यूके ने AI मानकों और फर्जी ख़बरों पर वैश्विक पहल की घोषणा, जानिए क्या है पूरा मामला

United Kingdom announces action on disinformation and global AI standards — diagram

यूके ने AI मानकों और फर्जी ख़बरों पर वैश्विक पहल की घोषणा, जानिए क्या है पूरा मामला

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Disinformation & AI Threats

✎ यूनाइटेड किंगडम भ्रामक सूचनाओं से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय सूचना रक्षा केंद्र स्थापित करेगा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित विकास के लिए वैश्विक मानकों पर सहयोग करेगा।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध, शासन व्यवस्था  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा
  • Prelims: भ्रामक सूचनाएँ (Disinformation), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI), साइबर सुरक्षा (Cyber Security), सूचना युद्ध (Information Warfare), राष्ट्रीय सूचना रक्षा केंद्र (National Centre for Information Defence), वैश्विक AI मानक (Global AI Standards)
  • Essay: डिजिटल युग में लोकतंत्र की चुनौतियाँ: भ्रामक सूचनाओं का प्रभाव, कृत्रिम बुद्धिमत्ता: अवसर, चुनौतियाँ और नैतिक शासन

त्वरित पुनरावृत्ति: यूनाइटेड किंगडम भ्रामक सूचनाओं से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय सूचना रक्षा केंद्र स्थापित करेगा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित विकास के लिए वैश्विक मानकों पर सहयोग करेगा।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले संबोधन में भ्रामक सूचनाओं (disinformation) से निपटने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) के लिए वैश्विक सुरक्षा मानक सुनिश्चित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में शत्रुतापूर्ण तत्वों द्वारा सूचना वातावरण पर ‘औद्योगिक पैमाने पर हमला’ हुआ है, जिसमें बॉट, फर्जी वेबसाइट और मनगढ़ंत समाचार लेखों का उपयोग करके झूठ और भ्रामक सूचनाएँ फैलाई गई हैं। प्रधानमंत्री ने AI के बढ़ते खतरे को भी रेखांकित किया और इसके सुरक्षित विकास के लिए वैश्विक सिद्धांतों और मानकों की आवश्यकता पर बल दिया।

पृष्ठभूमि

  • हाल के वर्षों में कई देशों में चुनावों को प्रभावित करने और सामाजिक अशांति फैलाने के लिए भ्रामक सूचनाओं का उपयोग एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
  • साइबर हमले और सूचना युद्ध (information warfare) राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा बन गए हैं, जिससे महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ प्रभावित हो रही हैं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में तेजी से हो रहे विकास ने इसके संभावित लाभों के साथ-साथ नैतिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी जन्म दिया है।
  • विभिन्न देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने AI के सुरक्षित और जिम्मेदार विकास के लिए वैश्विक सहयोग और साझा सिद्धांतों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
  • संयुक्त राष्ट्र भी AI जोखिमों को दूर करने के लिए देशों को एक साथ लाने और AI शासन पर साझा सिद्धांतों व प्रतिबद्धताओं को अपनाने का समर्थन करता है।
  • यूनाइटेड किंगडम ने पहले ही मोल्दोवा जैसे देशों को कथित रूसी हस्तक्षेप से चुनावों की रक्षा करने में सहायता की है, जो इस क्षेत्र में उसकी विशेषज्ञता को दर्शाता है।

भ्रामक सूचनाएँ (Disinformation) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्या हैं?

  • भ्रामक सूचनाएँ (Disinformation) जानबूझकर फैलाई गई गलत या भ्रामक जानकारी को संदर्भित करती हैं, जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, समूह, संगठन या देश को नुकसान पहुँचाना होता है।
  • यह अक्सर राजनीतिक उद्देश्यों, सामाजिक ध्रुवीकरण या आर्थिक लाभ के लिए उपयोग की जाती है और इसमें फर्जी खबरें, डीपफेक (deepfakes) और सोशल मीडिया बॉट शामिल हो सकते हैं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कंप्यूटर विज्ञान का एक क्षेत्र है जो मशीनों को मानव जैसी बुद्धिमत्ता प्रदर्शित करने में सक्षम बनाता है, जिसमें सीखना, समस्या-समाधान, निर्णय लेना और भाषा को समझना शामिल है।
  • फ्रंटियर AI (Frontier AI) AI प्रौद्योगिकी के सबसे अत्याधुनिक और शक्तिशाली रूपों को संदर्भित करता है, जिसमें अभूतपूर्व क्षमताएँ और संभावित जोखिम दोनों होते हैं।
  • AI के विकास से स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अर्थव्यवस्था जैसे विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन आ सकते हैं, लेकिन इसके साथ ही गोपनीयता, सुरक्षा, रोजगार और नैतिक उपयोग से संबंधित चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं।
  • भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए, यूके एक नया ‘राष्ट्रीय सूचना रक्षा केंद्र’ (National Centre for Information Defence) स्थापित करेगा, जो सूचना हमलों का पता लगाएगा, उनका श्रेय देगा और उन्हें बाधित करेगा।
  • AI के सुरक्षित विकास के लिए, यूके संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक नया AI रक्षा साझेदारी विकसित कर रहा है और वैश्विक स्तर पर AI के लिए साझा सिद्धांतों और मानकों पर सहमति बनाने की दिशा में काम करेगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सूचना रक्षा के लिए राष्ट्रीय केंद्र (National Centre for Information Defence) यह केंद्र सूचना हमलों का पता लगाएगा, उन्हें रोकेगा और लोकतंत्र की रक्षा करेगा।
वैश्विक AI मानक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) के सुरक्षित विकास और उपयोग के लिए एक समान वैश्विक सिद्धांतों और मानकों को स्थापित करने का प्रयास।
AI रक्षा साझेदारी यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) और संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) के बीच महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना (critical national infrastructure) की AI खतरों से रक्षा के लिए साझेदारी।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग यूके अन्य देशों को दुष्प्रचार (disinformation) से निपटने और चुनावों की रक्षा करने में सहायता प्रदान करेगा।
दुष्प्रचार से मुकाबला घरेलू और विदेशी स्तर पर सूचना वातावरण पर शत्रुतापूर्ण तत्वों के ‘औद्योगिक पैमाने पर हमले’ का मुकाबला करना।

महत्व

राष्ट्रीय सुरक्षा

  • दुष्प्रचार और साइबर हमलों से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होता है, विशेषकर चुनावों और महत्वपूर्ण अवसंरचना को लक्षित करने पर।
  • AI के संभावित दुरुपयोग से सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं, जिससे एक मजबूत रक्षा तंत्र की आवश्यकता है।

शासन और लोकतंत्र

  • दुष्प्रचार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करता है और सार्वजनिक विश्वास को कम करता है।
  • AI के विकास और उपयोग के लिए वैश्विक मानकों का निर्धारण सरकारों द्वारा किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह जनता के हित में हो।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

  • दुष्प्रचार से निपटने और AI मानकों को स्थापित करने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
  • यूके का अन्य देशों को सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सहयोगात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

तकनीकी विकास

  • AI एक महत्वपूर्ण तकनीकी अवसर है, लेकिन इसके साथ जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए सावधानीपूर्वक प्रबंधन की आवश्यकता है।
  • सुरक्षित और पारदर्शी AI विकास सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सिद्धांतों और मानकों की स्थापना आवश्यक है।

चुनौतियाँ

1. दुष्प्रचार का प्रसार

  • सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से गलत सूचनाओं का तेजी से प्रसार।
  • शत्रुतापूर्ण तत्वों द्वारा बॉट, फर्जी वेबसाइटों और मनगढ़ंत समाचार लेखों का उपयोग।

2. AI से उत्पन्न खतरे

  • AI का उपयोग दुष्प्रचार और साइबर हमलों की तीव्रता और पैमाने को बढ़ा सकता है।
  • AI द्वारा संचालित चुनाव हस्तक्षेप और सामाजिक अशांति फैलाने की क्षमता।

3. वैश्विक मानकों का अभाव

  • AI के विकास और उपयोग के लिए एक समान वैश्विक सिद्धांतों और मानकों की अनुपस्थिति।
  • विभिन्न देशों के बीच AI विनियमन पर आम सहमति तक पहुंचने में चुनौतियाँ।

4. साइबर सुरक्षा

  • ब्रिटिश कंपनियों और संस्थानों पर साइबर हमलों का बढ़ता खतरा।
  • महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सूचना वातावरण पर हमला शत्रुतापूर्ण तत्वों द्वारा सूचनाओं का हेरफेर और झूठ का प्रसार।
चुनावों में हस्तक्षेप दुष्प्रचार के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का प्रयास।
AI का दुरुपयोग AI द्वारा दुष्प्रचार और साइबर हमलों के खतरे को कई गुना बढ़ाना।
महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा AI और साइबर हमलों से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना को बचाना।
वैश्विक AI शासन AI के सुरक्षित और नैतिक विकास के लिए एक समान वैश्विक सिद्धांतों और मानकों की कमी।

आगे की राह

  • दुष्प्रचार का पता लगाने, उसे पहचानने और बाधित करने के लिए मजबूत राष्ट्रीय तंत्र स्थापित करना।
  • AI के सुरक्षित और नैतिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सिद्धांतों और मानकों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
  • AI के संभावित दुरुपयोग से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना की रक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय रक्षा साझेदारी विकसित करना।
  • चुनावों की सुरक्षा और सूचना हमलों से निपटने में अन्य देशों को तकनीकी सहायता और विशेषज्ञता प्रदान करना।
  • नागरिकों को गलत सूचनाओं की पहचान करने और उनका मुकाबला करने के लिए डिजिटल साक्षरता (digital literacy) और मीडिया साक्षरता (media literacy) को बढ़ावा देना।
  • AI के विकास में पारदर्शिता, जवाबदेही और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढाँचे विकसित करना।
  • AI के खतरों का मुकाबला करने के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश करना, विशेषकर साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सूचना विरूपण (Disinformation) · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) · साइबर सुरक्षा (Cyber Security) · राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) · लोकतंत्र की सुरक्षा (Protection of Democracy) · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (International Cooperation) · नैतिक AI मानक (Ethical AI Standards) · डिजिटल शासन (Digital Governance) · चुनाव हस्तक्षेप (Election Interference) · सूचना युद्ध (Information Warfare)

अवधारणा प्रवाह

शत्रुतापूर्ण तत्वों द्वारा दुष्प्रचार का प्रसार  →  लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा  →  AI द्वारा दुष्प्रचार के खतरे में वृद्धि  →  दुष्प्रचार से निपटने और AI को विनियमित करने की आवश्यकता  →  राष्ट्रीय केंद्र और वैश्विक AI मानकों की स्थापना  →  सुरक्षित और लचीले सूचना वातावरण का निर्माण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूचना विरूपण (Disinformation) जानबूझकर फैलाई गई गलत सूचना को संदर्भित करता है।
2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग सूचना विरूपण के प्रसार को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
3. राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति भारत में सूचना विरूपण से निपटने के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। सूचना विरूपण जानबूझकर फैलाई गई गलत या भ्रामक जानकारी है जिसका उद्देश्य धोखा देना या हेरफेर करना होता है। कथन 2 सही है। AI बॉट, डीपफेक और स्वचालित सामग्री निर्माण के माध्यम से सूचना विरूपण के प्रसार को कई गुना बढ़ा सकता है। कथन 3 गलत है। भारत में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति मुख्य रूप से साइबर हमलों और डेटा सुरक्षा पर केंद्रित है, न कि सीधे सूचना विरूपण से निपटने पर, हालांकि इसके कुछ पहलू अप्रत्यक्ष रूप से संबंधित हो सकते हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के संदर्भ में ‘फ्रंटियर AI’ को सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?

  1. यह AI का उपयोग करके सीमा सुरक्षा प्रणालियों का विकास है।
  2. यह AI प्रौद्योगिकी का सबसे उन्नत और अत्याधुनिक किनारा है।
  3. यह AI प्रणालियों के लिए एक नया सुरक्षा प्रोटोकॉल है।
  4. यह AI के माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी का पता लगाने की एक विधि है।

उत्तर: यह AI प्रौद्योगिकी का सबसे उन्नत और अत्याधुनिक किनारा है। — ‘फ्रंटियर AI’ कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकी के सबसे उन्नत और अत्याधुनिक किनारों को संदर्भित करता है, जिसमें नई क्षमताएं और संभावित जोखिम दोनों होते हैं।

Q3. अभिकथन (A): सूचना विरूपण आधुनिक लोकतंत्रों के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है।
कारण (R): यह चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है और सामाजिक अशांति को भड़का सकता है।

  1. (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सत्य हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है।
  4. (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सूचना विरूपण वास्तव में आधुनिक लोकतंत्रों के लिए एक गंभीर खतरा है। कारण (R) भी सही है क्योंकि सूचना विरूपण का उपयोग चुनाव परिणामों को प्रभावित करने, सार्वजनिक राय में हेरफेर करने और सामाजिक अशांति पैदा करने के लिए किया जा सकता है, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र के लिए खतरा है। इसलिए, (R), (A) की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सूचना विरूपण (Disinformation) आधुनिक लोकतंत्रों के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है। इस संदर्भ में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उदय से इस चुनौती की प्रकृति कैसे बदल गई है? भारत इस खतरे से निपटने के लिए क्या कदम उठा सकता है, चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर की रूपरेखा:
1. **परिचय:** सूचना विरूपण (Disinformation) की परिभाषा और लोकतंत्र पर इसके प्रभाव का संक्षिप्त परिचय। (जैसे, जानबूझकर फैलाई गई गलत सूचना, सार्वजनिक बहस को दूषित करना, विश्वास कम करना)।
2. **AI द्वारा चुनौती का विस्तार:**
* **प्रसार की गति और पैमाना:** AI-संचालित बॉट और एल्गोरिदम द्वारा गलत सूचना का तीव्र और व्यापक प्रसार।
* **सामग्री की प्रामाणिकता:** डीपफेक (Deepfake) वीडियो और ऑडियो, AI-जनित पाठ के माध्यम से अत्यधिक विश्वसनीय लगने वाली फर्जी सामग्री का निर्माण।
* **लक्षित प्रचार:** AI-आधारित विश्लेषण के माध्यम से व्यक्तियों को उनकी कमजोरियों और पूर्वाग्रहों के आधार पर लक्षित करना।
* **पहचान में कठिनाई:** AI-जनित सामग्री और वास्तविक सामग्री के बीच अंतर करना कठिन होना।
3. **भारत द्वारा उठाए जा सकने वाले कदम:**
* **कानूनी और नियामक ढाँचा:** सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 जैसे मौजूदा कानूनों को मजबूत करना और AI-जनित गलत सूचना के लिए विशिष्ट प्रावधान जोड़ना।
* **जागरूकता और शिक्षा:** नागरिकों को डिजिटल साक्षरता और महत्वपूर्ण सोच कौशल के बारे में शिक्षित करना।
* **प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान:** AI-आधारित डिटेक्शन टूल और फैक्ट-चेकिंग (Fact-checking) तंत्र विकसित करना।
* **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** गलत सूचना से निपटने और AI मानकों पर वैश्विक सहयोग में सक्रिय रूप से भाग लेना (जैसा कि यूके ने प्रस्तावित किया है)।
* **बहु-हितधारक दृष्टिकोण:** सरकार, नागरिक समाज, मीडिया और प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।
* **स्वतंत्र मीडिया का समर्थन:** विश्वसनीय पत्रकारिता और स्वतंत्र मीडिया संस्थानों को मजबूत करना।
* **राष्ट्रीय सूचना रक्षा केंद्र:** यूके के समान एक राष्ट्रीय केंद्र की स्थापना पर विचार करना जो सूचना हमलों का पता लगा सके, उन्हें बाधित कर सके और उनका मुकाबला कर सके।
4. **निष्कर्ष:** लोकतंत्र की सुरक्षा और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए सूचना विरूपण और AI के खतरों से निपटने के लिए एक समग्र और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देना।

स्रोत: news.un.org


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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