आरबीआई की एफसीएनआर(बी) योजना से रुपये को मिला बल, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों ने किया पस्त

Rupee gains on FCNR(B) deposits reverse amid crude price spike: RBI report — diagram

आरबीआई की एफसीएनआर(बी) योजना से रुपये को मिला बल, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों ने किया पस्त

आरबीआई की एफसीएनआर(बी) योजना से रुपये को मिला बल, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों ने किया पस्त — INR/USD विनिमय दर पर FCNR(B) प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव
आरेख: INR/USD विनिमय दर पर FCNR(B) प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव

✎ FCNR(B) जमा अनिवासी भारतीयों द्वारा विदेशी मुद्रा में रखे गए सावधि जमा हैं, जो भारतीय बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने और रुपये की स्थिरता बनाए रखने में मदद करते हैं, हालांकि कच्चे तेल की कीमतों जैसे बाहरी कारक इसके लाभों को…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोज़गार से संबंधित विषय।  |  GS Paper III — सरकारी बजटिंग।  |  GS Paper III — निवेश मॉडल।
  • Prelims: FCNR(B) जमा, भारतीय रुपया (INR), कच्चा तेल, मुद्रास्फीति (Inflation), विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI), तरलता समायोजन सुविधा (LAF), भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), चालू खाता घाटा (CAD)
  • Essay: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता और चुनौतियाँ।, भारत की बाह्य क्षेत्र की सुदृढ़ता और पूंजी प्रवाह का महत्व।

त्वरित पुनरावृत्ति: FCNR(B) जमा अनिवासी भारतीयों द्वारा विदेशी मुद्रा में रखे गए सावधि जमा हैं, जो भारतीय बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने और रुपये की स्थिरता बनाए रखने में मदद करते हैं, हालांकि कच्चे तेल की कीमतों जैसे बाहरी कारक इसके लाभों को प्रभावित कर सकते हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के मासिक बुलेटिन में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, सितंबर के शुरुआती दिनों में FCNR(B) जमा प्रवाह के कारण भारतीय रुपये में आई तेज़ी, महीने के उत्तरार्ध में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण उलट गई। वाणिज्यिक बैंकों ने जून में RBI द्वारा रियायती स्वैप विंडो खोलने के बाद से FCNR(B) के तहत 133 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए थे, जिसके कारण यह योजना अपनी निर्धारित समय-सीमा से एक महीने पहले ही बंद कर दी गई। इस रिपोर्ट में मुद्रास्फीति, आर्थिक संवृद्धि और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) प्रवाह पर भी प्रकाश डाला गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने जून में एक रियायती स्वैप विंडो खोली थी ताकि वाणिज्यिक बैंक अनिवासी भारतीयों से FCNR(B) जमा जुटा सकें और रुपये को स्थिरता प्रदान की जा सके।
  • इस योजना के तहत बैंकों ने 133 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए, जिससे रुपये को प्रारंभिक समर्थन मिला और अगस्त में प्रणालीगत तरलता (Systemic Liquidity) में वृद्धि हुई।
  • सितंबर के उत्तरार्ध में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण रुपये पर दबाव पड़ा, जिससे इसकी शुरुआती बढ़त समाप्त हो गई।
  • अगस्त में मुख्य मुद्रास्फीति (Headline Inflation) बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य और पेय पदार्थों के साथ-साथ ईंधन और कोर घटकों में वृद्धि थी।
  • चुनौतीपूर्ण वैश्विक वातावरण के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही (Q1:2026-27) में मजबूत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) संवृद्धि दर्ज की, जिसमें सेवा और उद्योग क्षेत्रों में लचीलापन देखा गया।
  • जुलाई में शुद्ध विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Net FDI) पाँच वर्षों में अपने उच्चतम स्तर 7.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर पहुँच गया, जिसमें संचार, वित्तीय और कंप्यूटर सेवाएँ प्रमुख प्राप्तकर्ता क्षेत्र थे।
  • तरलता समायोजन सुविधा (Liquidity Adjustment Facility) विंडो में बैंकों द्वारा रखे गए धन के अनुसार, अधिशेष तरलता (Surplus Liquidity) सितंबर के दूसरे भाग में कर-संबंधी बहिर्वाह और RBI के स्थायी तरलता उपायों के कारण कम हुई।

FCNR(B) जमा क्या हैं?

  • FCNR(B) का पूर्ण रूप ‘विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक)’ (Foreign Currency Non-Resident (Bank)) जमा है। यह एक प्रकार का सावधि जमा (Term Deposit) खाता है जिसे भारत में अनिवासी भारतीय (Non-Resident Indians – NRIs) विदेशी मुद्रा में खोल सकते हैं।
  • ये जमा भारतीय बैंकों को विदेशी मुद्रा में धन जुटाने की अनुमति देते हैं, जिससे उन्हें विदेशी मुद्रा तरलता बनाए रखने और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit – CAD) को वित्तपोषित करने में मदद मिलती है।
  • FCNR(B) जमा भारतीय रुपये के मूल्य को स्थिर करने में सहायक हो सकते हैं, खासकर जब रुपया बाहरी झटकों या पूंजी बहिर्वाह के कारण दबाव में हो।
  • ये जमा पूरी तरह से प्रत्यावर्तनीय (Fully Repatriable) होते हैं, जिसका अर्थ है कि मूलधन और अर्जित ब्याज दोनों को विदेशी मुद्रा में भारत से बाहर ले जाया जा सकता है।
  • RBI समय-समय पर FCNR(B) जमा को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष उपाय या रियायती स्वैप विंडो (Concessional Swap Window) की घोषणा कर सकता है, जैसा कि इस मामले में किया गया था, ताकि विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा दिया जा सके।
  • इन जमाओं पर ब्याज दरें भारतीय बैंकों द्वारा निर्धारित की जाती हैं और ये विभिन्न मुद्राओं (जैसे USD, GBP, EUR, JPY, AUD, CAD) में उपलब्ध होती हैं।
  • FCNR(B) जमा भारतीय बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा देनदारियों का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं और देश के बाह्य क्षेत्र की स्थिरता में योगदान करते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
FCNR(B) जमाएँ भारतीय बैंकों द्वारा अनिवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा में जमा स्वीकार करना, जो रुपये को मजबूत करने में सहायक।
रियायती स्वैप विंडो RBI द्वारा अस्थायी उपाय, जिसने बैंकों को FCNR(B) जमाओं के लिए अनुकूल स्वैप दरें प्रदान कीं, जिससे इन जमाओं को आकर्षित करने में मदद मिली।
कच्चे तेल की कीमतें भारत के आयात बिल का एक प्रमुख घटक; उच्च कीमतें रुपये पर दबाव डालती हैं और मुद्रास्फीति बढ़ाती हैं।
तरलता (Liquidity) बाजार में धन की उपलब्धता; FCNR(B) प्रवाह ने तरलता बढ़ाई, लेकिन कर-संबंधी बहिर्वाह और RBI के उपायों से यह नियंत्रित हुई।
मुद्रास्फीति (Inflation) वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में सामान्य वृद्धि; अगस्त में खाद्य और ईंधन के कारण यह 4.8 प्रतिशत तक बढ़ी।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किसी देश में विदेशी संस्थाओं द्वारा किया गया निवेश; जुलाई में शुद्ध FDI पाँच साल के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • FCNR(B) जमाओं ने रुपये को शुरुआती मजबूती प्रदान की, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि हुई और बाहरी झटकों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी।
  • कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने रुपये के मूल्य पर नकारात्मक दबाव डाला, जिससे आयात महंगा हुआ और व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका पैदा हुई।
  • मुद्रास्फीति में वृद्धि, विशेष रूप से खाद्य और ईंधन घटकों में, उपभोक्ता क्रय शक्ति को प्रभावित करती है और RBI की मौद्रिक नीति के लिए चुनौती पेश करती है।
  • मजबूत GDP वृद्धि और FDI प्रवाह अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित लचीलापन को दर्शाते हैं, जो वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

नीतिगत महत्व

  • RBI की रियायती स्वैप विंडो एक प्रभावी अल्पकालिक उपकरण साबित हुई, जिसने विदेशी मुद्रा प्रवाह को आकर्षित करके रुपये को सहारा दिया।
  • तरलता प्रबंधन (Liquidity Management) RBI के लिए एक सतत चुनौती है, क्योंकि FCNR(B) प्रवाह से उत्पन्न अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए उपायों की आवश्यकता होती है।
  • सरकार और RBI को कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और इसके रुपये तथा मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए रणनीतियाँ विकसित करनी होंगी।

भू-राजनीतिक महत्व

  • पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि भारत जैसे तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए सीधा खतरा पैदा करती है।
  • वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाएँ भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे बाहरी कारकों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है।

चुनौतियाँ

1. रुपये का अवमूल्यन

  • कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के आयात बिल को बढ़ाती हैं, जिससे रुपये पर दबाव पड़ता है और यह कमजोर होता है।
  • कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाता है, जिससे व्यापार घाटा बढ़ सकता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ सकता है।

2. मुद्रास्फीति का दबाव

  • खाद्य, ईंधन और कोर घटकों में वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति का बढ़ना आम जनता की क्रय शक्ति को कम करता है।
  • उच्च मुद्रास्फीति RBI को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर कर सकती है, जिससे आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है।

3. वैश्विक अनिश्चितताएँ

  • पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता का कारण बनते हैं।
  • वैश्विक आर्थिक मंदी या वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल भारत में पूंजी प्रवाह को प्रभावित कर सकती है।

4. तरलता प्रबंधन

  • बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी प्रवाह (जैसे FCNR(B) जमा) प्रणाली में अतिरिक्त तरलता पैदा कर सकता है, जिसे RBI को नियंत्रित करना होता है।
  • अतिरिक्त तरलता मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ा सकती है और वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि रुपये के अवमूल्यन और आयातित मुद्रास्फीति का जोखिम।
मुद्रास्फीति का दबाव उपभोक्ता क्रय शक्ति में कमी और RBI की मौद्रिक नीति पर दबाव।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और पूंजी प्रवाह में अस्थिरता।
अतिरिक्त तरलता मुद्रास्फीति को बढ़ावा देने और वित्तीय अस्थिरता पैदा करने की संभावना।
बाहरी क्षेत्र की भेद्यता वैश्विक झटकों के प्रति भारतीय अर्थव्यवस्था की संवेदनशीलता।

आगे की राह

  • कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना।
  • विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने के लिए निर्यात को बढ़ावा देना और विविध पूंजी प्रवाह स्रोतों को आकर्षित करना।
  • मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए RBI द्वारा विवेकपूर्ण मौद्रिक नीति और सरकार द्वारा आपूर्ति-पक्ष प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना।
  • वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रभाव को कम करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधों में विविधता लाना।
  • वित्तीय बाजारों में तरलता का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना ताकि स्थिरता बनी रहे और मुद्रास्फीति के दबाव को रोका जा सके।
  • घरेलू आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए निवेश के माहौल में सुधार और संरचनात्मक सुधारों को जारी रखना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

FCNR(B) जमा · भारतीय रुपया · कच्चे तेल की कीमतें · मुद्रास्फीति · चालू खाता घाटा · विदेशी मुद्रा भंडार · तरलता समायोजन सुविधा · आर्थिक संवृद्धि · प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) · भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) · राजकोषीय नीति · मौद्रिक नीति

अवधारणा प्रवाह

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि  →  भारत का आयात बिल बढ़ता है  →  रुपये पर अवमूल्यन का दबाव  →  FCNR(B) जमाओं से अस्थायी सहारा  →  कच्चे तेल की कीमतों में निरंतर वृद्धि से रुपये में गिरावट  →  आयातित मुद्रास्फीति और घरेलू कीमतों पर दबाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. FCNR(B) जमा अनिवासी भारतीयों (NRIs) द्वारा भारतीय बैंकों में विदेशी मुद्रा में खोले गए खाते हैं।
2. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा प्रदान की गई रियायती स्वैप सुविधा का उद्देश्य FCNR(B) जमा को आकर्षित करना था।
3. कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि आमतौर पर भारतीय रुपये के मूल्य को मजबूत करती है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। FCNR(B) जमा अनिवासी भारतीयों (NRIs) द्वारा भारतीय बैंकों में विदेशी मुद्रा में खोले गए खाते हैं, जो उन्हें विनिमय दर जोखिम से बचाते हैं। कथन 2 सही है। RBI की रियायती स्वैप सुविधा का उद्देश्य विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देना और रुपये पर दबाव कम करना था। कथन 3 गलत है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि भारत के आयात बिल को बढ़ाती है, जिससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ता है और आमतौर पर भारतीय रुपये का मूल्य कमजोर होता है।

Q2. कथन (A): हाल ही में FCNR(B) जमा से भारतीय रुपये को मिली बढ़त कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण उलट गई।
कारण (R): कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत का आयात बिल बढ़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है।

  1. कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) का सही स्पष्टीकरण है।
  2. कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
  4. कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।

उत्तर: कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) का सही स्पष्टीकरण है। — कथन (A) सही है, जैसा कि RBI बुलेटिन में बताया गया है। FCNR(B) जमा ने शुरुआती सितंबर में रुपये को मजबूत किया, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने इस लाभ को उलट दिया। कारण (R) भी सही है। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक है, और इसकी कीमतों में वृद्धि से आयात बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं की मांग बढ़ती है और भारतीय रुपये का अवमूल्यन होता है। कारण (R) कथन (A) का सही स्पष्टीकरण है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारतीय अर्थव्यवस्था पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। रुपये के मूल्य को स्थिर करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भारतीय रिज़र्व बैंक की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करके करें। इसमें व्यापार संतुलन, चालू खाता घाटा (CAD), मुद्रास्फीति (Inflation), राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) और आर्थिक संवृद्धि पर पड़ने वाले प्रभावों को शामिल करें। इसके बाद, रुपये के मूल्य को स्थिर करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की भूमिका का विस्तार से वर्णन करें। इसमें मौद्रिक नीति उपकरण (जैसे रेपो दर, रिवर्स रेपो दर), विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप, FCNR(B) जैसी विशेष जमा योजनाओं का उपयोग और तरलता प्रबंधन उपायों का उल्लेख करें। उत्तर में सरकार की राजकोषीय नीतियों के साथ RBI के समन्वय पर भी संक्षेप में चर्चा की जा सकती है।

स्रोत: Business Standard


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