15 Aug सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई को ओएसएम मूल्यांकन से प्रभावित छात्रों की सुरक्षा के निर्देश दिए
Supreme CourtAnswer scriptsOSM systemDigital grading✎ सर्वोच्च न्यायालय ने CBSE को ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा करने का निर्देश दिया है, जिससे मूल्यांकन प्रणाली में सुधार और नियमन की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- Prelims: सर्वोच्च न्यायालय, CBSE, ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM), केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, जनहित याचिका (PIL), मूल्यांकन प्रणाली, शैक्षणिक सुधार, न्यायिक समीक्षा
- Essay: भारत में शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता, डिजिटल इंडिया और शिक्षा क्षेत्र में इसके अनुप्रयोग
त्वरित पुनरावृत्ति: सर्वोच्च न्यायालय ने CBSE को ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा करने का निर्देश दिया है, जिससे मूल्यांकन प्रणाली में सुधार और नियमन की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा के लिए CBSE को निर्देश दिए हैं। यह मामला तब सामने आया जब हजारों छात्रों को इस नई मूल्यांकन प्रणाली के कारण अपने परिणामों में विसंगतियों का सामना करना पड़ा, जिससे उनके आगे के प्रवेश और शैक्षणिक भविष्य पर असर पड़ा। न्यायालय ने केंद्र सरकार और CBSE से इस प्रणाली के लिए नियम बनाने और सुधारों की निगरानी के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित करने की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई की।
पृष्ठभूमि
- CBSE ने अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली शुरू की थी।
- इस प्रणाली के तहत, शिक्षकों द्वारा भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियों का मूल्यांकन कंप्यूटर पर किया जाता है, बजाय इसके कि वे कागजी प्रतियों की जांच करें।
- कई छात्रों ने इस प्रणाली के तहत प्राप्त अंकों में विसंगतियों की शिकायत की, जिससे उनके प्रवेश परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में प्रवेश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
- कुछ छात्रों ने न्यूनतम आवश्यक अंक प्राप्त नहीं किए, जबकि कुछ पाठ्यक्रमों में पहले ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने छात्रों की ‘हताशा’ पर चिंता व्यक्त की और इस मामले में सॉलिसिटर जनरल की सहायता मांगी।
- सरकार ने प्रणालीगत मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा और आवश्यक प्रणालीगत परिवर्तनों की सिफारिश करने के लिए एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया है।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली क्या है?
- ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) एक डिजिटल मूल्यांकन पद्धति है जिसे CBSE द्वारा परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए अपनाया गया है।
- इस प्रणाली में, छात्रों द्वारा लिखी गई भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल प्रारूप में परिवर्तित किया जाता है।
- स्कैन की गई इन डिजिटल प्रतियों को फिर मूल्यांकन के लिए शिक्षकों को कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध कराया जाता है।
- शिक्षक भौतिक कागजों की जांच करने के बजाय इन डिजिटल प्रतियों पर अंक देते हैं और टिप्पणियाँ करते हैं।
- इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक कुशल, पारदर्शी और त्रुटि-मुक्त बनाना है, साथ ही लॉजिस्टिक्स और समय की बचत करना भी है।
- यह प्रणाली डेटा संग्रह और विश्लेषण को भी आसान बनाती है, जिससे मूल्यांकन पैटर्न और छात्र प्रदर्शन में अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है।
- हालांकि, इसके कार्यान्वयन में तकनीकी गड़बड़ियाँ, शिक्षकों के प्रशिक्षण की कमी और सॉफ्टवेयर संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं, जैसा कि वर्तमान मामले में देखा गया है।
- याचिका में केंद्र और CBSE को OSM मूल्यांकन प्रणाली के संचालन के लिए नियम बनाने और सुधारों की निगरानी के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली | यह उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की एक डिजिटल विधि है, जिसमें शिक्षक भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियों का कंप्यूटर पर मूल्यांकन करते हैं। |
| छात्रों के हित का संरक्षण | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने CBSE को OSM प्रणाली से प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा करने का निर्देश दिया है, विशेषकर उन छात्रों के लिए जिन्होंने प्रवेश परीक्षाओं में भाग लिया है। |
| नियमों का निर्माण | याचिका में केंद्र और CBSE को OSM प्रणाली के माध्यम से बोर्ड परीक्षाओं के संचालन के लिए नियम बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। |
| उच्चाधिकार प्राप्त समिति | सुधारों की निगरानी और कार्यान्वयन के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति (high-powered committee) के गठन की मांग की गई है। |
| न्यूनतम योग्यता अंकों में छूट | याचिका में उन छात्रों के लिए न्यूनतम योग्यता अंकों में छूट की मांग की गई है जिन्होंने अनंतिम प्रवेश प्राप्त कर लिया है या प्रवेश परीक्षाएं उत्तीर्ण कर ली हैं। |
महत्व
शैक्षिक महत्व
- यह मामला CBSE की मूल्यांकन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को उजागर करता है ताकि छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
- यह डिजिटल मूल्यांकन प्रणालियों को लागू करते समय उनकी विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर देता है।
प्रशासनिक महत्व
- सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप सरकारी निकायों (जैसे CBSE) को अपनी नीतियों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करता है।
- यह मूल्यांकन प्रणालियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढांचे की आवश्यकता को दर्शाता है।
न्यायिक महत्व
- यह मामला दर्शाता है कि न्यायपालिका किस प्रकार नागरिकों, विशेषकर छात्रों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाती है।
- यह न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के सिद्धांत का एक उदाहरण है, जहाँ न्यायालय सरकारी निर्णयों और नीतियों की वैधता तथा प्रभावशीलता की जांच करता है।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली का कार्यान्वयन
- नई OSM प्रणाली के कार्यान्वयन में तकनीकी खामियां और मानवीय त्रुटियां सामने आई हैं, जिससे छात्रों के अंकों में विसंगतियां उत्पन्न हुई हैं।
- शिक्षकों को नई प्रणाली के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान करने में चुनौतियां।
यूपीएससी लिंक: शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही
2. छात्रों का भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य
- गलत मूल्यांकन के कारण छात्रों को प्रवेश परीक्षाओं में अपेक्षित अंक न मिलना, जिससे उनके उच्च शिक्षा और करियर की संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- परिणामों में अनिश्चितता और देरी से छात्रों में निराशा और मानसिक तनाव उत्पन्न होता है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास, शिक्षा
3. नियामक और नीतिगत ढांचा
- OSM जैसी नई मूल्यांकन प्रणालियों के लिए स्पष्ट और व्यापक नियमों तथा दिशानिर्देशों का अभाव।
- सुधारों की निगरानी और कार्यान्वयन के लिए एक प्रभावी तंत्र की कमी।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
4. प्रणालीगत मुद्दे और जवाबदेही
- CBSE जैसी संस्थाओं में मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने में प्रणालीगत कमजोरियां।
- गलतियों के लिए जवाबदेही तय करने और सुधारात्मक कार्रवाई करने में देरी।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| OSM मूल्यांकन में त्रुटियां | हजारों छात्रों के अंकों में विसंगतियां, जिससे उनके प्रवेश और करियर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। |
| न्यूनतम योग्यता अंकों की समस्या | प्रभावित छात्रों को विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवश्यक न्यूनतम अंक प्राप्त न होना। |
| प्रवेश परीक्षाओं पर प्रभाव | CBSE अंकों के कारण प्रवेश परीक्षाओं में सफल होने के बावजूद प्रवेश न मिलना। |
| नियमों का अभाव | OSM प्रणाली के संचालन के लिए स्पष्ट और व्यापक नियामक ढांचे की कमी। |
| प्रणालीगत सुधार की आवश्यकता | मूल्यांकन प्रणाली में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति की मांग। |
आगे की राह
- CBSE को OSM प्रणाली की तकनीकी खामियों को दूर करने और मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
- शिक्षकों को डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के प्रभावी उपयोग के लिए व्यापक प्रशिक्षण और निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
- OSM प्रणाली के संचालन के लिए स्पष्ट और विस्तृत नियम तथा दिशानिर्देश तैयार किए जाने चाहिए, जिन्हें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाए।
- एक स्वतंत्र उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया जाना चाहिए जो मूल्यांकन प्रणाली में सुधारों की निगरानी करे और उनके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करे।
- प्रभावित छात्रों के लिए विशेष उपाय किए जाने चाहिए, जैसे कि न्यूनतम योग्यता अंकों में छूट या विशेष पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया, ताकि उनके शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
- CBSE को मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक तंत्र स्थापित करना चाहिए, जिसमें छात्रों की शिकायतों का त्वरित समाधान शामिल हो।
- भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए, नई प्रणालियों को लागू करने से पहले उनका पायलट परीक्षण (pilot testing) और व्यापक हितधारक परामर्श (stakeholder consultation) किया जाना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली · CBSE मूल्यांकन प्रणाली · न्यायिक समीक्षा · छात्र हित संरक्षण · शिक्षा सुधार · उच्चाधिकार प्राप्त समिति · प्रशासनिक पारदर्शिता · डिजिटल मूल्यांकन · शैक्षणिक मानक · न्यायिक सक्रियता
अवधारणा प्रवाह
CBSE द्वारा OSM मूल्यांकन प्रणाली का कार्यान्वयन → प्रणालीगत खामियों के कारण छात्रों के अंकों में विसंगतियां → छात्रों को उच्च शिक्षा में प्रवेश में कठिनाई → सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर → सर्वोच्च न्यायालय द्वारा CBSE को छात्रों के हित की रक्षा का निर्देश → मूल्यांकन प्रणाली में सुधार और नियमों के निर्माण की आवश्यकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में शिक्षक भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियों का मूल्यांकन कंप्यूटर पर करते हैं।
2. CBSE बोर्ड परीक्षाओं के लिए OSM प्रणाली को विनियमित करने हेतु केंद्र और CBSE को निर्देश देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने CBSE को OSM मूल्यांकन प्रणाली से प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि OSM एक डिजिटल मूल्यांकन विधि है जहाँ शिक्षक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कंप्यूटर पर करते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि याचिका में OSM प्रणाली के लिए नियम बनाने और एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित करने की मांग की गई है। कथन 3 सही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने CBSE को प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा के लिए कहा है।
Q2. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. CBSE भारत में स्कूली शिक्षा के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का बोर्ड है।
2. यह मुख्य रूप से निजी और सार्वजनिक स्कूलों के लिए परीक्षा आयोजित करता है।
3. CBSE भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि CBSE भारत में स्कूली शिक्षा के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय बोर्ड है। कथन 2 सही है क्योंकि यह संबद्ध स्कूलों के लिए बोर्ड परीक्षा आयोजित करता है। कथन 3 सही है क्योंकि CBSE शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्य करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ हाल ही में CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से संबंधित चुनौतियों के आलोक में, भारत में शिक्षा मूल्यांकन प्रणालियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधारों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और उससे उत्पन्न हालिया विवाद का संक्षिप्त परिचय। छात्रों पर इसके प्रभावों का उल्लेख।
2. OSM प्रणाली की कार्यप्रणाली: यह कैसे काम करती है (भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन) और इसके संभावित लाभ (दक्षता, मानकीकरण) तथा चुनौतियाँ (तकनीकी खराबी, मानवीय त्रुटि की संभावना, शिक्षकों का प्रशिक्षण) क्या हैं, इसका वर्णन।
3. मूल्यांकन प्रणालियों में पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्व: छात्रों के भविष्य, शैक्षणिक विश्वसनीयता और सार्वजनिक विश्वास के लिए इनकी आवश्यकता पर बल।
4. आवश्यक सुधार: निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करें:
क. तकनीकी बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण: मजबूत और त्रुटिहीन सॉफ्टवेयर, सर्वर क्षमता और साइबर सुरक्षा।
ख. शिक्षकों का व्यापक प्रशिक्षण: डिजिटल मूल्यांकन उपकरणों के उपयोग और मानकीकृत मूल्यांकन प्रोटोकॉल पर।
ग. दोहरी जाँच और गुणवत्ता नियंत्रण: मूल्यांकन प्रक्रिया में त्रुटियों को कम करने के लिए तंत्र।
घ. शिकायत निवारण तंत्र: छात्रों के लिए सुलभ, समयबद्ध और प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली।
ङ. नियामक ढाँचा: OSM जैसी नई मूल्यांकन प्रणालियों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और मानक।
च. उच्चाधिकार प्राप्त समिति: मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा और सुधारों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए।
छ. न्यायिक समीक्षा की भूमिका: छात्रों के अधिकारों की रक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका का उल्लेख।
5. निष्कर्ष: भारत में शिक्षा मूल्यांकन प्रणालियों को अधिक विश्वसनीय, निष्पक्ष और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments