मद्रास हाईकोर्ट ने त्यागपत्र देने वाले विधायकों की पुनः चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की याचिका खारिज की

Madras High Court dismisses plea to prevent resigned MLAs from recontesting in the resulting bypolls — diagram

मद्रास हाईकोर्ट ने त्यागपत्र देने वाले विधायकों की पुनः चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की याचिका खारिज की

विधायक इस्तीफा पुनः चुनाव प्रक्रियाविधायक इस्तीफाविधायक पद से इस्तीफा देता हैसीट रिक्तविधानसभा सीट खाली होती हैउपचुनाव घोषणाचुनाव आयोग उपचुनाव की घोषणा करविधायक पुनः चुनावइस्तीफा देने वाला विधायक पुनः याचिका चुनौतीजनहित याचिका द्वारा चुनौती दी न्यायालय खारिजउच्च न्यायालय याचिका खारिज करत
विधायक इस्तीफा पुनः चुनाव प्रक्रिया

✎ मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि इस्तीफा देने वाले विधायकों को उपचुनाव लड़ने से रोकने या उन पर खर्च का बोझ डालने का कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है, न कि न्यायपालिका के पास।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, संसद और राज्य विधायिका—संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।  |  GS Paper II — जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के मुख्य प्रावधान।
  • Prelims: विधायक का इस्तीफा, उपचुनाव, जनहित याचिका (PIL), भारत निर्वाचन आयोग (ECI), दल-बदल विरोधी कानून, संसद की शक्तियाँ
  • Essay: लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और जवाबदेही।, निर्वाचन प्रक्रिया की शुचिता और सुधारों की आवश्यकता।

त्वरित पुनरावृत्ति: मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि इस्तीफा देने वाले विधायकों को उपचुनाव लड़ने से रोकने या उन पर खर्च का बोझ डालने का कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है, न कि न्यायपालिका के पास।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें इस्तीफा देने वाले विधायकों को उपचुनावों में फिर से चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की गई थी। याचिका में यह भी कहा गया था कि ऐसे विधायकों को ‘कूलिंग-ऑफ’ अवधि का सामना करना चाहिए या उपचुनावों का खर्च वहन करना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है, न कि न्यायपालिका के पास। यह निर्णय विधायकों के इस्तीफे, उपचुनावों और दल-बदल विरोधी कानून से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म देता है।

पृष्ठभूमि

  • याचिका में तर्क दिया गया था कि विधायक अक्सर दल-बदल विरोधी कानून (Anti-defection law) से बचने के लिए इस्तीफा देते हैं और फिर दूसरे दल में शामिल होकर उसी निर्वाचन क्षेत्र से उपचुनाव लड़ते हैं, जिससे सार्वजनिक धन का अपव्यय होता है।
  • याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि इस्तीफा देने वाले विधायकों के लिए या तो पांच साल की ‘कूलिंग-ऑफ’ अवधि निर्धारित की जाए या उन्हें उपचुनावों का पूरा खर्च वहन करने के लिए बाध्य किया जाए।
  • मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो इस्तीफा देने वाले विधायकों को उपचुनाव लड़ने से रोकता हो, और न्यायालय ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता जहां कानून स्पष्ट है।
  • भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने भी न्यायालय को बताया कि इस्तीफा देने वाले विधायक के लिए उपचुनाव का खर्च वहन करने की कोई वैधानिक आवश्यकता नहीं है, और आयोग की भूमिका केवल रिक्तियों के उत्पन्न होने पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।
  • न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि इस मुद्दे पर निर्णय लेने और कानून बनाने का अधिकार संसद का है।
  • यह मामला तमिलनाडु में कुछ विधायकों के इस्तीफे के बाद उत्पन्न हुआ था, जिन्होंने कथित तौर पर अपनी पार्टी बदलकर दूसरे दल से फिर से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी।

विधायकों के इस्तीफे और उपचुनाव से संबंधित संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधान

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 190(3)(b) के तहत, यदि कोई विधायक अध्यक्ष को संबोधित करके अपने हस्ताक्षर सहित लिखित रूप में अपना पद त्याग देता है, तो उसका स्थान रिक्त हो जाता है।
  • अध्यक्ष को यह सुनिश्चित करना होता है कि इस्तीफा स्वैच्छिक और वास्तविक है। यदि अध्यक्ष संतुष्ट नहीं है, तो वह इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर सकता है।
  • एक बार स्थान रिक्त होने के बाद, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) उस रिक्त सीट को भरने के लिए उपचुनाव (Bypoll) कराने के लिए बाध्य होता है, बशर्ते शेष कार्यकाल एक वर्ष से अधिक हो।
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो इस्तीफा देने वाले विधायक को उपचुनाव में फिर से चुनाव लड़ने से रोकता हो।
  • दल-बदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची) का उद्देश्य राजनीतिक दलबदल को रोकना है। यदि कोई विधायक अपनी पार्टी बदलता है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। हालांकि, इस्तीफा देकर और फिर से चुनाव लड़कर इस कानून से बचने की कोशिश की जा सकती है।
  • उपचुनावों का खर्च सार्वजनिक धन से वहन किया जाता है, और याचिकाकर्ता का तर्क था कि बार-बार होने वाले उपचुनावों से राजकोष पर अनावश्यक बोझ पड़ता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पुनः चुनाव लड़ने का अधिकार विधायकों को इस्तीफा देने के बाद भी उपचुनावों में फिर से चुनाव लड़ने की अनुमति है, जब तक कि कोई कानूनी रोक न हो।
न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा उच्च न्यायालय ने माना कि मौजूदा कानून में हस्तक्षेप करना या नए नियम बनाना संसद का अधिकार क्षेत्र है, न कि न्यायपालिका का।
जनहित याचिका (PIL) का उद्देश्य याचिका का उद्देश्य इस्तीफा देने वाले विधायकों को उपचुनावों में फिर से चुनाव लड़ने से रोकना था ताकि सार्वजनिक धन की बर्बादी रोकी जा सके और दल-बदल विरोधी कानून से बचने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सके।
चुनाव आयोग की भूमिका चुनाव आयोग (ECI) का कार्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है; वह विधायकों के इस्तीफे के कारणों की जांच नहीं कर सकता या उपचुनावों का खर्च उन पर नहीं डाल सकता।
कूलिंग-ऑफ अवधि का प्रस्ताव याचिकाकर्ता ने इस्तीफा देने वाले विधायकों के लिए 5 साल की कूलिंग-ऑफ अवधि या उपचुनावों का खर्च वहन करने का प्रस्ताव रखा था।

महत्व

लोकतंत्र और शासन पर प्रभाव

  • यह निर्णय विधायकों के इस्तीफे और उपचुनावों में उनके फिर से चुनाव लड़ने के अभ्यास के कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करता है।
  • यह दल-बदल विरोधी कानून (Anti-defection law) के संभावित दुरुपयोग और सार्वजनिक धन के व्यय से संबंधित चिंताओं को उजागर करता है।
  • यह विधायिका (Parliament) की सर्वोच्चता को रेखांकित करता है कि वह चुनावी सुधारों पर निर्णय ले, न कि न्यायपालिका।

चुनावी प्रक्रिया पर प्रभाव

  • उपचुनावों की बार-बार आवश्यकता से चुनाव आयोग पर प्रशासनिक और वित्तीय बोझ पड़ता है।
  • यह मतदाताओं के जनादेश के सम्मान और उनके प्रतिनिधित्व की स्थिरता पर सवाल उठाता है।
  • यह राजनीतिक दलों के बीच दल-बदल की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकता है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता आ सकती है।

संवैधानिक और कानूनी निहितार्थ

  • यह मामला न्यायिक समीक्षा (Judicial review) की सीमाओं और विधायी कार्यों में अदालतों के हस्तक्षेप की सीमा को दर्शाता है।
  • यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) और दल-बदल विरोधी कानून के तहत मौजूदा प्रावधानों की पर्याप्तता पर बहस को जन्म देता है।
  • यह संसद की भूमिका को मजबूत करता है कि वह ऐसे मामलों में कानून बनाकर आवश्यक सुधार करे।

चुनौतियाँ

1. दल-बदल विरोधी कानून का दुरुपयोग

  • विधायक दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए इस्तीफा दे सकते हैं और फिर दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं।
  • यह कानून की मूल भावना को कमजोर करता है, जिसका उद्देश्य राजनीतिक अस्थिरता को रोकना था।

2. सार्वजनिक धन की बर्बादी

  • विधायकों के इस्तीफे के कारण होने वाले उपचुनावों पर भारी सार्वजनिक धन खर्च होता है।
  • यह करदाताओं के पैसे का अक्षम उपयोग है, खासकर जब इस्तीफे केवल राजनीतिक लाभ के लिए हों।

3. मतदाताओं के जनादेश का अनादर

  • एक विधायक का इस्तीफा और फिर दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ना मतदाताओं के मूल जनादेश का उल्लंघन हो सकता है।
  • यह मतदाताओं के विश्वास को कमजोर करता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को हतोत्साहित कर सकता है।

4. राजनीतिक अस्थिरता

  • बार-बार होने वाले उपचुनाव और विधायकों का दल-बदल राज्य सरकारों में अस्थिरता पैदा कर सकता है।
  • यह नीति निर्माण और शासन को प्रभावित करता है, जिससे विकास कार्य बाधित हो सकते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
इस्तीफा देकर पुनः चुनाव लड़ना दल-बदल विरोधी कानून से बचने और राजनीतिक लाभ के लिए इस्तीफे का दुरुपयोग।
उपचुनावों पर खर्च सार्वजनिक धन का अनावश्यक व्यय, जो विकास कार्यों में लगाया जा सकता था।
मतदाता का जनादेश मूल जनादेश का अनादर और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास में कमी।
कानूनी अस्पष्टता इस्तीफा देने वाले विधायकों के लिए पुनः चुनाव लड़ने पर स्पष्ट कानूनी प्रतिबंधों का अभाव।
न्यायिक बनाम विधायी भूमिका न्यायपालिका द्वारा विधायी क्षेत्र में हस्तक्षेप की सीमा और संसद की सर्वोच्चता।

आगे की राह

  • संसद को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और दल-बदल विरोधी कानून में संशोधन कर इस्तीफा देने वाले विधायकों के पुनः चुनाव लड़ने पर स्पष्ट नियम बनाने चाहिए।
  • इस्तीफा देने वाले विधायकों के लिए एक ‘कूलिंग-ऑफ’ अवधि पर विचार किया जा सकता है, जिसके दौरान वे उपचुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
  • उपचुनावों के खर्च को कम करने या इसे इस्तीफा देने वाले विधायकों पर डालने के लिए एक तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, यदि उनका इस्तीफा राजनीतिक कारणों से है।
  • चुनाव आयोग को ऐसे मामलों में अपनी भूमिका और शक्तियों को मजबूत करने के लिए विधायी समर्थन दिया जाना चाहिए।
  • राजनीतिक दलों को दल-बदल को हतोत्साहित करने और आंतरिक लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए आचार संहिता विकसित करनी चाहिए।
  • जनता में चुनावी प्रक्रिया और दल-बदल के नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए।
  • कानून आयोग (Law Commission) को इस मुद्दे पर एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए, जिसमें विभिन्न देशों के अनुभवों को भी शामिल किया गया हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विधायक का इस्तीफा · उपचुनाव · जन प्रतिनिधित्व अधिनियम · दल-बदल विरोधी कानून · भारत का चुनाव आयोग · न्यायिक समीक्षा · संसदीय संप्रभुता · जनहित याचिका · मतदाताओं का अपमान · लोकतांत्रिक प्रक्रिया

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 190 (3) (b)’, ‘note’: ‘विधायकों के इस्तीफे से संबंधित प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 324’, ‘note’: ‘चुनाव आयोग के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्तियाँ’}
  • {‘article’: ‘दसवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘दल-बदल विरोधी कानून से संबंधित प्रावधान’}

अवधारणा प्रवाह

विधायक का पद से इस्तीफा  →  विधानसभा सीट का रिक्त होना  →  चुनाव आयोग द्वारा उपचुनाव की घोषणा  →  इस्तीफा देने वाले विधायक का पुनः चुनाव लड़ना  →  जनहित याचिका द्वारा चुनौती  →  उच्च न्यायालय द्वारा याचिका खारिज करना  →  संसद को कानून बनाने का सुझाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत का संविधान विधायकों के इस्तीफे के बाद उपचुनावों में उनके फिर से चुनाव लड़ने पर कोई रोक नहीं लगाता है।
2. दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्यवाही से बचने के लिए विधायक इस्तीफा दे सकते हैं।
3. भारत का चुनाव आयोग (ECI) इस्तीफा देने वाले विधायकों के लिए ‘कूलिंग-ऑफ’ अवधि निर्धारित कर सकता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि वर्तमान कानून में ऐसी कोई रोक नहीं है। कथन 2 भी सही है, यह एक सामान्य कारण है जिसके लिए विधायक इस्तीफा देते हैं। कथन 3 गलत है, ECI के पास ऐसी ‘कूलिंग-ऑफ’ अवधि निर्धारित करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है, यह संसद का क्षेत्राधिकार है।

Q2. अभिकथन (A): मद्रास उच्च न्यायालय ने इस्तीफा देने वाले विधायकों को उपचुनावों में फिर से चुनाव लड़ने से रोकने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
कारण (R): न्यायालय ने कहा कि इस मुद्दे पर कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है, न कि न्यायपालिका के पास।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि मद्रास उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या है, क्योंकि न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ विधायकों के इस्तीफे और उसके बाद के उपचुनावों में उनके फिर से चुनाव लड़ने की प्रथा भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए क्या चुनौतियाँ प्रस्तुत करती है? इस संबंध में संसद के लिए आवश्यक विधायी सुधारों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में विधायकों के इस्तीफे और उपचुनावों में उनके फिर से चुनाव लड़ने की वर्तमान स्थिति का संक्षिप्त उल्लेख करें। पहले भाग में, इस प्रथा से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का विश्लेषण करें, जैसे सार्वजनिक धन की बर्बादी, मतदाताओं के जनादेश का अपमान, दल-बदल विरोधी कानून का कमजोर होना, राजनीतिक अस्थिरता और नैतिक मुद्दे। दूसरे भाग में, इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए संसद द्वारा किए जा सकने वाले संभावित विधायी सुधारों पर चर्चा करें, जिसमें ‘कूलिंग-ऑफ’ अवधि का प्रावधान, उपचुनावों का खर्च इस्तीफा देने वाले विधायक पर डालना, दल-बदल विरोधी कानून में संशोधन ताकि इस्तीफे को भी दल-बदल के दायरे में लाया जा सके, और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) में आवश्यक बदलाव शामिल हैं। मद्रास उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय और भारत के चुनाव आयोग (ECI) की भूमिका का भी उल्लेख करें। निष्कर्ष में, लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनावी अखंडता को बनाए रखने के लिए इन सुधारों के महत्व पर जोर दें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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