मिशन मौसम: भारत को मौसम-सुरक्षित बनाने की केंद्र सरकार की पहल

मिशन मौसम — concept mind map

मिशन मौसम: भारत को मौसम-सुरक्षित बनाने की केंद्र सरकार की पहल

मिशन मौसम: भारत को मौसम-सुरक्षित बनाने की केंद्र सरकार की पहल — मिशन मौसम: कार्यान्वयन प्रक्रिया
आरेख: मिशन मौसम: कार्यान्वयन प्रक्रिया

✎ मिशन मौसम भारत को अत्याधुनिक मौसम निगरानी, पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से एक मौसम-तैयार और जलवायु-जागरूक राष्ट्र बनाने की एक महत्वाकांक्षी पहल है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भौतिक भूगोल, जलवायु विज्ञान)  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (मौसम विज्ञान, सुदूर संवेदन, सुपरकंप्यूटिंग), आपदा प्रबंधन (आपदा जोखिम न्यूनीकरण, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली)
  • Prelims: मिशन मौसम, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, डॉप्लर मौसम रडार, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC), प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, जलवायु लचीलापन
  • Essay: भारत में जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन: चुनौतियाँ और समाधान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति

त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन मौसम भारत को अत्याधुनिक मौसम निगरानी, पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से एक मौसम-तैयार और जलवायु-जागरूक राष्ट्र बनाने की एक महत्वाकांक्षी पहल है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत सरकार का पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ‘मिशन मौसम’ नामक एक व्यापक केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू कर रहा है। इस मिशन का उद्देश्य भारत को “मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति जागरूक राष्ट्र” बनाना है। 14 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए इस मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2024 में मंजूरी दी थी, जिसके लिए 2024-25 और 2025-26 के लिए ₹2,000 करोड़ का बजट आवंटित किया गया था। यह मिशन पृथ्वी प्रणाली अवलोकन और पूर्वानुमान प्रणालियों को मजबूत करने, उच्च प्रभाव वाली मौसम घटनाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी में सुधार करने और निर्बाध मौसम एवं जलवायु सेवाएं प्रदान करने पर केंद्रित है, जिससे जलवायु लचीलापन और आपदा तैयारी में वृद्धि हो सके।

पृष्ठभूमि

  • भारत एक विशाल भौगोलिक विविधता वाला देश है जो चक्रवात, भारी वर्षा, लू, सूखा और शहरी बाढ़ जैसी विभिन्न उच्च प्रभाव वाली मौसम संबंधी घटनाओं के प्रति संवेदनशील है।
  • इन घटनाओं के कारण जान-माल का भारी नुकसान होता है और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, विशेषकर कृषि, मत्स्य पालन और विमानन जैसे क्षेत्रों पर।
  • मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में सुधार आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन (Climate Change Adaptation) के लिए महत्वपूर्ण है।
  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय देश में मौसम विज्ञान, भूकंप विज्ञान, समुद्र विज्ञान और जलवायु विज्ञान से संबंधित अनुसंधान और सेवाओं के लिए नोडल मंत्रालय है।
  • भारत ने हाल के वर्षों में अपनी मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन अभी भी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और मॉडलों को अपनाने की आवश्यकता है।
  • वैश्विक स्तर पर, मौसम और जलवायु सेवाओं में सुधार के लिए उन्नत अवलोकन, मॉडलिंग और कंप्यूटिंग तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है।

मिशन मौसम क्या है?

  • मिशन मौसम पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की व्यापक योजना है जिसका उद्देश्य भारत को “मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति जागरूक राष्ट्र” बनाना है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी प्रणाली अवलोकन और पूर्वानुमान प्रणालियों को मजबूत करना, उच्च प्रभाव वाली मौसम घटनाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी में सुधार करना और निर्बाध मौसम एवं जलवायु सेवाएं प्रदान करना है।
  • मिशन के तहत अत्याधुनिक मौसम निगरानी प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों का विकास किया जाएगा, जिसमें अगली पीढ़ी के डॉप्लर मौसम रडार (Doppler Weather Radar), पवन प्रोफाइलर और उन्नत उपकरण पेलोड से लैस उपग्रहों की तैनाती शामिल है।
  • यह उन्नत उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (High-Performance Computing – HPC) प्रणालियों के कार्यान्वयन और मौसम एवं जलवायु प्रक्रियाओं की समझ बढ़ाने पर भी केंद्रित है।
  • मिशन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी डेटा-संचालित विधियों का उपयोग करके उन्नत पृथ्वी प्रणाली मॉडल विकसित किए जाएंगे।
  • इसका लक्ष्य प्रभावी मौसम प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकियों और प्रोटोकॉल का विकास करना, साथ ही अंतिम-मील कनेक्टिविटी के लिए अत्याधुनिक निर्णय समर्थन प्रणाली और प्रसार प्रणाली स्थापित करना है।
  • मिशन के प्रमुख हस्तक्षेपों में सतही, ऊपरी वायु, रडार, उपग्रह और समुद्री अवलोकन प्रणालियों का आधुनिकीकरण, उच्च-रिज़ॉल्यूशन संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल का उपयोग, और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमानों को मजबूत करना शामिल है।
  • यह कृषि, मत्स्य पालन और विमानन जैसे मौसम के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों को अधिक सटीक, समय पर और स्थान-विशिष्ट मौसम एवं जलवायु संबंधी जानकारी प्रदान करके लाभान्वित करेगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पृथ्वी प्रणाली अवलोकन और पूर्वानुमान प्रणालियों को सुदृढ़ करना उच्च प्रभाव वाली मौसम घटनाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी में सुधार और जलवायु लचीलापन बढ़ाना।
अत्याधुनिक मौसम निगरानी प्रौद्योगिकियों का विकास उच्च-रिज़ॉल्यूशन वायुमंडलीय अवलोकन, अगली पीढ़ी के डॉप्लर मौसम रडार और उन्नत उपग्रहों की तैनाती।
उन्नत उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) प्रणालियों का कार्यान्वयन मौसम और जलवायु प्रक्रियाओं की समझ बढ़ाना तथा पूर्वानुमान क्षमताओं में सुधार करना।
AI/ML और हाइब्रिड भौतिकी-AI तकनीकों का अनुप्रयोग मौसम पूर्वानुमान, पूर्वानुमान सुधार और स्थान-विशिष्ट मौसम संबंधी जानकारी के विकास में सटीकता बढ़ाना।
प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और निर्णय समर्थन प्रणालियाँ मौसम संबंधी जानकारी की समय पर और कार्रवाई योग्य प्रारंभिक चेतावनी तथा अंतिम छोर तक डिलीवरी सुनिश्चित करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • कृषि क्षेत्र में बेहतर मौसम और कृषि-मौसम विज्ञान संबंधी सलाह से फसल नियोजन, सिंचाई और कृषि-स्तर के निर्णयों में सहायता मिलेगी, जिससे मौसम संबंधी जोखिम कम होंगे।
  • मत्स्य पालन क्षेत्र में बेहतर समुद्री मौसम पूर्वानुमान और प्रतिकूल मौसम की प्रारंभिक चेतावनी सुरक्षित मछली पकड़ने के संचालन और तटीय आजीविका का समर्थन करेगी।

आपदा प्रबंधन

  • चक्रवात, भारी वर्षा, गरज के साथ तूफान, बिजली गिरने, लू और शहरी बाढ़ जैसी उच्च प्रभाव वाली मौसम संबंधी घटनाओं के लिए पूर्वानुमानों और चेतावनियों की सटीकता, स्थानिक संकल्प और अग्रिम समय में सुधार होगा।
  • यह आपदा तैयारियों को मजबूत करेगा और जान-माल के नुकसान को कम करने में सहायक होगा।

वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति

  • अत्याधुनिक निगरानी प्रौद्योगिकियों, उन्नत पृथ्वी प्रणाली मॉडल और AI/ML जैसी विधियों का विकास भारत को मौसम विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाएगा।
  • उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) का उपयोग डेटा विश्लेषण और मॉडलिंग क्षमताओं को बढ़ाएगा।

सामाजिक लाभ

  • अधिक सटीक और समय पर मौसम संबंधी जानकारी से आम जनता को दैनिक जीवन और व्यावसायिक गतिविधियों की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
  • यह ‘मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति जागरूक राष्ट्र’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

चुनौतियाँ

1. प्रौद्योगिकी का तीव्र विकास और एकीकरण

  • अत्याधुनिक मौसम निगरानी प्रौद्योगिकियों, जैसे अगली पीढ़ी के डॉप्लर मौसम रडार और उन्नत उपग्रहों को विकसित करना और उन्हें मौजूदा प्रणालियों के साथ एकीकृत करना एक जटिल कार्य है।
  • AI/ML और हाइब्रिड भौतिकी-AI तकनीकों को मौसम पूर्वानुमान मॉडल में प्रभावी ढंग से शामिल करने के लिए विशेषज्ञता और निरंतर अनुसंधान की आवश्यकता होगी।

2. डेटा प्रबंधन और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग

  • उच्च-रिज़ॉल्यूशन वायुमंडलीय अवलोकन और उन्नत रिमोट-सेंसिंग प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न होने वाले विशाल डेटा को संग्रहीत, संसाधित और विश्लेषण करने के लिए मजबूत डेटा प्रबंधन प्रणालियों और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) अवसंरचना की आवश्यकता है।
  • डेटा एसिमिलेशन तकनीकों को प्रभावी ढंग से लागू करना एक तकनीकी चुनौती है।

3. क्षमता निर्माण और मानव संसाधन

  • मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मौसम विज्ञान, कंप्यूटिंग, AI/ML और डेटा विज्ञान में कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होगी।
  • इन क्षेत्रों में क्षमता निर्माण और अनुसंधान सहयोग को मजबूत करना एक सतत चुनौती है।

4. अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और प्रसार

  • मौसम संबंधी जानकारी की समय पर और कार्रवाई योग्य प्रारंभिक चेतावनी को अंतिम छोर तक पहुंचाना, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
  • इसके लिए प्रभावी निर्णय समर्थन प्रणालियों और बहु-चैनल प्रसार प्लेटफार्मों की स्थापना की आवश्यकता होगी।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
तकनीकी एकीकरण विभिन्न अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को एक सुसंगत प्रणाली में एकीकृत करने की जटिलता।
डेटा अवसंरचना विशाल मात्रा में उत्पन्न डेटा के भंडारण, प्रसंस्करण और विश्लेषण के लिए पर्याप्त HPC और डेटा प्रबंधन क्षमता।
विशेषज्ञता की कमी मौसम विज्ञान, AI/ML और HPC में कुशल मानव संसाधनों की उपलब्धता और प्रशिक्षण।
अंतिम छोर तक पहुंच मौसम संबंधी चेतावनियों को दूरदराज के क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में चुनौतियाँ।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग वैश्विक मौसम निगरानी और मॉडलिंग प्रयासों के साथ तालमेल बिठाने की आवश्यकता।

आगे की राह

  • अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों जैसे डॉप्लर मौसम रडार, पवन प्रोफाइलर और उन्नत उपग्रहों की तैनाती में तेजी लाना।
  • उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) अवसंरचना को लगातार अपग्रेड करना और डेटा प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करना।
  • मौसम पूर्वानुमान और जलवायु मॉडलिंग में AI/ML और हाइब्रिड भौतिकी-AI तकनीकों के अनुप्रयोग का विस्तार करना।
  • मौसम विज्ञान, डेटा विज्ञान और AI/ML में विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने के लिए व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू करना।
  • प्रभाव-आधारित पूर्वानुमानों और बहु-चैनल प्रसार प्लेटफार्मों के माध्यम से अंतिम छोर तक प्रभावी चेतावनी प्रणाली सुनिश्चित करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान संगठनों और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ावा देना ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रौद्योगिकियों का आदान-प्रदान हो सके।
  • मौसम संबंधी जानकारी के उपयोग के लिए विभिन्न क्षेत्रों (कृषि, मत्स्य पालन, विमानन) के साथ समन्वय स्थापित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मिशन मौसम · पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय · मौसम पूर्वानुमान · जलवायु लचीलापन · आपदा तैयारी · उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग · कृषि-मौसम विज्ञान · प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली · रिमोट-सेंसिंग · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

अवधारणा प्रवाह

उन्नत अवलोकन प्रणालियों की तैनाती (रडार, उपग्रह)  →  उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा संग्रह और डेटा एसिमिलेशन  →  उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) और AI/ML आधारित मॉडलिंग  →  बेहतर सटीकता और अग्रिम समय के साथ मौसम पूर्वानुमान  →  प्रभाव-आधारित प्रारंभिक चेतावनी और निर्णय समर्थन प्रणाली  →  अंतिम छोर तक जानकारी का प्रसार और क्षमता निर्माण  →  जलवायु लचीलापन और आपदा तैयारियों में वृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. मिशन मौसम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका उद्देश्य भारत को “मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति जागरूक राष्ट्र” बनाना है।
2. यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
3. इसके प्रमुख हस्तक्षेपों में उच्च-रिज़ॉल्यूशन संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान और AI/ML तकनीकों का उपयोग शामिल है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन मौसम का मुख्य उद्देश्य भारत को “मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति जागरूक राष्ट्र” बनाना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की व्यापक योजना है। कथन 3 भी सही है क्योंकि मिशन के प्रमुख हस्तक्षेपों में उच्च-रिज़ॉल्यूशन संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान और AI/ML तकनीकों का उपयोग शामिल है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से मिशन मौसम का/के उद्देश्य है/हैं?
1. अत्याधुनिक मौसम निगरानी प्रौद्योगिकियों का विकास करना।
2. उच्च-रिज़ॉल्यूशन वायुमंडलीय अवलोकन को लागू करना।
3. प्रभावी मौसम प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकियों और प्रोटोकॉल का विकास करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए सभी उद्देश्य (अत्याधुनिक मौसम निगरानी प्रौद्योगिकियों का विकास, उच्च-रिज़ॉल्यूशन वायुमंडलीय अवलोकन को लागू करना, और प्रभावी मौसम प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकियों और प्रोटोकॉल का विकास करना) मिशन मौसम के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में मौसम पूर्वानुमान और आपदा तैयारी को मजबूत करने में ‘मिशन मौसम’ की भूमिका का परीक्षण कीजिए। यह कृषि, मत्स्य पालन और विमानन जैसे मौसम-संवेदनशील क्षेत्रों को कैसे लाभान्वित कर सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: मिशन मौसम का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में इसकी स्थिति।
2. भूमिका का परीक्षण: मौसम पूर्वानुमान और आपदा तैयारी को मजबूत करने में मिशन की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण। इसमें शामिल होंगे:
क. अवलोकन प्रणालियों का आधुनिकीकरण (रडार, उपग्रह, रिमोट-सेंसिंग)।
ख. उच्च-रिज़ॉल्यूशन संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान और युग्मित पृथ्वी प्रणाली मॉडल का उपयोग।
ग. AI/ML और हाइब्रिड भौतिकी-AI तकनीकों का अनुप्रयोग।
घ. उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) अवसंरचना का उपयोग।
ङ. प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और अंतिम छोर तक प्रारंभिक चेतावनी का प्रसार।
3. मौसम-संवेदनशील क्षेत्रों को लाभ: कृषि, मत्स्य पालन और विमानन जैसे क्षेत्रों पर मिशन के विशिष्ट प्रभावों की चर्चा:
क. कृषि: फसल नियोजन, सिंचाई, कृषि-मौसम विज्ञान संबंधी सलाह।
ख. मत्स्य पालन: समुद्री मौसम पूर्वानुमान, सुरक्षित मछली पकड़ने के संचालन।
ग. विमानन: कोहरे, गरज के साथ तूफान जैसी घटनाओं की प्रारंभिक चेतावनी।
4. निष्कर्ष: भारत के जलवायु लचीलेपन और समग्र आपदा प्रबंधन क्षमताओं पर मिशन के व्यापक सकारात्मक प्रभाव का सारांश।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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