सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: न्यायिक सेवा में 3 साल प्रैक्टिस की शर्त हुई खत्म, जानिए क्या बदलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने 2027 तक न्यायिक सेवा में 3 साल की प्रैक्टिस शर्त हटाई, लॉ ग्रेजुएट्स को बड़ी राहत - Live Law Hindi — diagram

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: न्यायिक सेवा में 3 साल प्रैक्टिस की शर्त हुई खत्म, जानिए क्या बदलेगा

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✎ 2027 तक न्यायिक सेवा में 3 साल की प्रैक्टिस अनिवार्य नहीं, लॉ ग्रेजुएट्स के लिए बड़ा अवसर।

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प्रासंगिकता — UPSC & State PCS: Polity

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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए वर्ष 2027 तक न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए लॉ ग्रेजुएट्स से अनिवार्य तीन वर्ष की प्रैक्टिस की शर्त को समाप्त कर दिया है। यह निर्णय न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे लॉ ग्रेजुएट्स को तुरंत न्यायिक सेवा में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जिससे न्यायपालिका में रिक्त पदों की पूर्ति में तेजी आएगी। इस फैसले का उद्देश्य न्यायिक सेवा में युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना भी है, जिससे न्यायिक प्रणाली में नई ऊर्जा का संचार हो सके।

यह निर्णय विशेष रूप से उन अभ्यर्थियों के लिए राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से न्यायिक सेवाओं में शामिल होने के इच्छुक थे लेकिन तीन वर्ष की प्रैक्टिस की बाध्यता के कारण पीछे रह जाते थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस शर्त को हटाने का निर्णय देते हुए कहा कि यह आवश्यक नहीं है कि न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए लॉ ग्रेजुएट्स को पहले तीन वर्ष तक वकालत करनी ही चाहिए। इससे न केवल न्यायिक सेवा में प्रतिभाओं की कमी दूर होगी, बल्कि युवाओं को करियर के नए अवसर भी मिलेंगे।

इस फैसले का सीधा प्रभाव यूपीएससी और राज्य पीसीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों पर भी पड़ेगा। चूंकि न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए अब तीन वर्ष की प्रैक्टिस अनिवार्य नहीं रही, ऐसे में लॉ ग्रेजुएट्स के लिए न्यायिक सेवाओं में करियर बनाने के द्वार खुल गए हैं। इससे न्यायिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को नए सिरे से रणनीति बनाने का मौका मिलेगा। साथ ही, राज्य पीसीएस के अंतर्गत न्यायिक सेवा से संबंधित पदों पर नियुक्तियों में भी तेजी आने की संभावना है, जिससे राज्य स्तर पर न्यायिक व्यवस्था मजबूत होगी।

इस फैसले से न्यायिक सेवा में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ-साथ अभ्यर्थियों के मनोबल में भी वृद्धि होगी। यूपीएससी और राज्य पीसीएस के अभ्यर्थियों को चाहिए कि वे इस बदलाव को ध्यान में रख

स्रोत: news.google.com

अभ्यास प्रश्न

Q1. सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2027 तक न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए लागू की गई 3 साल की प्रैक्टिस शर्त को हटाने का मुख्य कारण क्या था?

  1. लॉ ग्रेजुएट्स की संख्या में कमी को दूर करना
  2. न्यायिक सेवा में तेजी से नियुक्तियों को बढ़ावा देना
  3. न्यायिक सेवा में विविधता लाना और प्रतिभाओं को आकर्षित करना
  4. राज्य सरकारों द्वारा लगाई गई आपत्ति
उत्तर

न्यायिक सेवा में विविधता लाना और प्रतिभाओं को आकर्षित करना — सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए 3 साल की प्रैक्टिस शर्त को हटाकर लॉ ग्रेजुएट्स को बड़ी राहत दी, ताकि न्यायिक सेवा में तेजी से नियुक्तियों को बढ़ावा मिल सके और प्रतिभाओं को आकर्षित किया जा सके।

Q2. न्यायिक सेवा में 3 साल की प्रैक्टिस शर्त को हटाने का निर्णय किस वर्ष तक लागू किया गया है?

  1. 2024
  2. 2025
  3. 2026
  4. 2027
उत्तर

2027 — सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा में 3 साल की प्रैक्टिस शर्त को हटाने का निर्णय 2027 तक लागू करने का आदेश दिया है।


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