्य के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 256’, ‘note’: ‘राज्यों पर संघ का नियंत्रण’}

अवधारणा प्रवाह

प्रवर्तन निदेशालय (ED) अधिकारी पर रिश्वत का आरोप  →  तमिलनाडु DVAC द्वारा मामला दर्ज  →  ED द्वारा मामले को केंद्रीय एजेंसी को स्थानांतरित करने की याचिका  →  सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थानांतरण पर विचार और कार्यवाही पर रोक  →  केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव और राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप  →  सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निष्पक्ष जांच और संघीय संतुलन सुनिश्चित करने का प्रयास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रवर्तन निदेशालय (ED) वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करता है।
2. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को जांच करने की शक्ति प्राप्त है।
3. भारत का सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 136 के तहत किसी भी न्यायालय या न्यायाधिकरण के निर्णय के विरुद्ध अपील की विशेष अनुमति प्रदान कर सकता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। ED वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करता है और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) तथा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) जैसे कानूनों को लागू करता है। कथन 2 सही है। CBI को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने का अधिकार है। कथन 3 सही है। अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को किसी भी भारतीय अदालत या न्यायाधिकरण द्वारा पारित किसी भी निर्णय, डिक्री, निर्धारण, सजा या आदेश के विरुद्ध अपील की विशेष अनुमति प्रदान करने का विवेकाधीन अधिकार देता है।

Q2. अभिकथन (A): सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा राज्य अधिकारियों के विरुद्ध मामलों की जांच को केंद्रीय एजेंसी को हस्तांतरित करने पर विचार किया है।
कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जांच राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित न हो और केंद्रीय कर्मचारियों के मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जाए।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु DVAC मामले को केंद्रीय एजेंसी को हस्तांतरित करने पर विचार किया है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि न्यायालय ने यह प्रश्न उठाया है कि क्या केंद्रीय कर्मचारी के विरुद्ध अपराध की जांच CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए, न कि राज्य एजेंसी द्वारा, और यह भी कि राजनीतिक प्रतिशोध की संभावना को कैसे रोका जाए। इसलिए, R, A की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हाल के घटनाक्रमों के आलोक में, केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य जांच एजेंसियों के बीच क्षेत्राधिकार संबंधी विवादों का विश्लेषण कीजिए। क्या आपको लगता है कि ऐसे मामलों में राजनीतिक प्रतिशोध की संभावना को रोकने के लिए एक तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है? अपने तर्कों के साथ चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: केंद्रीय और राज्य जांच एजेंसियों के बीच क्षेत्राधिकार विवादों की बढ़ती प्रवृत्ति का संक्षिप्त परिचय दें, विशेष रूप से ED और DVAC के बीच हालिया मामले का उल्लेख करें।
2. क्षेत्राधिकार विवादों के कारण: इन विवादों के मूल कारणों पर प्रकाश डालें, जैसे:
• संघीय ढांचे में शक्तियों का टकराव।
• केंद्रीय कानूनों (जैसे PMLA) और राज्य कानूनों के बीच ओवरलैप।
• ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य सूची का विषय होना।
• केंद्रीय कर्मचारियों के विरुद्ध राज्य द्वारा जांच का मुद्दा।
3. राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप: इस बात पर चर्चा करें कि कैसे केंद्र और राज्य दोनों एक-दूसरे पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाते हैं, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। ED द्वारा विपक्षी शासित राज्यों में कार्रवाई और राज्यों द्वारा केंद्रीय अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के उदाहरण दें।
4. न्यायिक हस्तक्षेप और सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका: सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका पर प्रकाश डालें, जिसने ऐसे मामलों में हस्तक्षेप किया है और जांच के हस्तांतरण पर विचार किया है। अनुच्छेद 136 के तहत सर्वोच्च न्यायालय की विशेष अनुमति याचिका की शक्ति का उल्लेख करें।
5. तंत्र विकसित करने की आवश्यकता: इस बात पर तर्क दें कि राजनीतिक प्रतिशोध की संभावना को रोकने के लिए एक स्पष्ट और निष्पक्ष तंत्र की आवश्यकता क्यों है। इसमें शामिल हो सकते हैं:
• जांच के लिए दिशानिर्देश या प्रोटोकॉल।
• एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति या न्यायिक निकाय द्वारा प्रारंभिक जांच की समीक्षा।
• अंतर-एजेंसी समन्वय और सहयोग के लिए तंत्र।
• ‘सहमति’ के मुद्दे पर स्पष्टता (जैसे CBI को जांच के लिए राज्य की सहमति)।
6. निष्कर्ष: एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें जो संघीय ढांचे के सम्मान, जांच की निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दे।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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