30 Aug पीएम मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा: द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा
✎ भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी व्यापार, निवेश, रक्षा और सांस्कृतिक संबंधों सहित विविध क्षेत्रों में गहरे सहयोग पर आधारित है, जो मध्य एशिया में भारत की विस्तारित पड़ोस नीति के लिए महत्वपूर्ण है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — अर्थव्यवस्था
- Prelims: भारत-उज़्बेकिस्तान संबंध, मध्य एशिया, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), रणनीतिक साझेदारी, वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट, शास्त्री मेमोरियल
- Essay: भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और मध्य एशियाई देशों के साथ संबंध, बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की विदेश नीति की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी व्यापार, निवेश, रक्षा और सांस्कृतिक संबंधों सहित विविध क्षेत्रों में गहरे सहयोग पर आधारित है, जो मध्य एशिया में भारत की विस्तारित पड़ोस नीति के लिए महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में उज़्बेकिस्तान का दो दिवसीय राजकीय दौरा किया, जहाँ उन्होंने राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। यह यात्रा दोनों देशों के बीच “रणनीतिक साझेदारी” को और गहरा करने तथा व्यापार, निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित थी। यह प्रधानमंत्री की उज़्बेकिस्तान की चौथी यात्रा थी, जो दोनों देशों के बढ़ते संबंधों को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि
- भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं, जिनमें रेशम मार्ग के माध्यम से व्यापार और लोगों से लोगों के बीच संपर्क शामिल है।
- दोनों देशों ने पिछले कई वर्षों से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर व्यापक और उपयोगी जुड़ाव बनाए रखा है।
- उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार है, जो क्षेत्र की भू-राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता में योगदान देता है।
- भारत की ‘विस्तारित पड़ोस’ नीति (Extended Neighbourhood Policy) में मध्य एशियाई देश महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
- उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने 2018 में भारत का राजकीय दौरा किया था और 2019 में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट (Vibrant Gujarat Global Summit) में भी भाग लिया था।
- भारत और उज़्बेकिस्तान दोनों शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य हैं, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है।
भारत-उज़्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी
- भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान सहित कई क्षेत्रों को कवर करती है।
- दोनों देश ‘विकसित भारत 2047’ और ‘उज़्बेकिस्तान-2030’ के साझा विकास दृष्टिकोणों को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
- व्यापार और निवेश सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और निवेश प्रोत्साहन उपायों पर काम कर रहे हैं।
- डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करना एक प्रमुख प्राथमिकता है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में सहयोग शामिल है।
- रक्षा सहयोग में संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण और रक्षा उपकरणों का आदान-प्रदान शामिल है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
- ऊर्जा क्षेत्र में, भारत उज़्बेकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान करने के अवसरों की तलाश कर रहा है, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में।
- सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए, प्रधानमंत्री मोदी ने ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी केंद्र का दौरा किया।
- दोनों देश क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी सहयोग करते हैं, विशेष रूप से आतंकवाद विरोधी प्रयासों और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उच्च-स्तरीय स्वागत | उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा हवाई अड्डे पर स्वयं प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत, दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता और बढ़ते संबंधों को दर्शाता है। |
| चौथी यात्रा | प्रधानमंत्री मोदी की उज़्बेकिस्तान की यह चौथी यात्रा भारत-उज़्बेकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों की गहराई और बढ़ती गति को रेखांकित करती है। |
| प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय वार्ता | व्यापार, निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने पर चर्चा। |
| सांस्कृतिक संबंध | शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र का दौरा, भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच घनिष्ठ सांस्कृतिक और जन-से-जन संबंधों को श्रद्धांजलि। |
| बहुपक्षीय मंच | शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भागीदारी, क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग में साझा हित को दर्शाती है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- व्यापार और निवेश को बढ़ावा: दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों की खोज से आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलेगी।
- डिजिटल कनेक्टिविटी: डिजिटल क्षेत्र में सहयोग से नवाचार और आर्थिक विकास के नए रास्ते खुल सकते हैं।
सामरिक महत्व
- मध्य एशिया में भारत की पहुंच: उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण है।
- रक्षा सहयोग: रक्षा क्षेत्र में सहयोग से क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और आतंकवाद जैसी साझा चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी।
सांस्कृतिक एवं जन-से-जन संबंध
- ऐतिहासिक संबंध: भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं, जो दोनों देशों के लोगों को जोड़ते हैं।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: सांस्कृतिक केंद्रों का दौरा और आदान-प्रदान कार्यक्रमों से लोगों के बीच समझ और सद्भावना बढ़ती है।
बहुपक्षीय कूटनीति
- SCO में भूमिका: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत और उज़्बेकिस्तान का सहयोग क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण को मजबूत करता है।
- क्षेत्रीय स्थिरता: मध्य एशिया में स्थिरता और विकास के लिए दोनों देशों का सहयोग महत्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. कनेक्टिविटी के मुद्दे
- मध्य एशिया तक सीधी पहुंच का अभाव: भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सीधी भूमि कनेक्टिविटी की कमी व्यापार और लोगों के आवागमन में बाधा डालती है।
- परिवहन बुनियादी ढांचा: क्षेत्रीय परिवहन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत की विदेश नीति
2. व्यापार असंतुलन
- व्यापार असंतुलन: दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन को बनाए रखना और विविधता लाना एक चुनौती हो सकती है।
- बाजार पहुंच: भारतीय उत्पादों के लिए उज़्बेकिस्तान के बाजार में पहुंच बढ़ाना।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
3. क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ
- आतंकवाद और कट्टरपंथ: मध्य एशिया में आतंकवाद और कट्टरपंथ की चुनौतियाँ दोनों देशों के लिए चिंता का विषय हैं।
- अफगानिस्तान की स्थिति: अफगानिस्तान में अस्थिरता का क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव।
यूपीएससी लिंक: सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भौगोलिक दूरी | भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सीधी भूमि कनेक्टिविटी की कमी व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रभावित करती है। |
| निवेश का माहौल | उज़्बेकिस्तान में भारतीय निवेश को आकर्षित करने के लिए व्यापार और निवेश के माहौल को और अनुकूल बनाना। |
| सुरक्षा सहयोग | क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, विशेषकर आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए प्रभावी सहयोग तंत्र विकसित करना। |
| सांस्कृतिक आदान-प्रदान | दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक समझ और आदान-प्रदान को और गहरा करने के लिए कार्यक्रमों को बढ़ावा देना। |
आगे की राह
- व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों को मजबूत करना।
- डिजिटल कनेक्टिविटी परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाना, जैसे ई-गवर्नेंस और आईटी क्षेत्र में साझेदारी।
- रक्षा सहयोग को गहरा करना, जिसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उपकरणों का आदान-प्रदान शामिल है।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना।
- मध्य एशिया में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) जैसी परियोजनाओं में सहयोग करना।
- क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, विशेषकर आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करना और संयुक्त रणनीति विकसित करना।
- ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के अवसरों की तलाश करना, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारत-उज़्बेकिस्तान संबंध · मध्य एशिया नीति · रणनीतिक साझेदारी · आर्थिक सहयोग · सांस्कृतिक संबंध · डिजिटल कनेक्टिविटी · रक्षा सहयोग · ऊर्जा सुरक्षा · शंघाई सहयोग संगठन (SCO) · बहुपक्षीय मंच
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना
अवधारणा प्रवाह
प्रधानमंत्री की उज़्बेकिस्तान यात्रा → द्विपक्षीय वार्ता और सहयोग के क्षेत्रों की पहचान → व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी में वृद्धि → सांस्कृतिक और जन-से-जन संबंधों का सुदृढ़ीकरण → क्षेत्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति देखी गई है।
2. शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक बहुपक्षीय मंच है जिसमें भारत और उज़्बेकिस्तान दोनों सदस्य हैं।
3. भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति मध्य एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी में वृद्धि हुई है और दोनों SCO के सदस्य हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति दक्षिण-पूर्व एशियाई और पूर्वी एशियाई देशों पर केंद्रित है, न कि मध्य एशिया पर। मध्य एशिया के लिए भारत की अलग नीति है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा देश शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का सदस्य नहीं है?
- भारत
- उज़्बेकिस्तान
- जापान
- कजाकिस्तान
उत्तर: जापान — जापान शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का सदस्य नहीं है। भारत, उज़्बेकिस्तान और कजाकिस्तान SCO के सदस्य हैं।
Q3. अभिकथन (A): भारत मध्य एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
कारण (R): मध्य एशिया भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
सही विकल्प चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — भारत मध्य एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, और यह ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए, कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति के संदर्भ में, भारत-उज़्बेकिस्तान संबंधों के महत्व का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस क्षेत्र में भारत के हितों को आगे बढ़ाने में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय मंचों की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति का संक्षिप्त परिचय दें और उज़्बेकिस्तान के साथ संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करें।
2. भारत-उज़्बेकिस्तान संबंधों का महत्व:
क. रणनीतिक महत्व: मध्य एशिया में भारत के भू-राजनीतिक हितों, आतंकवाद विरोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता में उज़्बेकिस्तान की भूमिका।
ख. आर्थिक महत्व: व्यापार, निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं। ‘विकसित भारत 2047’ और ‘उज़्बेकिस्तान-2030’ के साझा दृष्टिकोण का उल्लेख।
ग. सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के संबंध: महात्मा गांधी केंद्र और शास्त्री मेमोरियल जैसे सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख।
घ. रक्षा सहयोग: सैन्य अभ्यास और रक्षा प्रौद्योगिकी साझाकरण।
3. शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की भूमिका:
क. क्षेत्रीय सुरक्षा: आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने में SCO का महत्व।
ख. आर्थिक सहयोग: व्यापार और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को बढ़ावा देने में SCO की भूमिका।
ग. बहुपक्षीय कूटनीति: भारत और उज़्बेकिस्तान के लिए क्षेत्रीय मुद्दों पर समन्वय और संवाद का मंच।
घ. चुनौतियों और सीमाओं पर चर्चा: SCO के भीतर शक्ति संतुलन और भारत के हितों पर इसका प्रभाव।
4. निष्कर्ष: भारत-उज़्बेकिस्तान संबंधों को और गहरा करने तथा मध्य एशिया में भारत के रणनीतिक हितों को साधने में बहुपक्षीय मंचों के निरंतर महत्व पर बल दें।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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