09 Aug एआई से भारत में स्वास्थ्य सेवा की कमी को पूरा करने की संभावना: रिपोर्ट
✎ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत में स्वास्थ्य सेवा अंतराल को पाटने, निदान में सुधार करने और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच का विस्तार करने में एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उभर रही है, विशेषकर विशेषज्ञ क्षमता को बढ़ाकर और…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — स्वास्थ्य, मानव संसाधन | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में विकास, सूचना प्रौद्योगिकी
- Prelims: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वास्थ्य सेवा अंतराल, गैर-संचारी रोग (NCDs), आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, इंडिया AI मिशन, राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023, मेडटेक, डिजिटल स्वास्थ्य
- Essay: भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता और चुनौतियाँ, डिजिटल क्रांति और भारत का सामाजिक-आर्थिक विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत में स्वास्थ्य सेवा अंतराल को पाटने, निदान में सुधार करने और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच का विस्तार करने में एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उभर रही है, विशेषकर विशेषज्ञ क्षमता को बढ़ाकर और गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ को संबोधित करके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा ‘मेडटेक में AI: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा में क्रांति’ नामक एक ज्ञान पत्र जारी किया गया है। यह रिपोर्ट भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में बढ़ते दबाव, जैसे कि वृद्ध होती जनसंख्या, पुरानी बीमारियों का बढ़ता बोझ और डॉक्टरों, नर्सों तथा अस्पताल के बिस्तरों की कमी को उजागर करती है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) विशेषज्ञता का विस्तार करके, निदान में सुधार करके और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाकर इस अंतर को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, विशेषकर छोटे अस्पतालों और कम सेवा वाले क्षेत्रों में।
पृष्ठभूमि
- भारत की जनसंख्या 2026 में 1.47 अरब अनुमानित है, जिसमें 65% से अधिक मौतें अब हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases – NCDs) के कारण होती हैं।
- 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की जनसंख्या 2036 तक 230 मिलियन को पार करने का अनुमान है, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा की मांग में और वृद्धि होगी।
- स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के बावजूद, डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल के बिस्तरों की कमी बनी हुई है। भारत में प्रति 10,000 जनसंख्या पर 9.6 डॉक्टर हैं, जबकि वैश्विक औसत 18.3 है।
- भारत में प्रति 10,000 जनसंख्या पर 27.2 नर्सिंग कर्मी हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर 40.5 हैं, और प्रति 10,000 पर 15.9 अस्पताल बिस्तर हैं, जबकि वैश्विक औसत 33 है।
- देश में प्रति मिलियन लोगों पर केवल 4 MRI स्कैनर हैं, जबकि वैश्विक औसत 19 है, जो उन्नत नैदानिक क्षमताओं की कमी को दर्शाता है।
- रिपोर्ट के अनुसार, AI का उद्देश्य डॉक्टरों को प्रतिस्थापित करना नहीं है, बल्कि निदान, नैदानिक निर्णय लेने और स्क्रीनिंग में सहायता करके विशेषज्ञ क्षमता को कई गुना बढ़ाना है।
स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्या है?
- स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कंप्यूटर प्रणालियों का उपयोग है जो मानव बुद्धि के समान संज्ञानात्मक कार्य कर सकती हैं, जैसे कि सीखना, समस्या-समाधान और निर्णय लेना।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य स्वास्थ्य पेशेवरों की क्षमताओं को बढ़ाना है, न कि उन्हें प्रतिस्थापित करना, जिससे स्वास्थ्य सेवा वितरण में दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार हो सके।
- AI-सक्षम निदान (AI-enabled diagnostics) को पहला बड़े पैमाने का अनुप्रयोग माना जाता है, जो प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवा में विशेषज्ञता का विस्तार करने में मदद करेगा।
- यह नैदानिक सटीकता में सुधार कर सकता है, उत्पादकता बढ़ा सकता है और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में असमानताओं को कम कर सकता है, विशेषकर ग्रामीण और कम सेवा वाले क्षेत्रों में।
- भारत ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission), इंडिया AI मिशन (IndiaAI Mission), SAHI और BODH जैसी पहलों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा में AI के लिए नींव तैयार की है।
- राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 (National Medical Devices Policy, 2023) भी स्वास्थ्य सेवा में प्रौद्योगिकी के एकीकरण का समर्थन करती है।
- अगली चुनौती AI को सफल पायलट परियोजनाओं से नियमित नैदानिक उपयोग में लाना है, जिसके लिए AI-तैयार स्वास्थ्य डेटा, एक अनुमानित नियामक ढांचा और AI-सक्षम प्रौद्योगिकियों के लिए प्रतिपूर्ति तंत्र (reimbursement mechanisms) बनाने की आवश्यकता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विशेषज्ञ क्षमता का विस्तार | AI निदान और नैदानिक निर्णय लेने में सहायता करके विशेषज्ञ डॉक्टरों की क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में भी विशेषज्ञता उपलब्ध होगी। |
| बेहतर निदान | AI-सक्षम निदान (AI-enabled diagnostics) प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवा में सटीकता और दक्षता में सुधार कर सकते हैं, जिससे बीमारियों का शीघ्र पता लगाने में मदद मिलेगी। |
| गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच का विस्तार | छोटे अस्पतालों और कम सेवा वाले क्षेत्रों में AI के उपयोग से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे स्वास्थ्य असमानताएं कम होंगी। |
| गैर-संचारी रोगों का प्रबंधन | हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों (Non-communicable diseases) के बढ़ते बोझ को AI-आधारित स्क्रीनिंग और निगरानी के माध्यम से बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है। |
| बढ़ती उम्र की आबादी की देखभाल | 2036 तक 60 वर्ष से अधिक आयु की आबादी 230 मिलियन से अधिक होने का अनुमान है। AI दीर्घकालिक स्वास्थ्य देखभाल (long-term healthcare) की बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायक हो सकता है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- AI स्वास्थ्य सेवा में असमानताओं को कम करने में मदद कर सकता है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जहां डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी है।
- यह नागरिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार करेगा, जिससे समग्र सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में वृद्धि होगी।
- बढ़ती उम्र की आबादी और गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में AI महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे समाज पर पड़ने वाला स्वास्थ्य सेवा का दबाव कम होगा।
आर्थिक महत्व
- AI-सक्षम निदान और उपचार से स्वास्थ्य सेवा की लागत कम हो सकती है, जिससे यह अधिक किफायती बनेगी।
- यह स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाएगा, जिससे डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों को अधिक मरीजों की देखभाल करने में मदद मिलेगी।
- भारत में चिकित्सा उपकरण (Medical Device) और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी (Health Technology) उद्योग में नवाचार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) होगी।
शासनिक महत्व
- AI स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणालियों को मजबूत कर सकता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की दक्षता में सुधार कर सकता है।
- यह सरकार को स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन की कमी को दूर करने में एक प्रभावी उपकरण प्रदान करता है।
- नीति निर्माताओं को डेटा-संचालित अंतर्दृष्टि (data-driven insights) प्रदान करके बेहतर स्वास्थ्य नीतियों और रणनीतियों को तैयार करने में मदद मिलेगी।
चुनौतियाँ
1. AI-तैयार स्वास्थ्य डेटा की कमी
- AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और मान्य करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले, मानकीकृत और बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य डेटा की आवश्यकता होती है।
- डेटा गोपनीयता (data privacy) और सुरक्षा (security) सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है, खासकर संवेदनशील स्वास्थ्य जानकारी के साथ।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य
2. नियामक ढांचा और नैतिक चिंताएं
- AI-सक्षम प्रौद्योगिकियों के लिए एक स्पष्ट और अनुमानित नियामक ढांचा (regulatory framework) विकसित करना आवश्यक है।
- AI के उपयोग से जुड़े नैतिक मुद्दे, जैसे एल्गोरिथम पूर्वाग्रह (algorithmic bias) और जवाबदेही (accountability), को संबोधित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: शासन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नैतिकता
3. पुनर्भुगतान तंत्र का अभाव
- AI-सक्षम प्रौद्योगिकियों के लिए एक प्रभावी पुनर्भुगतान तंत्र (reimbursement mechanism) की अनुपस्थिति उनके व्यापक उपयोग को बाधित कर सकती है।
- स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और बीमा कंपनियों के लिए AI समाधानों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य
4. डिजिटल साक्षरता और बुनियादी ढांचा
- स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों और रोगियों के बीच डिजिटल साक्षरता (digital literacy) का निम्न स्तर AI प्रौद्योगिकियों को अपनाने में बाधा बन सकता है।
- दूरदराज के क्षेत्रों में विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल बुनियादी ढांचे की कमी AI के प्रभावी कार्यान्वयन को चुनौती देती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल के बिस्तरों की कमी | भारत में प्रति 10,000 जनसंख्या पर डॉक्टरों, नर्सिंग कर्मियों और अस्पताल के बिस्तरों की संख्या वैश्विक औसत से काफी कम है, जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर दबाव बढ़ रहा है। |
| बढ़ती उम्र की आबादी | 2036 तक 60 वर्ष से अधिक आयु की आबादी 230 मिलियन को पार कर जाएगी, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य देखभाल की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। |
| गैर-संचारी रोगों का बढ़ता बोझ | भारत में 65% से अधिक मौतें अब हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों के कारण होती हैं, जिनके लिए विशेष देखभाल और प्रबंधन की आवश्यकता होती है। |
| विशेषज्ञता तक असमान पहुंच | विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और उनका शहरी क्षेत्रों में केंद्रित होना, छोटे अस्पतालों और कम सेवा वाले क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण विशेषज्ञता तक पहुंच में बाधा डालता है। |
| सीमित नैदानिक बुनियादी ढांचा | प्रति मिलियन लोगों पर MRI स्कैनर जैसे उन्नत नैदानिक उपकरणों की संख्या वैश्विक औसत से काफी कम है, जो सटीक और समय पर निदान को प्रभावित करती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission)
- IndiaAI मिशन
- SAHI (संभवतः स्वास्थ्य सेवा में AI से संबंधित कोई पहल)
- BODH (संभवतः स्वास्थ्य सेवा में AI से संबंधित कोई पहल)
- राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 (National Medical Devices Policy, 2023)
आगे की राह
- AI-तैयार स्वास्थ्य डेटा इकोसिस्टम का निर्माण करना, जिसमें मानकीकृत डेटा संग्रह, भंडारण और सुरक्षित साझाकरण प्रोटोकॉल शामिल हों।
- AI-सक्षम प्रौद्योगिकियों के लिए एक स्पष्ट, गतिशील और भविष्य-उन्मुख नियामक ढांचा विकसित करना, जो नवाचार को बढ़ावा दे और रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करे।
- AI-आधारित स्वास्थ्य समाधानों के लिए प्रभावी पुनर्भुगतान तंत्र स्थापित करना ताकि स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं द्वारा उनके व्यापक उपयोग को प्रोत्साहित किया जा सके।
- स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों और रोगियों के लिए AI प्रौद्योगिकियों के उपयोग और लाभों के बारे में जागरूकता और डिजिटल साक्षरता बढ़ाना।
- दूरदराज के क्षेत्रों में विश्वसनीय डिजिटल बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में निवेश करना ताकि AI समाधानों की पहुंच सुनिश्चित हो सके।
- AI विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को बढ़ावा देना ताकि अनुसंधान, विकास और कार्यान्वयन में तेजी लाई जा सके।
- AI के नैतिक उपयोग और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश और नीतियां तैयार करना, जिसमें एल्गोरिथम पूर्वाग्रह को कम करना शामिल हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: स्वास्थ्य के अधिकार का अप्रत्यक्ष संबंध, AI गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाकर इसे मजबूत कर सकता है।
- अनुच्छेद 47: राज्य का कर्तव्य है कि वह पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाए और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करे, AI इसमें सहायक हो सकता है।
अवधारणा प्रवाह
भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर बढ़ता दबाव (बढ़ती उम्र, पुरानी बीमारियाँ, संसाधनों की कमी) → स्वास्थ्य सेवा अंतराल (Healthcare Gap) का विस्तार → AI की क्षमता की पहचान (निदान, विशेषज्ञता विस्तार, पहुंच सुधार) → AI-सक्षम स्वास्थ्य समाधानों का विकास और कार्यान्वयन → स्वास्थ्य सेवा अंतराल को कम करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत में प्रति 10,000 जनसंख्या पर डॉक्टरों की संख्या वैश्विक औसत से अधिक है।
2. गैर-संचारी रोग (Non-Communicable Diseases – NCDs) भारत में होने वाली अधिकांश मौतों का कारण बनते हैं।
3. राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 का उद्देश्य भारत में चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण और नवाचार को बढ़ावा देना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 गलत है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति 10,000 जनसंख्या पर 9.6 डॉक्टर हैं, जबकि वैश्विक औसत 18.3 है। कथन 2 सही है। रिपोर्ट बताती है कि 65% से अधिक मौतें अब हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों के कारण होती हैं। कथन 3 सही है। राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 का उद्देश्य चिकित्सा उपकरण क्षेत्र को मजबूत करना और नवाचार को बढ़ावा देना है, जिसमें AI-सक्षम प्रौद्योगिकियां भी शामिल हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से AI को स्वास्थ्य सेवा में एकीकृत करने के लिए भारत सरकार की पहल/पहलें हैं?
1. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन
2. IndiaAI मिशन
3. SAHI
4. BODH
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) भारत में डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए एक प्रमुख पहल है। IndiaAI मिशन का उद्देश्य देश में AI नवाचार को बढ़ावा देना है। SAHI और BODH भी स्वास्थ्य सेवा में AI के लिए नींव बनाने वाली पहलों में से हैं। ये सभी पहलें स्वास्थ्य सेवा में AI के उपयोग के लिए आधार तैयार करती हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की क्षमता का परीक्षण करें। इस क्षमता को साकार करने में आने वाली प्रमुख चुनौतियों और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक नीतिगत उपायों पर भी चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. परिचय: भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति (जनसंख्या वृद्धि, गैर-संचारी रोगों का बढ़ता बोझ, डॉक्टरों और बिस्तरों की कमी) का संक्षिप्त विवरण दें और AI की भूमिका का उल्लेख करें।
2. AI की क्षमता: स्वास्थ्य सेवा अंतराल को पाटने में AI की क्षमता पर विस्तार से चर्चा करें। इसमें शामिल हो सकते हैं:
* निदान में सहायता (विशेषज्ञ क्षमता का विस्तार)।
* नैदानिक निर्णय लेने में सुधार।
* स्क्रीनिंग और प्रारंभिक पहचान।
* प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच बढ़ाना, विशेषकर ग्रामीण और कम सेवा वाले क्षेत्रों में।
* उत्पादकता में वृद्धि और देखभाल तक पहुँच में असमानताओं को कम करना।
* व्यक्तिगत चिकित्सा और दवा विकास।
3. प्रमुख चुनौतियाँ: AI को स्वास्थ्य सेवा में व्यापक रूप से अपनाने में आने वाली बाधाओं को सूचीबद्ध करें:
* AI-तैयार स्वास्थ्य डेटा की कमी (गुणवत्ता, मानकीकरण)।
* एक अनुमानित नियामक ढाँचे का अभाव।
* AI-सक्षम प्रौद्योगिकियों के लिए प्रतिपूर्ति तंत्र की कमी।
* डेटा गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
* तकनीकी अवसंरचना और डिजिटल साक्षरता का अभाव।
* डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच AI को अपनाने में हिचकिचाहट या प्रशिक्षण की कमी।
4. आवश्यक नीतिगत उपाय: इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकार और अन्य हितधारकों द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर प्रकाश डालें:
* डेटा मानकीकरण और साझाकरण प्रोटोकॉल विकसित करना।
* एक स्पष्ट और अनुकूल नियामक ढाँचा स्थापित करना।
* AI-सक्षम सेवाओं के लिए प्रतिपूर्ति मॉडल बनाना।
* आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और IndiaAI मिशन जैसी मौजूदा पहलों को मजबूत करना।
* स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के लिए AI प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम।
* सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना।
* अनुसंधान और विकास में निवेश।
5. निष्कर्ष: भारत के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य को बदलने में AI की महत्वपूर्ण भूमिका को दोहराते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें, जिसमें मानव-केंद्रित दृष्टिकोण और नैतिक विचारों पर जोर दिया गया हो।
स्रोत: Times of India
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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