गुजरात में AI और ऑप्टिकल फाइबर: शेरों को रेल दुर्घटना से बचाने का अनूठा प्रयास

How Gujarat is using AI to save lions from railway accident — diagram

गुजरात में AI और ऑप्टिकल फाइबर: शेरों को रेल दुर्घटना से बचाने का अनूठा प्रयास

Map of Junagadh, Gir-Somnath, Amreli, Porbandar highlighted on the map of India — गुजरात AI शेर रेल दुर्घटना बचाव
मानचित्र व माइंड-मैप: गुजरात में एआई और तकनीक से शेरों की सुरक्षा

✎ गुजरात सरकार ने रेलवे ट्रैक पर एशियाई शेरों की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी और ऑप्टिकल फाइबर केबल सहित उन्नत प्रौद्योगिकियों का सफलतापूर्वक उपयोग किया है, जिससे शेरों की मौतों में उल्लेखनीय…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • Prelims: एशियाई शेर, गिर राष्ट्रीय उद्यान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऑप्टिकल फाइबर केबल, वन्यजीव संरक्षण, इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम (IDS), गुजरात उच्च न्यायालय, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
  • Essay: वन्यजीव संरक्षण में प्रौद्योगिकी की भूमिका, मानव-वन्यजीव संघर्ष और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: गुजरात सरकार ने रेलवे ट्रैक पर एशियाई शेरों की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी और ऑप्टिकल फाइबर केबल सहित उन्नत प्रौद्योगिकियों का सफलतापूर्वक उपयोग किया है, जिससे शेरों की मौतों में उल्लेखनीय कमी आई है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, गुजरात उच्च न्यायालय में प्रस्तुत एक हलफनामे के अनुसार, गुजरात सरकार ने रेलवे ट्रैक पर एशियाई शेरों की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी, CCTV कैमरे, ट्रेनों पर LED लाइटें लगाने और ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया है। इस पहल के परिणामस्वरूप अगस्त 2024 से मई 2026 की अवधि में ट्रेन से किसी भी शेर की मृत्यु नहीं हुई है, जबकि 2014 से 2024 के बीच 19 शेरों की मौत हुई थी। यह प्रयास उच्च न्यायालय द्वारा गठित एक उच्च-स्तरीय समिति की सिफारिशों का हिस्सा है।

पृष्ठभूमि

  • एशियाई शेर (Panthera leo persica) भारत में एक लुप्तप्राय प्रजाति है और यह केवल गुजरात के गिर वन और उसके आसपास के क्षेत्रों में पाया जाता है।
  • शेरों की बढ़ती आबादी और मानव बस्तियों एवं बुनियादी ढाँचे के विस्तार के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि हुई है।
  • रेलवे ट्रैक, विशेष रूप से सौराष्ट्र क्षेत्र में, शेरों के लिए एक बड़ा खतरा बन गए थे, जिससे कई शेरों की दुर्घटनाओं में मृत्यु हो गई थी।
  • गुजरात उच्च न्यायालय ने शेरों की मौतों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी और इन घटनाओं को रोकने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था।
  • पारंपरिक सुरक्षा उपायों के साथ-साथ, सरकार ने शेरों को रेलवे ट्रैक से दूर रखने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को अपनाया है।
  • इस पहल के तहत 6,682 शेरों को रेलवे ट्रैक से सफलतापूर्वक मोड़ा गया है।

एशियाई शेरों के संरक्षण में प्रौद्योगिकी का उपयोग क्या है?

  • इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम (IDS): यह एक व्यापक प्रणाली है जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी, CCTV कैमरे और ऑप्टिकल फाइबर केबल शामिल हैं।
  • ऑप्टिकल फाइबर केबल: ये केबल रेलवे ट्रैक के किनारे बिछाई गई हैं, जो शेरों की आवाजाही का पता लगाने के लिए कंपन और अन्य संकेतों का उपयोग करती हैं। ये विशेष रूप से अमरेली जिले के लिलिया-सावरकुंडला खंड में बिछाई गई हैं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी: AI प्रणाली ऑप्टिकल फाइबर केबलों और CCTV कैमरों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण करती है ताकि शेरों की उपस्थिति का शीघ्र पता लगाया जा सके और संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेजा जा सके।
  • ट्रेनों पर LED लाइटें: ट्रेनों पर लगाई गई LED लाइटें दूर से ही शेरों को ट्रैक से दूर रखने में मदद करती हैं और लोको-पायलटों को बेहतर दृश्यता प्रदान करती हैं।
  • वनस्पति हटाना और अंडरपास: रेलवे ट्रैक के किनारे 14.23 हेक्टेयर वनस्पति को साफ किया गया है ताकि शेरों की दृश्यता बढ़ाई जा सके। साथ ही, 14 रेलवे अंडरपासों को रेट्रोफिट करने और 13 नए अंडरपास प्रस्तावित करने का आकलन किया गया है।
  • रेलवे ट्रैकर्स और प्रशिक्षण: 70 रेलवे ट्रैकर्स को तैनात किया गया है जो शेरों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। इसके अतिरिक्त, लोको-पायलटों को वन्यजीवों के प्रति सावधानी बरतने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
  • गति प्रतिबंध और वॉचटावर: शेरों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में ट्रेनों की गति पर प्रतिबंध लगाया गया है और निगरानी के लिए वॉचटावर स्थापित किए गए हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) आधारित घुसपैठ पहचान प्रणाली (Intrusion Detection System – IDS) रेलवे ट्रैक के पास शेरों की आवाजाही का पता लगाने के लिए, विशेषकर सावरकुंडला और लिलिया क्षेत्रों में बिछाई गई है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आधारित निगरानी शेरों की गतिविधियों का विश्लेषण कर संभावित खतरों की पहचान करने और समय पर चेतावनी जारी करने में सहायक।
CCTV निगरानी रेलवे ट्रैक के आसपास के क्षेत्रों में शेरों की उपस्थिति पर वास्तविक समय (real-time) में नज़र रखने के लिए।
ट्रेनों में LED लाइटें लगाना रात के समय या कम रोशनी में लोको पायलटों को ट्रैक पर शेरों को दूर से देखने में मदद करना।
वनस्पतियों की कटाई और वॉच टावर ट्रैक के किनारे दृश्यता में सुधार करना और निगरानी को प्रभावी बनाना।
अंडरपास और गति प्रतिबंध शेरों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करना और ट्रेनों की गति को नियंत्रित कर दुर्घटनाओं की संभावना को कम करना।

महत्व

पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण

  • एशियाई शेरों (Asiatic Lions) की बढ़ती आबादी को रेलवे दुर्घटनाओं से बचाना, जिससे उनकी संख्या और पारिस्थितिक संतुलन बना रहे।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को कम करना और सह-अस्तित्व (co-existence) के मॉडल को बढ़ावा देना।

प्रशासनिक और न्यायिक प्रभाव

  • गुजरात उच्च न्यायालय (Gujarat High Court) के स्वत: संज्ञान (suo motu) जनहित याचिका (Public Interest Litigation) के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना।
  • उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee) द्वारा की गई सिफारिशों और कार्यान्वयन की निगरानी करना।

तकनीकी नवाचार और अनुप्रयोग

  • वन्यजीव संरक्षण में AI और ऑप्टिकल फाइबर जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग प्रदर्शित करना।
  • अन्य वन्यजीव गलियारों (wildlife corridors) में भी इसी तरह के समाधानों को लागू करने के लिए एक मॉडल स्थापित करना।

सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

  • स्थानीय समुदायों और रेलवे कर्मचारियों के बीच जागरूकता बढ़ाना और उन्हें संरक्षण प्रयासों में शामिल करना।
  • वन्यजीव पर्यटन (wildlife tourism) को बढ़ावा देना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाना।

चुनौतियाँ

1. बढ़ती आबादी और आवास का विस्तार

  • एशियाई शेरों की आबादी में वृद्धि और उनके पारंपरिक निवास स्थान (Gir landscape) से बाहर विस्तार के कारण मानव बस्तियों और बुनियादी ढाँचे (infrastructure) के साथ टकराव बढ़ रहा है।
  • नए क्षेत्रों में शेरों की आवाजाही को ट्रैक करना और उनके लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।

2. बुनियादी ढाँचे का विकास बनाम वन्यजीव संरक्षण

  • रेलवे लाइनों और अन्य परिवहन नेटवर्क का विस्तार वन्यजीव गलियारों को बाधित करता है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ता है।
  • विकास परियोजनाओं और संरक्षण लक्ष्यों के बीच संतुलन स्थापित करना एक जटिल कार्य है।

3. तकनीकी कार्यान्वयन और रखरखाव

  • AI-आधारित निगरानी प्रणालियों और ऑप्टिकल फाइबर केबलों की स्थापना और उनके निरंतर रखरखाव में उच्च लागत और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में इन प्रणालियों की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना।

4. मानव संसाधन और प्रशिक्षण

  • रेलवे ट्रैकर्स, लोको पायलटों और वन विभाग के कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण (capacity building) की आवश्यकता है।
  • प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए समन्वय स्थापित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
शेरों का आवास विस्तार पारंपरिक क्षेत्रों से बाहर निकलने पर नए जोखिमों का सामना करना।
रेलवे ट्रैक का घनत्व शेरों के आवागमन के मार्गों को बाधित करना और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ाना।
तकनीकी एकीकरण की लागत AI और OFC जैसी प्रणालियों की स्थापना और संचालन में वित्तीय भार।
कर्मचारियों का प्रशिक्षण नई तकनीकों और प्रोटोकॉल के साथ तालमेल बिठाने में चुनौतियाँ।
मौसम संबंधी बाधाएँ खराब मौसम में निगरानी प्रणालियों की कार्यक्षमता प्रभावित होना।
अवैध घुसपैठ/तोड़फोड़ संरक्षण उपकरणों को नुकसान पहुँचाने का जोखिम।

आगे की राह

  • वन्यजीव गलियारों (wildlife corridors) की पहचान कर उन्हें सुरक्षित और अबाधित बनाए रखना, जिसमें अंडरपास और ओवरपास का निर्माण शामिल हो।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करके वन्यजीवों की आवाजाही की भविष्यवाणी और निगरानी को और बेहतर बनाना।
  • रेलवे और वन विभाग के बीच समन्वय को मजबूत करना, संयुक्त गश्त (joint patrols) और सूचना साझाकरण तंत्र (information sharing mechanisms) को बढ़ावा देना।
  • स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में शामिल करना और उन्हें जागरूकता कार्यक्रमों तथा वैकल्पिक आजीविका के अवसरों के माध्यम से सशक्त बनाना।
  • वन्यजीवों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने हेतु रेलवे ट्रैक के किनारे बाड़ लगाने और अन्य भौतिक बाधाओं (physical barriers) पर विचार करना।
  • लोको पायलटों और ट्रैकर्स के लिए नियमित और उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, जिसमें वन्यजीव व्यवहार और आपातकालीन प्रतिक्रिया शामिल हो।
  • दीर्घकालिक संरक्षण रणनीतियों के हिस्से के रूप में शेरों के आवासों का वैज्ञानिक प्रबंधन (scientific management) और उनके विस्तार के लिए योजनाएँ बनाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

एशियाई शेर संरक्षण · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · वन्यजीव संरक्षण · मानव-वन्यजीव संघर्ष · रेलवे सुरक्षा · प्रौद्योगिकी का उपयोग · गिर राष्ट्रीय उद्यान · पर्यावरण संरक्षण · सतत विकास · उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

शेरों की बढ़ती आबादी और आवास का विस्तार  →  रेलवे ट्रैक के पास शेरों की आवाजाही में वृद्धि  →  रेलवे दुर्घटनाओं में शेरों की मृत्यु की घटनाएँ  →  गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा स्वत: संज्ञान जनहित याचिका  →  तकनीकी समाधानों (AI, OFC) और पारंपरिक उपायों का कार्यान्वयन  →  रेलवे दुर्घटनाओं में शेरों की मृत्यु में कमी

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एशियाई शेर (Asiatic Lion) वर्तमान में केवल गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान और उसके आसपास के क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
2. भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत एशियाई शेर अनुसूची I में सूचीबद्ध हैं।
3. गुजरात सरकार ने शेरों को रेलवे दुर्घटनाओं से बचाने के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल और AI-आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि एशियाई शेर का एकमात्र प्राकृतिक आवास गुजरात का गिर वन और उसके आसपास का क्षेत्र है। कथन 2 भी सही है, भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत एशियाई शेर को सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त है और यह अनुसूची I में सूचीबद्ध है। कथन 3 भी सही है, गुजरात सरकार ने AI-आधारित घुसपैठ पहचान प्रणाली (Intrusion Detection System) और ऑप्टिकल फाइबर केबल का उपयोग करके शेरों को रेलवे ट्रैक से दूर रखने के लिए कदम उठाए हैं।

Q2. अभिकथन (A): गुजरात में एशियाई शेरों को रेलवे दुर्घटनाओं से बचाने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को अपनाया गया है।
कारण (R): पिछले दशक में रेलवे ट्रैक पर शेरों की मृत्यु की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिससे संरक्षण प्रयासों पर दबाव पड़ा है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, जैसा कि लेख में बताया गया है कि गुजरात सरकार ने AI, CCTV और ऑप्टिकल फाइबर केबल जैसी तकनीकों का उपयोग किया है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि 2014 से 2024 के बीच 19 शेरों की रेलवे दुर्घटनाओं में मौत हुई थी, जिसने इन तकनीकी समाधानों को अपनाने की आवश्यकता को बल दिया। कारण (R) वास्तव में अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि बढ़ती दुर्घटनाओं ने ही इन समाधानों को अपनाने का कारण बनाया।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में प्रौद्योगिकी की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। गुजरात में एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए अपनाए गए उपायों के संदर्भ में इसके लाभों और चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की संक्षिप्त परिभाषा और इसके बढ़ते कारणों का उल्लेख करें। प्रौद्योगिकी को इस संघर्ष के समाधान के एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में प्रस्तुत करें।
2. प्रौद्योगिकी की भूमिका के लाभ: AI, CCTV, ऑप्टिकल फाइबर सेंसर, GPS ट्रैकिंग, अर्ली वार्निंग सिस्टम, बाड़ लगाना आदि जैसी तकनीकों का उल्लेख करें। इन तकनीकों से वन्यजीवों की निगरानी, उनके आवागमन का पता लगाने, दुर्घटनाओं को रोकने और मानव बस्तियों से दूर रखने में कैसे मदद मिलती है, इस पर प्रकाश डालें।
3. गुजरात में एशियाई शेरों के संरक्षण के संदर्भ में: लेख में उल्लिखित विशिष्ट उपायों (AI-आधारित निगरानी, ऑप्टिकल फाइबर केबल, LED लाइट, अंडरपास, वनस्पति हटाना, रेलवे ट्रैकर्स) का विस्तार से वर्णन करें। इन उपायों से प्राप्त सकारात्मक परिणामों (जैसे 2024-2026 में कोई शेर दुर्घटना नहीं) का उल्लेख करें।
4. चुनौतियाँ: प्रौद्योगिकी के उपयोग से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करें, जैसे कि उच्च लागत, तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता, रखरखाव, दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, वन्यजीवों का प्रौद्योगिकी के प्रति अनुकूलन, और मानव हस्तक्षेप की निरंतर आवश्यकता।
5. समालोचनात्मक परीक्षण: केवल प्रौद्योगिकी पर निर्भरता के बजाय, समुदाय की भागीदारी, पारंपरिक ज्ञान, पर्यावास सुधार और प्रभावी नीति निर्माण के साथ प्रौद्योगिकी के एकीकरण की आवश्यकता पर बल दें।
6. निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें कि कैसे प्रौद्योगिकी मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में एक शक्तिशाली उपकरण हो सकती है, लेकिन यह समग्र संरक्षण रणनीति का केवल एक हिस्सा है।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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