अरुणाचल में भूस्खलन: चार मृत, पांच सैनिक लापता, एनडीआरएफ की तलाश जारी

Four dead, five Army personnel missing after landslide, flash flood in Arunachal — concept mind map

अरुणाचल में भूस्खलन: चार मृत, पांच सैनिक लापता, एनडीआरएफ की तलाश जारी

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Arunachal landslide & flood triggers

✎ भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ हिमालयी क्षेत्रों में भारी वर्षा और अस्थिर भूवैज्ञानिक स्थितियों के कारण होने वाली विनाशकारी प्राकृतिक आपदाएँ हैं, जिनके प्रभावी प्रबंधन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण आवश्यक है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारत एवं विश्व का भौतिक भूगोल)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन (आपदा और आपदा प्रबंधन)  |  GS Paper III — पर्यावरण (पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन)
  • Prelims: भूस्खलन, अचानक आई बाढ़, अरुणाचल प्रदेश, आपदा प्रबंधन, NDRF, आपदा जोखिम न्यूनीकरण
  • Essay: भारत में प्राकृतिक आपदाएँ: चुनौतियाँ और समाधान, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन में भारत की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ हिमालयी क्षेत्रों में भारी वर्षा और अस्थिर भूवैज्ञानिक स्थितियों के कारण होने वाली विनाशकारी प्राकृतिक आपदाएँ हैं, जिनके प्रभावी प्रबंधन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण आवश्यक है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन और दिबांग घाटी जिले में अचानक आई बाढ़ (Flash Flood) में चार लोगों की मृत्यु हो गई है। यह घटना केओजारिंग-ब्याचिंग सड़क कटिंग स्थल पर हुई, जिसने इस संवेदनशील क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को एक बार फिर उजागर किया है।

पृष्ठभूमि

  • अरुणाचल प्रदेश हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जो भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
  • राज्य में भारी वर्षा मानसून के मौसम में एक सामान्य घटना है, जो अक्सर मिट्टी के कटाव और ढलानों की अस्थिरता को बढ़ाती है।
  • सड़क निर्माण और अन्य विकासात्मक गतिविधियाँ, विशेष रूप से पहाड़ी ढलानों को काटकर, क्षेत्र की भूवैज्ञानिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।
  • ऊपरी सुबनसिरी और दिबांग घाटी जैसे जिले अपनी कठिन स्थलाकृति और दुर्गम क्षेत्रों के लिए जाने जाते हैं, जिससे बचाव और राहत कार्य चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) जैसी एजेंसियाँ ऐसी घटनाओं में खोज और बचाव अभियान चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा के पैटर्न में बदलाव और अत्यधिक मौसमी घटनाओं की आवृत्ति में वृद्धि देखी जा रही है, जिससे इन आपदाओं का जोखिम और बढ़ गया है।

भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ क्या हैं?

  • भूस्खलन (Landslide) चट्टान, मलबे या पृथ्वी के ढलान से नीचे की ओर खिसकने की घटना है, जो अक्सर भारी वर्षा, भूकंप या मानवीय गतिविधियों के कारण होता है।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में, भूस्खलन सड़कों, बस्तियों और कृषि भूमि को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे जान-माल का नुकसान होता है।
  • अचानक आई बाढ़ (Flash Flood) एक तीव्र और अत्यधिक स्थानीयकृत बाढ़ है जो बहुत कम समय में, आमतौर पर छह घंटे से भी कम समय में आती है।
  • यह अक्सर भारी वर्षा, बांध के टूटने या ग्लेशियर झील के फटने (GLOF) के कारण होता है, जिससे नदियों और नालों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ जाता है।
  • अचानक आई बाढ़ में पानी की गति और बल अत्यधिक विनाशकारी होता है, जो बड़े पैमाने पर कटाव और मलबे के प्रवाह का कारण बन सकता है।
  • इन आपदाओं का प्रबंधन करने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणालियों, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, वैज्ञानिक भू-उपयोग नियोजन और मजबूत बुनियादी ढाँचे के विकास की आवश्यकता होती है।
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) रणनीतियों में सामुदायिक जागरूकता, क्षमता निर्माण और प्रभावी निकासी योजनाएँ शामिल हैं।
  • भारत में आपदा प्रबंधन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के तहत संचालित होता है, जो आपदाओं की रोकथाम, शमन और प्रतिक्रिया के लिए नीतियाँ और दिशानिर्देश तैयार करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
भूस्खलन (Landslide) पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी, चट्टान या मलबे का अचानक नीचे खिसकना, जो अक्सर भारी वर्षा या भूकंप के कारण होता है। यह बुनियादी ढांचे और जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
अकस्मात बाढ़ (Flash Flood) अल्प समय में अत्यधिक वर्षा के कारण नदियों, नालों या निचले इलाकों में पानी का तेजी से बढ़ना। यह अचानक और विनाशकारी होती है।
अरुणाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति यह राज्य हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जहाँ की भूगर्भीय संरचना अस्थिर है और भारी वर्षा के प्रति संवेदनशील है, जिससे भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
सड़क निर्माण गतिविधियाँ पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए की जाने वाली कटिंग (ढलान काटना) मिट्टी की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है, जिससे भूस्खलन की संभावना बढ़ जाती है।
NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) यह भारत सरकार की एक विशेष इकाई है जो प्राकृतिक आपदाओं और मानव निर्मित आपदाओं के दौरान खोज और बचाव कार्यों में विशेषज्ञता रखती है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • अरुणाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्यों में भूस्खलन और अकस्मात बाढ़ जैसी घटनाएँ जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों और चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति में वृद्धि का संकेत देती हैं।
  • वनावरण का क्षरण और अनियोजित विकास गतिविधियाँ इन प्राकृतिक आपदाओं की गंभीरता को बढ़ा सकती हैं, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ता है।

सामाजिक-आर्थिक महत्व

  • प्राकृतिक आपदाओं के कारण जान-माल का नुकसान होता है, जिससे स्थानीय समुदायों पर गंभीर सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पड़ता है।
  • बुनियादी ढांचे, जैसे सड़कों और पुलों का विनाश, कनेक्टिविटी को बाधित करता है, जिससे राहत कार्यों में बाधा आती है और आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं।

सुरक्षा और रणनीतिक महत्व

  • अरुणाचल प्रदेश जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य कर्मियों का प्रभावित होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह इन क्षेत्रों में सैन्य आवाजाही और संचालन को प्रभावित कर सकता है।
  • आपदा प्रबंधन और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताएँ सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

शासन और नीतिगत महत्व

  • यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के विकास और प्रभावी आपदा प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।
  • स्थानीय प्रशासन, NDRF और सेना के बीच बेहतर समन्वय और पूर्व-चेतावनी प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण भविष्य की आपदाओं से निपटने के लिए आवश्यक है।

चुनौतियाँ

1. भूगर्भीय अस्थिरता

  • हिमालयी क्षेत्र की युवा और अस्थिर भूगर्भीय संरचना इसे भूस्खलन और भूकंप के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है।
  • मिट्टी का कटाव और ढलानों की प्राकृतिक स्थिरता में कमी इन घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ाती है।

2. जलवायु परिवर्तन और चरम मौसमी घटनाएँ

  • जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा पैटर्न में बदलाव आया है, जिससे अत्यधिक और केंद्रित वर्षा की घटनाएँ बढ़ी हैं, जो अकस्मात बाढ़ और भूस्खलन को ट्रिगर करती हैं।
  • तापमान वृद्धि से ग्लेशियरों का पिघलना भी नदियों में पानी के प्रवाह को प्रभावित कर सकता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।

3. बुनियादी ढांचा विकास का प्रभाव

  • पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, बांध और अन्य निर्माण परियोजनाओं के लिए की जाने वाली कटिंग और खुदाई अक्सर ढलानों को अस्थिर कर देती है।
  • अनियोजित या वैज्ञानिक रूप से कमजोर निर्माण तकनीकें भूस्खलन के जोखिम को बढ़ाती हैं।

4. आपदा प्रबंधन और प्रतिक्रिया में चुनौतियाँ

  • दूरस्थ और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को अंजाम देना चुनौतीपूर्ण होता है, खासकर खराब मौसम की स्थिति में।
  • पूर्व-चेतावनी प्रणालियों की कमी या उनकी प्रभावी क्रियान्वयन में बाधाएँ जान-माल के नुकसान को बढ़ा सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अत्यधिक वर्षा अकस्मात बाढ़ और भूस्खलन का मुख्य कारण, जिससे जान-माल का नुकसान होता है।
अस्थिर भूगर्भीय क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्य भूस्खलन के प्रति स्वाभाविक रूप से संवेदनशील हैं।
बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का प्रभाव सड़क निर्माण जैसी गतिविधियाँ ढलानों की स्थिरता को कमजोर कर सकती हैं।
दूरस्थ स्थान प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचने और बचाव अभियान चलाने में कठिनाई।
सैन्य कर्मियों की सुरक्षा सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सेना के लिए अतिरिक्त जोखिम, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (National Disaster Management Plan)
  • राष्ट्रीय भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण रणनीति (National Landslide Risk Reduction Strategy)

आगे की राह

  • पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे (Disaster Resilient Infrastructure) के निर्माण को प्राथमिकता देना, जिसमें वैज्ञानिक भू-तकनीकी सर्वेक्षण शामिल हों।
  • अत्यधिक वर्षा और भूस्खलन के लिए उन्नत पूर्व-चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) को स्थापित करना और उनका प्रभावी ढंग से उपयोग करना।
  • वनारोपण और ढलान स्थिरीकरण तकनीकों (Slope Stabilization Techniques) के माध्यम से मिट्टी के कटाव को रोकना और ढलानों को मजबूत करना।
  • आपदा प्रबंधन एजेंसियों (NDRF, SDRF) और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय और क्षमता निर्माण को बढ़ाना।
  • जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन (Climate Change Adaptation) रणनीतियों को लागू करना और चरम मौसमी घटनाओं के प्रभावों को कम करने के लिए उपाय करना।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के लिए सख्त पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) और भूगर्भीय स्थिरता अध्ययन अनिवार्य करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भूस्खलन · अकस्मात बाढ़ · आपदा प्रबंधन · पूर्वोत्तर भारत · जलवायु परिवर्तन · संवेदनशील क्षेत्र · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल · पहाड़ी क्षेत्र विकास · आधारभूत संरचना · पर्यावरणीय प्रभाव आकलन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}

अवधारणा प्रवाह

अत्यधिक वर्षा  →  भूस्खलन और अकस्मात बाढ़  →  जान-माल का नुकसान  →  बुनियादी ढांचे का विनाश  →  राहत और बचाव कार्य  →  आपदा प्रबंधन की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत किया गया था।
2. भूस्खलन और अकस्मात बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ हिमालयी क्षेत्र में आम हैं।
3. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। NDMA का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत किया गया था। कथन 2 सही है। हिमालयी क्षेत्र भूस्खलन, अकस्मात बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। कथन 3 सही है। NDRF गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।

Q2. अरुणाचल प्रदेश के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सी पर्वत श्रृंखलाएँ इसके भूभाग का हिस्सा हैं?

  1. पटकाई बूम
  2. मिशमी पहाड़ियाँ
  3. अबोर पहाड़ियाँ
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: उपरोक्त सभी — अरुणाचल प्रदेश में पटकाई बूम, मिशमी पहाड़ियाँ और अबोर पहाड़ियाँ सभी प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएँ हैं, जो राज्य की जटिल स्थलाकृति का निर्माण करती हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पूर्वोत्तर भारत में भूस्खलन और अकस्मात बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं के कारणों का परीक्षण कीजिए। इन आपदाओं के शमन और प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक संवेदनशीलता और हाल की घटनाओं का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **बढ़ती घटनाओं के कारण:**
* **भौगोलिक और भूवैज्ञानिक कारक:** अस्थिर भूभाग, युवा वलित पर्वत (हिमालय), उच्च भूकंपीय गतिविधि।
* **जलवायु परिवर्तन:** वर्षा के पैटर्न में बदलाव, अत्यधिक वर्षा की घटनाएँ, बादल फटना।
* **मानवीय गतिविधियाँ:** वनों की कटाई, अनियोजित शहरीकरण, सड़क निर्माण, जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण।
* **नदी प्रणालियाँ:** तीव्र ढलान वाली नदियाँ और उनकी कटाव क्षमता।
3. **सरकार द्वारा उठाए गए कदम:**
* **आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005:** राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन संरचना (NDMA, SDMA, DDMA)।
* **राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF):** खोज और बचाव अभियान, प्रशिक्षण।
* **प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली:** मौसम पूर्वानुमान, भूस्खलन निगरानी प्रणाली।
* **आधारभूत संरचना विकास:** आपदा प्रतिरोधी निर्माण तकनीकें, सड़क और पुलों का सुदृढ़ीकरण।
* **जागरूकता और क्षमता निर्माण:** स्थानीय समुदायों को प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल।
* **वनरोपण और मृदा संरक्षण:** भूस्खलन को रोकने के उपाय।
* **राष्ट्रीय भूस्खलन जोखिम शमन रणनीति:** भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों की पहचान और मानचित्रण।
4. **निष्कर्ष:** इन आपदाओं से निपटने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान, सामुदायिक भागीदारी और सतत विकास शामिल हो।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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