केरल में बुजुर्ग महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राज्य महिला आयोग की चिंता

Kerala State Women’s Commission raises concerns on safety of elderly women — diagram

केरल में बुजुर्ग महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राज्य महिला आयोग की चिंता

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Elderly Women Safety Layers

✎ वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण के लिए संविधान के अनुच्छेद 15(3) और घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय समाज  |  GS Paper II — शासन व्यवस्था एवं सामाजिक न्याय  |  GS Paper IV — नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति
  • Prelims: वृद्ध महिलाओं का सामाजिक संरक्षण, घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, संविधान का अनुच्छेद 15(3), राष्ट्रीय महिला आयोग, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ
  • Essay: वृद्धावस्था में सुरक्षा एवं सम्मान : समाज की जिम्मेदारी, सामाजिक मूल्यों का ह्रास : पारिवारिक विघटन के परिणाम

त्वरित पुनरावृत्ति: वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण के लिए संविधान के अनुच्छेद 15(3) और घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केरल राज्य महिला आयोग द्वारा वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण से संबंधित चिंताओं को उठाया जाना इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करता है। आयोग की अध्यक्षा पी. सतीदेवी ने बताया कि संपत्ति बंटवारे के बाद परिवारों द्वारा वृद्ध महिलाओं को त्याग दिए जाने की घटनाएँ बढ़ रही हैं। इसके अतिरिक्त, साइबर अपराधों एवं अकेले रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा संबंधी चिंताएँ भी उभर कर आई हैं। यह मामला समाज में वृद्ध महिलाओं की स्थिति एवं उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए व्यापक नीति हस्तक्षेप की आवश्यकता को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में वृद्ध जनसंख्या का आकार निरंतर बढ़ रहा है।
  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2021-2030 को ‘स्वस्थ वार्धक्य का दशक’ घोषित किया गया है, जिसमें वृद्ध व्यक्तियों के अधिकारों एवं कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
  • भारत में वृद्ध महिलाओं के प्रति होने वाले भेदभाव एवं उत्पीड़न के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • संविधान के अनुच्छेद 15(3) में महिलाओं एवं बच्चों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनके अंतर्गत राज्य को उनके संरक्षण के लिए विशेष कानून बनाने का अधिकार दिया गया है।
  • घरेलू हिंसा अधिनियम (Protection of Women from Domestic Violence Act) महिलाओं को घरेलू हिंसा से सुरक्षा प्रदान करता है, किंतु इसके प्रभावी क्रियान्वयन में अनेक चुनौतियाँ विद्यमान हैं।
  • केरल राज्य महिला आयोग द्वारा उठाए गए मुद्दे राष्ट्रीय महिला आयोग एवं राज्य महिला आयोगों के माध्यम से वृद्ध महिलाओं के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का एक हिस्सा हैं।

वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण : प्रमुख पहलू

  • वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा से तात्पर्य उनके शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक अधिकारों की रक्षा से है, ताकि वे गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।
  • सामाजिक संरक्षण के अंतर्गत वृद्ध महिलाओं को परिवार एवं समाज से मिलने वाले सहयोग, स्वास्थ्य सेवाएँ, कानूनी सुरक्षा एवं आर्थिक संसाधनों तक पहुँच सुनिश्चित करना शामिल है।
  • केरल राज्य महिला आयोग द्वारा उठाई गई चिंताओं में संपत्ति बंटवारे के बाद परिवारों द्वारा वृद्ध महिलाओं को त्याग दिए जाने की घटनाएँ प्रमुख हैं, जो उनकी आर्थिक स्वतंत्रता एवं सामाजिक स्थिति को प्रभावित करती हैं।
  • साइबर अपराधों में वृद्धि, विशेषकर महिलाओं के प्रति, उनके डिजिटल अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति एक नई चुनौती बन गई है।
  • घरेलू हिंसा अधिनियम महिलाओं को घरेलू हिंसा से सुरक्षा प्रदान करता है, किंतु इसके प्रभावी क्रियान्वयन में पुलिस एवं न्यायिक प्रणाली की भूमिका महत्वपूर्ण है।
  • वृद्ध महिलाओं के संरक्षण के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, जैसे राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (NOAPS) एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS), का विस्तार एवं सुधार आवश्यक है।
  • वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने, कानूनी साक्षरता एवं परिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा सामाजिक सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण।
पारिवारिक विवाद वृद्ध महिलाओं के परित्याग और अलगाव का एक प्रमुख कारण।
संपत्ति के हिस्से के बाद परित्याग महिलाओं के वित्तीय अधिकारों के दुरुपयोग और सामाजिक असुरक्षा को दर्शाता है।
सामाजिक अलगाव वृद्धावस्था में भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
साइबर हमले और अकेले रहने वाली महिलाओं की सुरक्षा डिजिटल युग में नई सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करता है।
घरेलू हिंसा और कानून प्रवर्तन कानूनी प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधाओं को दर्शाता है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह मुद्दा वृद्ध महिलाओं के मानवाधिकारों और गरिमा से जुड़ा है, जो एक सभ्य समाज के लिए आवश्यक है।
  • परिवारों में मूल्यों के क्षरण और अंतर-पीढ़ीगत संबंधों में गिरावट को दर्शाता है, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • महिलाओं के सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के व्यापक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • राज्य महिला आयोगों की भूमिका को रेखांकित करता है, जो महिलाओं से संबंधित मुद्दों को उठाने और उनके समाधान के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • मौजूदा कानूनों जैसे घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (Protection of Women from Domestic Violence Act) के प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियों को उजागर करता है, जिससे नीतिगत सुधारों की आवश्यकता महसूस होती है।
  • वृद्ध व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों की समीक्षा और सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर बल देता है।

नैतिक और मानवीय महत्व

  • यह समाज में कमजोर वर्गों, विशेषकर वृद्ध महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और देखभाल की आवश्यकता को दर्शाता है।
  • पारिवारिक जिम्मेदारियों और नैतिक मूल्यों के महत्व को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
  • वृद्धावस्था में व्यक्तियों को सम्मान, प्रेम और देखभाल प्रदान करने के मानवीय कर्तव्य को याद दिलाता है।

चुनौतियाँ

1. वृद्ध महिलाओं का परित्याग और अलगाव

  • संपत्ति के हिस्से के बाद परिवारों द्वारा वृद्ध महिलाओं को छोड़ देना एक गंभीर सामाजिक समस्या है।
  • वृद्धावस्था में प्रेम और देखभाल की आवश्यकता के समय सामाजिक अलगाव का सामना करना पड़ता है।

2. सामाजिक सुरक्षा का अभाव

  • आर्थिक रूप से सुरक्षित महिलाओं को भी वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा की कमी का सामना करना पड़ता है।
  • अकेले रहने वाली महिलाओं के लिए गंभीर सुरक्षा चिंताएँ।

3. घरेलू हिंसा और कानून प्रवर्तन में चुनौतियाँ

  • पुरुषों द्वारा शराब और नशीले पदार्थों के उपयोग के कारण परिवारों के भीतर सुरक्षा खतरों में वृद्धि।
  • घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत अदालती आदेशों के कार्यान्वयन में कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा शिकायतों को ‘पारिवारिक मुद्दे’ के रूप में खारिज करना।

4. बढ़ते साइबर हमले

  • महिलाओं को लक्षित करने वाले साइबर हमलों में वृद्धि, विशेषकर अकेले रहने वाली वृद्ध महिलाओं के लिए खतरा।

5. पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों का क्षरण

  • माता-पिता के लगातार संघर्ष वाले घरों में पल रहे बच्चों में पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों का ह्रास।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वृद्ध महिलाओं का परित्याग संपत्ति प्राप्त करने के बाद परिवारों द्वारा छोड़ दिया जाना।
सामाजिक अलगाव वृद्धावस्था में प्रेम और देखभाल की आवश्यकता के समय अकेलापन।
सामाजिक सुरक्षा की कमी आर्थिक रूप से सुरक्षित महिलाओं के लिए भी सुरक्षा का अभाव।
घरेलू हिंसा शराब/नशीले पदार्थों के उपयोग से परिवार के भीतर सुरक्षा खतरे।
कानून प्रवर्तन में बाधाएँ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायतों को ‘पारिवारिक मुद्दे’ के रूप में खारिज करना।
साइबर हमले महिलाओं, विशेषकर अकेले रहने वाली महिलाओं को लक्षित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007)

आगे की राह

  • माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
  • वृद्ध महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत किया जाए, जिसमें वित्तीय सहायता, स्वास्थ्य सेवाएँ और भावनात्मक समर्थन शामिल हो।
  • कानून प्रवर्तन एजेंसियों को घरेलू हिंसा से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लेने और अदालती आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संवेदनशील बनाया जाए।
  • साइबर सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए और वृद्ध महिलाओं को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँ।
  • पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा और जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, ताकि अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को सुधारा जा सके।
  • राज्य महिला आयोगों और अन्य संबंधित संस्थाओं की क्षमता को बढ़ाया जाए ताकि वे वृद्ध महिलाओं से संबंधित शिकायतों का त्वरित और प्रभावी ढंग से समाधान कर सकें।
  • वृद्ध महिलाओं के लिए आश्रय गृहों और हेल्पलाइन सेवाओं का विस्तार किया जाए, विशेषकर उन लोगों के लिए जिन्हें परित्याग का सामना करना पड़ता है।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा · पारिवारिक परित्याग · घरेलू हिंसा · सामाजिक सुरक्षा · महिला आयोग · मातृत्व, पितृत्व और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम · साइबर हमले · अंतर-पीढ़ीगत संघर्ष · न्यायिक समीक्षा · लैंगिक न्याय · कल्याणकारी राज्य

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(e)’, ‘note’: ‘नागरिकों के स्वास्थ्य और शक्ति की सुरक्षा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘कुछ मामलों में काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देना’}

अवधारणा प्रवाह

परिवारों द्वारा संपत्ति के बाद वृद्ध महिलाओं का परित्याग  →  वृद्ध महिलाओं का सामाजिक अलगाव और असुरक्षा  →  घरेलू हिंसा और कानून प्रवर्तन में चुनौतियाँ  →  सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का अपर्याप्त कार्यान्वयन  →  वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा पर नकारात्मक प्रभाव  →  समाज में मूल्यों का क्षरण और सामाजिक ताने-बाने पर दबाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत का संविधान ‘महिला आयोग’ की स्थापना का प्रावधान करता है।
2. राष्ट्रीय महिला आयोग एक सांविधिक निकाय है।
3. राज्य महिला आयोगों को घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत अदालती आदेशों को लागू करने का अधिकार है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 गलत है। भारत का संविधान सीधे ‘महिला आयोग’ की स्थापना का प्रावधान नहीं करता है। राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग सांविधिक निकाय हैं, जिनकी स्थापना संसद या राज्य विधानसभाओं द्वारा अधिनियमों के माध्यम से की गई है। कथन 2 सही है। राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के तहत की गई थी, जो इसे एक सांविधिक निकाय बनाता है। कथन 3 गलत है। राज्य महिला आयोगों के पास अदालती आदेशों को सीधे लागू करने की शक्ति नहीं होती है; वे शिकायतें प्राप्त कर सकते हैं, जांच कर सकते हैं और सिफारिशें कर सकते हैं, लेकिन प्रवर्तन न्यायिक प्रणाली या संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से होता है।

Q2. कथन (A): वृद्ध महिलाओं को अक्सर संपत्ति में हिस्सा मिलने के बाद उनके परिवारों द्वारा छोड़ दिया जाता है, जिससे उन्हें बुढ़ापे में गंभीर अलगाव का सामना करना पड़ता है।
कारण (R): मातृत्व, पितृत्व और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007) वृद्ध व्यक्तियों के परित्याग को रोकने में अप्रभावी रहा है।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है। — कथन (A) सही है, जैसा कि केरल राज्य महिला आयोग की रिपोर्ट में उजागर किया गया है। वृद्ध महिलाओं को अक्सर संपत्ति प्राप्त करने के बाद सामाजिक और भावनात्मक समर्थन की कमी का सामना करना पड़ता है। कारण (R) भी सही है कि अधिनियम के बावजूद, परित्याग की समस्या बनी हुई है, जो इसकी प्रभावशीलता में चुनौतियों को दर्शाती है। हालांकि, R, A की सही व्याख्या नहीं है क्योंकि परित्याग के कई कारण हैं, जिनमें सामाजिक मूल्यों का क्षरण और पारिवारिक संघर्ष शामिल हैं, न कि केवल अधिनियम की अप्रभावीता। अधिनियम का उद्देश्य भरण-पोषण सुनिश्चित करना है, लेकिन यह सामाजिक अलगाव और भावनात्मक परित्याग के व्यापक मुद्दे को पूरी तरह से संबोधित नहीं कर सकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण सुनिश्चित करने में राज्य महिला आयोगों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण करें। इस संदर्भ में, ‘मातृत्व, पितृत्व और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007’ की प्रभावशीलता पर भी चर्चा करें। (15 Marks)

रूपरेखा: राज्य महिला आयोगों की भूमिका: परिचय में वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करें। राज्य महिला आयोगों की भूमिका पर प्रकाश डालें, जिसमें शिकायत निवारण, जांच, सिफारिशें, जागरूकता अभियान और सरकार को नीतिगत सुझाव देना शामिल है। इसकी सीमाओं का भी उल्लेख करें, जैसे प्रवर्तन शक्तियों की कमी, सीमित संसाधन और सिफारिशों का गैर-बाध्यकारी स्वरूप।
‘मातृत्व, पितृत्व और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007’ की प्रभावशीलता: अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों का उल्लेख करें, जैसे भरण-पोषण न्यायाधिकरण, परित्याग के खिलाफ प्रावधान और संपत्ति हस्तांतरण को रद्द करने की शक्ति। इसकी सफलताओं और चुनौतियों पर चर्चा करें, जैसे जागरूकता की कमी, कार्यान्वयन में बाधाएं, सामाजिक कलंक और वृद्ध व्यक्तियों द्वारा अपने बच्चों के खिलाफ कार्रवाई करने में झिझक।
निष्कर्ष: वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दें, जिसमें कानूनी सुधार, सामाजिक जागरूकता, अंतर-पीढ़ीगत संवाद को बढ़ावा देना और संस्थागत तंत्रों को मजबूत करना शामिल हो।

स्रोत: The Hindu

Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: केरल राज्य महिला आयोग ने हाल ही में वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। इस संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कदम केरल सरकार द्वारा वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है?

  1. वृद्ध महिलाओं के लिए विशेष पुलिस चौकियाँ स्थापित करना
  2. महिला स्वयंसेवी समूहों को वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित करना
  3. घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 में संशोधन कर वृद्ध महिलाओं को शामिल करना
  4. वृद्ध महिलाओं के लिए निशुल्क कानूनी सहायता केंद्र स्थापित करना

उत्तर: वृद्ध महिलाओं के लिए निशुल्क कानूनी सहायता केंद्र स्थापित करना — केरल राज्य महिला आयोग ने वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा के लिए निशुल्क कानूनी सहायता केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की है, ताकि उन्हें कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा सके।

Mains: वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर केरल राज्य महिला आयोग द्वारा उठाई गई चिंताओं का विश्लेषण करते हुए, केरल सरकार द्वारा इस दिशा में उठाए गए कदमों का मूल्यांकन कीजिए। साथ ही, वृद्ध महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं?


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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