19 Sep मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: पीपीपी मॉडल और एमबीबीएस सीटों में वृद्धि
✎ मध्य प्रदेश ने चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का सफलतापूर्वक उपयोग किया है, जिससे MBBS सीटों में वृद्धि हुई है और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय | GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ तथा इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय
- Prelims: सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल, मातृ मृत्यु अनुपात (MMR), शिशु मृत्यु दर (IMR), नवजात मृत्यु दर (NMR), राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS), चिकित्सा शिक्षा का विस्तार, स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना, CAR-T सेल थेरेपी
- Essay: भारत में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच और गुणवत्ता में सुधार: चुनौतियाँ और समाधान, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल: सामाजिक क्षेत्र के विकास में इसकी भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: मध्य प्रदेश ने चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का सफलतापूर्वक उपयोग किया है, जिससे MBBS सीटों में वृद्धि हुई है और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हुआ है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव से मुलाकात कर राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को मजबूत करने, चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के अभिनव उपयोग के लिए मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने पर भी चर्चा की गई।
पृष्ठभूमि
- भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सुधार और सभी नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण तथा किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना एक प्रमुख नीतिगत प्राथमिकता रही है।
- चिकित्सा शिक्षा का विस्तार, विशेष रूप से MBBS और सुपर-स्पेशियलिटी सीटों में वृद्धि, देश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने और स्वास्थ्य सेवा कार्यबल को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना के विकास में तेजी लाने और निजी क्षेत्र के संसाधनों तथा विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए एक प्रभावी तंत्र के रूप में देखा जाता है।
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतक (जैसे MMR, IMR, NMR) किसी भी देश की स्वास्थ्य प्रणाली की प्रभावशीलता और सामाजिक विकास के महत्वपूर्ण मापक होते हैं।
- केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से राज्यों को स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में सहायता प्रदान करती है।
- कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए उन्नत चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, जैसे CAR-T सेल थेरेपी, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने में सहायक है।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल क्या है?
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) एक दीर्घकालिक अनुबंध है, जिसमें सरकार और निजी क्षेत्र के बीच एक परियोजना या सेवा के प्रावधान के लिए सहयोग होता है।
- इस मॉडल में, निजी क्षेत्र पूंजी निवेश, विशेषज्ञता और दक्षता लाता है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र नीतिगत दिशा-निर्देश, नियामक ढाँचा और अक्सर वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- PPP मॉडल का उपयोग आमतौर पर बड़े पैमाने की अवसंरचना परियोजनाओं जैसे सड़कों, पुलों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाओं जैसे अस्पतालों और स्कूलों के निर्माण और संचालन में किया जाता है।
- इसके मुख्य लाभों में परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्तपोषण, बेहतर दक्षता, नवाचार को बढ़ावा देना और परियोजनाओं को समय पर पूरा करना शामिल है।
- स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में, PPP मॉडल का उपयोग मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, अस्पतालों के निर्माण और संचालन, डायग्नोस्टिक सेवाओं के प्रावधान और विशेषज्ञ उपचार सुविधाओं के विकास के लिए किया जा सकता है।
- मध्य प्रदेश ने धार, पन्ना, कटनी और बैतूल में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए PPP मॉडल का अभिनव उपयोग किया है, जिसका लक्ष्य दिसंबर 2027 तक इन कॉलेजों को पूरा करना है।
- यह मॉडल सरकार को सीमित बजटीय संसाधनों के बावजूद स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना का तेजी से विस्तार करने में सक्षम बनाता है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| MBBS सीटों में वृद्धि | वर्ष 2026 में 5,600 से बढ़कर 6,120 सीटें, जिससे चिकित्सा कार्यबल को मजबूती मिलेगी। |
| सुपर-स्पेशियलिटी शिक्षा का विस्तार | सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 63 से 73 और निजी में 29 से 53 सीटें, उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार। |
| पीपीपी मॉडल का अभिनव उपयोग | धार, पन्ना, कटनी और बैतूल में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ सेवाओं का विकेंद्रीकरण। |
| मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार | मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) में 7 अंकों की कमी, प्रसवपूर्व जांच (ANC) में वृद्धि, नवजात और शिशु मृत्यु दर में कमी। |
| विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार | 52 जिलों में 70 हेमोडायलिसिस इकाइयां और 52 कैंसर डे-केयर केंद्र, उन्नत कैंसर उपचार सुविधाओं की शुरुआत। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से राज्य में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी।
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार से समाज के सबसे कमजोर वर्गों, यानी माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य परिणामों में सकारात्मक परिवर्तन आएगा, जिससे समग्र मानव विकास सूचकांकों में सुधार होगा।
- विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं, जैसे हेमोडायलिसिस और कैंसर उपचार इकाइयों का विस्तार, गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उनके निवास स्थान के करीब गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करेगा, जिससे उन्हें बड़े शहरों की यात्रा करने की आवश्यकता कम होगी।
आर्थिक महत्व
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से चिकित्सा बुनियादी ढांचे का विकास सरकारी संसाधनों पर बोझ कम करता है और निजी निवेश को आकर्षित करता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
- बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ कार्यबल की उत्पादकता बढ़ाती हैं और बीमारियों के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करती हैं, जिससे राज्य की समग्र आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) में योगदान मिलता है।
- चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में निवेश से रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं, जिनमें डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और सहायक कर्मचारी शामिल हैं।
शासनिक महत्व
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण व किफायती स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उदाहरण है।
- पीपीपी मॉडल का अभिनव उपयोग शासन में लचीलेपन और दक्षता को दर्शाता है, जिससे सीमित सरकारी संसाधनों के बावजूद बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता है।
- स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रगति की नियमित समीक्षा और मूल्यांकन नीति निर्माण और कार्यान्वयन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
चुनौतियाँ
1. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण
- MBBS और सुपर-स्पेशियलिटी सीटों में वृद्धि के साथ, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे और छात्रों को पर्याप्त व्यावहारिक प्रशिक्षण मिले।
- नए मेडिकल कॉलेजों में अनुभवी फैकल्टी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं की कमी एक चुनौती हो सकती है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा
2. ग्रामीण-शहरी स्वास्थ्य असमानताएँ
- चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों का वितरण अभी भी शहरी क्षेत्रों में केंद्रित है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच एक चुनौती बनी हुई है।
- दूरदराज के क्षेत्रों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को आकर्षित करना और उन्हें बनाए रखना एक सतत चुनौती है, भले ही सीटों की संख्या बढ़ाई गई हो।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य सेवा वितरण
3. पीपीपी मॉडल का प्रभावी कार्यान्वयन
- पीपीपी मॉडल में निजी क्षेत्र की लाभ कमाने की प्रवृत्ति और सार्वजनिक सेवा के बीच संतुलन बनाए रखना एक चुनौती है, ताकि किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा सकें।
- निजी भागीदारों के साथ अनुबंधों का प्रभावी प्रबंधन और निगरानी आवश्यक है ताकि गुणवत्ता मानकों और समय-सीमा का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
यूपीएससी लिंक: शासन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी
4. स्वास्थ्य सेवा का वित्तपोषण
- बढ़ते स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे और सेवाओं के लिए पर्याप्त और सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना एक चुनौती है, खासकर जब आबादी की स्वास्थ्य आवश्यकताओं में वृद्धि हो रही हो।
- स्वास्थ्य देखभाल पर जेब से होने वाले खर्च (Out-of-Pocket Expenditure) को कम करना और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) की दिशा में आगे बढ़ना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य नीति, सार्वजनिक वित्त
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता | बढ़ती सीटों के साथ शिक्षण मानकों और व्यावहारिक प्रशिक्षण को बनाए रखना। |
| ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी | शहरी-ग्रामीण स्वास्थ्य असमानता और दूरदराज के क्षेत्रों में डॉक्टरों को आकर्षित करने में कठिनाई। |
| पीपीपी मॉडल में जवाबदेही | निजी क्षेत्र द्वारा गुणवत्ता और किफायती सेवाओं की सुनिश्चितता तथा अनुबंधों का प्रभावी प्रबंधन। |
| स्वास्थ्य सेवा का सतत वित्तपोषण | बढ़ते बुनियादी ढांचे और सेवाओं के लिए पर्याप्त धन की उपलब्धता और जेब से होने वाले खर्च को कम करना। |
| बुनियादी ढांचे का रखरखाव | नए स्थापित मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य इकाइयों का दीर्घकालिक रखरखाव और उन्नयन सुनिश्चित करना। |
आगे की राह
- चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित मूल्यांकन, पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण और अनुभवी फैकल्टी की भर्ती पर ध्यान केंद्रित करना।
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डॉक्टरों और विशेषज्ञ स्वास्थ्य कर्मियों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन योजनाएँ (जैसे ग्रामीण सेवा बांड) और बेहतर कार्य वातावरण प्रदान करना।
- पीपीपी मॉडल के तहत स्पष्ट दिशानिर्देश, मजबूत नियामक ढांचा और प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करना ताकि गुणवत्ता, सामर्थ्य और पहुंच सुनिश्चित हो सके।
- स्वास्थ्य सेवा पर सार्वजनिक व्यय में वृद्धि करना और स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का विस्तार करना ताकि नागरिकों पर जेब से होने वाले खर्च का बोझ कम हो सके।
- टेलीमेडिसिन (Telemedicine) और ई-स्वास्थ्य (e-Health) समाधानों का लाभ उठाना ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाई जा सके।
- स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के रखरखाव और उन्नयन के लिए सतत वित्तपोषण मॉडल विकसित करना।
- जन जागरूकता अभियान चलाकर निवारक स्वास्थ्य देखभाल (Preventive Healthcare) को बढ़ावा देना और स्वस्थ जीवन शैली को प्रोत्साहित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल · स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना · चिकित्सा शिक्षा का विस्तार · मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य · स्वास्थ्य सेवा कार्यबल · राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन · सतत विकास लक्ष्य (SDGs) · किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ · राज्य स्वास्थ्य नीतियाँ · स्वास्थ्य संकेतक
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 21’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘अनुच्छेद 47’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा करने तथा लोक स्वास्थ्य में सुधार करने का राज्य का कर्तव्य’}
- {‘सातवीं अनुसूची (राज्य सूची)’: ‘लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता, अस्पताल और औषधालय’}
अवधारणा प्रवाह
राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा → चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे का विस्तार → सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का अभिनव उपयोग → MBBS सीटों में वृद्धि और सुपर-स्पेशियलिटी शिक्षा का विस्तार → मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार → राज्य में स्वास्थ्य कार्यबल को मजबूती और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का उपयोग केवल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किया जाता है, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नहीं।
2. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों पर महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है।
3. भारत में मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) में कमी सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि PPP मॉडल का उपयोग स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी किया जाता है, जैसा कि मध्य प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना में देखा गया है। कथन 2 सही है क्योंकि NFHS स्वास्थ्य संकेतकों, विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर व्यापक डेटा एकत्र करता है। कथन 3 सही है क्योंकि MMR में कमी SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) के लक्ष्यों में से एक है।
Q2. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे उपयुक्त है?
- यह केवल निजी क्षेत्र द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं को संदर्भित करता है।
- यह सार्वजनिक और निजी संस्थाओं के बीच एक सहयोग है, जिसमें जोखिम और लाभ साझा किए जाते हैं।
- इसका उपयोग केवल उन परियोजनाओं में किया जाता है जहाँ सरकार पूरी तरह से वित्तपोषण करने में असमर्थ होती है।
- यह एक ऐसा मॉडल है जहाँ सरकार निजी क्षेत्र को पूरी तरह से स्वास्थ्य सेवाएँ चलाने की अनुमति देती है।
उत्तर: यह सार्वजनिक और निजी संस्थाओं के बीच एक सहयोग है, जिसमें जोखिम और लाभ साझा किए जाते हैं। — PPP मॉडल सार्वजनिक और निजी संस्थाओं के बीच एक सहयोगात्मक व्यवस्था है, जिसमें संसाधनों, विशेषज्ञता और जोखिमों को साझा किया जाता है ताकि सार्वजनिक सेवाओं या बुनियादी ढाँचे को वितरित किया जा सके। यह केवल वित्तपोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें परियोजना प्रबंधन और सेवा वितरण भी शामिल है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में PPP मॉडल की क्षमता और चुनौतियों पर प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: PPP मॉडल की संक्षिप्त परिभाषा और भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में इसकी प्रासंगिकता।
2. PPP मॉडल की भूमिका (क्षमताएँ):
– अवसंरचना विकास (जैसे मेडिकल कॉलेज, अस्पताल).
– वित्तपोषण के वैकल्पिक स्रोत.
– विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण.
– सेवा वितरण में दक्षता और गुणवत्ता में सुधार.
– स्वास्थ्य सेवा कार्यबल का विस्तार (जैसे एमबीबीएस सीटों में वृद्धि).
– दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँच बढ़ाना.
3. चुनौतियाँ:
– सामर्थ्य और पहुँच (विशेषकर गरीबों के लिए).
– विनियमन और निगरानी की कमी.
– लाभ-उन्मुखीकरण बनाम सार्वजनिक सेवा.
– गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण.
– पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे.
– नैतिक दुविधाएँ.
4. चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं में PPP की विशिष्ट क्षमताएँ और चुनौतियाँ:
– क्षमता: सीटों की संख्या में वृद्धि, उन्नत उपचार सुविधाओं का विकास (जैसे CAR-T सेल थेरेपी), विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता.
– चुनौतियाँ: शुल्क संरचना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मानकीकरण, ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी.
5. निष्कर्ष: PPP मॉडल की क्षमता का लाभ उठाने और चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण, जिसमें मजबूत नियामक ढाँचा, सार्वजनिक हित की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण, सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना शामिल हो।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Madhya Pradesh PCS (MPPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हाल ही में श्री जे. पी. नड्डा द्वारा मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में की गई समीक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
- उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए पीपीपी मॉडल की सराहना की तथा इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव बताया।
- उन्होंने मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए केवल सरकारी योजनाओं पर बल दिया।
- उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
- उन्होंने मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विदेशी निवेश की अनुशंसा की।
उत्तर: उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए पीपीपी मॉडल की सराहना की तथा इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव बताया। — श्री जे. पी. नड्डा ने मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और पीपीपी मॉडल की सराहना की थी।
Mains: मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में पीपीपी मॉडल की भूमिका तथा इसके लाभों पर प्रकाश डालते हुए, राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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