07 Nov हैदराबाद अवैध ऊसाइट रैकेट: तेलंगाना महिला आयोग की निष्क्रियता पर प्रश्न
✎ सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत ART क्लिनिकों का पंजीकरण अनिवार्य है और अंडाणु दान केवल चिकित्सकीय व्यय की प्रतिपूर्ति तक सीमित है; वाणिज्यिक शोषण अनुच्छेद 21 (गरिमा, स्वास्थ्य) और अनुच्छेद 23 (मानव…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य (महिला संरक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं का नियमन, वैधानिक निकाय) | GS Paper IV — नैतिकता (शरीर की स्वायत्तता, गरिमा और बाज़ार का दबाव; शोषण के विरुद्ध नैतिक दायित्व)
- Prelims: सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 (Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021), अंडाणु दान (Oocyte Donation) और दाता की आयु-सीमा व जीवनकाल में अधिकतम संग्रह की सीमा, राष्ट्रीय ART एवं सरोगेसी बोर्ड और राज्य बोर्ड, सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 (Surrogacy (Regulation) Act, 2021), IVF (In Vitro Fertilisation) और ART क्लिनिकों का पंजीकरण, अनुच्छेद 21 — गरिमा, दैहिक स्वतंत्रता और स्वास्थ्य का अधिकार, अनुच्छेद 23 — मानव तस्करी और बेगार का प्रतिषेध, राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग की भूमिका (सलाहकारी व जाँच-आधारित कार्य)
- Essay: जब शरीर भी बाज़ार की वस्तु बन जाए: प्रजनन-श्रम, आर्थिक विवशता और मानव गरिमा, नियम हैं, पर अमल कमज़ोर क्यों: नियामक व्यवस्था में जवाबदेही की कमी
त्वरित पुनरावृत्ति: सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत ART क्लिनिकों का पंजीकरण अनिवार्य है और अंडाणु दान केवल चिकित्सकीय व्यय की प्रतिपूर्ति तक सीमित है; वाणिज्यिक शोषण अनुच्छेद 21 (गरिमा, स्वास्थ्य) और अनुच्छेद 23 (मानव तस्करी का प्रतिषेध) दोनों का उल्लंघन है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हैदराबाद में एक अवैध अंडाणु संग्रह रैकेट के मामले में कुछ एजेंटों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है, जबकि पाँच प्रजनन केंद्रों के नाम शिकायतों में सामने आए हैं। एक साथ हुए छापों में 43 महिलाओं को बचाया गया। आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को एक दान-चक्र के लिए ₹20,000 से ₹30,000 दिए जाते थे, जबकि इस व्यवस्था से जुड़े लोग प्रति चक्र औसतन लगभग ₹3 लाख कमाते थे। तेलंगाना राज्य महिला आयोग ने प्रश्न उठाया है कि अस्पतालों और प्रजनन केंद्रों के विरुद्ध अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जबकि उसने व्यापक जाँच के निर्देश दिए थे। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल जाँच और कठोर कार्रवाई की माँग की है। यह मामला नियामक ढाँचे के क्रियान्वयन, संस्थागत जवाबदेही और महिलाओं की शारीरिक स्वायत्तता व गरिमा की सुरक्षा से जुड़ा है।
पृष्ठभूमि
- सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) के माध्यम से बांझपन के उपचार में IVF जैसी तकनीकों का प्रयोग बढ़ा है, जिससे अंडाणु दान का क्षेत्र भी विस्तृत हुआ है। इसी के साथ इसके दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ा है।
- भारत में ART और सरोगेसी के नियमन के लिए 2021 में दो अलग-अलग कानून बनाए गए। इनका उद्देश्य वाणिज्यिक शोषण रोकना, दाताओं के अधिकार सुरक्षित करना और क्लिनिकों को पंजीकरण के अधीन लाना है।
- आर्थिक विवशता से जूझ रही महिलाओं को कम भुगतान पर शरीर से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए तैयार करना मानव तस्करी और शोषण के दायरे में आ सकता है। इसी कारण यह मामला केवल स्वास्थ्य-नियमन का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का भी है।
- महिला आयोग एक वैधानिक निकाय है, जो शिकायतों की जाँच करता है और संबंधित प्राधिकरणों को सिफारिश या निर्देश देता है। अभियोजन और दंड का अधिकार पुलिस, न्यायपालिका और संबंधित नियामक प्राधिकरणों के पास होता है।
- इस प्रकरण में प्रारंभिक कार्रवाई एजेंटों तक सीमित रही, जबकि संस्थागत जिम्मेदारी तय होना अभी शेष है। यह अंतर नियामक निगरानी और प्रवर्तन की चुनौती को दर्शाता है।
सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) का नियामक ढाँचा क्या है?
- सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (Assisted Reproductive Technology – ART) में IVF, अंडाणु या शुक्राणु दान जैसी प्रक्रियाएँ आती हैं, जिनके माध्यम से संतान प्राप्ति में कठिनाई वाले दंपतियों को चिकित्सकीय सहायता दी जाती है।
- सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अंतर्गत ART क्लिनिकों और बैंकों का पंजीकरण अनिवार्य है। बिना पंजीकरण के ऐसी सेवाएँ देना दंडनीय अपराध है।
- इस अधिनियम में अंडाणु दाता की आयु-सीमा और एक महिला से जीवनकाल में अंडाणु संग्रह की अधिकतम संख्या निर्धारित की गई है, ताकि दाता के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।
- दाता को केवल वास्तविक चिकित्सकीय व्यय और बीमा जैसी प्रतिपूर्ति मिल सकती है; दान को व्यावसायिक लेन-देन बनाना निषिद्ध है। इसी सिद्धांत से वाणिज्यिक शोषण पर रोक लगती है।
- अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय ART एवं सरोगेसी बोर्ड और राज्य बोर्ड गठित किए गए हैं, जो नीति-सलाह, पंजीकरण की निगरानी और नियमों के पालन से जुड़े कार्य देखते हैं।
- सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 वाणिज्यिक सरोगेसी पर रोक लगाता है और केवल कुछ शर्तों के अधीन परोपकारी सरोगेसी की अनुमति देता है। यह अंडाणु दान से संबंधित नैतिक-कानूनी सीमाओं को समझने में सहायक है।
- संवैधानिक रूप से अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गरिमा, दैहिक स्वतंत्रता और स्वास्थ्य का अधिकार आता है, जबकि अनुच्छेद 23 मानव तस्करी और बेगार का प्रतिषेध करता है। आर्थिक विवशता का लाभ उठाकर शरीर का उपयोग इन दोनों सिद्धांतों के विपरीत है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अंडाणु संग्रह का कथित अवैध नेटवर्क | एक साथ हुए छापों में 43 महिलाओं को मुक्त कराया गया और कुछ एजेंटों के विरुद्ध मामले दर्ज हुए |
| आर्थिक शोषण का स्वरूप | आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं को कथित तौर पर ₹20,000 से ₹30,000 प्रति चक्र दिए जाते थे, जबकि संचालकों की औसत आय लगभग ₹3 लाख प्रति चक्र बताई गई |
| संस्थागत उत्तरदायित्व | पाँच प्रजनन केंद्रों के नाम सामने आए हैं, परंतु उनके विरुद्ध अब तक ठोस विधिक कार्रवाई नहीं हुई है |
| राज्य महिला आयोग की भूमिका | आयोग ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से व्यापक जाँच और कठोर कार्रवाई का आग्रह किया तथा विलंब पर गंभीर परिणामों की चेतावनी दी |
| मुख्य आरोपी की स्थिति | पीड़िताओं द्वारा नामित एक व्यक्ति का पता नहीं है और उसके विरुद्ध अभी तक मामला दर्ज नहीं हुआ है |
महत्व
मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय
- शरीर पर स्वायत्तता, गरिमा और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारों का सीधा प्रश्न इस मामले में निहित है
- आर्थिक विवशता के कारण महिलाओं की सहमति को वास्तविक स्वैच्छिक सहमति मानना कठिन है, इसलिए शोषण की संभावना बढ़ जाती है
- सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को निशाना बनाना असमानता और सुभेद्यता के चक्र को गहरा करता है
विधिक एवं नियामकीय
- सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (Assisted Reproductive Technology) का नियमन सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (नियमन) अधिनियम, 2021 के अंतर्गत होता है, जिसमें क्लिनिकों का पंजीकरण और गैमीट (जनन कोशिका) दान के नियम शामिल हैं
- दाता को चिकित्सकीय व्यय और बीमा के अतिरिक्त भुगतान की अनुमति सामान्यतः नहीं है, इसलिए नकद प्रलोभन वाला व्यापार विधि के सीधे उल्लंघन की श्रेणी में आता है
- बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता, 2023) के मानव-तस्करी संबंधी प्रावधान भी ऐसे मामलों में प्रासंगिक हो सकते हैं, जहाँ शोषण के उद्देश्य से व्यक्तियों की भर्ती या ढुलाई हो
स्वास्थ्य एवं नैतिक आयाम
- बार-बार अंडाणु संग्रह से महिलाओं के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकते हैं, जिनकी निगरानी और परामर्श अनिवार्य है
- चिकित्सा पेशे की नैतिकता और सूचित सहमति (Informed Consent) के सिद्धांतों का पालन इस क्षेत्र की साख के लिए आवश्यक है
शासन-व्यवस्था
- राज्य स्तर पर स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और महिला आयोग के बीच समन्वय की कमी से जाँच में विलंब होता है
- ऐसे मामले दिखाते हैं कि नियामक ढाँचे का प्रभाव तभी होता है जब निरीक्षण, पंजीकरण-निरस्तीकरण और दंड का प्रभावी क्रियान्वयन हो
चुनौतियाँ
1. आर्थिक विवशता और वास्तविक सहमति का अभाव
- गरीबी और ऋण के दबाव में महिलाएँ जोखिम भरी चिकित्सीय प्रक्रिया के लिए तैयार हो जाती हैं
- सूचना की कमी और दलालों पर निर्भरता के कारण महिलाएँ अपने अधिकारों और दुष्परिणामों से अनभिज्ञ रहती हैं
- भुगतान की असमानता यह दर्शाती है कि लाभ का बड़ा हिस्सा मध्यस्थों के पास जाता है
यूपीएससी लिंक: सामाजिक-आर्थिक असमानता; अनुच्छेद 39(ङ) से संबंधित नीति-विश्लेषण
2. चिकित्सा-नियमन का प्रवर्तन
- क्लिनिकों और प्रयोगशालाओं की नियमित जाँच और पंजीकरण की निगरानी प्रभावी नहीं रही प्रतीत होती
- अधिनियम के होते हुए भी दाताओं के रिकॉर्ड, आयु-सीमा और दान की संख्या का सत्यापन व्यवहार में कठिन है
- नियामक निकायों के बीच स्पष्ट उत्तरदायित्व-विभाजन आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य प्रशासन; सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (नियमन) अधिनियम, 2021 का प्रवर्तन
3. जाँच में विलंब और संस्थागत संरक्षण की आशंका
- आयोग के निर्देशों के बावजूद संस्थानों पर ठोस कदम न उठना प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्न उठाता है
- आरोपी का फरार या अनुपलब्ध होना जाँच की गति और साक्ष्य संग्रह को प्रभावित करता है
- शिकायतों पर समयबद्ध प्राथमिकी और जाँच-प्रक्रिया का अभाव न्याय में बाधा बनता है
यूपीएससी लिंक: प्रशासनिक जवाबदेही; शासन में पारदर्शिता और सिविल सेवा की भूमिका
4. मानव-तस्करी और संगठित शोषण के रूप में पहचान
- ऐसे नेटवर्क में भर्ती, ढुलाई और शोषण की कड़ियाँ होती हैं, जिन्हें संगठित अपराध के रूप में देखना आवश्यक है
- एजेंटों के साथ-साथ संस्थागत सहभागिता की जाँच, केवल छोटे दलालों तक सीमित कार्रवाई से पूरी नहीं होती
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा; संगठित अपराध और मानव-तस्करी का नियंत्रण
5. राज्य और केंद्र के बीच समन्वय
- लोक स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है, जबकि सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी से संबंधित केंद्रीय विधि का क्रियान्वयन राज्य बोर्डों के माध्यम से होता है
- अंतर-राज्यीय नेटवर्क होने पर राज्यों के बीच सूचना-साझाकरण की व्यवस्था आवश्यक हो जाती है
यूपीएससी लिंक: संघवाद; राज्य सूची की प्रविष्टि 6 (लोक स्वास्थ्य) और केंद्र-राज्य समन्वय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| सहमति की गुणवत्ता | आर्थिक दबाव में दी गई सहमति को स्वैच्छिक मानना नैतिक और विधिक रूप से संदिग्ध है |
| स्वास्थ्य जोखिम | बार-बार चिकित्सीय उत्तेजना और संग्रह प्रक्रिया से दीर्घकालिक स्वास्थ्य हानि की आशंका |
| नियामक निगरानी | क्लिनिकों के निरीक्षण और रिकॉर्ड-सत्यापन में कमी से अवैध गतिविधि पनपती है |
| जाँच में विलंब | संस्थानों और आरोपी पर कार्रवाई न होने से साक्ष्य नष्ट होने और अपराधियों के बच निकलने का खतरा |
| एजेंट-आधारित तंत्र | दलालों की परत से वास्तविक लाभार्थियों की पहचान कठिन हो जाती है |
| एकसमान प्रवर्तन | राज्यों की क्षमता और प्राथमिकता में अंतर से नियम-पालन असमान रहता है |
आगे की राह
- सभी नामित प्रजनन केंद्रों और प्रयोगशालाओं की स्वतंत्र और समयबद्ध जाँच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर पंजीकरण निरस्त करने सहित कठोर कार्रवाई हो
- लंबित शिकायतों पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच स्पष्ट प्रक्रिया बनाई जाए
- सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (नियमन) अधिनियम, 2021 के अंतर्गत दाताओं के पंजीकरण, आयु-सीमा और दान की संख्या के डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था हो
- पीड़ित महिलाओं के लिए चिकित्सीय जाँच, परामर्श, पुनर्वास और विधिक सहायता सुनिश्चित की जाए
- आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं में अपने अधिकारों और सूचित सहमति के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाए
- राज्य महिला आयोग, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के बीच नियमित समन्वय बैठकें और साझा निगरानी तंत्र स्थापित हो
- अंतर-राज्यीय नेटवर्क की आशंका को देखते हुए राज्यों के बीच सूचना-आदान-प्रदान की व्यवस्था मज़बूत की जाए
- दलालों की भूमिका पर अंकुश के लिए उनके विरुद्ध संगठित अपराध और मानव-तस्करी के प्रावधानों के तहत कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (Assisted Reproductive Technology) या ART · सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 (Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021) · अंडाणु दान (Oocyte Donation) · शारीरिक स्वायत्तता (Bodily Autonomy) · अनुच्छेद 21 (Article 21) · अनुच्छेद 23 (Article 23) · मानव तस्करी (Human Trafficking) · आर्थिक भेद्यता (Economic Vulnerability) · विनियामक निरीक्षण (Regulatory Inspection) · चिकित्सीय नैतिकता (Medical Ethics) · राज्य महिला आयोग (State Women’s Commission) · राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: शरीर पर स्वायत्तता और गरिमा का अधिकार
- अनुच्छेद 23: मानव-तस्करी और बलात् श्रम का निषेध
- अनुच्छेद 39(ङ): आर्थिक विवशता से अनुपयुक्त व्यवसाय में प्रवेश पर रोक
अवधारणा प्रवाह
आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं की गरीबी और ऋण-दबाव को दलालों द्वारा भुगतान का प्रलोभन बनाया जाता है → दलाल और कथित केंद्र मिलकर महिलाओं की भर्ती और अंडाणु संग्रह की प्रक्रिया संचालित करते हैं → प्रति चक्र भारी लाभ होने से शोषण का आर्थिक प्रोत्साहन बढ़ता है और नेटवर्क का विस्तार होता है → एक साथ हुए छापों में 43 महिलाएँ मुक्त होती हैं और कुछ एजेंटों के विरुद्ध मामले दर्ज होते हैं → महिला आयोग संस्थानों और आरोपी पर कार्रवाई में विलंब पर प्रश्न उठाकर जाँच और दंड का दबाव बनाता है → सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रवर्तन, संस्थागत जाँच और जवाबदेही से ही नेटवर्क की जड़ पर प्रहार संभव है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के अंतर्गत सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी क्लिनिकों और बैंकों का पंजीकरण अनिवार्य है।
2. इस अधिनियम में मानव युग्मकों (Gametes) और भ्रूण की वाणिज्यिक खरीद-बिक्री निषिद्ध है।
3. इसके अंतर्गत राष्ट्रीय बोर्ड और राज्य बोर्ड की स्थापना का प्रावधान है।
4. यह अधिनियम केवल सरोगेसी को नियंत्रित करता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल तीन — कथन 1, 2 और 3 सही हैं, क्योंकि ART अधिनियम क्लिनिकों और बैंकों के पंजीकरण, युग्मकों व भ्रूण के वाणिज्यिक व्यापार पर रोक तथा राष्ट्रीय व राज्य बोर्ड का प्रावधान करता है। कथन 4 गलत है, क्योंकि यह अधिनियम सहायक प्रजनन की सभी प्रक्रियाओं को विनियमित करता है; सरोगेसी के लिए अलग सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए, जिनमें एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है:
अभिकथन (A): आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं से अंडाणु दान के नाम पर शोषण संवैधानिक दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है।
कारण (R): अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रजनन संबंधी निर्णय व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अंग माने गए हैं और शारीरिक स्वायत्तता की रक्षा राज्य का दायित्व है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही विकल्प चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — सर्वोच्च न्यायालय ने सुचिता श्रीवास्तव बनाम चंडीगढ़ प्रशासन (2009) मामले में प्रजनन संबंधी विकल्पों को अनुच्छेद 21 की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अंग माना। शोषण इसी स्वायत्तता का सीधा हनन है, इसलिए (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन सूची पर विचार कीजिए:
सूची I:
1. अनुच्छेद 23
2. राष्ट्रीय महिला आयोग
3. अनुच्छेद 15(3)
4. सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021
सूची II:
(a) बेगार और मानव तस्करी का प्रतिषेध
(b) राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 द्वारा स्थापित सांविधिक निकाय
(c) महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष उपबंध बनाने की राज्य की शक्ति
(d) ART क्लिनिकों और बैंकों का विनियमन
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-a, 2-b, 3-c, 4-d
- 1-c, 2-a, 3-b, 4-d
- 1-a, 2-c, 3-b, 4-d
- 1-d, 2-b, 3-c, 4-a
उत्तर: 1-a, 2-b, 3-c, 4-d — अनुच्छेद 23 बेगार और मानव तस्करी का प्रतिषेध करता है। राष्ट्रीय महिला आयोग राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 द्वारा स्थापित सांविधिक निकाय है। अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष उपबंध बनाने की शक्ति देता है। ART अधिनियम, 2021 क्लिनिकों और बैंकों के विनियमन से संबंधित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 ने प्रजनन उपचार क्षेत्र के विनियमन हेतु एक सुदृढ़ ढाँचा प्रदान किया है, फिर भी आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं से अवैध अंडाणु संग्रह के मामले सामने आते हैं। इस अधिनियम के प्रवर्तन में विद्यमान कमियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इसके साथ यह भी स्पष्ट कीजिए कि महिला दाताओं की शारीरिक स्वायत्तता और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए किन विधिक एवं संस्थागत उपायों की आवश्यकता है। (15 Marks)
रूपरेखा: 1. भूमिका: हैदराबाद मामले के तथ्य। 43 महिलाओं को समन्वित छापों में बचाया गया; कथित भुगतान ₹20,000 से ₹30,000 प्रति चक्र बनाम लगभग ₹3 लाख औसत लाभ। राज्य महिला आयोग की आपत्ति कि अस्पतालों और प्रयोगशालाओं के विरुद्ध ठोस कार्रवाई में विलंब है। पाँच केंद्रों के नाम और एक चिकित्सक के ठिकाने की अज्ञातता जैसे आरोप अभी जाँच का विषय हैं, इन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में न लिखें। 2. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 (सुचिता श्रीवास्तव बनाम चंडीगढ़ प्रशासन, 2009 में प्रजनन विकल्प; के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ, 2017 में निजता और शरीर पर व्यक्ति का अधिकार); अनुच्छेद 23 (मानव तस्करी और बेगार का प्रतिषेध); अनुच्छेद 15(3) (महिलाओं के लिए विशेष उपबंध)। 3. ART अधिनियम, 2021 के प्रमुख प्रावधान: क्लिनिकों और बैंकों का पंजीकरण; राष्ट्रीय और राज्य बोर्डों की स्थापना; युग्मकों व भ्रूण की वाणिज्यिक खरीद-बिक्री पर रोक; दाता की आयु व दान की संख्या संबंधी सीमाएँ जो नियमों के अनुसार लागू होती हैं; दंडात्मक प्रावधान। सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के साथ तुलना कीजिए कि दोनों विधियों की दृष्टि एक-दूसरे की पूरक है। 4. अन्य विधिक उपकरण: भारतीय न्याय संहिता, 2023 में मानव तस्करी से संबंधित प्रावधान; चिकित्सकीय आचरण का नियमन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और राज्य चिकित्सा परिषदों के अधीन। 5. संस्थागत ढाँचा और कमियाँ: पंजीकरण के बाद निरीक्षण की आवृत्ति और क्षमता; राज्य स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और महिला आयोग के बीच समन्वय का अभाव; प्रारंभिक शिकायतों पर प्राथमिकी दर्ज करने में विलंब; अवैध बाजार के भूमिगत होने का खतरा; डेटा-आधारित ट्रेसिंग की सीमाएँ। 6. बहुपक्षीय विचार: (क) आपराधिक दंड बनाम दाता की स्वैच्छिक सहमति, और आर्थिक एजेंसी का तर्क बनाम संरचनात्मक शोषण; (ख) अति-नियमन से वैध क्लिनिकों पर बोझ बनाम पर्याप्त सुरक्षा उपाय; (ग) मार्था नुसबाम के क्षमता दृष्टिकोण (Capabilities Approach) में शारीरिक अखंडता को केंद्रीय क्षमता माना गया है, जो दाता के पक्ष में विधि की व्याख्या का आधार है। 7. निष्कर्ष और उपाय: पंजीकृत केंद्रों का सत्यापित डेटाबेस; आकस्मिक निरीक्षण; स्वास्थ्य, पुलिस और महिला आयोग के बीच समयबद्ध समन्वित जाँच; दोषी केंद्रों के विरुद्ध लाइसेंस निलंबन और अभियोजन; पीड़ित महिलाओं का पुनर्वास, परामर्श और गवाह संरक्षण; निर्णय में नैतिक आचार संहिता और जन-जागरूकता का समावेश।
स्रोत: The Hindu
Telangana PCS (TGPSC (TSPSC)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हाल ही में हैदराबाद में उजागर हुए अवैध ऊसाइट (अंडाणु) रैकेट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस रैकेट में पांच फर्टिलिटी सेंटर शामिल पाए गए हैं।
2. तेलंगाना महिला आयोग ने इस मामले में निष्क्रियता पर सवाल उठाया है।
3. यह मामला मुख्य रूप से तेलंगाना के ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाओं को निशाना बनाने से संबंधित है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — दिए गए विषय के अनुसार, अवैध ऊसाइट रैकेट में पांच फर्टिलिटी सेंटर शामिल थे और तेलंगाना महिला आयोग ने निष्क्रियता पर सवाल उठाया था। ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाओं को निशाना बनाने का उल्लेख नहीं है।
Mains: हैदराबाद में अवैध ऊसाइट रैकेट के हालिया खुलासे के आलोक में, तेलंगाना में प्रजनन क्लीनिकों के विनियमन और महिला स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए जा सकने वाले कदमों पर चर्चा करें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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