यूपीएससी के लिए वन प्रबंधन क्षमता संवर्धन पर केंद्र सरकार-जीआईसीए कार्यशाला

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने नई दिल्ली में जेआईसीए के सहयोग से आयोजित 'प्रभावी वन प्रबंधन परियोजना के लिए क्षमता संवर्धन' — labelled illustration

यूपीएससी के लिए वन प्रबंधन क्षमता संवर्धन पर केंद्र सरकार-जीआईसीए कार्यशाला

✎ यह परियोजना भारत और जापान के बीच वन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संरक्षण के लिए वन कर्मियों की क्षमता संवर्धन हेतु एक महत्वपूर्ण पहल है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (International Relations)  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (Environment and Ecology), आपदा प्रबंधन (Disaster Management)
  • Prelims: वन प्रबंधन, क्षमता संवर्धन, जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA), वनाग्नि प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन
  • Essay: सतत विकास में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका, भारत में वन संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: यह परियोजना भारत और जापान के बीच वन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संरक्षण के लिए वन कर्मियों की क्षमता संवर्धन हेतु एक महत्वपूर्ण पहल है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने नई दिल्ली में ‘प्रभावी वन प्रबंधन परियोजना के लिए क्षमता संवर्धन’ विषय पर एक कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस कार्यशाला का आयोजन मंत्रालय ने जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के सहयोग से किया था। यह परियोजना वन एवं वन्यजीव प्रबंधन की बदलती आवश्यकताओं, उभरती जलवायु एवं पर्यावरणीय चिंताओं तथा क्षेत्र में वन कर्मियों की बढ़ती विविध जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों की क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है।

पृष्ठभूमि

  • भारत और जापान के बीच वन क्षेत्र में दशकों से सहयोग चला आ रहा है, जो इस नई परियोजना के माध्यम से और सुदृढ़ होगा।
  • वन जलवायु परिवर्तन से निपटने, जैव विविधता (Biodiversity) के संरक्षण और वन-आश्रित समुदायों की आजीविका को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • वनाग्नि प्रबंधन (Forest Fire Management) एक वैश्विक चुनौती है, जिसके लिए प्रभावी क्षमता निर्माण और आधुनिक तकनीकों की आवश्यकता है।
  • क्षमता संवर्धन परियोजना (2025-26 से 2031-32) का उद्देश्य वन कर्मियों को नवीनतम वैज्ञानिक दृष्टिकोणों और उभरती प्रौद्योगिकियों से लैस करना है।
  • इस परियोजना में ज्ञान और अनुसंधान परिणामों को बेहतर प्रशिक्षण तथा टिकाऊ वन प्रबंधन (Sustainable Forest Management) प्रथाओं में बदलने के लिए अनुसंधान एवं विकास (Research & Development) को मजबूत करने की भी परिकल्पना की गई है।
  • JICA की भारत के साथ वानिकी क्षेत्र में साझेदारी लगभग तीन दशकों से चली आ रही है, जिससे 7 लाख से अधिक लोगों को लाभ हुआ है।

प्रभावी वन प्रबंधन परियोजना के लिए क्षमता संवर्धन

  • यह परियोजना भारत के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के बीच एक सहयोगात्मक पहल है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों की परिचालन और प्रशासनिक दोनों दृष्टिकोणों से क्षमता को मजबूत करना है।
  • परियोजना में क्षेत्र-विशिष्ट क्षमता निर्माण मॉड्यूल पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो स्थानीय ज्ञान और चुनौतियों को प्रतिबिंबित करते हों।
  • इसमें वनाग्नि प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के क्षेत्र में तकनीकी तथा जमीनी स्तर की क्षमताओं को बढ़ाना शामिल है।
  • परियोजना के तहत व्यावहारिक तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए शोध और विकास को बढ़ावा दिया जाएगा, साथ ही जमीनी स्तर पर नई तकनीकों के इस्तेमाल के लिए पायलट परियोजनाएं भी चलाई जाएंगी।
  • यह प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत करने और सार्क (SAARC) तथा अन्य विकासशील देशों के साथ बेहतर कार्यप्रणालियां साझा करने पर भी जोर देती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
क्षमता संवर्धन परियोजना (2025-26 से 2031-32) वन एवं वन्यजीव प्रबंधन की बदलती आवश्यकताओं और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों की क्षमता बढ़ाना।
अनुसंधान एवं विकास (R&D) को सुदृढ़ करना ज्ञान और अनुसंधान परिणामों को प्रभावी प्रशिक्षण और स्थायी वन प्रबंधन पद्धतियों में लागू करना।
क्षेत्र-विशिष्ट क्षमता निर्माण मॉड्यूल स्थानीय ज्ञान और चुनौतियों को प्रतिबिंबित करते हुए आधुनिक तकनीकों और जमीनी स्तर पर सर्वोत्तम उपायों का उपयोग।
पायलट परियोजनाएँ जमीनी स्तर पर नई तकनीकों के इस्तेमाल का परीक्षण और कार्यान्वयन।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग भारत और जापान के बीच दशकों से चले आ रहे सहयोग को मजबूत करना और सार्क (SAARC) व अन्य विकासशील देशों के साथ सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ साझा करना।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने और जैव विविधता (Biodiversity) के संरक्षण में वनों की महत्वपूर्ण भूमिका को मजबूत करना।
  • वनाग्नि प्रबंधन (Forest Fire Management) जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी और जमीनी स्तर की क्षमताओं का विकास।

सामाजिक-आर्थिक महत्व

  • वन-आश्रित समुदायों की आजीविका (Livelihood) को बनाए रखने में सहायता, क्योंकि वन उनके लिए महत्वपूर्ण संसाधन हैं।
  • लकड़ी प्रसंस्करण और आजीविका सृजन पर ध्यान केंद्रित करके स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना।

प्रशासनिक एवं तकनीकी महत्व

  • वन कर्मियों की परिचालन और प्रशासनिक दोनों दृष्टिकोणों से क्षमता को मजबूत करना, जिससे वन प्रबंधन अधिक प्रभावी हो सके।
  • बेहतर वन प्रबंधन के लिए डिजिटल रूपांतरण (Digital Transformation) और सहयोगात्मक अकादमिक अनुसंधान को बढ़ावा देना।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

  • भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना, विशेषकर वानिकी और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में।
  • वन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में विकासशील देशों में भारत के नेतृत्व को सुदृढ़ करना।

चुनौतियाँ

1. वन कर्मियों की क्षमता का अभाव

  • बदलती आवश्यकताओं, उभरती जलवायु एवं पर्यावरणीय चिंताओं के अनुरूप अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों में अद्यतन ज्ञान और कौशल की कमी।
  • आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक दृष्टिकोणों को जमीनी स्तर पर लागू करने में चुनौतियाँ।

2. वनाग्नि प्रबंधन

  • वनाग्नि एक वैश्विक चुनौती है जिसके लिए प्रभावी रोकथाम, पता लगाने और प्रतिक्रिया तंत्र की आवश्यकता है।
  • तकनीकी और जमीनी स्तर पर वनाग्नि प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाना एक सतत चुनौती है।

3. स्थानीय ज्ञान का एकीकरण

  • क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और अनुभव को प्रभावी ढंग से शामिल करना।
  • क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों के अनुरूप समाधान विकसित करना।

4. अनुसंधान और विकास का अनुप्रयोग

  • वानिकी क्षेत्र में अनुसंधान परिणामों को प्रभावी प्रशिक्षण और स्थायी वन प्रबंधन पद्धतियों में बदलने की चुनौती।
  • प्रयोगशाला से जमीन तक ज्ञान के हस्तांतरण में अंतराल।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वन प्रबंधन की बदलती आवश्यकताएँ जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि और बढ़ती मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण पारंपरिक प्रबंधन पद्धतियाँ अपर्याप्त।
तकनीकी अंतराल आधुनिक तकनीकों (जैसे रिमोट सेंसिंग, GIS) और डिजिटल उपकरणों के उपयोग में वन कर्मियों का अपर्याप्त प्रशिक्षण।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी स्थानीय ज्ञान और आजीविका संबंधी आवश्यकताओं को मुख्यधारा के वन प्रबंधन में एकीकृत करने की चुनौती।
संसाधनों का सतत उपयोग वन उत्पादों के सतत उत्पादन और प्रसंस्करण के लिए प्रभावी रणनीतियों का अभाव।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का विस्तार विकासशील देशों के साथ सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने और उनके अनुभवों से सीखने में चुनौतियाँ।

आगे की राह

  • क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को केवल कक्षा प्रशिक्षण तक सीमित न रखकर, आधुनिक तकनीकों और जमीनी स्तर पर सर्वोत्तम उपायों के प्रयोग पर ध्यान केंद्रित करना।
  • स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और अनुभवों को क्षमता निर्माण मॉड्यूल में सक्रिय रूप से शामिल करना।
  • व्यावहारिक तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए अनुसंधान और विकास को सुदृढ़ करना तथा पायलट परियोजनाओं के माध्यम से नई तकनीकों का परीक्षण करना।
  • वन कर्मियों को वनाग्नि प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन में विशेष प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • वन प्रबंधन में डिजिटल रूपांतरण को बढ़ावा देना, जिसमें डेटा संग्रह, विश्लेषण और निगरानी के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकियों का उपयोग शामिल हो।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और सार्क व अन्य विकासशील देशों के साथ सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और अनुभवों का आदान-प्रदान करना।
  • प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत करना और उन्हें नवीनतम पाठ्यक्रम तथा शिक्षण सामग्री से लैस करना।
  • वन-आधारित आजीविका सृजन और लकड़ी प्रसंस्करण में कौशल विकास पर जोर देना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वन प्रबंधन · वन्यजीव प्रबंधन · जलवायु परिवर्तन · जैव विविधता संरक्षण · क्षमता संवर्धन · स्थानीय ज्ञान · आधुनिक तकनीकें · वनाग्नि प्रबंधन · सतत वन प्रबंधन · भारत-जापान सहयोग

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

वन प्रबंधन की बदलती आवश्यकताएँ  →  वन कर्मियों की क्षमता संवर्धन की आवश्यकता  →  भारत-जापान सहयोग के तहत परियोजना का शुभारंभ  →  क्षेत्र-विशिष्ट प्रशिक्षण और अनुसंधान एवं विकास  →  स्थायी वन प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से मुकाबला  →  वन-आश्रित समुदायों की आजीविका में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) भारत में वानिकी क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक समय से सहयोग कर रही है।
2. ‘प्रभावी वन प्रबंधन परियोजना के लिए क्षमता संवर्धन’ कार्यशाला का उद्देश्य केवल कक्षा प्रशिक्षण के माध्यम से वन कर्मियों की क्षमता बढ़ाना है।
3. यह परियोजना वनाग्नि प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण में तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि JICA की साझेदारी लगभग तीन दशकों से है। कथन 2 गलत है क्योंकि परियोजना का उद्देश्य कक्षा प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीकों और जमीनी स्तर पर सर्वोत्तम उपायों के प्रयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है। कथन 3 सही है क्योंकि परियोजना वनाग्नि प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के क्षेत्र में तकनीकी और जमीनी स्तर की क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित है।

Q2. भारत में वन प्रबंधन के संदर्भ में, जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) द्वारा समर्थित ‘क्षमता संवर्धन परियोजना’ का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. केवल वन-आधारित उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  2. अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप क्षमता बढ़ाना।
  3. भारत के शहरी क्षेत्रों में वृक्षारोपण को बढ़ावा देना।
  4. वन्यजीवों के अवैध शिकार को रोकने के लिए सैन्य बलों को प्रशिक्षित करना।

उत्तर: अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप क्षमता बढ़ाना। — परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य वन एवं वन्यजीव प्रबंधन की बदलती आवश्यकताओं, उभरती जलवायु एवं पर्यावरणीय चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों की क्षमता को बढ़ाना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में प्रभावी वन प्रबंधन के लिए क्षमता संवर्धन की आवश्यकता और महत्व का परीक्षण कीजिए। इस संबंध में, जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के सहयोग से शुरू की गई परियोजना के प्रमुख आयामों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
1. **परिचय:** भारत में वन प्रबंधन के महत्व और बदलती चुनौतियों (जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि, वनाग्नि) का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **क्षमता संवर्धन की आवश्यकता:**
* वन कर्मियों की दक्षता बढ़ाना (परिचालन और प्रशासनिक दोनों)।
* आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक दृष्टिकोणों का समावेश।
* स्थानीय समुदायों के ज्ञान और अनुभव का उपयोग।
* जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संरक्षण की चुनौतियों का सामना करना।
* वन-आश्रित समुदायों की आजीविका को बनाए रखना।
3. **JICA सहयोग परियोजना के प्रमुख आयाम:**
* **उद्देश्य:** अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों की क्षमता बढ़ाना, अनुसंधान एवं विकास को सुदृढ़ करना।
* **अवधि:** 2025-26 से 2031-32 तक।
* **फोकस क्षेत्र:** वनाग्नि प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटना।
* **कार्यप्रणाली:** क्षेत्र-विशिष्ट क्षमता निर्माण मॉड्यूल, स्थानीय ज्ञान का समावेश, आधुनिक तकनीकों का प्रयोग, पायलट परियोजनाएं, प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत करना।
* **दूसरा चरण (2025-32):** लकड़ी प्रसंस्करण, आजीविका सृजन, डिजिटल रूपांतरण, सहयोगात्मक अकादमिक अनुसंधान।
* **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:** सार्क और अन्य विकासशील देशों के साथ सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां साझा करना।
4. **निष्कर्ष:** परियोजना के दीर्घकालिक लाभों और सतत वन प्रबंधन में इसके योगदान पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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