23 Sep हिमाचल में आयुष चिकित्सा का बढ़ता प्रचलन: 57.2% लोगों ने अपनाई आयुष पद्धतियाँ, जानें कारण
✎ आयुष पद्धतियाँ भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक समूह हैं, जिनमें आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी शामिल हैं, जिन्हें स्वास्थ्य सेवा में बढ़ती स्वीकार्यता मिल रही है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — स्वास्थ्य, सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; स्वदेशीकरण
- Prelims: आयुष मंत्रालय, आयुष पद्धतियाँ, आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, होम्योपैथी, राष्ट्रीय आयुष मिशन
- Essay: भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का पुनरुत्थान: चुनौतियाँ और अवसर, सार्वजनिक स्वास्थ्य में आयुष की भूमिका: एक समग्र दृष्टिकोण
त्वरित पुनरावृत्ति: आयुष पद्धतियाँ भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक समूह हैं, जिनमें आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी शामिल हैं, जिन्हें स्वास्थ्य सेवा में बढ़ती स्वीकार्यता मिल रही है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में जारी 79वें अखिल भारतीय आयुष सर्वेक्षण (All India AYUSH Survey) के आँकड़ों से पता चला है कि हिमाचल प्रदेश में 57.2 प्रतिशत लोग आयुष पद्धतियों का उपयोग कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय औसत 28.4 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह सर्वेक्षण वर्ष 2022-23 में किया गया था और इसमें देश भर के 1.81 लाख से अधिक परिवारों से जानकारी एकत्र की गई थी, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र शामिल थे। यह आँकड़े आयुष (AYUSH) प्रणालियों के प्रति बढ़ती स्वीकार्यता और विश्वास को दर्शाते हैं।
पृष्ठभूमि
- आयुष (AYUSH) भारत सरकार द्वारा स्थापित एक संक्षिप्त रूप है, जिसमें आयुर्वेद (Ayurveda), योग (Yoga) और प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy), यूनानी (Unani), सिद्ध (Siddha) और होम्योपैथी (Homeopathy) शामिल हैं।
- भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक समृद्ध इतिहास रहा है, जो सदियों से चली आ रही हैं और स्वास्थ्य सेवा का एक अभिन्न अंग रही हैं।
- आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) का गठन 2014 में किया गया था, जिसका उद्देश्य इन पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देना, उनका विकास करना और उन्हें मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा में एकीकृत करना है।
- राष्ट्रीय आयुष मिशन (National AYUSH Mission – NAM) जैसी योजनाओं के माध्यम से आयुष स्वास्थ्य केंद्रों, पंचकर्म तकनीशियन पाठ्यक्रमों और विभिन्न थेरेपी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे इन पद्धतियों की पहुँच बढ़ रही है।
- सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 95 प्रतिशत लोग आयुष प्रणालियों के बारे में जानते हैं और बीमारियों से बचाव तथा कायाकल्प के लिए इनका उपयोग कर रहे हैं।
- हिमाचल प्रदेश को आयुर्वेद की भूमि माना जाता है, जहाँ की संस्कृति में प्राकृतिक चिकित्सा का गहरा महत्व है और हिमालयी क्षेत्र में औषधीय पौधे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो आयुष पद्धतियों के चलन को सहज बनाते हैं।
आयुष पद्धतियाँ क्या हैं?
- आयुष (AYUSH) भारत की प्राचीन और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक समूह है, जिसे भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त है।
- इसमें आयुर्वेद (Ayurveda) शामिल है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित एक समग्र चिकित्सा प्रणाली है।
- योग (Yoga) एक प्राचीन भारतीय अभ्यास है जिसमें शारीरिक आसन, श्वास व्यायाम और ध्यान शामिल हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।
- प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy) प्रकृति के उपचार सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें आहार, जीवनशैली और प्राकृतिक तत्वों का उपयोग किया जाता है।
- यूनानी (Unani) चिकित्सा प्रणाली प्राचीन ग्रीक चिकित्सा पर आधारित है और शरीर में चार हास्य (humors) के संतुलन पर केंद्रित है।
- सिद्ध (Siddha) चिकित्सा प्रणाली मुख्य रूप से दक्षिण भारत में प्रचलित है, जो जड़ी-बूटियों और खनिजों के उपयोग पर जोर देती है।
- होम्योपैथी (Homeopathy) एक वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली है जो ‘समरूपता द्वारा उपचार’ (like cures like) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें अत्यधिक तनु पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
- इन पद्धतियों को अक्सर किफायती, सुलभ और कम दुष्प्रभाव वाली माना जाता है, जिससे पुरानी बीमारियों के इलाज में इनकी प्राथमिकता बढ़ रही है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| आयुष पद्धतियों का बढ़ता उपयोग | हिमाचल प्रदेश में 57.2% परिवार आयुष पद्धतियों का उपयोग कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय औसत 28.4% से काफी अधिक है। |
| राष्ट्रीय शीर्ष स्थान | अखिल भारतीय आयुष सर्वेक्षण और अध्ययन के अनुसार, हिमाचल प्रदेश आयुष पद्धतियों के उपयोग में देश में शीर्ष स्थान पर है। |
| आयुष स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार | आयुष स्वास्थ्य केंद्रों, पंचकर्म तकनीशियन पाठ्यक्रमों और विभिन्न थेरेपी सुविधाओं के तेजी से विस्तार ने इस वृद्धि में योगदान दिया है। |
| जन जागरूकता | देशभर में लगभग 95% लोग आयुष प्रणालियों के बारे में जानते हैं, जो इन पद्धतियों की स्वीकार्यता को दर्शाता है। |
| हिमालयी क्षेत्र की विशेषता | हिमालयी क्षेत्र में औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों की प्रचुरता आयुष पद्धतियों के प्रचलन को सहज बनाती है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- आयुष पद्धतियों का बढ़ता उपयोग पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणालियों में जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है, जो स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार कर सकता है।
- ये पद्धतियाँ अक्सर आर्थिक रूप से अधिक किफायती और सुलभ होती हैं, जिससे समाज के बड़े वर्ग को लाभ मिल सकता है।
- प्राकृतिक चिकित्सा और औषधियों के कम दुष्प्रभाव होने के कारण पुरानी बीमारियों के इलाज में इन्हें प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
स्वास्थ्य सेवा महत्व
- आयुष पद्धतियाँ बीमारियों की रोकथाम और कायाकल्प (rejuvenation) में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बोझ कम हो सकता है।
- यह आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ एकीकृत होकर समग्र स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण (holistic healthcare approach) को बढ़ावा दे सकता है।
- हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में औषधीय पौधों की उपलब्धता इन पद्धतियों को स्थानीय स्तर पर मजबूत करती है, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ती है।
आर्थिक महत्व
- आयुष क्षेत्र का विस्तार औषधीय पौधों की खेती, प्रसंस्करण और संबंधित सेवाओं में रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है।
- आयुष पर्यटन (AYUSH tourism) को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
- यह पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन में भी योगदान देता है, जिसका आर्थिक मूल्य भी है।
चुनौतियाँ
1. मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण
- आयुष उत्पादों और सेवाओं के मानकीकरण (standardization) और गुणवत्ता नियंत्रण (quality control) की कमी उपभोक्ताओं के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
- विभिन्न आयुष पद्धतियों में उपचार प्रोटोकॉल और औषधियों की प्रभावकारिता के वैज्ञानिक प्रमाणों का अभाव एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
2. अनुसंधान और विकास का अभाव
- आयुष क्षेत्र में आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश की कमी है, जिससे इन पद्धतियों की विश्वसनीयता और स्वीकार्यता सीमित हो सकती है।
- नैदानिक परीक्षणों (clinical trials) और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा (evidence-based medicine) के माध्यम से आयुष उपचारों की प्रभावकारिता को स्थापित करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
3. बुनियादी ढाँचा और मानव संसाधन
- आयुष स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में पर्याप्त बुनियादी ढाँचे (infrastructure) और प्रशिक्षित मानव संसाधनों (human resources) की कमी एक बड़ी चुनौती है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
- आयुष चिकित्सकों और सहायक कर्मचारियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अभाव है।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य/मानव संसाधन
4. जागरूकता और एकीकरण
- आयुष पद्धतियों के लाभों और सीमाओं के बारे में आम जनता में अभी भी पूरी जागरूकता नहीं है।
- आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ आयुष पद्धतियों का प्रभावी एकीकरण (integration) सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य/सामाजिक मुद्दे
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| मानकीकरण | आयुष उत्पादों और सेवाओं के लिए एक समान गुणवत्ता मानकों का अभाव। |
| वैज्ञानिक प्रमाण | कई आयुष उपचारों की प्रभावकारिता के लिए कठोर वैज्ञानिक साक्ष्य की कमी। |
| बुनियादी ढाँचा | आयुष स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त सुविधाओं और उपकरणों का अभाव। |
| मानव संसाधन | प्रशिक्षित आयुष चिकित्सकों और सहायक कर्मचारियों की कमी। |
| अनुसंधान निवेश | आयुष क्षेत्र में आधुनिक अनुसंधान और विकास के लिए अपर्याप्त निवेश। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय आयुष मिशन (National AYUSH Mission)
- आयुष ग्राम (AYUSH Gram)
- आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (AYUSH Health and Wellness Centres)
आगे की राह
- आयुष उत्पादों और सेवाओं के लिए कठोर मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र स्थापित करना।
- आयुष पद्धतियों की प्रभावकारिता और सुरक्षा को प्रमाणित करने के लिए साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और नैदानिक परीक्षणों को बढ़ावा देना।
- आयुष शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत करना तथा प्रशिक्षित मानव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- आयुष स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी ढाँचे का विस्तार और आधुनिकीकरण करना, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
- आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ आयुष पद्धतियों के प्रभावी एकीकरण के लिए नीतिगत ढाँचा विकसित करना।
- आयुष के लाभों और सीमाओं के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाना।
- औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देना, जिससे कच्चे माल की सतत आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘राज्य का कर्तव्य: सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
आयुष पद्धतियों के प्रति जन जागरूकता → आयुष स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार → आयुष सेवाओं की बढ़ती उपलब्धता → आयुष पद्धतियों में बढ़ता जन विश्वास → आयुष उपचारों का अधिक उपयोग → सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आयुष मिशन (National AYUSH Mission) का उद्देश्य आयुष चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देना है।
2. हिमाचल प्रदेश में आयुष पद्धतियों का उपयोग करने वाले परिवारों का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
3. आयुष में केवल आयुर्वेद और योग शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। राष्ट्रीय आयुष मिशन भारत में आयुष प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए एक प्रमुख सरकारी पहल है। कथन 2 भी सही है क्योंकि सर्वेक्षण के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 57.2% लोग आयुष पद्धतियों का उपयोग कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 28.4% है। कथन 3 गलत है। आयुष (AYUSH) का अर्थ आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी है, यह केवल आयुर्वेद और योग तक सीमित नहीं है।
Q2. आयुष (AYUSH) मंत्रालय के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. आयुष मंत्रालय भारत में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के विकास, शिक्षा और अनुसंधान के लिए जिम्मेदार है।
2. आयुष मंत्रालय का गठन वर्ष 2014 में किया गया था।
सही उत्तर का चयन नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर कीजिए:
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर: 1 और 2 दोनों — कथन 1 गलत है। आयुष मंत्रालय भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों (आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) के विकास, शिक्षा और अनुसंधान के लिए जिम्मेदार है, न कि गैर-पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए। कथन 2 सही है। आयुष मंत्रालय का गठन 9 नवंबर, 2014 को किया गया था, ताकि पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में आयुष (AYUSH) पद्धतियों के बढ़ते महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संबंध में राष्ट्रीय आयुष मिशन की भूमिका पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत आयुष पद्धतियों के संक्षिप्त परिचय और सार्वजनिक स्वास्थ्य में उनके महत्व से करें। भारत में आयुष पद्धतियों के बढ़ते उपयोग के कारणों का विश्लेषण करें, जैसे कि सामर्थ्य, सुलभता, कम दुष्प्रभाव और सांस्कृतिक स्वीकार्यता। हिमाचल प्रदेश के सर्वेक्षण जैसे हालिया आंकड़ों का उल्लेख करें। सार्वजनिक स्वास्थ्य में आयुष के योगदानों पर चर्चा करें, जैसे कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल, पुरानी बीमारियों का प्रबंधन और समग्र कल्याण। राष्ट्रीय आयुष मिशन (National AYUSH Mission) के उद्देश्यों, घटकों और उपलब्धियों का विस्तार से वर्णन करें, जिसमें आयुष स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना शामिल हो। आयुष के सामने आने वाली चुनौतियों, जैसे मानकीकरण की कमी, वैज्ञानिक सत्यापन और आधुनिक चिकित्सा के साथ एकीकरण की कमी पर समालोचनात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करें। अंत में, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में आयुष के पूर्ण एकीकरण के लिए आगे की राह सुझाते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: amarujala.com
Himachal Pradesh PCS (HPPSC (HAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हिमाचल प्रदेश में आयुष पद्धतियों के उपयोग में वृद्धि के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- हिमाचल प्रदेश में 57.2% लोग आयुष पद्धतियों का उपयोग कर रहे हैं, जो राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव का संकेत है।
- हिमाचल प्रदेश सरकार ने आयुष पद्धतियों को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया है।
- आयुष पद्धतियों का उपयोग केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित है।
- हिमाचल प्रदेश में आयुष पद्धतियों का उपयोग 20% से भी कम है।
उत्तर: हिमाचल प्रदेश में 57.2% लोग आयुष पद्धतियों का उपयोग कर रहे हैं, जो राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव का संकेत है। — हिमाचल प्रदेश में आयुष पद्धतियों के उपयोग में वृद्धि हुई है, जहाँ 57.2% लोग इन पद्धतियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जैसा कि हालिया सर्वेक्षण में बताया गया है।
Mains: हिमाचल प्रदेश में आयुष पद्धतियों के बढ़ते उपयोग के कारणों एवं इसके समाजिक-आर्थिक प्रभावों पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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