तमिलनाडु राज्य नियोजन आयोग को समाप्त करने की तैयारी में सरकार, क्या हैं कारण और विकल्प?

Tamil Nadu government mulling over abolition of State Planning Commission — diagram

तमिलनाडु राज्य नियोजन आयोग को समाप्त करने की तैयारी में सरकार, क्या हैं कारण और विकल्प?

तमिलनाडु राज्य नियोजन आयोग को समाप्त करने की तैयारी में सरकार, क्या हैं कारण और विकल्प? — तमिलनाडु राज्य योजना आयोग को समाप्त करने की प्रक्रिया
आरेख: तमिलनाडु राज्य योजना आयोग को समाप्त करने की प्रक्रिया

✎ राज्य योजना आयोग राज्य सरकार को विकास नीतियों और कार्यक्रमों के निर्माण में सलाह देने वाला एक शीर्ष सलाहकार निकाय है, जिसकी प्रासंगिकता और स्वरूप पर केंद्र में योजना आयोग के उन्मूलन के बाद से लगातार बहस चल रही है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, योजना, विकास
  • Prelims: राज्य योजना आयोग, नीति आयोग, राज्य विकास नीति परिषद, योजना आयोग, संघवाद, राजकोषीय संघवाद
  • Essay: भारत में योजनाबद्ध विकास का बदलता स्वरूप और राज्यों की भूमिका, सहकारी संघवाद के युग में राज्य स्तरीय संस्थाओं की प्रासंगिकता

त्वरित पुनरावृत्ति: राज्य योजना आयोग राज्य सरकार को विकास नीतियों और कार्यक्रमों के निर्माण में सलाह देने वाला एक शीर्ष सलाहकार निकाय है, जिसकी प्रासंगिकता और स्वरूप पर केंद्र में योजना आयोग के उन्मूलन के बाद से लगातार बहस चल रही है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

तमिलनाडु सरकार राज्य योजना आयोग (State Planning Commission) को समाप्त करने पर विचार कर रही है। यह कदम राज्य के नीति निर्माण और विकास योजना के दृष्टिकोण में संभावित बदलाव का संकेत देता है। पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा भी इस निकाय के स्वरूप और नाम में परिवर्तन किए गए हैं, जो इसकी भूमिका को लेकर चल रही बहस को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • तमिलनाडु राज्य योजना आयोग का गठन 55 वर्ष पूर्व, 1970 के दशक की शुरुआत में किया गया था, जब देश में योजनाबद्ध विकास का दौर चल रहा था।
  • इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के संसाधनों का आकलन करना और उनके प्रभावी तथा संतुलित उपयोग के लिए एक योजना तैयार करना था।
  • परंपरागत रूप से, राज्य के मुख्यमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं, जबकि मुख्य सचिव और वित्त सचिव पदेन सदस्य होते हैं।
  • 2017 में, AIADMK सरकार ने राज्य योजना आयोग को समाप्त कर राज्य विकास नीति परिषद (State Development Policy Council – SDPC) बनाने की घोषणा की थी।
  • वर्तमान सरकार का मानना है कि नीतिगत इनपुट प्रदान करने के लिए स्थायी विशेषज्ञ निकाय के बजाय विषय-विशिष्ट विशेषज्ञ समितियों का गठन अधिक प्रभावी हो सकता है।
  • केंद्र सरकार ने भी 2015 में योजना आयोग (Planning Commission) को समाप्त कर नीति आयोग (NITI Aayog) का गठन किया था, जिससे राज्यों में भी ऐसे निकायों की प्रासंगिकता पर बहस तेज हुई है।

राज्य योजना आयोग क्या है?

  • राज्य योजना आयोग एक सलाहकार निकाय है जो राज्य सरकार को समग्र विकास और वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए साक्ष्य-आधारित नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करता है।
  • यह राज्य के संसाधनों का आकलन करता है और उनके प्रभावी तथा संतुलित उपयोग के लिए योजनाएं तैयार करने में सहायता करता है।
  • यह राज्य के विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने में भी भूमिका निभाता है।
  • आयोग राज्य की विशिष्ट आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप विकास रणनीतियों को तैयार करने में मदद करता है।
  • इसकी संरचना में आमतौर पर मुख्यमंत्री (पदेन अध्यक्ष), उपाध्यक्ष, पूर्णकालिक सदस्य, पदेन सदस्य (जैसे मुख्य सचिव, वित्त सचिव) और एक सदस्य-सचिव शामिल होते हैं।
  • यह केंद्र सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों के साथ राज्य की विकास योजनाओं को संरेखित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • कई राज्यों में, केंद्रीय योजना आयोग के समाप्त होने के बाद, राज्य योजना आयोगों की भूमिका और कार्यप्रणाली में बदलाव आया है, कुछ ने नीति आयोग के मॉडल को अपनाया है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
राज्य योजना आयोग (State Planning Commission – SPC) राज्य के समग्र विकास के लिए साक्ष्य-आधारित नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करने वाला एक शीर्ष सलाहकार निकाय।
अध्यक्ष परंपरागत रूप से, मुख्यमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं।
सदस्य मुख्य सचिव और वित्त सचिव जैसे अधिकारी पदेन सदस्य होते हैं, साथ ही उपाध्यक्ष और पूर्णकालिक सदस्य भी होते हैं।
नीतिगत इनपुट सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत सलाह और इनपुट प्रदान करना इसका मुख्य कार्य है।
विशेषज्ञ समितियों का विचार राज्य सरकार विषय-विशिष्ट विशेषज्ञ समितियों के माध्यम से अधिक लाभ प्राप्त करने पर विचार कर रही है।

महत्व

शासन और नीति निर्माण

  • राज्य योजना आयोग का संभावित उन्मूलन राज्य में नीति निर्माण और विकास योजना के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।
  • यह स्थायी सलाहकार निकायों के बजाय विशिष्ट मुद्दों के लिए तदर्थ विशेषज्ञ समितियों पर अधिक निर्भरता की ओर बदलाव को दर्शाता है, जिससे नीति निर्माण में अधिक लचीलापन आ सकता है।
  • यह कदम राज्य के भीतर नीतिगत सलाह के लिए विभिन्न विभागों जैसे अर्थशास्त्र और सांख्यिकी विभाग (Department of Economics and Statistics – DoES) और मूल्यांकन और अनुप्रयुक्त अनुसंधान विभाग (Department of Evaluation and Applied Research – DEAR) की भूमिकाओं को पुनर्गठित या मजबूत कर सकता है।

राजकोषीय प्रबंधन

  • राजस्व बढ़ाने और राजकोषीय आत्मनिर्भरता में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य को मजबूत करने की सरकार की प्राथमिकता को उजागर करता है।
  • यह राज्य के अपने कर और गैर-कर राजस्व को बढ़ाने, राजस्व उछाल में सुधार करने और रिसाव को रोकने पर ध्यान केंद्रित करता है, जो दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

संघवाद और विकेंद्रीकरण

  • यह केंद्र में योजना आयोग के उन्मूलन के बाद राज्यों में भी इसी तरह के परिवर्तनों की प्रवृत्ति को दर्शाता है, जिससे राज्यों को अपनी विकास रणनीतियों को तैयार करने में अधिक स्वायत्तता मिलती है।
  • यह राज्य-विशिष्ट आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप नीतियों को तैयार करने के लिए स्थानीय विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ उठाने के महत्व पर जोर देता है।

चुनौतियाँ

1. नीतिगत निरंतरता का अभाव

  • स्थायी निकाय के अभाव में, नीतिगत सलाह में निरंतरता और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य की कमी हो सकती है।
  • बार-बार विशेषज्ञ समितियों के गठन से संस्थागत स्मृति और संचित ज्ञान का नुकसान हो सकता है।

2. समन्वय और सामंजस्य

  • विभिन्न विषय-विशिष्ट समितियों के बीच नीतियों और कार्यक्रमों में समन्वय स्थापित करना एक चुनौती हो सकता है, जिससे खंडित दृष्टिकोण हो सकता है।
  • समग्र विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत सामंजस्य सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है।

3. संस्थागत क्षमता

  • स्थायी विशेषज्ञ निकाय की अनुपस्थिति में, राज्य की संस्थागत क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर जब जटिल और बहु-क्षेत्रीय मुद्दों से निपटना हो।
  • नीतिगत सलाह के लिए बाहरी विशेषज्ञों पर अत्यधिक निर्भरता आंतरिक क्षमता निर्माण को बाधित कर सकती है।

4. जवाबदेही और पारदर्शिता

  • तदर्थ समितियों की सलाह और उनके कार्यान्वयन की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकता है, क्योंकि उनका कार्यकाल सीमित होता है।
  • नीतिगत निर्णयों के पीछे की प्रक्रिया और तर्क को समझना जनता के लिए कठिन हो सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
राज्य योजना आयोग का उन्मूलन दीर्घकालिक नीतिगत मार्गदर्शन और विकास योजना में निरंतरता की कमी।
तदर्थ विशेषज्ञ समितियों पर निर्भरता विभिन्न समितियों के बीच समन्वय की कमी और नीतिगत सामंजस्य का अभाव।
संस्थागत स्मृति का नुकसान राज्य के विकास के लिए संचित ज्ञान और अनुभव का अभाव।
नीतिगत सलाह की गुणवत्ता क्या तदर्थ समितियाँ स्थायी निकाय जितनी व्यापक और गहन सलाह प्रदान कर पाएंगी, यह एक प्रश्न है।
जवाबदेही सुनिश्चित करना सीमित कार्यकाल वाली समितियों द्वारा दी गई सलाह के लिए जवाबदेही तय करना।

आगे की राह

  • राज्य योजना आयोग के उन्मूलन के बाद भी, राज्य के समग्र विकास के लिए एक मजबूत नीतिगत मार्गदर्शन तंत्र सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
  • विषय-विशिष्ट विशेषज्ञ समितियों के गठन के साथ-साथ, एक केंद्रीय समन्वय इकाई स्थापित की जा सकती है जो विभिन्न समितियों की सिफारिशों को एकीकृत करे और नीतिगत सामंजस्य सुनिश्चित करे।
  • नीति निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए, विशेषज्ञ समितियों की रिपोर्टों और सिफारिशों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
  • अर्थशास्त्र और सांख्यिकी विभाग (DoES) और मूल्यांकन और अनुप्रयुक्त अनुसंधान विभाग (DEAR) जैसी मौजूदा संस्थाओं की क्षमता को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि वे नीतिगत सलाह में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।
  • नीतिगत निर्णयों के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे वांछित विकास लक्ष्यों को प्राप्त कर रहे हैं।
  • राज्य के विशिष्ट संदर्भ और आवश्यकताओं के अनुरूप एक नई विकास नीति परिषद (State Development Policy Council – SDPC) या इसी तरह के निकाय को मजबूत किया जा सकता है, जो दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करे।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राज्य योजना आयोग · नीति आयोग · सहकारी संघवाद · विकेन्द्रीकृत नियोजन · राजकोषीय संघवाद · आर्थिक नियोजन · राज्य विकास नीति परिषद · सलाहकारी निकाय · संस्थागत सुधार · नीति निर्माण

अवधारणा प्रवाह

राज्य योजना आयोग (SPC) के उन्मूलन पर विचार  →  स्थायी निकाय के बजाय विषय-विशिष्ट विशेषज्ञ समितियों का प्रस्ताव  →  नीतिगत इनपुट और मार्गदर्शन के लिए नया दृष्टिकोण  →  राजकोषीय सुधारों पर विशेषज्ञ समिति का गठन  →  राज्य के विकास और नीति निर्माण में संभावित बदलाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. राज्य योजना आयोग एक संवैधानिक निकाय है जो राज्यों के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ तैयार करता है।
2. भारत में नीति आयोग ने योजना आयोग का स्थान लिया, जिसका मुख्य कार्य सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना है।
3. राज्य योजना आयोग का अध्यक्ष आमतौर पर राज्य का मुख्यमंत्री होता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि राज्य योजना आयोग एक वैधानिक या कार्यकारी निकाय है, संवैधानिक नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि नीति आयोग ने योजना आयोग का स्थान लिया और सहकारी संघवाद पर जोर देता है। कथन 3 सही है क्योंकि राज्य योजना आयोग का अध्यक्ष आमतौर पर मुख्यमंत्री होता है।

Q2. अभिकथन (A): तमिलनाडु सरकार राज्य योजना आयोग को समाप्त करने पर विचार कर रही है।
कारण (R): सरकार का मानना है कि विषय-विशिष्ट विशेषज्ञ समितियाँ नीतिगत इनपुट प्रदान करने में अधिक प्रभावी हो सकती हैं।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि खबर के अनुसार तमिलनाडु सरकार राज्य योजना आयोग को समाप्त करने पर विचार कर रही है। कारण (R) भी सही है क्योंकि सरकार का तर्क है कि विषय-विशिष्ट विशेषज्ञ समितियाँ नीतिगत इनपुट प्रदान करने में अधिक लाभप्रद होंगी। कारण, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राज्य योजना आयोगों की भूमिका और प्रासंगिकता का समालोचनात्मक परीक्षण करें, विशेष रूप से नीति आयोग के गठन के बाद। क्या राज्यों के लिए ऐसे निकायों को समाप्त करना एक प्रगतिशील कदम है? अपने तर्कों को प्रस्तुत करें। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** राज्य योजना आयोगों (State Planning Commissions) की संक्षिप्त पृष्ठभूमि और उनके गठन का उद्देश्य (जैसे संसाधनों का आकलन, संतुलित उपयोग के लिए योजना निर्माण)।
2. **राज्य योजना आयोगों की भूमिका:**
* राज्य के संसाधनों का मूल्यांकन।
* पंचवर्षीय योजनाओं के लिए मसौदा तैयार करना (पूर्व-नीति आयोग युग में)।
* क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने के लिए नीतियां बनाना।
* केंद्र सरकार की योजनाओं के राज्य-विशिष्ट अनुकूलन पर सलाह देना।
* नीतिगत इनपुट और साक्ष्य-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करना।
3. **नीति आयोग के गठन के बाद प्रासंगिकता में परिवर्तन:**
* केंद्र में योजना आयोग के उन्मूलन और नीति आयोग (NITI Aayog) के ‘थिंक टैंक’ मॉडल के उदय का उल्लेख।
* सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और विकेन्द्रीकृत नियोजन (Decentralized Planning) पर जोर।
* राज्य योजना आयोगों की भूमिका का पुनर्मूल्यांकन।
4. **राज्य योजना आयोगों को समाप्त करने के पक्ष में तर्क (प्रगतिशील कदम):**
* विशेषज्ञ समितियों के माध्यम से अधिक लक्षित और लचीले नीतिगत इनपुट।
* स्थायी निकायों की तुलना में लागत-प्रभावशीलता।
* बदलते आर्थिक परिदृश्य और त्वरित नीतिगत प्रतिक्रियाओं की आवश्यकता।
* अन्य विभागों (जैसे अर्थशास्त्र और सांख्यिकी विभाग) द्वारा भी नीतिगत सलाह का प्रावधान।
5. **राज्य योजना आयोगों को समाप्त करने के विपक्ष में तर्क (संभावित चुनौतियाँ):**
* दीर्घकालिक नियोजन और समग्र विकास दृष्टिकोण का अभाव।
* संस्थागत स्मृति (Institutional Memory) का नुकसान।
* नीतिगत सामंजस्य (Policy Coherence) और निरंतरता पर प्रभाव।
* केंद्र-राज्य समन्वय में संभावित कमी।
* स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार नीतियों को अनुकूलित करने में कठिनाई।
6. **निष्कर्ष:** एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें कि क्या राज्य योजना आयोगों को समाप्त करना एक प्रगतिशील कदम है। वैकल्पिक मॉडल जैसे ‘राज्य विकास नीति परिषद’ (State Development Policy Council) या विशेषज्ञ-आधारित ‘थिंक टैंक’ की संभावनाओं पर विचार करें, जो नियोजन और नीति निर्माण में राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।

स्रोत: The Hindu

Tamil Nadu PCS (TNPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: तमिलनाडु सरकार द्वारा राज्य योजना आयोग को समाप्त करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इस संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राज्य योजना आयोग एक संवैधानिक निकाय है। 2. इसका मुख्य कार्य राज्य के पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण करना है। 3. इसकी स्थापना 1950 में हुई थी। 4. इसका अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. केवल 2 और 4
  2. केवल 1, 2 और 3
  3. केवल 2, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: केवल 2 और 4 — राज्य योजना आयोग एक गैर-संवैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना 1950 में हुई थी। इसका मुख्य कार्य राज्य की पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण करना है और इसका अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है।

Mains: तमिलनाडु सरकार द्वारा राज्य योजना आयोग को समाप्त करने के प्रस्तावित निर्णय के संदर्भ में, राज्य के विकास नियोजन में इसके महत्व और वैकल्पिक संस्थागत व्यवस्था के बारे में चर्चा कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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