18 Sep महिलाओं के लिए नीली अर्थव्यवस्था में अवसर: कोच्चि में राष्ट्रीय सम्मेलन
✎ नीली अर्थव्यवस्था महासागरों और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग पर आधारित एक विकास मॉडल है, जिसमें महिलाओं का सशक्तिकरण इसके समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — समाज में महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन | GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ तथा इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय; आधारभूत संरचना (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि)
- Prelims: नीली अर्थव्यवस्था, मत्स्य पालन क्षेत्र, महिला सशक्तिकरण, केंद्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान (CIFT), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), सागरमाला परियोजना
- Essay: भारत के आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका: चुनौतियाँ और अवसर, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में नीली अर्थव्यवस्था का योगदान
त्वरित पुनरावृत्ति: नीली अर्थव्यवस्था महासागरों और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग पर आधारित एक विकास मॉडल है, जिसमें महिलाओं का सशक्तिकरण इसके समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कोच्चि में ‘भारत की नीली अर्थव्यवस्था में महिलाओं का सशक्तिकरण: पहचान, समावेशन और साझेदारी’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय मछुआरा महिला सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में केरल, लक्षद्वीप, तमिलनाडु, पुडुचेरी, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 60 महिलाओं ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य नीली अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को मान्यता देना और उनके समावेशन को बढ़ावा देना था।
पृष्ठभूमि
- भारत की नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) लाखों लोगों को आजीविका प्रदान करती है, जिसमें एक महत्वपूर्ण हिस्सा महिलाओं का है।
- मत्स्य पालन (Fisheries) और जलीय कृषि (Aquaculture) क्षेत्र में महिलाएँ कटाई के बाद के कार्यों, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
- इन क्षेत्रों में महिलाओं को अक्सर अनौपचारिक श्रम बल का हिस्सा माना जाता है, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा, ऋण तक पहुँच और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सीमित भागीदारी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- भारत सरकार ने नीली अर्थव्यवस्था के विकास और मछुआरों के कल्याण के लिए कई पहल की हैं, जैसे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और सागरमाला परियोजना।
- महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देना संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) का एक अभिन्न अंग है, विशेष रूप से SDG 5 (लैंगिक समानता) और SDG 8 (सभ्य कार्य और आर्थिक विकास)।
- केंद्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान (CIFT) मत्स्य पालन क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए एक प्रमुख संस्थान है, जो इस क्षेत्र में नवाचार और क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नीली अर्थव्यवस्था क्या है?
- नीली अर्थव्यवस्था एक व्यापक अवधारणा है जो महासागरों, समुद्रों, झीलों और तटीय क्षेत्रों के सतत उपयोग से संबंधित है, जिसमें आर्थिक विकास, बेहतर आजीविका और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संरक्षण शामिल है।
- इसमें मत्स्य पालन, जलीय कृषि, समुद्री पर्यटन, समुद्री परिवहन, अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा, जैव-प्रौद्योगिकी और समुद्री खनिज निष्कर्षण जैसे विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं।
- इसका उद्देश्य समुद्री संसाधनों का विवेकपूर्ण और टिकाऊ तरीके से उपयोग करना है ताकि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए उनकी उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
- भारत के लिए, नीली अर्थव्यवस्था का विशेष महत्व है क्योंकि इसकी एक लंबी तटरेखा (लगभग 7,500 किमी) और एक विशाल विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone – EEZ) है, जो समुद्री संसाधनों से समृद्ध है।
- यह आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth), खाद्य सुरक्षा, रोजगार सृजन और जलवायु परिवर्तन शमन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
- भारत सरकार ने ‘नीली क्रांति’ (Blue Revolution) के माध्यम से देश में मत्स्य पालन और जलीय कृषि के एकीकृत विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।
- नीली अर्थव्यवस्था के तहत महिलाओं की भूमिका को पहचानना और उन्हें सशक्त बनाना न केवल लैंगिक समानता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इस क्षेत्र के समग्र और सतत विकास के लिए भी आवश्यक है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| महिला मछुआरों का समागम | यह समागम भारत की नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) में महिलाओं की भूमिका को मान्यता देने और उन्हें सशक्त बनाने पर केंद्रित है। |
| समावेशी विकास | यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों, विशेषकर महिलाओं तक पहुँचें। |
| कौशल विकास और क्षमता निर्माण | महिलाओं को मत्स्य पालन और संबंधित क्षेत्रों में नए कौशल सीखने और अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के अवसर प्रदान करता है। |
| नीति निर्माण में भागीदारी | महिलाओं को नीतिगत चर्चाओं और निर्णयों में शामिल होने का मंच प्रदान करता है, जिससे उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। |
| आजीविका सुरक्षा | मत्स्य पालन क्षेत्र में महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करके उनकी आजीविका को सुरक्षित करता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- भारत की नीली अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने से मत्स्य पालन और समुद्री उत्पादों के प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता और नवाचार में वृद्धि हो सकती है।
- महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने से ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में गरीबी कम होती है और घरेलू आय में वृद्धि होती है।
- यह समागम समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और प्रबंधन में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करता है, जो दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) के लिए महत्वपूर्ण है।
सामाजिक महत्व
- महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल करने से लैंगिक समानता (Gender Equality) को बढ़ावा मिलता है और समाज में उनकी स्थिति मजबूत होती है।
- यह महिलाओं को उद्यमिता (Entrepreneurship) और नेतृत्व के अवसर प्रदान करता है, जिससे वे अपने समुदायों में बदलाव ला सकती हैं।
- महिलाओं के सशक्तिकरण से उनके परिवारों और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण में सुधार होता है, जिससे मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) में सुधार होता है।
रणनीतिक महत्व
- भारत की नीली अर्थव्यवस्था के समग्र विकास के लिए महिलाओं का समावेश आवश्यक है, क्योंकि वे इस क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण कार्यबल हैं।
- यह पहल सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) को प्राप्त करने में मदद करती है, विशेष रूप से SDG 5 (लैंगिक समानता) और SDG 14 (पानी के नीचे जीवन)।
- महिलाओं को सशक्त करने से भारत की तटीय सुरक्षा और समुद्री शासन में भी अप्रत्यक्ष रूप से सुधार हो सकता है, क्योंकि वे स्थानीय समुदायों का एक अभिन्न अंग हैं।
चुनौतियाँ
1. वित्तीय संसाधनों तक पहुँच का अभाव
- महिला मछुआरों को अक्सर ऋण, बीमा और अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुँचने में कठिनाई होती है।
- परंपरागत रूप से, वित्तीय संस्थान पुरुषों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे महिलाओं के लिए व्यवसाय शुरू करना या विस्तार करना मुश्किल हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: समावेशी विकास, वित्तीय समावेशन
2. तकनीकी ज्ञान और कौशल की कमी
- आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों, प्रसंस्करण विधियों और विपणन रणनीतियों तक महिलाओं की पहुँच सीमित है।
- प्रशिक्षण कार्यक्रमों की कमी या उन तक पहुँचने में बाधाएँ उनके कौशल विकास को रोकती हैं।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन: कौशल विकास, शिक्षा
3. सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ
- लैंगिक रूढ़िवादिता और पितृसत्तात्मक मानदंड महिलाओं को मत्स्य पालन क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिकाएँ निभाने से रोकते हैं।
- सुरक्षा संबंधी चिंताएँ और कार्यस्थल पर भेदभाव भी महिलाओं की भागीदारी को सीमित करता है।
यूपीएससी लिंक: समाज: महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय
4. बाजार तक सीमित पहुँच और मूल्य श्रृंखला में निम्न स्थिति
- महिला मछुआरे अक्सर मध्यस्थों पर निर्भर रहती हैं, जिससे उन्हें अपने उत्पादों का उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
- प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (Value Addition) गतिविधियों में उनकी भागीदारी कम होती है, जिससे लाभ का बड़ा हिस्सा दूसरों को मिलता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: कृषि विपणन, मूल्य श्रृंखला
5. जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय जोखिम
- समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव, अत्यधिक मछली पकड़ना और प्रदूषण महिलाओं की आजीविका को सीधे प्रभावित करते हैं।
- प्राकृतिक आपदाएँ और मौसम की चरम घटनाएँ उनके काम को बाधित करती हैं और असुरक्षा बढ़ाती हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण: जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वित्तीय समावेशन का अभाव | महिलाओं को ऋण, बीमा और सरकारी योजनाओं तक पहुँचने में कठिनाई होती है। |
| कौशल और प्रशिक्षण की कमी | आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों और मूल्य संवर्धन प्रक्रियाओं में महिलाओं का प्रशिक्षण अपर्याप्त है। |
| बाजार तक सीमित पहुँच | महिला मछुआरे अक्सर मध्यस्थों पर निर्भर रहती हैं, जिससे उन्हें अपने उत्पादों का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। |
| लैंगिक असमानता | मत्स्य पालन क्षेत्र में निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी कम है। |
| बुनियादी ढाँचे की कमी | मछली पकड़ने, प्रसंस्करण और भंडारण के लिए पर्याप्त और सुरक्षित बुनियादी ढाँचे का अभाव है, खासकर महिलाओं के लिए। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana)
आगे की राह
- महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups – SHGs) और सहकारी समितियों को बढ़ावा देना ताकि वित्तीय पहुँच और सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाई जा सके।
- मत्स्य पालन, प्रसंस्करण और विपणन में महिलाओं के लिए विशेष कौशल विकास और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू करना।
- महिलाओं को सीधे बाजार से जोड़ने और मूल्य श्रृंखला में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विकास करना।
- नीति निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिला मछुआरों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना।
- महिलाओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ कार्य वातावरण सुनिश्चित करने हेतु कानूनी और नियामक ढाँचे को मजबूत करना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए महिलाओं को अनुकूलन रणनीतियों और वैकल्पिक आजीविका के अवसरों के बारे में प्रशिक्षित करना।
- समुद्री संसाधनों के सतत प्रबंधन में महिलाओं की पारंपरिक ज्ञान और भागीदारी को मान्यता देना और उसका उपयोग करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नीली अर्थव्यवस्था · महिला सशक्तिकरण · मत्स्य पालन क्षेत्र · तटीय समुदाय · सतत विकास · आजीविका सुरक्षा · लैंगिक समानता · कौशल विकास · सरकारी योजनाएँ · सामाजिक समावेशन · समुद्री संसाधन · जलवायु परिवर्तन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 14’, ‘note’: ‘कानून के समक्ष समानता’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 15’, ‘note’: ‘भेदभाव का निषेध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(क)’, ‘note’: ‘समान आजीविका के अवसर’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘दुर्बल वर्गों के हितों का संवर्धन’}
अवधारणा प्रवाह
महिला मछुआरों का समागम आयोजित → नीली अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा → चुनौतियों और अवसरों की पहचान → नीतिगत सिफारिशों का विकास → महिलाओं का सशक्तिकरण और समावेशी विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग से संबंधित है, जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, बेहतर आजीविका और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखना है।
2. भारत की नीली अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन, समुद्री पर्यटन, शिपिंग और अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
3. राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (National Fisheries Development Board) मत्स्य पालन क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विशेष योजनाएँ लागू करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। नीली अर्थव्यवस्था की परिभाषा और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्र सही बताए गए हैं। कथन 3 गलत है। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड मत्स्य पालन क्षेत्र के समग्र विकास के लिए काम करता है, लेकिन महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विशेष योजनाएँ मुख्य रूप से मत्स्य संपदा योजना जैसे बड़े कार्यक्रमों के तहत एकीकृत होती हैं, न कि बोर्ड द्वारा सीधे विशेष योजनाएँ लागू की जाती हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ के उद्देश्यों को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?
- यह योजना केवल अंतर्देशीय मत्स्य पालन के विकास पर केंद्रित है।
- इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
- यह मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देने, मछुआरों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजित करने पर केंद्रित है।
- यह योजना केवल मछली पकड़ने वाले जहाजों के आधुनिकीकरण से संबंधित है।
उत्तर: यह मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देने, मछुआरों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजित करने पर केंद्रित है। — प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और जिम्मेदार विकास को बढ़ावा देना, मछुआरों और मछली किसानों की आय को दोगुना करना, रोजगार सृजित करना और मूल्य श्रृंखला दक्षता में सुधार करना है। यह अंतर्देशीय और समुद्री दोनों मत्स्य पालन को कवर करती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की नीली अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस क्षेत्र में उनके सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और आवश्यक भावी रणनीतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** नीली अर्थव्यवस्था की संक्षिप्त परिभाषा और भारत के लिए इसका महत्व। महिलाओं की भूमिका का एक सामान्य अवलोकन।
2. **नीली अर्थव्यवस्था में महिलाओं की वर्तमान भूमिका:**
* मत्स्य पालन (पकड़ने, प्रसंस्करण, विपणन) में योगदान।
* समुद्री पर्यटन, तटीय शिल्प, नमक उत्पादन जैसे अन्य क्षेत्रों में भागीदारी।
* अदृश्य श्रम और अनौपचारिक क्षेत्र में अधिक भागीदारी।
* निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सीमित प्रतिनिधित्व।
3. **महिलाओं के सशक्तिकरण में चुनौतियाँ:**
* वित्तीय संसाधनों तक पहुँच का अभाव।
* कौशल विकास और प्रशिक्षण की कमी।
* सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ और लैंगिक रूढ़िवादिता।
* स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी मुद्दे।
* जलवायु परिवर्तन और समुद्री संसाधनों पर निर्भरता का प्रभाव।
4. **सरकार द्वारा उठाए गए कदम:**
* प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY): महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को प्रोत्साहन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता।
* दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM): स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका के अवसर।
* कौशल विकास कार्यक्रम: मत्स्य पालन और संबंधित क्षेत्रों में महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण।
* मत्स्य पालन अवसंरचना विकास निधि (FIDF): प्रसंस्करण इकाइयों में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर।
5. **भावी रणनीतियाँ:**
* वित्तीय समावेशन और ऋण तक आसान पहुँच।
* उन्नत कौशल प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण।
* निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।
* समुद्री संसाधनों के सतत प्रबंधन में उनकी भूमिका को पहचानना।
* सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार।
* जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अनुकूलन क्षमता बढ़ाना।
6. **निष्कर्ष:** नीली अर्थव्यवस्था के सतत और समावेशी विकास के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण आवश्यक है, जिससे न केवल आर्थिक लाभ होंगे बल्कि सामाजिक न्याय भी सुनिश्चित होगा।
स्रोत: The Hindu
Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: केरल में आयोजित ‘भारत की नीली अर्थव्यवस्था में महिलाओं’ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किस संगठन द्वारा किया गया था?
- A. नीति आयोग
- B. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
- C. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)
- D. संयुक्त राष्ट्र महासभा
उत्तर: C. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) — यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा ‘भारत की नीली अर्थव्यवस्था में महिलाओं’ विषय पर आयोजित किया गया था, जिसका उद्घाटन केरल के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।
Mains: केरल की नीली अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए, राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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