एल नीनो: दुनिया के सामने जलवायु अनुकूलन की चुनौती

How El Niño offers a test of whether the world can adapt to a changing climate — diagram

एल नीनो: दुनिया के सामने जलवायु अनुकूलन की चुनौती

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El Niño Impact Chain

✎ अल नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की एक प्राकृतिक घटना है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है और भारत में कमजोर मानसून तथा सूखे का कारण बन सकती है, जिसके प्रभावों को जलवायु…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भौतिक भूगोल, जलवायु विज्ञान)  |  GS Paper III — पर्यावरण (जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन), अर्थव्यवस्था (कृषि, खाद्य सुरक्षा)
  • Prelims: अल नीनो, ला नीना, ENSO, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, कृषि पर प्रभाव, भारत का मानसून, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO), खाद्य और कृषि संगठन (FAO)
  • Essay: जलवायु परिवर्तन के युग में अनुकूलन की चुनौतियाँ और अवसर, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में वैज्ञानिक पूर्वानुमानों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: अल नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की एक प्राकृतिक घटना है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है और भारत में कमजोर मानसून तथा सूखे का कारण बन सकती है, जिसके प्रभावों को जलवायु परिवर्तन और भी बढ़ा रहा है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो (El Niño) की घटना, जो पहले से ही गर्म हो चुकी दुनिया में और अधिक तीव्र हो रही है, सूखे, बाढ़ और फसल के नुकसान का जोखिम बढ़ा रही है। यह स्थिति दुनिया के कुछ सबसे महत्वपूर्ण खाद्य उत्पादक क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है।

पृष्ठभूमि

  • अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान और वायुमंडलीय दबाव में बड़े पैमाने पर बदलाव को संदर्भित करता है, जिसके दो चरम चरण अल नीनो और ला नीना हैं।
  • अल नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सामान्य से अधिक गर्म सतही जल की स्थिति है, जबकि ला नीना सामान्य से अधिक ठंडे सतही जल की स्थिति है।
  • ये प्राकृतिक जलवायु पैटर्न वैश्विक मौसम और जलवायु पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं, विशेषकर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में।
  • वैज्ञानिकों द्वारा अल नीनो की निगरानी की जाती है और इसके विकास का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है, जिससे सरकारों को तैयारी के लिए बहुमूल्य समय मिलता है।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और खाद्य और कृषि संगठन (FAO) जैसी संस्थाएँ अल नीनो के कृषि और खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करने के लिए डेटा और पूर्वानुमानों का उपयोग करती हैं।
  • भारत में, अल नीनो की घटनाएँ अक्सर कमजोर मानसून, सूखे और कृषि उत्पादन में कमी से जुड़ी होती हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ता है।

अल नीनो क्या है?

  • अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि को दर्शाता है, जो सामान्यतः हर 2 से 7 साल में होता है।
  • यह एक जटिल मौसम पैटर्न है जो प्रशांत महासागर के पूर्वी और मध्य भागों में सतही जल के गर्म होने से शुरू होता है।
  • अल नीनो के दौरान, व्यापारिक हवाएँ (Trade Winds) कमजोर पड़ जाती हैं या अपनी दिशा बदल देती हैं, जिससे गर्म पानी पश्चिमी प्रशांत से पूर्वी प्रशांत की ओर बढ़ने लगता है।
  • यह वैश्विक स्तर पर वर्षा पैटर्न, तापमान और मौसम की घटनाओं को प्रभावित करता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में सूखा और अन्य में भारी वर्षा हो सकती है।
  • भारत में, अल नीनो का संबंध अक्सर कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून से होता है, जिससे कृषि उत्पादन और जल संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • ला नीना (La Niña) अल नीनो का विपरीत चरण है, जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक ठंडा हो जाता है, और यह अक्सर मजबूत मानसून और अधिक वर्षा से जुड़ा होता है।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण, अल नीनो जैसी प्राकृतिक घटनाएँ अब एक उच्च आधार रेखा पर घटित हो रही हैं, जिसका अर्थ है कि उनके प्रभाव अधिक तीव्र और विनाशकारी हो सकते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अल नीनो का सुदृढ़ीकरण यह एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है जो उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में असामान्य रूप से गर्म पानी से जुड़ा है, जिससे दुनिया भर में वर्षा पैटर्न और तापमान बाधित हो सकता है।
बढ़ते वैश्विक तापमान में अल नीनो अल नीनो अब एक ऐसे समय में आ रहा है जब दुनिया पहले से ही अधिक गर्म है, जिससे इसके प्रभावों, जैसे सूखा, बाढ़ और फसल के नुकसान की तीव्रता बढ़ जाती है।
पूर्वानुमेय आपदा अन्य कई आपदाओं के विपरीत, अल नीनो के आने का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। वैज्ञानिक इसके विकास को ट्रैक कर सकते हैं, जिससे सरकारों को तैयारी के लिए बहुमूल्य समय मिल जाता है।
कृषि पर प्रभाव यह वर्षा पैटर्न और तापमान को बदल देता है, जिससे कई क्षेत्रों में फसल और खाद्य आपूर्ति प्रभावित होती है, जिससे खाद्य सुरक्षा संकट पैदा हो सकता है।
WMO और FAO की भूमिका विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) बड़े पैमाने पर परिवर्तनों को ट्रैक करता है, जबकि खाद्य और कृषि संगठन (FAO) कृषि पर अल नीनो के प्रभावों पर चार दशकों से अधिक का डेटा प्रदान करता है, जिससे कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलती है।

महत्व

खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव

  • अल नीनो के कारण सूखे और बाढ़ से फसलें नष्ट हो सकती हैं, जिससे खाद्य उत्पादन में कमी आती है और खाद्य सुरक्षा (Food Security) को खतरा होता है।
  • पशुधन के लिए चारे की कमी हो सकती है, जिससे पशुधन-आधारित आजीविका और खाद्य आपूर्ति प्रभावित होगी।

आर्थिक प्रभाव

  • कृषि उत्पादन में कमी से किसानों की आय प्रभावित होती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ता है।
  • खाद्य कीमतों में वृद्धि से मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ सकती है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ पड़ता है।

जलवायु अनुकूलन की परीक्षा

  • अल नीनो की पूर्वानुमान क्षमता दुनिया के लिए बदलती जलवायु के अनुकूल होने की अपनी क्षमता का परीक्षण करने का अवसर प्रदान करती है।
  • यह देशों को दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के लिए तैयार रहने और भविष्य की अप्रत्याशित जलवायु के लिए योजना बनाने का अवसर देता है।

आपदा प्रबंधन

  • अल नीनो के पूर्वानुमान से सरकारों को आपदा प्रबंधन (Disaster Management) रणनीतियों को सक्रिय करने, जैसे कि खाद्य भंडार बनाना और कमजोर आबादी को सहायता प्रदान करना, में मदद मिलती है।
  • यह प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और जोखिम मानचित्रण के महत्व को उजागर करता है, जिससे लक्षित हस्तक्षेप संभव हो पाते हैं।

चुनौतियाँ

1. खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना

  • अल नीनो के कारण होने वाले फसल नुकसान और खाद्य आपूर्ति में व्यवधान से निपटने के लिए पर्याप्त खाद्य भंडार और वितरण प्रणाली सुनिश्चित करना।
  • कमजोर आबादी तक समय पर सहायता पहुंचाना और कुपोषण को रोकना।

2. जलवायु अनुकूलन रणनीतियाँ

  • किसानों को जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियों (Climate-Resilient Agricultural Practices) को अपनाने में सहायता करना, जैसे सूखा-प्रतिरोधी फसलें और कुशल सिंचाई तकनीकें।
  • दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुकूलन योजनाओं को लागू करना।

3. प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण

  • अल नीनो जैसे जलवायु पैटर्न के सटीक और समय पर पूर्वानुमान के लिए मौसम विज्ञान बुनियादी ढांचे और डेटा विश्लेषण क्षमताओं को बढ़ाना।
  • किसानों और स्थानीय समुदायों तक चेतावनी संदेशों का प्रभावी ढंग से संचार सुनिश्चित करना।

4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

  • अल नीनो के वैश्विक प्रभावों से निपटने के लिए देशों के बीच डेटा साझाकरण, अनुसंधान और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान बढ़ाना।
  • कमजोर देशों को जलवायु अनुकूलन और आपदा तैयारियों के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
फसल नुकसान सूखा और बाढ़ के कारण फसलें नष्ट हो सकती हैं, जिससे खाद्य उत्पादन में कमी आती है।
खाद्य मूल्य वृद्धि खाद्य आपूर्ति में कमी से कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे मुद्रास्फीति और खाद्य असुरक्षा बढ़ती है।
जल संकट वर्षा पैटर्न में बदलाव से कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी हो सकती है, जिससे कृषि और मानव उपभोग प्रभावित होता है।
आजीविका का नुकसान किसानों और कृषि श्रमिकों की आय प्रभावित होती है, जिससे ग्रामीण गरीबी बढ़ सकती है।
स्वास्थ्य जोखिम पानी की कमी और कुपोषण से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana)
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (Rashtriya Krishi Vikas Yojana)
  • मनरेगा (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act – MGNREGA)

आगे की राह

  • अल नीनो के प्रभावों को कम करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं को सुदृढ़ करना।
  • किसानों को जलवायु-लचीली फसल किस्मों और कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त खाद्य भंडार बनाए रखना और लक्षित वितरण प्रणाली स्थापित करना।
  • जल संरक्षण और कुशल सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देना ताकि पानी की कमी से निपटा जा सके।
  • आपदा प्रबंधन योजनाओं को अद्यतन करना और कमजोर समुदायों के लिए त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना।
  • जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन प्रयासों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
  • कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अल नीनो · जलवायु परिवर्तन · खाद्य सुरक्षा · कृषि · आपदा प्रबंधन · अनुकूलन · वैश्विक तापन · मौसम विज्ञान · प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली · सतत विकास · संयुक्त राष्ट्र · विश्व मौसम विज्ञान संगठन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार (खाद्य सुरक्षा से संबंधित)
  • अनुच्छेद 48: कृषि और पशुपालन का संगठन (राज्य का कर्तव्य)
  • अनुच्छेद 243G: पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व (स्थानीय विकास में भूमिका)
  • सातवीं अनुसूची: संघ सूची (रक्षा, अंतर्राष्ट्रीय संबंध), राज्य सूची (कृषि, जल), समवर्ती सूची (पर्यावरण)

अवधारणा प्रवाह

अल नीनो का सुदृढ़ीकरण (उष्णकटिबंधीय प्रशांत में गर्म पानी)  →  वैश्विक वर्षा पैटर्न और तापमान में बदलाव  →  सूखा, बाढ़ और चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि  →  कृषि उत्पादन में कमी और फसल का नुकसान  →  खाद्य सुरक्षा पर खतरा और आर्थिक प्रभाव  →  जलवायु अनुकूलन और आपदा प्रबंधन की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल नीनो प्रशांत महासागर में असामान्य रूप से गर्म सतही जल से जुड़ा एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है।
2. अल नीनो की घटनाएँ वैश्विक तापमान को कम करने में मदद करती हैं क्योंकि वे वायुमंडल से गर्मी को अवशोषित करती हैं।
3. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) अल नीनो की तीव्रता का पूर्वानुमान लगा सकता है, जिससे सरकारों को तैयारी के लिए समय मिल जाता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अल नीनो उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ा है। कथन 2 गलत है। अल नीनो की घटनाएँ अक्सर वैश्विक तापमान को बढ़ाती हैं, न कि कम करती हैं, क्योंकि वे मौजूदा वैश्विक तापन के साथ मिलकर प्रभाव को बढ़ाती हैं। कथन 3 सही है। WMO जैसी संस्थाएँ अल नीनो की निगरानी और पूर्वानुमान लगा सकती हैं, जिससे देशों को सूखे, बाढ़ और फसल के नुकसान जैसे संभावित प्रभावों के लिए तैयारी करने का अवसर मिलता है।

Q2. अल नीनो के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. यह उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में उत्पन्न होता है।
  2. यह वर्षा पैटर्न और तापमान को प्रभावित करता है।
  3. यह केवल सूखे का कारण बनता है, बाढ़ का नहीं।
  4. यह खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

उत्तर: यह केवल सूखे का कारण बनता है, बाढ़ का नहीं। — अल नीनो वर्षा पैटर्न और तापमान को बदलता है, जिससे दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में सूखा और बाढ़ दोनों हो सकते हैं। यह केवल सूखे का कारण नहीं बनता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अल नीनो जैसी जलवायु घटनाएँ खाद्य सुरक्षा और कृषि पर किस प्रकार गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं? इन प्रभावों को कम करने के लिए भारत जैसे देश क्या अनुकूलन रणनीतियाँ अपना सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** अल नीनो का संक्षिप्त परिचय और वैश्विक जलवायु पर इसके प्रभाव।
2. **खाद्य सुरक्षा और कृषि पर प्रभाव:**
* **फसल उत्पादन पर प्रभाव:** सूखे, बाढ़, कीटों का प्रकोप।
* **पशुधन और मत्स्य पालन:** चारे की कमी, जल स्रोतों का सूखना, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तन।
* **खाद्य कीमतों में वृद्धि:** आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, मुद्रास्फीति (Inflation)।
* **ग्रामीण आजीविका पर प्रभाव:** किसानों की आय में कमी, पलायन।
* **कुपोषण और स्वास्थ्य:** खाद्य असुरक्षा के कारण स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ।
3. **अनुकूलन रणनीतियाँ (भारत के संदर्भ में):**
* **प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning Systems):** मौसम पूर्वानुमान और कृषि सलाह सेवाओं का सुदृढ़ीकरण (जैसे IMD की सेवाएँ)।
* **जल प्रबंधन:** वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting), सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation), नहरों का आधुनिकीकरण।
* **फसल विविधीकरण और जलवायु-लचीली फसलें:** सूखा-प्रतिरोधी और बाढ़-प्रतिरोधी किस्मों का विकास और प्रोत्साहन।
* **कृषि बीमा योजनाएँ:** प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का प्रभावी कार्यान्वयन।
* **खाद्य भंडारण और वितरण:** बफर स्टॉक का रखरखाव, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System – PDS) का सुदृढ़ीकरण।
* **अनुसंधान और विकास:** कृषि-जलवायु अनुसंधान में निवेश, नई तकनीकों का विकास।
* **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** वैश्विक स्तर पर डेटा साझाकरण और तकनीकी सहायता।
4. **निष्कर्ष:** जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में अल नीनो जैसी घटनाओं से निपटने के लिए एक समन्वित और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: news.un.org


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