01 Sep तमिलनाडु के 52 प्रमुख मंदिरों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लागू, कैमरा रहित फोन की अनुमति
✎ तमिलनाडु के मंदिरों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्रयास है, जिसका उद्देश्य पूजा स्थलों की पवित्रता और शांति बनाए रखना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय विरासत और संस्कृति, समाज | GS Paper II — भारतीय संविधान, राज्य व्यवस्था, सामाजिक न्याय
- Prelims: धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, अनुच्छेद 25, सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य, राज्य के नीति निदेशक तत्व, HR&CE विभाग, मंदिर प्रशासन
- Essay: धार्मिक स्वतंत्रता बनाम सार्वजनिक हित: एक संवैधानिक विश्लेषण, आधुनिक तकनीक और पारंपरिक आस्थाओं का संगम: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: तमिलनाडु के मंदिरों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्रयास है, जिसका उद्देश्य पूजा स्थलों की पवित्रता और शांति बनाए रखना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु में 1 सितंबर, 2026 से हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग द्वारा प्रबंधित 52 प्रमुख मंदिरों के परिसर में स्मार्टफोन के उपयोग पर प्रतिबंध लागू हो गया है। यह प्रतिबंध भक्तों द्वारा देवी-देवताओं और मूर्तियों की तस्वीरें लेने और वीडियो रिकॉर्ड करने की बढ़ती घटनाओं के जवाब में लगाया गया है, जिसका उद्देश्य मंदिरों में शांतिपूर्ण और पवित्र वातावरण सुनिश्चित करना है। सामान्य मोबाइल फोन (बिना कैमरे वाले) ले जाने की अनुमति दी गई है।
पृष्ठभूमि
- यह प्रतिबंध मौजूदा अदालती निर्देशों के आधार पर और भक्तों के लिए पूजा के लिए शांतिपूर्ण और शांत वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लगाया गया है।
- HR&CE विभाग ने प्रतिबंध को लागू करने के लिए इन मंदिरों के प्रवेश द्वार पर मोबाइल फोन जमा करने के लिए लॉकर सुविधाएँ स्थापित की हैं।
- भक्तों को 5 रुपये का शुल्क देकर अपने मोबाइल फोन जमा करने होंगे और उन्हें एक प्लास्टिक टोकन जारी किया जाएगा। टोकन प्रस्तुत करने और कर्मचारियों द्वारा मोबाइल नंबरों की जाँच के बाद फोन वापस कर दिए जाएंगे।
- पलानी, तिरुचेंदूर, मदुरै और रामेश्वरम जैसे मंदिरों में मोबाइल फोन पहले से ही प्रतिबंधित हैं।
- यह कदम धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने और भक्तों को बिना किसी व्यवधान के पूजा करने का अवसर प्रदान करने के लिए उठाया गया है।
- कुछ भक्तों ने इस नियम को असुविधाजनक बताया है, खासकर उन स्थानीय निवासियों के लिए जो प्रतिदिन मंदिर जाते हैं, जबकि मंदिर कर्मचारियों ने मोबाइल फोन की सुरक्षा की जिम्मेदारी को एक बड़ी चुनौती बताया है।
धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार और प्रतिबंध
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है।
- यह अधिकार पूर्ण नहीं है और सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर तथा संविधान के भाग III के अन्य प्रावधानों के अधीन राज्य द्वारा इस पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
- मंदिरों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से लगाया गया है, जो अनुच्छेद 25 के तहत अनुमेय प्रतिबंधों की श्रेणी में आ सकता है।
- राज्य को यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि धार्मिक प्रथाएँ सार्वजनिक शांति और व्यवस्था को भंग न करें।
- इस तरह के प्रतिबंधों का उद्देश्य भक्तों को बिना किसी बाहरी व्यवधान के अपनी आस्था का पालन करने के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करना है।
- यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार और राज्य द्वारा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की शक्ति के बीच संतुलन स्थापित करने का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
- HR&CE विभाग एक सरकारी निकाय है जो तमिलनाडु में हिंदू मंदिरों और धार्मिक संस्थानों का प्रशासन और रखरखाव करता है, यह सुनिश्चित करता है कि मंदिर सुचारू रूप से कार्य करें और उनकी संपत्ति का उचित प्रबंधन हो।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्मार्टफोन पर प्रतिबंध | तमिलनाडु के 52 प्रमुख मंदिरों में लागू, शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करने हेतु। |
| कैमरा रहित फोन की अनुमति | सामान्य मोबाइल फोन, जिनमें कैमरा नहीं है, उन्हें मंदिर परिसर में ले जाने की अनुमति है। |
| जमा काउंटर की व्यवस्था | श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रवेश द्वार पर मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा, ₹5 शुल्क के साथ। |
| न्यायालय के निर्देश | यह प्रतिबंध मौजूदा न्यायालय के निर्देशों के आधार पर लगाया गया है। |
| HR&CE विभाग का प्रबंधन | तमिलनाडु का हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग इन मंदिरों का प्रबंधन करता है। |
महत्व
सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व
- यह प्रतिबंध मंदिरों के भीतर एक शांत और पवित्र वातावरण बनाए रखने में सहायक होगा, जिससे श्रद्धालुओं को बिना किसी व्यवधान के पूजा-अर्चना करने का अवसर मिलेगा।
- देवी-देवताओं की मूर्तियों और विग्रहों की तस्वीरें लेने या वीडियो रिकॉर्ड करने की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगेगी, जिससे धार्मिक परंपराओं का सम्मान सुनिश्चित होगा।
प्रशासनिक महत्व
- यह कदम राज्य सरकार के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग की मंदिरों के प्रबंधन और उनकी पवित्रता बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करता है, जो सुशासन और विधि के शासन के सिद्धांतों के अनुरूप है।
सुरक्षा महत्व
- मंदिर परिसर में अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा बेहतर होगी।
- महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी यह सहायक हो सकता है।
चुनौतियाँ
1. श्रद्धालुओं के लिए असुविधा
- स्थानीय निवासियों और दैनिक दर्शनार्थियों के लिए प्रतिदिन ₹5 का शुल्क देना बोझिल हो सकता है।
- मोबाइल फोन आधुनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं, और उन्हें जमा करने की प्रक्रिया कुछ लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही
2. विभाग पर अतिरिक्त जिम्मेदारी
- HR&CE विभाग के कर्मचारियों पर लाखों महंगे मोबाइल फोन की सुरक्षित अभिरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।
- त्योहारों और विशेष अवसरों पर भारी भीड़ के दौरान फोन के गुम होने या बदलने का जोखिम बढ़ जाता है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियों का क्रियान्वयन
3. प्रौद्योगिकी और उपयोगिता
- आजकल स्मार्टफोन केवल कॉल करने का उपकरण नहीं हैं, बल्कि इनमें भुगतान, पहचान पत्र और आपातकालीन संपर्क जैसी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं होती हैं।
- कैमरा रहित फोन की अनुमति देना एक आंशिक समाधान है, क्योंकि अधिकांश लोग स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| दैनिक शुल्क | नियमित दर्शनार्थियों के लिए ₹5 का शुल्क आर्थिक बोझ बन सकता है। |
| सुरक्षा और जिम्मेदारी | मोबाइल फोन जमा करने वाले काउंटरों पर चोरी या क्षति का जोखिम, कर्मचारियों पर तनाव। |
| आधुनिक जीवनशैली | स्मार्टफोन के बिना दैनिक कार्यों (भुगतान, संचार) में बाधा। |
| क्रियान्वयन में जटिलता | भारी भीड़ के प्रबंधन और फोन वापसी की प्रक्रिया में लगने वाला समय। |
आगे की राह
- श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मोबाइल फोन जमा करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और स्वचालित किया जाना चाहिए।
- नियमित दर्शनार्थियों के लिए मासिक पास या रियायती शुल्क जैसी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
- कर्मचारियों को मोबाइल फोन की सुरक्षित अभिरक्षा और प्रबंधन के लिए उचित प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए।
- मंदिर परिसर के भीतर ‘नो-फोन जोन’ (No-Phone Zone) जैसे वैकल्पिक समाधानों पर विचार किया जा सकता है, जहां फोन स्विच ऑफ करके बैग में रखने की अनुमति हो।
- स्मार्टफोन के उपयोग के संबंध में जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए, जिसमें श्रद्धालुओं को मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के महत्व के बारे में शिक्षित किया जाए।
- तकनीकी समाधानों का पता लगाया जा सकता है, जैसे कि मंदिर के अंदर सीमित वाई-फाई (Wi-Fi) जोन प्रदान करना ताकि आपातकालीन संचार की आवश्यकता पूरी हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
धार्मिक स्वतंत्रता · अनुच्छेद 25 · राज्य का हस्तक्षेप · सार्वजनिक व्यवस्था · नैतिकता और स्वास्थ्य · मंदिर प्रशासन · मूलभूत धार्मिक प्रथाएँ · न्यायिक समीक्षा · संवैधानिक अधिकार · धर्मनिरपेक्षता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 25’, ‘note’: ‘धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 26’, ‘note’: ‘धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता’}
अवधारणा प्रवाह
मंदिरों में स्मार्टफोन का बढ़ता उपयोग → देवी-देवताओं की तस्वीरें/वीडियो रिकॉर्डिंग में वृद्धि → मंदिरों की पवित्रता और शांति भंग → न्यायालय के निर्देश और HR&CE विभाग का निर्णय → स्मार्टफोन पर प्रतिबंध और जमा काउंटर की स्थापना → शांतिपूर्ण और पवित्र वातावरण की बहाली
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है।
2. राज्य सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार पर प्रतिबंध लगा सकता है।
3. धार्मिक संस्थानों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाना अनुच्छेद 25 का पूर्ण उल्लंघन है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 25 यही अधिकार प्रदान करता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि ये अनुच्छेद 25 पर लगाए जा सकने वाले वैध प्रतिबंध हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि सार्वजनिक व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए ऐसे प्रतिबंधों को उचित ठहराया जा सकता है, और यह पूर्ण उल्लंघन नहीं है।
Q2. अभिकथन (A): तमिलनाडु के मंदिरों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य भक्तों के लिए शांतिपूर्ण और पवित्र वातावरण सुनिश्चित करना है।
कारण (R): भारतीय संविधान का अनुच्छेद 26 धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता प्रदान करता है, जिसमें धार्मिक संस्थानों को अपने आंतरिक मामलों को विनियमित करने का अधिकार शामिल है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि प्रतिबंध का घोषित उद्देश्य शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना है। कारण (R) भी सही है क्योंकि अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों को अपने मामलों का प्रबंधन करने की स्वतंत्रता देता है, और यह प्रतिबंध इसी अधिकार के तहत मंदिर प्रशासन द्वारा लिया गया एक निर्णय है। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता ही मंदिर प्रशासन को ऐसे नियम बनाने का अधिकार देती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक प्रावधानों के आलोक में, धार्मिक स्थलों पर मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के औचित्य का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या ऐसे प्रतिबंध धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 25 और 26) का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए प्रश्न का संदर्भ स्थापित करें।
2. प्रतिबंध का औचित्य: तमिलनाडु के मंदिरों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध के पीछे के कारणों (शांतिपूर्ण वातावरण, मूर्तियों की गोपनीयता, सुरक्षा, अव्यवस्था से बचाव) पर प्रकाश डालें।
3. संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 25 (अंतःकरण की स्वतंत्रता, धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता) का विस्तार से उल्लेख करें।
4. प्रतिबंधों की सीमाएँ: सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर धार्मिक स्वतंत्रता पर लगाए जा सकने वाले उचित प्रतिबंधों की व्याख्या करें।
5. समालोचनात्मक परीक्षण:
क. पक्ष में तर्क: मंदिर प्रशासन के अधिकार, भक्तों की शांति और ध्यान भंग न होने देने की आवश्यकता, सुरक्षा चिंताएँ, और धार्मिक प्रथाओं की पवित्रता बनाए रखने के महत्व पर बल दें।
ख. विपक्ष में तर्क: आधुनिक जीवन में मोबाइल फोन की आवश्यकता (संचार, डिजिटल भुगतान, आपात स्थिति), प्रतिबंध से भक्तों को होने वाली असुविधा, और क्या यह प्रतिबंध ‘सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य’ की कसौटी पर खरा उतरता है, इस पर विचार करें। यह भी देखें कि क्या यह ‘धर्म के आचरण’ के मूलभूत पहलू को बाधित करता है।
6. न्यायिक दृष्टिकोण: सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करें जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता और उस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच संतुलन स्थापित किया गया है (जैसे शबरीमाला मामला, जहाँ धार्मिक प्रथाओं की संवैधानिकता की जाँच की गई)।
7. निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें कि कैसे धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था/मंदिर की पवित्रता के बीच सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है, जिसमें प्रतिबंधों की आवश्यकता और उनके संभावित प्रभावों पर विचार हो।
स्रोत: The Hindu
Tamil Nadu PCS (TNPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: तमिलनाडु सरकार द्वारा मंदिरों में स्मार्टफोन प्रतिबंध के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A. मंदिरों में केवल कैमरा रहित फोन की अनुमति दी गई है
- B. मंदिरों में सभी प्रकार के मोबाइल फोन पूर्णतः प्रतिबंधित हैं
- C. मंदिरों में स्मार्टफोन के उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं है
- D. मंदिरों में केवल स्मार्टफोन के उपयोग की अनुमति है
उत्तर: A. मंदिरों में केवल कैमरा रहित फोन की अनुमति दी गई है — तमिलनाडु सरकार ने मंदिरों में स्मार्टफोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन कैमरा रहित फोन की अनुमति दी गई है।
Mains: तमिलनाडु सरकार द्वारा मंदिरों में स्मार्टफोन प्रतिबंध लागू करने के निर्णय के पीछे के प्रमुख कारणों एवं इसके सामाजिक-धार्मिक प्रभावों पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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