11 Aug झारखंड में छात्र आंदोलन: ईडी जांच और सरकार-विपक्ष की रणनीति पर गहराया संकट
✎ झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष | GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ एवं इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन | GS Paper IV — लोक प्रशासन में नैतिकता
- Prelims: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC), झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC), प्रतियोगी परीक्षा पारदर्शिता, छात्र आंदोलन, कानून और व्यवस्था, राज्य सरकार की भूमिका
- Essay: लोकतंत्र में विरोध का अधिकार और राज्य की भूमिका, भारत में शिक्षा और रोजगार के अवसर: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
झारखंड में JPSC और JSSC की भर्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर हजारों छात्र पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन के दौरान रांची में छात्रों पर लाठीचार्ज की घटना सामने आई है, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दलों ने इस घटना की निंदा करते हुए सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही है।
पृष्ठभूमि
- झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं, जिससे छात्रों में असंतोष व्याप्त है।
- JPSC और JSSC द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं के परिणाम और चयन प्रक्रियाओं पर छात्रों ने लगातार सवाल उठाए हैं।
- छात्रों की मुख्य मांगों में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना, कथित अनियमितताओं की उच्च-स्तरीय जांच कराना और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करना शामिल है।
- हाल ही में, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन हुआ था, जिसने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता के मुद्दे को और मुखर किया है।
- आंदोलनकारी छात्रों ने विधानसभा घेराव का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।
- इस घटना के बाद राज्य में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं, जिसमें विपक्ष ने सरकार पर छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही
- प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता (Transparency) का अर्थ है कि पूरी चयन प्रक्रिया, विज्ञापन से लेकर अंतिम परिणाम तक, स्पष्ट, खुली और सभी हितधारकों के लिए सुलभ होनी चाहिए।
- जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित करती है कि परीक्षा आयोजित करने वाले निकाय (जैसे JPSC, JSSC) अपने कार्यों और निर्णयों के लिए उत्तरदायी हों और किसी भी अनियमितता की स्थिति में कार्रवाई की जा सके।
- भारत में विभिन्न सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती प्रक्रियाएँ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) और कर्मचारी चयन आयोगों (SSC) द्वारा संचालित की जाती हैं।
- इन आयोगों का मुख्य उद्देश्य योग्यता के आधार पर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से उम्मीदवारों का चयन करना है।
- परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप अक्सर पेपर लीक, नकल, परिणाम में हेरफेर या भर्ती प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद से संबंधित होते हैं।
- ऐसी अनियमितताएँ न केवल योग्य उम्मीदवारों के अवसरों को छीनती हैं, बल्कि सार्वजनिक संस्थानों में विश्वास को भी कमजोर करती हैं।
- इन मुद्दों को संबोधित करने के लिए सरकारें अक्सर सख्त कानून, तकनीकी समाधान (जैसे ऑनलाइन परीक्षा) और निगरानी तंत्र स्थापित करती हैं।
- छात्रों और नागरिक समाज संगठनों का विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को रखने और सरकार पर दबाव बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार | संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार, शासन में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करता है। |
| पुलिस बल का प्रयोग | कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक, परंतु आनुपातिकता और मानवाधिकारों का सम्मान अनिवार्य। |
| भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता | सरकारी नौकरियों में निष्पक्षता और योग्यता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण, युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा। |
| राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) | राज्य में सरकारी नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार संवैधानिक/वैधानिक निकाय, इनकी विश्वसनीयता महत्वपूर्ण। |
| न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) | प्रशासनिक निर्णयों और कानूनों की संवैधानिकता की जांच, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह आंदोलन युवाओं के भविष्य और सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता की मांग को दर्शाता है, जो समाज के एक बड़े वर्ग की आकांक्षाओं से जुड़ा है।
- पुलिस द्वारा बल प्रयोग से लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता पर बहस छिड़ती है, जो सामाजिक ताने-बाने के लिए महत्वपूर्ण है।
शासनिक महत्व
- भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताएं राज्य के शासन पर गंभीर सवाल उठाती हैं और सुशासन की आवश्यकता पर बल देती हैं।
- राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और आंदोलनकारियों के साथ संवाद का तरीका उसकी जवाबदेही और पारदर्शिता को दर्शाता है।
राजनीतिक महत्व
- यह मुद्दा राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनावी और नीतिगत विषय बन गया है।
- विपक्षी दल सरकार पर दबाव बनाने और युवाओं के समर्थन को आकर्षित करने के लिए इस मुद्दे का उपयोग कर रहे हैं।
चुनौतियाँ
1. भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव
- आयोगों द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं और भ्रष्टाचार के आरोप युवाओं में अविश्वास पैदा करते हैं।
- परिणामों में देरी, प्रश्नों का गलत चयन और चयन प्रक्रिया में अस्पष्टता मुख्य चिंताएँ हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. लोकतांत्रिक विरोध का दमन
- शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और बल प्रयोग नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
- यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्रित होने के अधिकार को कमजोर करता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान – मौलिक अधिकार
3. राज्य और केंद्र के बीच राजनीतिक खींचतान
- छात्र आंदोलन जैसे मुद्दों पर केंद्र और राज्य के राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से वास्तविक समस्याओं का समाधान बाधित होता है।
- यह समस्या के समाधान के बजाय राजनीतिक लाभ पर अधिक केंद्रित हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
4. युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और निराशा
- भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और अनियमितताओं से युवाओं में बेरोजगारी और भविष्य को लेकर निराशा बढ़ती है।
- यह सामाजिक अशांति और असंतोष को जन्म दे सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था – बेरोजगारी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जेपीएससी/जेएसएससी में कथित अनियमितताएं | परीक्षा प्रणाली में विश्वास की कमी, योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित। |
| पुलिस द्वारा लाठीचार्ज | लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का हनन, मानवाधिकारों का उल्लंघन। |
| अनशनकारी की बिगड़ती तबीयत | आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की चिंता, सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल। |
| सरकारी प्रतिक्रिया | संवाद की कमी, समस्याओं के समाधान के बजाय दमन का आरोप। |
| राजनीतिकरण | समस्या के मूल समाधान से भटकाव, राजनीतिक लाभ पर ध्यान। |
आगे की राह
- भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन किया जाए।
- परीक्षा आयोजित करने वाले आयोगों की कार्यप्रणाली में सुधार किया जाए और तकनीकी उन्नयन किया जाए ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम हो।
- शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान पुलिस बल के प्रयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाएं और उनका सख्ती से पालन किया जाए।
- राज्य सरकार को आंदोलनकारी छात्रों के साथ रचनात्मक संवाद स्थापित करना चाहिए और उनकी वैध मांगों पर विचार करना चाहिए।
- भर्ती कैलेंडर का सख्ती से पालन किया जाए और परिणामों की घोषणा में अनावश्यक देरी से बचा जाए।
- न्यायिक समीक्षा और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन किया जा सकता है जो भर्ती संबंधी विवादों का निपटारा करें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
छात्र आंदोलन · लोकतांत्रिक विरोध · राज्य सरकार की भूमिका · प्रतियोगी परीक्षा पारदर्शिता · पुलिस बल प्रयोग · संघवाद · न्यायिक समीक्षा · मूल अधिकार
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(b)’, ‘note’: ‘शांतिपूर्ण सम्मेलन का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 315’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग’}
अवधारणा प्रवाह
भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं → युवाओं में असंतोष और विरोध प्रदर्शन → पुलिस द्वारा बल प्रयोग और लाठीचार्ज → राजनीतिक दलों द्वारा मुद्दे का उठाया जाना → शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने के अधिकार की गारंटी देता है।
2. भारत में विरोध प्रदर्शन का अधिकार एक पूर्ण अधिकार है और इस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
3. राज्य सरकारें सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए विरोध प्रदर्शनों पर उचित प्रतिबंध लगा सकती हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 19(1)(a) भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित है, जबकि शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(b) में है। कथन 2 गलत है क्योंकि विरोध प्रदर्शन का अधिकार पूर्ण नहीं है और इस पर अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि सार्वजनिक व्यवस्था राज्य सूची का विषय है और राज्य सरकारें इस पर उचित प्रतिबंध लगा सकती हैं।
Q2. अभिकथन (A): भारत में, नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है।
कारण (R): भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) सभी नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है, जिस पर अनुच्छेद 19(3) के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि भारत में नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्ण एकत्र होने का अधिकार देता है, जिस पर अनुच्छेद 19(3) के तहत राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था आदि के हित में उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में राज्य सरकारों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के राज्य के दायित्व के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और छात्र आंदोलनों के संदर्भ में राज्य सरकारों की भूमिका का संक्षिप्त परिचय।
2. प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में राज्य सरकारों की भूमिका (समालोचनात्मक परीक्षण):
क. सकारात्मक भूमिका: भर्ती एजेंसियों का गठन (जैसे JPSC, JSSC), नियमों का निर्धारण, परीक्षा आयोजित करना, परिणाम घोषित करना।
ख. चुनौतियाँ/कमियाँ: पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, भ्रष्टाचार के आरोप, न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता।
ग. सुधार के उपाय: प्रौद्योगिकी का उपयोग, सख्त कानून (जैसे सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024), स्वतंत्र जाँच एजेंसियाँ, शिकायत निवारण तंत्र।
3. लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के राज्य के दायित्व के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौतियाँ:
क. विरोध प्रदर्शन का अधिकार: अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत मौलिक अधिकार, सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का संदर्भ (जैसे रामलीला मैदान घटना, शाहीन बाग मामला)।
ख. राज्य का दायित्व: सार्वजनिक व्यवस्था (राज्य सूची का विषय) बनाए रखना, कानून और व्यवस्था सुनिश्चित करना, हिंसा रोकना, संपत्ति की सुरक्षा।
ग. संतुलन की चुनौतियाँ: बल प्रयोग की सीमा, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और उपद्रवियों के बीच अंतर, पुलिस सुधार, संवाद और बातचीत का अभाव।
घ. न्यायिक समीक्षा की भूमिका: बल प्रयोग की वैधता की जाँच, मौलिक अधिकारों का संरक्षण।
4. निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों के सम्मान के साथ-साथ सार्वजनिक व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया गया हो।
स्रोत: amarujala.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments