गहरे समुद्र जीव वर्गीकरण: आईएसए के क्षमता विकास कार्यक्रम में 30 वैज्ञानिकों की भागीदारी

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सहयोग से समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र, — diagram

गहरे समुद्र जीव वर्गीकरण: आईएसए के क्षमता विकास कार्यक्रम में 30 वैज्ञानिकों की भागीदारी

गहरे समुद्र जीव वर्गीकरणCMLREकोच्चि केंद्रISAसंयुक्त राष्ट्र संगठनIORAहिंद महासागर सहयोगMABIKकोरिया संस्थानकार्यक्रम5 दिन, 7-11 सितंबर 2026प्रशिक्षणडीएनए बारकोडिंग, माइक्रोस्कोपी
गहरे समुद्र जीव वर्गीकरण

✎ यह क्षमता-विकास कार्यक्रम गहरे समुद्र में जैव विविधता के वैज्ञानिक अध्ययन, मानकीकृत पद्धतियों के विकास और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  |  GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध
  • Prelims: अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA), गहरे समुद्र में जीव वर्गीकरण, समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (CMLRE), सतत समुद्री तल ज्ञान पहल (SSKI), हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA), डीप ओशन मिशन, जैव विविधता ओपन एक्सेस डेटा प्रकाशन
  • Essay: सतत विकास के लिए समुद्री संसाधनों का महत्व, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: यह क्षमता-विकास कार्यक्रम गहरे समुद्र में जैव विविधता के वैज्ञानिक अध्ययन, मानकीकृत पद्धतियों के विकास और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (CMLRE), कोच्चि में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA) के सहयोग से ‘गहरे समुद्र में जीव वर्गीकरण: जैव विविधता आकलन की मानकीकृत पद्धतियां’ विषय पर पाँच दिवसीय क्षमता-विकास कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह पहल ISA की सतत समुद्री तल ज्ञान पहल (SSKI) के अंतर्गत आती है और गहरे समुद्र में जैव विविधता अनुसंधान तथा प्रबंधन में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।

पृष्ठभूमि

  • यह क्षमता-विकास कार्यक्रम 7 से 11 सितंबर 2026 तक समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (CMLRE), कोच्चि में आयोजित किया जा रहा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA) संयुक्त राष्ट्र का एक स्वायत्त संगठन है जो राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र की सीमाओं से परे गहरे समुद्र तल में खनिज-संबंधी गतिविधियों को नियंत्रित और विनियमित करता है।
  • यह कार्यक्रम CMLRE, ISA, हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) और कोरिया के राष्ट्रीय समुद्री जैव विविधता संस्थान (MABIK) के सहयोगात्मक प्रयासों का परिणाम है।
  • कार्यक्रम का उद्देश्य गहरे समुद्री तल के सुचारू पर्यावरणीय प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक ज्ञान और वर्गीकरण संबंधी विशेषज्ञता को सुदृढ़ करना है।
  • इसमें हिंद महासागर क्षेत्र के ISA सदस्य देशों (जैसे दक्षिण अफ्रीका, केन्या, बांग्लादेश, मॉरीशस, मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका, मोज़ाम्बिक, तंजानिया, थाईलैंड, ओमान और भारत) के लगभग 30 नवोदित अनुसंधानकर्ता और वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।
  • भारत की मेजबानी गहरे समुद्र में जैव विविधता अनुसंधान के क्षेत्र में उसके बढ़ते नेतृत्व और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

गहरे समुद्र में जैव विविधता और इसका महत्व

  • गहरा समुद्र पृथ्वी का सबसे बड़ा और सबसे कम खोजा गया पारिस्थितिकी तंत्र है, जो अद्वितीय और विविध जीव-जंतुओं का घर है।
  • इन गहरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों में पाए जाने वाले जीव-जंतु अत्यधिक दबाव, पूर्ण अंधकार और कम तापमान जैसी चरम स्थितियों के अनुकूल होते हैं।
  • गहरे समुद्र में जैव विविधता का अध्ययन पृथ्वी के जीवन के विकास, जलवायु विनियमन और संभावित जैव-औद्योगिक अनुप्रयोगों (जैसे नई दवाएं) को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • गहरे समुद्र में जीव वर्गीकरण (Taxonomy) विभिन्न प्रजातियों की पहचान करने, उनका नामकरण करने और उन्हें वर्गीकृत करने की प्रक्रिया है, जो जैव विविधता आकलन के लिए आधारभूत है।
  • मानकीकृत पद्धतियां (Standardized methodologies) यह सुनिश्चित करती हैं कि विभिन्न क्षेत्रों और शोधकर्ताओं द्वारा एकत्र किए गए डेटा की तुलना की जा सके और वह विश्वसनीय हो।
  • समुद्री तल खनन और अन्य मानवीय गतिविधियों से गहरे समुद्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्रों को खतरा है, जिससे उनके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक ज्ञान और प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता है।
  • जैव विविधता ओपन एक्सेस डेटा प्रकाशन (Biodiversity Open Access Data Publication) वैज्ञानिक डेटा को सार्वजनिक रूप से साझा करने की प्रक्रिया है, जो पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और नीति निर्धारण को बढ़ावा देती है।
  • भारत का ‘डीप ओशन मिशन’ गहरे समुद्र के संसाधनों का पता लगाने और उनके सतत उपयोग के लिए एक व्यापक पहल है, जिसमें समुद्री जैव विविधता अध्ययन एक महत्वपूर्ण घटक है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
क्षमता विकास कार्यक्रम गहरे समुद्र के वृहद जीव वर्गीकरण में विशेषज्ञता बढ़ाना
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA) का सहयोग राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से परे गहरे समुद्र तल के प्रबंधन में अंतर्राष्ट्रीय मानकों और सहयोग को बढ़ावा
बहु-संस्थागत सहयोग समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (CMLRE), ISA, हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) और कोरिया के राष्ट्रीय समुद्री जैव विविधता संस्थान (MABIK) के बीच ज्ञान साझाकरण और अनुसंधान को सुदृढ़ करना
क्षेत्रीय भागीदारी हिंद महासागर क्षेत्र के 13 सदस्य देशों के अनुसंधानकर्ताओं और वैज्ञानिकों की भागीदारी, क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा
व्यापक प्रशिक्षण मॉड्यूल विशेष व्याख्यान, क्षेत्र दौरा, प्रयोगशाला प्रशिक्षण, डीएनए बारकोडिंग और जैव विविधता डेटा विश्लेषण जैसे उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण शामिल

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • यह कार्यक्रम गहरे समुद्र में जैव विविधता के आकलन के लिए मानकीकृत पद्धतियों को विकसित करने में सहायक होगा, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और प्रबंधन में सुधार होगा।
  • गहरे समुद्र के वृहद जीवों के वर्गीकरण में विशेषज्ञता बढ़ने से अज्ञात प्रजातियों की पहचान और उनके पारिस्थितिकीय महत्व को समझने में मदद मिलेगी।

वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व

  • डीएनए बारकोडिंग और स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी जैसी उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण अनुसंधानकर्ताओं को आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करने में सक्षम बनाएगा।
  • जैव विविधता ओपन एक्सेस डेटा प्रकाशन पर कार्यशालाएं वैज्ञानिक डेटा को सार्वजनिक रूप से साझा करने और वैश्विक अनुसंधान प्रयासों में योगदान करने को प्रोत्साहित करेंगी।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं कूटनीतिक महत्व

  • ISA के सतत समुद्री तल ज्ञान पहल (SSKI) के तहत यह कार्यक्रम भारत को गहरे समुद्र में जैव विविधता अनुसंधान के क्षेत्र में एक अग्रणी भूमिका निभाने में मदद करेगा।
  • हिंद महासागर क्षेत्र के सदस्य देशों के बीच सहयोग से समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और प्रबंधन के लिए एक साझा दृष्टिकोण विकसित होगा।

क्षमता निर्माण

  • यह कार्यक्रम हिंद महासागर क्षेत्र के नवोदित अनुसंधानकर्ताओं और वैज्ञानिकों को गहरे समुद्र के वर्गीकरण और जैव विविधता आकलन में आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान करेगा।
  • प्रशिक्षित विशेषज्ञ गहरे समुद्र के पर्यावरणीय प्रबंधन और नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे।

चुनौतियाँ

1. गहरे समुद्र तक पहुँच और अन्वेषण की लागत

  • गहरे समुद्र का अन्वेषण अत्यधिक महंगा है और इसके लिए विशेष उपकरणों तथा प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है।
  • दूरस्थ और दुर्गम स्थानों तक पहुँचने में तकनीकी और तार्किक चुनौतियाँ आती हैं।

2. विशेषज्ञता और मानव संसाधन की कमी

  • गहरे समुद्र के वृहद जीवों के वर्गीकरण और अध्ययन के लिए विशिष्ट विशेषज्ञता वाले वैज्ञानिकों की कमी है।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों और क्षमता निर्माण पहलों की आवश्यकता है ताकि इस क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार किए जा सकें।

3. डेटा प्रबंधन और मानकीकरण

  • विभिन्न देशों और संस्थानों द्वारा एकत्र किए गए गहरे समुद्र के डेटा को एकीकृत और मानकीकृत करना एक चुनौती है।
  • डेटा साझाकरण और ओपन एक्सेस डेटा प्रकाशन के लिए एक सुदृढ़ तंत्र की आवश्यकता है।

4. अंतर्राष्ट्रीय समन्वय और विनियमन

  • राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से परे गहरे समुद्र तल में खनिज-संबंधी गतिविधियों को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA) जैसे संगठनों के साथ प्रभावी समन्वय आवश्यक है।
  • विभिन्न देशों के हितों और नीतियों के बीच संतुलन स्थापित करना एक जटिल कार्य है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
गहरे समुद्र का अन्वेषण उच्च लागत, तकनीकी जटिलता और दुर्गमता
वर्गीकरण विशेषज्ञता विशिष्ट कौशल वाले वैज्ञानिकों की कमी, प्रशिक्षण की आवश्यकता
डेटा एकीकरण विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डेटा का मानकीकरण और साझाकरण
अंतर्राष्ट्रीय विनियमन राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से परे गतिविधियों का प्रभावी प्रबंधन और समन्वय
पर्यावरणीय प्रभाव गहरे समुद्र में खनन और अन्य मानवीय गतिविधियों से पारिस्थितिकी तंत्र को संभावित खतरा

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • डीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission)

आगे की राह

  • गहरे समुद्र के अन्वेषण और अनुसंधान के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास और नवाचार को बढ़ावा देना।
  • समुद्री जैव विविधता के वर्गीकरण और अध्ययन में विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को निरंतर संचालित करना।
  • गहरे समुद्र के डेटा को एकत्र करने, विश्लेषण करने और साझा करने के लिए एक मानकीकृत और सुदृढ़ डेटा प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA) जैसे संगठनों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करना ताकि गहरे समुद्र के संसाधनों का सतत और न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित हो सके।
  • समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर मानवीय गतिविधियों के प्रभावों का आकलन करने और उनके शमन के लिए अनुसंधान को प्राथमिकता देना।
  • समुद्री जैव विविधता के महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना और नीति निर्माताओं को सूचित निर्णय लेने के लिए सशक्त करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का सहयोग  →  समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (CMLRE) में क्षमता विकास कार्यक्रम का आयोजन  →  गहरे समुद्र के वृहद जीव वर्गीकरण में अनुसंधानकर्ताओं का प्रशिक्षण  →  मानकीकृत पद्धतियों और उन्नत तकनीकों का उपयोग  →  समुद्री जैव विविधता आकलन और डेटा साझाकरण में वृद्धि  →  गहरे समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र का बेहतर प्रबंधन और संरक्षण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA) संयुक्त राष्ट्र का एक स्वायत्त संगठन है जो राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र की सीमाओं से परे गहरे समुद्र तल में खनिज-संबंधी गतिविधियों को नियंत्रित और विनियमित करता है।
2. समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (CMLRE) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
3. डीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission) का उद्देश्य समुद्री जैव विविधता का अध्ययन करना और गहरे समुद्र में संसाधनों का पता लगाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। ISA संयुक्त राष्ट्र का एक स्वायत्त संगठन है जो गहरे समुद्र तल में खनिज-संबंधी गतिविधियों को नियंत्रित करता है। कथन 2 सही है। CMLRE पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन है। कथन 3 सही है। डीप ओशन मिशन का एक प्रमुख घटक समुद्री जैव विविधता का अध्ययन और गहरे समुद्र के संसाधनों की खोज है।

Q2. अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह केवल हिंद महासागर क्षेत्र में खनिज-संबंधी गतिविधियों का विनियमन करता है।
2. इसका मुख्यालय जमैका में स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: केवल 2 — कथन 1 गलत है। ISA राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र की सीमाओं से परे गहरे समुद्र तल में खनिज-संबंधी गतिविधियों को नियंत्रित और विनियमित करता है, न कि केवल हिंद महासागर क्षेत्र में। कथन 2 सही है। ISA का मुख्यालय किंग्स्टन, जमैका में है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में गहरे समुद्र में जैव विविधता अनुसंधान के महत्व का परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, ‘डीप ओशन मिशन’ और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: गहरे समुद्र में जैव विविधता के महत्व और भारत के समुद्री हितों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. गहरे समुद्र में जैव विविधता अनुसंधान का महत्व:
क. पारिस्थितिक संतुलन: समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और जलवायु विनियमन में भूमिका।
ख. आर्थिक क्षमता: नए संसाधनों (जैसे खनिज, औषधीय यौगिक) की खोज।
ग. वैज्ञानिक ज्ञान: अज्ञात प्रजातियों और प्रक्रियाओं का अध्ययन, जीवन की उत्पत्ति पर अंतर्दृष्टि।
घ. पर्यावरणीय प्रबंधन: गहरे समुद्र खनन और अन्य गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन।
ङ. सामरिक महत्व: समुद्री सीमाओं और संसाधनों पर नियंत्रण।
3. ‘डीप ओशन मिशन’ की भूमिका:
क. लक्ष्य और उद्देश्य: मिशन के प्रमुख घटकों का उल्लेख (जैसे गहरे समुद्र खनन, समुद्री जैव विविधता अध्ययन, महासागर जलवायु परिवर्तन सलाहकार सेवाएं)।
ख. उपलब्धियाँ/संभावित योगदान: भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाना, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।
ग. संबंधित संस्थान: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, NIOT, CMLRE की भूमिका।
4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका:
क. ज्ञान और प्रौद्योगिकी साझाकरण: अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA), हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) जैसे संगठनों के साथ सहयोग।
ख. क्षमता निर्माण: वर्तमान कार्यक्रम जैसे ‘गहरे समुद्र में जीव वर्गीकरण’ का उदाहरण।
ग. मानकीकृत पद्धतियाँ: वैश्विक स्तर पर डेटा संग्रह और विश्लेषण में एकरूपता।
घ. साझा चुनौतियाँ: समुद्री प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर वैश्विक प्रतिक्रिया।
5. निष्कर्ष: भारत के बढ़ते समुद्री नेतृत्व और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में गहरे समुद्र अनुसंधान के महत्व पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सहयोग से केरल में स्थापित ‘अंतर्राष्ट्रीय गहरे समुद्र के जैव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. A. गहरे समुद्र में खनिज अन्वेषण को बढ़ावा देना
  2. B. गहरे समुद्र के जैव संसाधनों का संरक्षण एवं सतत उपयोग सुनिश्चित करना
  3. C. तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन को नियंत्रित करना
  4. D. समुद्री प्रदूषण पर वैश्विक समझौते तैयार करना

उत्तर: B. गहरे समुद्र के जैव संसाधनों का संरक्षण एवं सतत उपयोग सुनिश्चित करना — अंतर्राष्ट्रीय गहरे समुद्र के जैव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र का मुख्य उद्देश्य गहरे समुद्र के जैव संसाधनों का संरक्षण एवं उनके सतत उपयोग को सुनिश्चित करना है।

Mains: अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सहयोग से केरल में स्थापित ‘अंतर्राष्ट्रीय गहरे समुद्र के जैव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र’ के स्थापना के पीछे के प्रमुख कारणों एवं इसके संभावित प्रभावों पर प्रकाश डालिए। (150 शब्द)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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