03 Sep असम के विकास में केंद्र की भूमिका: विधानसभा अध्यक्ष और डॉ. जितेंद्र सिंह की बैठक
✎ पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है, जिसमें असम एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, विकास प्रक्रियाएँ और विकास उद्योग | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास
- Prelims: पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग
- Essay: भारत के विकास में पूर्वोत्तर क्षेत्र की भूमिका, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना
त्वरित पुनरावृत्ति: पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है, जिसमें असम एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
असम विधानसभा अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की, जिसमें असम के तेजी से हो रहे विकास और भारत की विकास यात्रा में उसकी बढ़ती भूमिका पर चर्चा हुई। इस बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी-संचालित विकास को बढ़ावा देने और विज्ञान, अंतरिक्ष एवं जैव प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने पर विशेष बल दिया गया।
पृष्ठभूमि
- पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) भारत के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों और मानव पूंजी की प्रचुरता है।
- ऐतिहासिक रूप से, इस क्षेत्र को भौगोलिक बाधाओं, कनेक्टिविटी के मुद्दों और कभी-कभी सुरक्षा चुनौतियों के कारण विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
- केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी है, जिसके लिए विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और सामाजिक-आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science and Technology) को पूर्वोत्तर क्षेत्र में नवाचार, आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और समावेशी विकास के एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक के रूप में देखा जाता है।
- असम पूर्वोत्तर क्षेत्र का सबसे बड़ा राज्य है और इस क्षेत्र के विकास में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है, जो अन्य राज्यों के लिए प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है।
- पिछले एक दशक में, असम में शांति, एकीकरण और तीव्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति देखी गई है, जिससे राज्य की छवि में सकारात्मक बदलाव आया है।
पूर्वोत्तर में प्रौद्योगिकी-संचालित विकास
- पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी-संचालित विकास का अर्थ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का उपयोग करके क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करना और अवसरों का लाभ उठाना है।
- इसमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अवसंरचना (Infrastructure) का विस्तार करना, अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) को बढ़ावा देना और स्टार्टअप तथा व्यवसाय विकास केंद्रों को प्रोत्साहित करना शामिल है।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) जैसे केंद्रीय विभाग विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से इस क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देते हैं।
- अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) और परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy) के तहत विभिन्न योजनाएं दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी (Geospatial Technology) का उपयोग करती हैं।
- भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग योजना, आपदा प्रबंधन (Disaster Management) और कृषि उत्पादकता (Agricultural Productivity) में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे लक्षित विकास संभव होता है।
- यह दृष्टिकोण युवाओं में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने और उन्हें प्रौद्योगिकी-आधारित करियर के लिए तैयार करने पर भी केंद्रित है।
- प्रौद्योगिकी-संचालित विकास से क्षेत्र में रोजगार सृजन, आय वृद्धि और जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है, जिससे यह भारत की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पूर्वोत्तर में प्रौद्योगिकी-संचालित विकास | असम में विज्ञान, अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना। |
| विज्ञान और प्रौद्योगिकी अवसंरचना का विस्तार | राज्य में वैज्ञानिक प्रगति के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना का निर्माण और सुदृढीकरण। |
| स्टार्टअप और व्यवसाय विकास केंद्रों को प्रोत्साहन | उद्यमिता को बढ़ावा देना, रोजगार सृजित करना और आर्थिक विकास को गति देना। |
| युवाओं में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना | भविष्य के लिए वैज्ञानिक प्रतिभा का पोषण करना और नवाचार की संस्कृति विकसित करना। |
| अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग की योजनाएँ | दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में विकास कार्यों, आपदा प्रबंधन और कृषि उत्पादकता के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग। |
| पिछले एक दशक में शांति और एकीकरण | राज्य को उग्रवाद और विरोध प्रदर्शनों से निकालकर विकास की मुख्यधारा में लाना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- प्रौद्योगिकी-संचालित विकास से नए उद्योगों का सृजन होगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
- स्टार्टअप और व्यवसाय विकास केंद्रों के माध्यम से उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- कृषि उत्पादकता में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग किसानों की आय में वृद्धि कर सकता है और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।
सामरिक महत्व
- पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के लिए महत्वपूर्ण है, जो क्षेत्रीय एकीकरण और सुरक्षा को मजबूत करता है।
- सीमावर्ती राज्य होने के नाते, असम में शांति और विकास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग आपदा प्रबंधन में सहायता कर सकता है, जो इस क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए महत्वपूर्ण है।
सामाजिक महत्व
- युवाओं में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने से समाज में प्रगतिशील दृष्टिकोण विकसित होगा।
- शांति और एकीकरण से सामाजिक सद्भाव बढ़ेगा और उग्रवाद जैसी समस्याओं का समाधान होगा।
- दूरस्थ क्षेत्रों में विकास कार्यों से समावेशी विकास सुनिश्चित होगा और क्षेत्रीय असमानताएं कम होंगी।
प्रशासनिक महत्व
- केंद्र और राज्य के बीच सहयोग से विकास परियोजनाओं का सुचारु क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के कार्यक्रमों का लाभ उठाकर शासन में दक्षता लाई जा सकती है।
- भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग योजना और निगरानी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बना सकता है।
चुनौतियाँ
1. बुनियादी ढाँचे का अभाव
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए आवश्यक उन्नत प्रयोगशालाएँ, अनुसंधान सुविधाएँ और डिजिटल कनेक्टिविटी अभी भी कई क्षेत्रों में अपर्याप्त हैं।
- दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग के लिए मजबूत भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, आर्थिक विकास
2. मानव संसाधन विकास
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों में कुशल कार्यबल की कमी एक चुनौती है।
- युवाओं में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, कौशल विकास
3. वित्तपोषण और निवेश
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान तथा स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों और निवेश की आवश्यकता है।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को आकर्षित करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, निजी निवेश
4. क्षेत्रीय असमानताएँ
- असम के भीतर भी विभिन्न क्षेत्रों में विकास और प्रौद्योगिकी तक पहुँच में असमानताएँ मौजूद हैं।
- यह सुनिश्चित करना कि विकास के लाभ सभी तक पहुँचें, एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: क्षेत्रीय विकास, समावेशी वृद्धि
5. आपदा प्रबंधन
- असम बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है, जिससे विकास परियोजनाओं में बाधा आ सकती है।
- आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन, पर्यावरणीय मुद्दे
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी कौशल की कमी | विज्ञान और प्रौद्योगिकी-आधारित उद्योगों के लिए आवश्यक कुशल कार्यबल का अभाव। |
| अनुसंधान एवं विकास में निवेश | राज्य में नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता। |
| भौगोलिक बाधाएँ | पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ। |
| डिजिटल विभाजन | ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल पहुँच और साक्षरता में अंतर। |
| संस्थागत क्षमता | विज्ञान और प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मजबूत संस्थागत तंत्र की आवश्यकता। |
| प्राकृतिक आपदाएँ | बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं का विकास परियोजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science & Technology – DST) के कार्यक्रम
- जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology – DBT) के कार्यक्रम
आगे की राह
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी अवसंरचना के विस्तार के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को बढ़ावा देना।
- युवाओं में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए STEM शिक्षा को मजबूत करना और कौशल विकास कार्यक्रमों को लागू करना।
- स्टार्टअप और व्यवसाय विकास केंद्रों के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाना, जिसमें वित्तीय सहायता और मेंटरशिप शामिल हो।
- अंतरिक्ष और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके आपदा प्रबंधन और कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए क्षमता निर्माण करना।
- पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विशिष्ट अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता देना, जो स्थानीय जरूरतों और चुनौतियों का समाधान करें।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को और मजबूत करना ताकि विकास परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
- डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना ताकि प्रौद्योगिकी के लाभ दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँच सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास · विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी · अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी · जैव प्रौद्योगिकी · भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी · आपदा प्रबंधन · कृषि उत्पादकता · स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र · शांति और एकीकरण · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्य सूची में विज्ञान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ द्वारा राज्यों को अनुदान’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ और राज्य के विधायी संबंध’}
अवधारणा प्रवाह
असम में शांति और स्थिरता की स्थापना → केंद्र सरकार द्वारा पूर्वोत्तर विकास पर विशेष ध्यान → विज्ञान, अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की क्षमता → विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अवसंरचना का विस्तार और स्टार्टअप को प्रोत्साहन → प्रौद्योगिकी-संचालित विकास और नवाचार को बढ़ावा → असम का तीव्र आर्थिक और सामाजिक विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
2. भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी (Geospatial Technology) का उपयोग योजना, आपदा प्रबंधन और कृषि उत्पादकता जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।
3. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) युवाओं में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम संचालित करते हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई भी नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। कथन 2 सही है। भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग विभिन्न विकास कार्यों में होता है, जिसमें योजना, आपदा प्रबंधन और कृषि उत्पादकता शामिल हैं। कथन 3 सही है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) युवाओं में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम और पहल करते हैं।
Q2. अभिकथन (A): पूर्वोत्तर भारत में प्रौद्योगिकी-संचालित विकास केंद्र सरकार की एक प्रमुख प्राथमिकता है।
कारण (R): यह क्षेत्र विज्ञान, अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर तीव्र विकास प्राप्त कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र में नवाचार और प्रौद्योगिकी आधारित विकास को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। कारण (R) भी सही है क्योंकि विज्ञान, अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, विशेषकर दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना ही पूर्वोत्तर में प्रौद्योगिकी-संचालित विकास की प्राथमिकता का मुख्य कारण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी आपदा प्रबंधन और कृषि उत्पादकता को कैसे बढ़ा सकती है, चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: पूर्वोत्तर क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का संक्षिप्त उल्लेख करें और विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (S&T) की आवश्यकता बताएं।
2. विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका: पूर्वोत्तर के विकास में S&T के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित करें:
क. नवाचार और उद्यमिता: स्टार्टअप और व्यवसाय विकास केंद्रों को बढ़ावा देना।
ख. वैज्ञानिक अनुसंधान: स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए अनुसंधान।
ग. अवसंरचना विकास: S&T आधारित अवसंरचना का विस्तार।
घ. मानव संसाधन विकास: युवाओं में वैज्ञानिक सोच और कौशल विकास।
ङ. शांति और एकीकरण: प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सामाजिक-आर्थिक एकीकरण।
3. भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का विशिष्ट अनुप्रयोग:
क. आपदा प्रबंधन: बाढ़, भूस्खलन जैसी आपदाओं की निगरानी, पूर्व चेतावनी प्रणाली, राहत कार्यों का समन्वय। उदाहरण: ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन में बाढ़ प्रबंधन।
ख. कृषि उत्पादकता: मृदा स्वास्थ्य मानचित्रण, फसल निगरानी, सिंचाई प्रबंधन, कीट नियंत्रण, सटीक कृषि (Precision Agriculture) के माध्यम से उपज में वृद्धि। उदाहरण: पहाड़ी क्षेत्रों में बागवानी और नकदी फसलों का विकास।
ग. योजना और शासन: दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की योजना, संसाधन मानचित्रण, सुशासन के लिए डेटा-आधारित निर्णय।
4. चुनौतियाँ और समाधान: S&T के उपयोग में आने वाली चुनौतियों (जैसे कनेक्टिविटी, कौशल की कमी) और उनके संभावित समाधानों पर संक्षिप्त चर्चा।
5. निष्कर्ष: पूर्वोत्तर के समग्र और समावेशी विकास के लिए S&T के महत्व को दोहराते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Assam PCS (APSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: असम विधानसभा अध्यक्ष ने हाल ही में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से किस विषय पर चर्चा की थी?
- A. असम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन पर
- B. असम में पर्यटन विकास और केंद्र सरकार की योजनाओं पर
- C. असम में राष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण प्रणाली (NRC) के अपडेट पर
- D. असम में खेल नीति और खेल अवसंरचना विकास पर
उत्तर: B. असम में पर्यटन विकास और केंद्र सरकार की योजनाओं पर — असम विधानसभा अध्यक्ष ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से असम में पर्यटन विकास और केंद्र सरकार की योजनाओं पर चर्चा की थी।
Mains: असम विधानसभा अध्यक्ष द्वारा केंद्रीय मंत्री से की गई बैठक के प्रमुख उद्देश्यों और असम के विकास में केंद्र सरकार की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, राज्य विधायिका और केंद्र सरकार के बीच समन्वय के महत्व पर चर्चा कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- AI से उत्पादकता बढ़ेगी या घटेगी? जानिए विशेषज्ञों की राय - September 3, 2026
- AI’s Productivity Paradox: Will Automation Boost or Reduce Output? - September 3, 2026
- असम के विकास में केंद्र की भूमिका: विधानसभा अध्यक्ष और डॉ. जितेंद्र सिंह की बैठक - September 3, 2026

No Comments