18 Sep यूपी में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान: 5000 स्थानों पर सफाई, कानपुर सेंट्रल भी शामिल
✎ स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा एक जन-केंद्रित अभियान है जो सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने और अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जनभागीदारी को प्रोत्साहित करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
- Prelims: स्वच्छता ही सेवा, स्वच्छ भारत अभियान, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य, रेलवे स्वच्छता
- Essay: स्वच्छता: राष्ट्र निर्माण का आधार, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी
त्वरित पुनरावृत्ति: स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा एक जन-केंद्रित अभियान है जो सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने और अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जनभागीदारी को प्रोत्साहित करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, प्रयागराज मंडल में ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़े का शुभारंभ किया गया, जिसके तहत कानपुर सेंट्रल सहित 5,000 स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अभियान में स्टेशनों, यार्ड, रेलवे कॉलोनियों और ट्रैक के आसपास के कचरा संवेदनशील स्थानों की सफाई और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहल सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करती है और नागरिकों की सहभागिता को प्रोत्साहित करती है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने देश भर में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न अभियानों की शुरुआत की है, जिनमें ‘स्वच्छ भारत अभियान’ (Swachh Bharat Abhiyan) प्रमुख है।
- रेलवे स्टेशन और उसके आसपास का क्षेत्र सार्वजनिक स्थानों में से एक है जहाँ बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं, इसलिए इन स्थानों की स्वच्छता का सीधा प्रभाव जनस्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ता है।
- ‘स्वच्छता ही सेवा’ एक राष्ट्रव्यापी अभियान है जिसे महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और श्रमदान को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया गया था।
- इस तरह के अभियान का उद्देश्य न केवल गंदगी हटाना है, बल्कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) और पुनर्चक्रण (Recycling) के महत्व के बारे में भी जागरूकता फैलाना है।
- सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने में यात्रियों और स्थानीय निवासियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
- स्वच्छता अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखना भी है, जिसके लिए उन्हें आवश्यक उपकरण और स्वास्थ्य जांच प्रदान की जाती है।
स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा क्या है?
- ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़ा एक राष्ट्रव्यापी अभियान है जिसे भारत सरकार द्वारा स्वच्छता के महत्व को उजागर करने और नागरिकों को स्वच्छता गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करने हेतु शुरू किया गया था।
- यह अभियान आमतौर पर महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) के आसपास आयोजित किया जाता है, जो स्वच्छता के प्रबल समर्थक थे।
- इसका मुख्य उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाना है, जिसमें सभी वर्ग के लोग शामिल हों।
- पखवाड़े के दौरान, विभिन्न सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे स्टेशनों, स्कूलों, अस्पतालों, बाजारों और आवासीय क्षेत्रों में विशेष सफाई अभियान चलाए जाते हैं।
- अभियान में कचरा पृथक्करण (Waste Segregation), पुनर्चक्रण और अपशिष्ट प्रबंधन की बेहतर प्रथाओं के बारे में जागरूकता फैलाई जाती है।
- इसमें ‘श्रमदान’ (स्वैच्छिक श्रम) पर जोर दिया जाता है, जहाँ लोग स्वेच्छा से अपने आसपास के वातावरण को साफ करने के लिए समय निकालते हैं।
- यह अभियान सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार, पर्यावरण प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 5,000 स्थानों का लक्ष्य | यह अभियान व्यापक कवरेज सुनिश्चित करता है, जिसमें स्टेशन, यार्ड, रेलवे कॉलोनियां और ट्रैक के आसपास के संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं। |
| कचरा संवेदनशील स्थानों का कायाकल्प | यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है जहाँ कचरा जमा होने की संभावना अधिक होती है, जिससे समग्र स्वच्छता और सौंदर्य में सुधार होता है। |
| यात्रियों को ‘मेरी सीट, मेरा डिब्बा’ अभियान से जोड़ना | यह यात्रियों में व्यक्तिगत जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देता है, जिससे वे अपने आसपास की स्वच्छता बनाए रखने में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। |
| सफाई मित्रों के स्वास्थ्य की जांच और पीपीई किट का वितरण | यह सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देता है, जो स्वच्छता अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं। |
| रेलवे स्कूलों में कचरा पृथक्करण और रीसाइक्लिंग की जानकारी | यह बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और अच्छी आदतें विकसित करता है, जो भविष्य में स्थायी स्वच्छता प्रथाओं को बढ़ावा देगा। |
| सामूहिक श्रमदान और पौधरोपण | यह सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्यक्ष योगदान देता है, जिससे अभियान को दीर्घकालिक प्रभाव मिलता है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- स्वच्छता के प्रति जन जागरूकता और भागीदारी को बढ़ावा मिलता है, जिससे ‘स्वच्छ भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलती है।
- सार्वजनिक स्थानों, विशेषकर रेलवे परिसरों में स्वच्छता के उच्च मानकों को स्थापित करता है, जिससे यात्रियों और कर्मचारियों के लिए बेहतर वातावरण बनता है।
- सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करके उनके सम्मान और कल्याण को सुनिश्चित करता है।
पर्यावरणीय महत्व
- कचरा संवेदनशील क्षेत्रों की सफाई और सौंदर्यीकरण से पर्यावरणीय प्रदूषण कम होता है और पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ मिलता है।
- कचरा पृथक्करण और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देकर अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) की प्रभावी प्रथाओं को प्रोत्साहित करता है।
- वृक्षारोपण अभियान ‘एक पेड़ मां के नाम’ के माध्यम से हरित आवरण को बढ़ाता है और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने में योगदान देता है।
प्रशासनिक महत्व
- यह अभियान स्थानीय प्रशासन और रेलवे अधिकारियों के बीच समन्वय को मजबूत करता है, जिससे बड़े पैमाने पर स्वच्छता पहल को सफलतापूर्वक लागू किया जा सके।
- लक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण (Target-based approach) के साथ 5,000 स्थानों की मैपिंग और सफाई से संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित होता है।
- यह सरकारी योजनाओं और नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
चुनौतियाँ
1. जन भागीदारी की निरंतरता
- अभियान के बाद भी लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक और सक्रिय बनाए रखना एक चुनौती है।
- व्यक्तिगत जिम्मेदारी की भावना को दीर्घकालिक रूप से बनाए रखना कठिन हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ
- एकत्रित कचरे के उचित पृथक्करण, प्रसंस्करण और निपटान के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचे और संसाधनों की आवश्यकता होती है।
- प्लास्टिक और ई-कचरे जैसे गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण
3. बुनियादी ढाँचे और संसाधनों की कमी
- स्वच्छता अभियान को बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मचारी, उपकरण और अपशिष्ट निपटान सुविधाओं की आवश्यकता होती है।
- विशेष रूप से दूरदराज के या कम विकसित क्षेत्रों में इन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि
4. निगरानी और प्रवर्तन
- स्वच्छता मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन तंत्र का अभाव अभियान की सफलता को प्रभावित कर सकता है।
- नियमित निरीक्षण और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| व्यवहार परिवर्तन | लोगों की आदतों और व्यवहार में स्थायी बदलाव लाना मुश्किल है, खासकर सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकने के संबंध में। |
| संसाधन आवंटन | स्वच्छता अभियानों के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तीय तथा मानव संसाधनों का आवंटन सुनिश्चित करना। |
| तकनीकी समाधानों का अभाव | आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रौद्योगिकियों और समाधानों को अपनाने में धीमी गति, विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में। |
| अनियमित शहरीकरण | तेजी से अनियोजित शहरीकरण के कारण उत्पन्न होने वाले कचरे की मात्रा का प्रबंधन करना एक बड़ी चुनौती है। |
| अंतर-विभागीय समन्वय | विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय की कमी, जिससे स्वच्छता प्रयासों में दोहराव या अंतराल हो सकता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा
- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)
आगे की राह
- स्थायी व्यवहार परिवर्तन के लिए व्यापक जागरूकता अभियान और शिक्षा कार्यक्रम चलाए जाएँ।
- अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों और बुनियादी ढाँचे में निवेश बढ़ाया जाए, जिसमें कचरा पृथक्करण और रीसाइक्लिंग पर विशेष जोर हो।
- सफाई कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियाँ, स्वास्थ्य सेवाएँ और सुरक्षा उपकरण सुनिश्चित किए जाएँ।
- सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए स्थानीय निकायों और स्वयं सहायता समूहों को सशक्त किया जाए।
- स्वच्छता मानकों के उल्लंघन के लिए प्रभावी निगरानी और दंड प्रणाली लागू की जाए।
- रेलवे स्टेशनों और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता के लिए ‘शून्य अपशिष्ट’ (Zero Waste) मॉडल को अपनाया जाए।
- नियमित अंतराल पर स्वच्छता सर्वेक्षण और ऑडिट आयोजित किए जाएँ ताकि प्रगति का मूल्यांकन किया जा सके और कमियों को दूर किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छता अभियान · स्वच्छ भारत मिशन · शहरी स्वच्छता · ठोस अपशिष्ट प्रबंधन · सार्वजनिक स्वास्थ्य · सामुदायिक भागीदारी · पर्यावरण संरक्षण · सतत विकास लक्ष्य · रेलवे स्वच्छता · कचरा पृथक्करण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘शहरी स्थानीय निकायों के कार्य’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों के कार्य’}
अवधारणा प्रवाह
स्वच्छता अभियान का शुभारंभ → 5,000 स्थानों की पहचान और मैपिंग → कचरा संवेदनशील क्षेत्रों की सफाई और सौंदर्यीकरण → जनभागीदारी और जागरूकता कार्यक्रम → सफाई कर्मचारियों का कल्याण और सुरक्षा → अपशिष्ट पृथक्करण और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा → सामूहिक श्रमदान और पौधरोपण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़ा भारत सरकार द्वारा स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया एक वार्षिक अभियान है।
2. यह अभियान केवल शहरी क्षेत्रों में केंद्रित है और ग्रामीण स्वच्छता को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
3. इस अभियान का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़ा भारत सरकार द्वारा स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए एक वार्षिक अभियान है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह अभियान शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देता है। कथन 3 सही है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
Q2. स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसका शुभारंभ वर्ष 2014 में किया गया था।
2. इसका मुख्य उद्देश्य खुले में शौच मुक्त (Open Defecation Free – ODF) भारत का निर्माण करना था।
3. यह केवल शहरी विकास मंत्रालय के अंतर्गत आता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। स्वच्छ भारत मिशन का शुभारंभ 2 अक्टूबर 2014 को किया गया था और इसका एक प्रमुख उद्देश्य भारत को खुले में शौच मुक्त बनाना था। कथन 3 गलत है क्योंकि स्वच्छ भारत मिशन को दो उप-मिशनों में विभाजित किया गया है: स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में शहरी स्वच्छता अभियानों की सफलता में सामुदायिक भागीदारी के महत्व का परीक्षण कीजिए। साथ ही, इन अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक नीतिगत उपायों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: शहरी स्वच्छता की वर्तमान स्थिति और ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे अभियानों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. सामुदायिक भागीदारी का महत्व:
– जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन में भूमिका।
– अपशिष्ट पृथक्करण और प्रबंधन में स्थानीय सहयोग।
– सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने में नागरिक जिम्मेदारी।
– सरकारी प्रयासों की पूरकता।
– स्वामित्व की भावना का विकास।
3. अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने हेतु नीतिगत उपाय:
– ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) नियमों का कठोर कार्यान्वयन।
– प्रौद्योगिकी का उपयोग (जैसे IoT आधारित कचरा संग्रह)।
– वित्तीय प्रोत्साहन और दंड का प्रावधान।
– शिक्षा और संचार रणनीतियों का सुदृढ़ीकरण।
– शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता निर्माण।
– निजी क्षेत्र और गैर-सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी।
– स्वच्छता कार्यकर्ताओं (सफाई मित्रों) के लिए बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा।
4. निष्कर्ष: सतत शहरी स्वच्छता के लिए जनभागीदारी और नीतिगत समर्थन के सहजीवी संबंध पर बल।
स्रोत: amarujala.com
Uttar Pradesh PCS (UPPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में शुरू किए गए ‘स्वच्छता अभियान’ के अंतर्गत कानपुर सेंट्रल सहित 5000 स्थानों पर कौन-सा प्रमुख उद्देश्य शामिल है?
- A. औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण
- B. कचरा संवेदनशील स्थानों का कायाकल्प
- C. जल संसाधनों का संरक्षण
- D. पर्यटन स्थलों का विकास
उत्तर: B. कचरा संवेदनशील स्थानों का कायाकल्प — इस अभियान का मुख्य उद्देश्य कचरा संवेदनशील स्थानों का कायाकल्प करना है, ताकि स्वच्छता और पर्यावरण सुधार हो सके।
Mains: उत्तर प्रदेश में चलाए जा रहे ‘स्वच्छता अभियान’ के अंतर्गत कानपुर सेंट्रल जैसे प्रमुख स्थानों पर कायाकल्प कार्यवाही को सफल बनाने हेतु प्रशासनिक और सामुदायिक स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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