23 Sep यूपीएससी/पीसीएस के लिए दूरसंचार विनिर्माण में निवेश: ग्वालियर टीएमजेड के अवसर
✎ दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) भारत को दूरसंचार प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को साकार करती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था (सहकारी संघवाद) | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था (विनिर्माण क्षेत्र, अवसंरचना, निवेश मॉडल) | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (दूरसंचार प्रौद्योगिकी, नवाचार)
- Prelims: दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ), आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना, सहकारी संघवाद, डिजाइन इन इंडिया
- Essay: आत्मनिर्भर भारत का मार्ग: चुनौतियाँ और अवसर, भारत में विनिर्माण क्षेत्र का पुनरुत्थान: आर्थिक संवृद्धि का नया इंजन
त्वरित पुनरावृत्ति: दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) भारत को दूरसंचार प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
दूरसंचार विभाग (DoT) ने बेंगलुरु में दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र के लिए तीसरे निवेशक गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थापित किए जा रहे भारत के पहले एकीकृत दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) में निवेश, नवाचार और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना था। केंद्रीय संचार मंत्री और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के नेताओं और संभावित निवेशकों ने भाग लिया, जहाँ लगभग 700 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई।
पृष्ठभूमि
- प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अनुरूप भारत में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) की स्थापना की जा रही है।
- ग्वालियर में स्थापित होने वाला यह TMZ भारत का पहला एकीकृत दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र होगा, जो दूरसंचार उत्पादों के डिजाइन, विकास और उत्पादन के लिए एक समर्पित पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करेगा।
- दूरसंचार विभाग द्वारा निवेशकों तक पहुँचने के लिए यह तीसरा गोलमेज सम्मेलन था, जिसका उद्देश्य उद्योग जगत के साथ जुड़कर घरेलू दूरसंचार विनिर्माण और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
- केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार इस पहल में मिलकर काम कर रही हैं, जहाँ राज्य सरकार लगभग 8,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन और सब्सिडी प्रदान कर रही है, जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उदाहरण है।
- भारत अब सेवा-प्रधान राष्ट्र से उत्पाद-प्रधान राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसमें दूरसंचार क्षेत्र को अगला महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है।
- सरकार की प्राथमिकताएं घरेलू मूल्यवर्धन बढ़ाना, भारत में बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) का सृजन करना और भारतीय डिज़ाइन तथा निर्मित उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) क्या है?
- दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) एक समर्पित औद्योगिक क्षेत्र है जिसे दूरसंचार उपकरणों और संबंधित उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- इसका उद्देश्य भारत को दूरसंचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजाइन इन इंडिया’ के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है।
- TMZ में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार विभिन्न प्रोत्साहन और सब्सिडी प्रदान करती है, जिससे निजी क्षेत्र को विनिर्माण, नवाचार और विस्तार के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
- यह क्षेत्र अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने, मूल्यवर्धन बढ़ाने और निर्यात को समर्थन देने पर केंद्रित है, जिससे भारत वैश्विक दूरसंचार आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन सके।
- ग्वालियर में स्थापित होने वाला TMZ भारत का पहला ऐसा एकीकृत क्षेत्र होगा, जो दूरसंचार उद्योग के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करेगा।
- यह पहल भारत को सेवा-प्रधान अर्थव्यवस्था से उत्पाद-प्रधान अर्थव्यवस्था में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका लक्ष्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद बनाना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| भारत का पहला एकीकृत दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) | घरेलू दूरसंचार विनिर्माण और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित पारिस्थितिकी तंत्र |
| ग्वालियर, मध्य प्रदेश में स्थापना | क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन को प्रोत्साहन, ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप |
| केंद्र और राज्य सरकार का सहयोगात्मक दृष्टिकोण | सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का उदाहरण; निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन |
| निवेशक गोलमेज सम्मेलन | उद्योग जगत के हितधारकों और संभावित निवेशकों को एक मंच पर लाना, निवेश के अवसरों पर चर्चा करना |
| घरेलू मूल्यवर्धन और बौद्धिक संपदा सृजन पर जोर | भारत को सेवा-प्रधान से उत्पाद-प्रधान राष्ट्र में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम |
महत्व
आर्थिक महत्व
- दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में घरेलू निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को मजबूती मिलेगी।
- नए उद्योगों की स्थापना से रोजगार के अवसर सृजित होंगे, विशेषकर मध्य प्रदेश के ग्वालियर क्षेत्र में।
- उत्पाद-प्रधान राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की प्रगति को गति मिलेगी, जिससे निर्यात में वृद्धि और व्यापार घाटे में कमी आ सकती है।
सामरिक महत्व
- दूरसंचार उपकरणों के घरेलू विनिर्माण से आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।
- स्वदेशी नवाचार और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) के सृजन से भारत वैश्विक दूरसंचार बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरेगा।
- ‘डिजाइन इन इंडिया’ पर ध्यान केंद्रित करने से भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद विकसित कर सकेगा।
शासनिक महत्व
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग ‘सहकारी संघवाद’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो बड़े पैमाने की परियोजनाओं के लिए आवश्यक है।
- निवेशकों के मुद्दों को 48 घंटे के भीतर हल करने की प्रतिबद्धता एक अनुकूल कारोबारी माहौल बनाने के लिए सरकार की सक्रियता को दर्शाती है।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी क्षमता और अनुसंधान एवं विकास
- घरेलू विनिर्माण को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास (R&D) में पर्याप्त निवेश की आवश्यकता है।
- सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण घटकों के लिए अभी भी आयात पर निर्भरता है, जिसे कम करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ
2. कौशल विकास और मानव संसाधन
- दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में आवश्यक कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती है, जिसके लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता होगी।
- उच्च-तकनीकी विनिर्माण के लिए इंजीनियरों और तकनीशियनों को आकर्षित करना और बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: कौशल विकास योजनाएँ
3. वैश्विक प्रतिस्पर्धा और बाजार पहुंच
- वैश्विक दूरसंचार बाजार में स्थापित खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना और भारतीय उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार पहुंच बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- गुणवत्ता मानकों और लागत-प्रभावशीलता को बनाए रखना वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: उदारीकरण के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
4. बुनियादी ढाँचा और लॉजिस्टिक्स
- विनिर्माण इकाइयों के लिए आवश्यक विश्व-स्तरीय बुनियादी ढाँचा, जैसे बिजली, कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स, का विकास सुनिश्चित करना।
- कच्चे माल की आसान उपलब्धता और तैयार उत्पादों के वितरण के लिए कुशल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अनुसंधान एवं विकास में निवेश | घरेलू नवाचार को बढ़ावा देने और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पाद विकसित करने के लिए पर्याप्त निवेश की कमी। |
| कौशल अंतराल | दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र के लिए आवश्यक विशिष्ट कौशल वाले कार्यबल की कमी। |
| आपूर्ति श्रृंखला की भेद्यता | महत्वपूर्ण घटकों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भरता, जिससे वैश्विक झटकों के प्रति संवेदनशीलता। |
| नीतिगत निरंतरता | दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करने के लिए स्थिर और अनुमानित नीतिगत ढाँचे की आवश्यकता। |
| पर्यावरण संबंधी अनुपालन | विनिर्माण प्रक्रियाओं में पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना। |
आगे की राह
- दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को मजबूत करना।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना और उच्च-तकनीकी विनिर्माण के लिए कुशल कार्यबल तैयार करना।
- घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और महत्वपूर्ण घटकों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने हेतु प्रोत्साहन प्रदान करना।
- भारतीय दूरसंचार उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए गुणवत्ता मानकों और लागत-प्रभावशीलता पर ध्यान केंद्रित करना।
- निवेशकों के लिए एक स्थिर और अनुमानित नीतिगत वातावरण सुनिश्चित करना, जिसमें नियामक बाधाओं को कम किया जा सके।
- दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र के लिए आवश्यक विश्व-स्तरीय बुनियादी ढाँचे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विकास करना।
- ‘डिजाइन इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देना ताकि भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और नवाचारी उत्पादों का केंद्र बन सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र · आत्मनिर्भर भारत · मेक इन इंडिया · घरेलू मूल्यवर्धन · बौद्धिक संपदा · सहकारी संघवाद · निवेश गोलमेज सम्मेलन · उत्पाद-प्रधान राष्ट्र · डिजाइन इन इंडिया · रोजगार सृजन · नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र · निर्यात संवर्धन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा अनुदान’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची’}
अवधारणा प्रवाह
दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) की स्थापना → निवेशक गोलमेज सम्मेलन का आयोजन → घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करना → दूरसंचार विनिर्माण और नवाचार को बढ़ावा → आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को मजबूती → आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. दूरसंचार विभाग (DoT) ने बेंगलुरु में तीसरे निवेशक गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया।
2. ग्वालियर में भारत का पहला एकीकृत दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) स्थापित किया जा रहा है।
3. इस पहल का उद्देश्य भारत को सेवा-प्रधान राष्ट्र से उत्पाद-प्रधान राष्ट्र में बदलना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि दूरसंचार विभाग ने बेंगलुरु में तीसरे निवेशक गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया। कथन 2 सही है क्योंकि ग्वालियर में भारत का पहला एकीकृत दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) स्थापित किया जा रहा है। कथन 3 भी सही है क्योंकि केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अब सेवा-प्रधान राष्ट्र से उत्पाद-प्रधान राष्ट्र बनने की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है।
Q2. अभिकथन (A): दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) पहल सहकारी संघवाद का एक सशक्त उदाहरण है।
कारण (R): केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार मिलकर काम कर रही हैं, और राज्य सरकार लगभग 8,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन और सब्सिडी प्रदान कर रही है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र सहकारी संघवाद का एक उदाहरण है। कारण (R) भी सही है और A की सही व्याख्या करता है क्योंकि केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहयोग, जिसमें राज्य द्वारा प्रोत्साहन और सब्सिडी प्रदान करना शामिल है, सहकारी संघवाद को दर्शाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के पहले एकीकृत दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) की स्थापना ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों के अनुरूप है। इस पहल के उद्देश्यों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों का विस्तार से विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (TMZ) की अवधारणा और ग्वालियर में इसकी स्थापना का संक्षिप्त परिचय। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ से इसका संबंध।
2. **TMZ के मुख्य उद्देश्य:**
* घरेलू दूरसंचार विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करना।
* मूल्यवर्धन बढ़ाना।
* अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना।
* नवाचार को प्रोत्साहित करना।
* निर्यात को समर्थन देना।
* विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी दूरसंचार एवं इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना।
* ‘डिजाइन इन इंडिया’ पर जोर।
3. **भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव:**
* **आर्थिक संवृद्धि:** विनिर्माण क्षेत्र में निवेश से GDP में वृद्धि।
* **रोजगार सृजन:** प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर।
* **आयात प्रतिस्थापन:** दूरसंचार उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करना।
* **निर्यात संवर्धन:** ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ दृष्टिकोण के तहत वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाना।
* **तकनीकी आत्मनिर्भरता:** स्वदेशी बौद्धिक संपदा का सृजन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को कम करना।
* **निवेश आकर्षित करना:** घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करना, जैसा कि बेंगलुरु गोलमेज सम्मेलन में देखा गया।
* **सहकारी संघवाद का उदाहरण:** केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग का मॉडल।
* **उत्पाद-प्रधान राष्ट्र की ओर बदलाव:** सेवा-प्रधान अर्थव्यवस्था से विनिर्माण-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण।
4. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** संभावित चुनौतियों (जैसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा, तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता) का संक्षिप्त उल्लेख और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम।
5. **निष्कर्ष:** भारत को वैश्विक दूरसंचार विनिर्माण केंद्र बनाने में TMZ की भूमिका का सारांश।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: कर्नाटक सरकार द्वारा दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए आयोजित तीसरे निवेशक गोलमेज सम्मेलन का मुख्य फोकस क्या था?
- A. केवल विदेशी निवेश आकर्षित करना
- B. निवेश, नवाचार और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना
- C. केवल सरकारी सब्सिडी प्रदान करना
- D. केवल ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा विस्तार करना
उत्तर: B. निवेश, नवाचार और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना — इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में निवेश, नवाचार और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना था।
Mains: कर्नाटक में दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र के विकास के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और उनकी प्रभावकारिता का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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