09 Aug तमिलनाडु बजट 2026: टीवीके सरकार के सामने चुनौतीपूर्ण कर कार्य

✎ राजकोषीय समेकन का अर्थ है सरकार द्वारा अपने राजकोषीय घाटे और सार्वजनिक ऋण को कम करने के लिए राजस्व जुटाने और व्यय प्रबंधन के माध्यम से वित्तीय स्थिरता प्राप्त करना।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, शासन और सामाजिक न्याय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और विकास
- Prelims: राज्य बजट, राजकोषीय समेकन, राजस्व जुटाना, व्यय प्रबंधन, लोक वित्त, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) सुधार, ऋण प्रबंधन, राजकोषीय घाटा
- Essay: राजकोषीय उत्तरदायित्व बनाम लोक कल्याणकारी योजनाएँ: एक विकासात्मक दुविधा, राज्य वित्त में चुनौतियाँ और सुधार के मार्ग
त्वरित पुनरावृत्ति: राजकोषीय समेकन का अर्थ है सरकार द्वारा अपने राजकोषीय घाटे और सार्वजनिक ऋण को कम करने के लिए राजस्व जुटाने और व्यय प्रबंधन के माध्यम से वित्तीय स्थिरता प्राप्त करना।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु में TVK-नेतृत्व वाली सरकार ने अपना पहला बजट 2026 प्रस्तुत किया है, जिसमें उसे उच्च चुनावी वादों को पूरा करने और साथ ही राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) प्राप्त करने की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यह बजट राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य को सुधारने और विकास को बढ़ावा देने के लिए संसाधन जुटाने के विकल्पों पर केंद्रित है, जबकि नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना लीक को रोकने का प्रयास कर रहा है।
पृष्ठभूमि
- तमिलनाडु सरकार ने एक श्वेत पत्र (White Paper) जारी किया था, जिसमें राज्य की बिगड़ती वित्तीय स्थिति का विस्तृत विवरण दिया गया था।
- सरकार को चुनावी वादे पूरे करने हैं, जैसे महिलाओं के लिए मासिक मानदेय में वृद्धि (₹2,500) और अंतर-जिला बस सेवाओं में मुफ्त यात्रा।
- राज्य का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) अधिक है और ऋण का बोझ भी काफी है, जिससे नए कार्यक्रमों के लिए बहुत कम राजकोषीय स्थान (Fiscal Space) उपलब्ध है।
- उद्योग और वाणिज्य मंडलों ने बजट को प्रगतिशील बताया है, जो विकास और औद्योगिक विकास पर केंद्रित है।
- सरकार ने भ्रष्टाचार को खत्म करने और सर्वोत्तम प्रथाओं को बहाल करने के लिए रिसाव (Leakages) को कम करने पर जोर दिया है।
- वित्त मंत्री ने स्वीकार किया है कि राज्य की वित्तीय स्थिति ‘लाल’ में है और इसे सुधारने में कम से कम दो साल लगेंगे।
राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) क्या है?
- राजकोषीय समेकन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत सरकार अपने राजकोषीय घाटे और सार्वजनिक ऋण को कम करने के लिए नीतियां अपनाती है।
- इसका मुख्य उद्देश्य सरकार की वित्तीय स्थिरता को बढ़ाना और भविष्य की पीढ़ियों पर ऋण का बोझ कम करना है।
- राजकोषीय समेकन आमतौर पर दो तरीकों से प्राप्त किया जाता है: राजस्व जुटाना (Revenue Mobilisation) और व्यय प्रबंधन (Expenditure Management)।
- राजस्व जुटाने में कर आधार का विस्तार करना, कर दरों को युक्तिसंगत बनाना या गैर-कर राजस्व स्रोतों को बढ़ाना शामिल हो सकता है।
- व्यय प्रबंधन में अनावश्यक खर्चों में कटौती करना, सब्सिडी को युक्तिसंगत बनाना और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (Public Sector Undertakings – PSUs) में सुधार करना शामिल है।
- यह प्रक्रिया अक्सर कठिन होती है क्योंकि इसमें लोक कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च में कटौती या नागरिकों पर कर का बोझ बढ़ाने जैसे unpopular निर्णय शामिल हो सकते हैं।
- एक सफल राजकोषीय समेकन दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) की आवश्यकता | राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य को सुधारने और ऋण भार को कम करने के लिए महत्वपूर्ण। |
| चुनावी वादों को पूरा करने का दबाव | जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने और राजनीतिक विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक। |
| संसाधन जुटाने की चुनौतियाँ | राजस्व बढ़ाने और व्यय प्रबंधन के माध्यम से वित्तीय स्थिरता प्राप्त करने की आवश्यकता। |
| सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) में सुधार | दक्षता बढ़ाने और वित्तीय बोझ कम करने के लिए महत्वपूर्ण। |
| ऋण प्रबंधन | राज्य के बढ़ते ऋण को नियंत्रित करने और भविष्य की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक। |
| भ्रष्टाचार उन्मूलन और रिसाव को रोकना | राजस्व के बेहतर उपयोग और सुशासन के लिए महत्वपूर्ण। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- तमिलनाडु के बजट 2026 में राजकोषीय समेकन और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है।
- राज्य सरकार पर चुनावी वादों को पूरा करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का दोहरा दबाव है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव डालेगा।
- संसाधन जुटाने और व्यय प्रबंधन में सुधार से राज्य के दीर्घकालिक वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
सामाजिक महत्व
- महिलाओं के लिए मासिक मानदेय में वृद्धि और अंतर-जिला बस सेवाओं में मुफ्त यात्रा जैसे वादे सामाजिक कल्याण और महिला सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में सरकारी हस्तक्षेप को बढ़ाने से नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार हो सकता है।
प्रशासनिक महत्व
- सरकार द्वारा जारी श्वेत पत्र (White Paper) और बजट भाषण में वित्तीय स्थिति की पारदर्शिता और सुधार की प्रतिबद्धता दर्शाई गई है।
- भ्रष्टाचार को समाप्त करने और सर्वोत्तम प्रथाओं को बहाल करने पर जोर सुशासन (Good Governance) के लिए महत्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. राजकोषीय समेकन और चुनावी वादों का संतुलन
- सरकार को एक ओर राजकोषीय घाटे को कम करना है, वहीं दूसरी ओर उसे अपने महंगे चुनावी वादों को भी पूरा करना है।
- यह संतुलन बनाना अत्यंत कठिन है क्योंकि वादों को पूरा करने से व्यय बढ़ता है, जबकि राजकोषीय समेकन के लिए व्यय में कटौती आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय नीति एवं प्रबंधन
2. संसाधन जुटाने की सीमाएँ
- नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना राजस्व जुटाने के नए रास्ते खोजना एक बड़ी चुनौती है।
- राज्य के पास नए कार्यक्रमों के लिए बहुत कम राजकोषीय गुंजाइश है, जिससे संसाधनों का कुशल उपयोग आवश्यक हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: राजस्व जुटाना एवं व्यय प्रबंधन
3. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सुधार
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का वित्तीय प्रदर्शन अक्सर राज्य के बजट पर बोझ डालता है।
- इन उपक्रमों में सुधार लाना, उनकी दक्षता बढ़ाना और घाटे को कम करना एक जटिल प्रक्रिया है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का प्रबंधन
4. ऋण प्रबंधन
- राज्य पर भारी ऋण का बोझ है, जिससे ब्याज भुगतान में एक बड़ा हिस्सा चला जाता है।
- ऋण को नियंत्रित करना और एक स्थायी ऋण प्रबंधन रणनीति अपनाना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक ऋण एवं वित्तीय स्थिरता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कम राजकोषीय गुंजाइश | नए कार्यक्रमों के लिए सीमित धन उपलब्धता। |
| चुनावी वादों का दबाव | वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में कठिनाई। |
| राजस्व जुटाने की चुनौती | नागरिकों पर बोझ डाले बिना आय बढ़ाने की आवश्यकता। |
| बढ़ता ऋण भार | राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव। |
| सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का प्रदर्शन | राज्य के बजट पर वित्तीय बोझ। |
| भ्रष्टाचार और रिसाव | राजस्व का अक्षम उपयोग। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सुपर क्लीन सुपर कैंपस योजना (Super Clean Super Campus scheme)
आगे की राह
- राजस्व वृद्धि के लिए गैर-कर स्रोतों की पहचान और उनका प्रभावी दोहन करना।
- व्यय प्रबंधन में दक्षता लाना और अनावश्यक खर्चों में कटौती करना।
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में संरचनात्मक सुधारों को लागू करना ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
- ऋण प्रबंधन के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति अपनाना, जिसमें ऋण पुनर्गठन और वित्तीय अनुशासन शामिल हो।
- भ्रष्टाचार को समाप्त करने और वित्तीय रिसाव को रोकने के लिए कठोर उपाय करना।
- सामाजिक कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार करना।
- डिजिटल बुनियादी ढाँचे और सेवाओं का विस्तार करके प्रशासन की लागत कम करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राजकोषीय समेकन · चुनावी वादे · संसाधन जुटाना · व्यय प्रबंधन · राजकोषीय घाटा · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सुधार · ऋण प्रबंधन · राजस्व जुटाना · राज्य वित्त · आर्थिक संवृद्धि
अवधारणा प्रवाह
चुनावी वादे और जनता की अपेक्षाएँ → राज्य के व्यय में वृद्धि का दबाव → राजकोषीय घाटा और ऋण भार में वृद्धि → संसाधन जुटाने और व्यय प्रबंधन की आवश्यकता → राजकोषीय समेकन और वित्तीय स्थिरता की दिशा में प्रयास → दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक कल्याण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) का अर्थ है सरकार के राजस्व और व्यय के बीच के अंतर को कम करना।
2. भारत में, राज्य सरकारों के लिए राजकोषीय समेकन का एक महत्वपूर्ण पहलू सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में सुधार करना है।
3. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) हमेशा सरकार की ऋण चुकाने की क्षमता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। राजकोषीय समेकन का लक्ष्य सरकार के वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार करना है, जिसमें राजस्व बढ़ाना और व्यय को तर्कसंगत बनाना शामिल है। कथन 2 भी सही है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का बेहतर प्रदर्शन राज्य के वित्त पर बोझ कम कर सकता है। कथन 3 गलत है। राजकोषीय घाटा हमेशा नकारात्मक नहीं होता; यदि इसका उपयोग उत्पादक निवेश के लिए किया जाता है तो यह आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा दे सकता है।
Q2. राजकोषीय समेकन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा उपाय राजस्व जुटाने के लिए एक प्रभावी तरीका हो सकता है, जिससे नागरिकों पर सीधे बोझ न पड़े?
- नए कर लगाना
- मौजूदा करों की दरें बढ़ाना
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का विनिवेश
- सरकारी सेवाओं के शुल्क में वृद्धि
उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का विनिवेश — सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) का विनिवेश (Disinvestment) सरकार के लिए राजस्व जुटाने का एक तरीका है, जिससे नागरिकों पर सीधे कर का बोझ नहीं पड़ता। नए कर लगाना, मौजूदा करों की दरें बढ़ाना और सरकारी सेवाओं के शुल्क में वृद्धि सीधे नागरिकों पर वित्तीय बोझ डालती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए। राज्य सरकारों के समक्ष राजकोषीय समेकन प्राप्त करने और चुनावी वादों को पूरा करने के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** राजकोषीय समेकन की परिभाषा दीजिए – सरकारी ऋण और घाटे को कम करने के लिए राजस्व बढ़ाना और व्यय को नियंत्रित करना। इसके महत्व पर प्रकाश डालिए (स्थिरता, संवृद्धि)।
2. **राजकोषीय समेकन के घटक:** राजस्व जुटाना (कर और गैर-कर), व्यय प्रबंधन (अनुत्पादक व्यय में कमी, सब्सिडी का युक्तिकरण), सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सुधार, ऋण प्रबंधन।
3. **चुनौतियाँ:**
* **चुनावी वादे:** मुफ्त योजनाओं (freebies), सब्सिडी और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के कारण व्यय में वृद्धि।
* **सीमित राजकोषीय स्थान:** राजस्व जुटाने के सीमित विकल्प (GST के बाद राज्यों के पास कर लगाने की स्वायत्तता कम हुई)।
* **राजस्व रिसाव और भ्रष्टाचार:** लीकेज और भ्रष्टाचार के कारण राजस्व का नुकसान।
* **बाहरी कारक:** वैश्विक और राष्ट्रीय आर्थिक मंदी का प्रभाव।
* **केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध:** केंद्र से मिलने वाले हस्तांतरण और अनुदान पर निर्भरता।
4. **संतुलन स्थापित करने के उपाय:**
* **लक्ष्य-उन्मुख सब्सिडी:** जरूरतमंदों तक लाभ सुनिश्चित करना।
* **राजस्व आधार का विस्तार:** गैर-कर राजस्व स्रोतों की पहचान।
* **सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का युक्तिकरण:** दक्षता बढ़ाना या विनिवेश करना।
* **डिजिटलीकरण और पारदर्शिता:** लीकेज को कम करना।
* **दीर्घकालिक संवृद्धि नीतियाँ:** निवेश आकर्षित करना और रोजगार सृजित करना।
5. **निष्कर्ष:** राजकोषीय अनुशासन और लोक कल्याण के बीच सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दीजिए, जो सतत और समावेशी संवृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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