डीडीयू-जीकेवाई 2.0: 70,000 ग्रामीण युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण, जानें पूरी योजना

दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) 2.0 के अंतर्गत अक्टूबर 2026 से राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों मे — diagram

डीडीयू-जीकेवाई 2.0: 70,000 ग्रामीण युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण, जानें पूरी योजना

Map of Andhra Pradesh, Arunachal Pradesh, Assam, Bihar, Chhattisgar highlighted on the map of India — डीडीयू-जीकेवाई 2.0…
मानचित्र व माइंड-मैप: डीडीयू-जीकेवाई 2.0: कौशल प्रशिक्षण हेतु राज्यवार लक्ष्य आवंटन

✎ दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो गरीब ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी आजीविका में सुधार लाती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप, विकास प्रक्रियाएँ  |  GS Paper III — समावेशी विकास, मानव संसाधन
  • Prelims: दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY), ग्रामीण विकास मंत्रालय, केंद्र प्रायोजित योजना, राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF), कौशल प्रशिक्षण, ग्रामीण युवा, रोजगारोन्मुखी कौशल
  • Essay: ग्रामीण भारत में कौशल विकास और रोजगार सृजन की चुनौतियाँ और अवसर, समावेशी विकास के लिए सरकारी योजनाओं की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो गरीब ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी आजीविका में सुधार लाती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) 2.0 के कार्यान्वयन में तेजी लाई है। अक्टूबर 2026 से अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशिक्षण बैच शुरू होने की उम्मीद है, जिसके तहत लगभग 70,000 ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIA) को लक्ष्य आवंटित करने और निर्धारित समय-सीमा के भीतर बैच शुरू करने का आग्रह किया है।

पृष्ठभूमि

  • DDU-GKY ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीब युवाओं को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है।
  • इस योजना का लक्ष्य ग्रामीण युवाओं की आय क्षमता को बढ़ाना और उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना है।
  • प्रशिक्षण की अवधि आमतौर पर 3 महीने से 12 महीने तक होती है, जो विभिन्न क्षेत्रों में कौशल विकास पर केंद्रित होती है।
  • DDU-GKY 2.0 के अंतर्गत, 2026-28 की दो वर्षीय अवधि के लिए सभी 31 भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 9 लाख से अधिक लक्ष्य आवंटित किए गए हैं।
  • योजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित है, जहाँ परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियाँ (PIA) प्रशिक्षण प्रदान करती हैं।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप होते हैं, जो कौशल मानकों की एकरूपता सुनिश्चित करते हैं।

दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) क्या है?

  • DDU-GKY ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों की आय में वृद्धि करना है।
  • इसका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण युवाओं को ऐसे कौशल प्रदान करना है जो उन्हें संगठित क्षेत्र में स्थायी रोजगार दिला सकें।
  • योजना के तहत, प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योग की मांग के अनुरूप तैयार किए जाते हैं, जिससे प्रशिक्षित युवाओं की रोजगार क्षमता सुनिश्चित होती है।
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ग्रामीण युवाओं को संगठित करने और मांग के अनुसार कौशल प्रशिक्षण आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
  • यह योजना कौशल विकास के माध्यम से ग्रामीण-शहरी आय असमानता को कम करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने का प्रयास करती है।
  • DDU-GKY 2.0 के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 31 अक्टूबर 2026 तक परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों को लक्ष्य आवंटित करने होंगे ताकि प्रशिक्षण शुरू किया जा सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) 2.0 ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना, जो गरीब ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है।
लक्ष्य आवंटन 2026-28 की दो वर्षीय अवधि के लिए सभी 31 भागीदार राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को 9 लाख से अधिक लक्ष्य आवंटित किए गए हैं।
प्रशिक्षण बैच अक्टूबर 2026 से 24 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 70,000 ग्रामीण युवाओं के 2,015 बैचों का प्रशिक्षण शुरू होने की उम्मीद है।
प्रशिक्षण अवधि प्रशिक्षण की अवधि 3 महीने से 12 महीने तक की होती है, जो विभिन्न कौशलों के लिए अनुकूलित है।
साझेदारी सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा, जिससे दक्षता और प्रासंगिकता सुनिश्चित हो सके।
मानक राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप पाठ्यक्रम, जो लाभार्थियों की सतत रोजगार क्षमता को बढ़ाता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह योजना ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रदान कर उन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल होने में मदद करती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है और गरीबी कम होती है।
  • कुशल कार्यबल की उपलब्धता से उद्योगों को लाभ होता है, जिससे उत्पादन और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन को कम करने में सहायक, क्योंकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होते हैं।

सामाजिक महत्व

  • युवाओं को सशक्त बनाती है, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समाज में अधिक सक्रिय भूमिका निभा पाते हैं।
  • कौशल विकास से सामाजिक असमानताएँ कम होती हैं, क्योंकि वंचित वर्गों के युवाओं को भी रोजगार के समान अवसर मिलते हैं।
  • महिलाओं और अन्य हाशिए पर पड़े समूहों के लिए विशेष प्रावधानों के माध्यम से समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।

शासनिक महत्व

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को बढ़ावा देती है, जिससे योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) मॉडल के माध्यम से संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और दक्षता बढ़ती है।
  • राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (National Skill Qualification Framework – NSQF) जैसे मानकों का उपयोग कर कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है।

चुनौतियाँ

1. कार्यान्वयन में देरी

  • राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIA) को लक्ष्य आवंटित करने में देरी से प्रशिक्षण बैच शुरू होने में विलंब हो सकता है।
  • प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता और समन्वय की कमी भी कार्यान्वयन में बाधा डाल सकती है।

2. प्रशिक्षण की गुणवत्ता

  • यह सुनिश्चित करना कि प्रदान किया गया कौशल प्रशिक्षण बाजार की वास्तविक मांगों के अनुरूप हो और उच्च गुणवत्ता का हो, एक चुनौती है।
  • प्रशिक्षकों की योग्यता और प्रशिक्षण सामग्री की प्रासंगिकता भी महत्वपूर्ण कारक हैं।

3. रोजगार सुनिश्चितता

  • प्रशिक्षण के बाद लाभार्थियों को सतत रोजगार दिलाने में चुनौतियाँ आ सकती हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ संगठित क्षेत्र के रोजगार के अवसर सीमित होते हैं।
  • उद्योगों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करना और प्लेसमेंट दरों में सुधार करना आवश्यक है।

4. ग्रामीण युवाओं को संगठित करना

  • गरीब ग्रामीण युवाओं की पहचान करना और उन्हें प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए प्रेरित करना एक बड़ी चुनौती है।
  • जागरूकता की कमी और सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ भी इसमें आड़े आ सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
लक्ष्य आवंटन में विलंब प्रशिक्षण कार्यक्रमों के समय पर शुरू न होने से ग्रामीण युवाओं के अवसरों में कमी।
कौशल की प्रासंगिकता प्रदान किए गए कौशल का बाजार की वर्तमान और भविष्य की मांगों से मेल न खाना, जिससे रोजगार क्षमता प्रभावित हो सकती है।
प्लेसमेंट दरें प्रशिक्षण के बाद लाभार्थियों को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार दिलाने में कठिनाई।
बुनियादी ढाँचा और संसाधन पर्याप्त प्रशिक्षण केंद्र, उपकरण और योग्य प्रशिक्षकों की कमी, विशेषकर दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में।
निगरानी और मूल्यांकन योजना के प्रभाव और दक्षता का प्रभावी ढंग से मूल्यांकन करने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र की कमी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY)

आगे की राह

  • राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को लक्ष्य आवंटन और बैच शुरू करने की प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए, जिससे निर्धारित समय-सीमा का पालन हो सके।
  • प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और नियमित ऑडिट किए जाने चाहिए।
  • उद्योगों के साथ मजबूत संबंध स्थापित किए जाने चाहिए ताकि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम बाजार की मांगों के अनुरूप हों और प्लेसमेंट के अवसर बढ़ें।
  • ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए प्रेरित करने हेतु व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
  • प्रशिक्षण के बाद लाभार्थियों को उद्यमिता के अवसर प्रदान करने के लिए वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
  • योजना के कार्यान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जिसमें नियमित प्रगति रिपोर्ट और प्रभाव आकलन शामिल हों।
  • प्रशिक्षकों के कौशल विकास और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए ताकि वे नवीनतम तकनीकों और पद्धतियों के साथ अद्यतन रहें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) · ग्रामीण कौशल विकास · गरीब ग्रामीण युवा · रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण · राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) · सार्वजनिक-निजी भागीदारी · कौशल भारत मिशन · सतत रोजगार क्षमता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39 (a)’, ‘note’: ‘नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम पाने का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक व आर्थिक हितों की अभिवृद्धि’}

अवधारणा प्रवाह

ग्रामीण युवाओं में कौशल की कमी  →  दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) 2.0 का कार्यान्वयन  →  कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना (NSQF अनुरूप)  →  रोजगार के अवसरों में वृद्धि  →  ग्रामीण गरीबी में कमी और आर्थिक सशक्तिकरण  →  समावेशी विकास और सामाजिक न्याय

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
2. इसका उद्देश्य केवल शहरी गरीब युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है।
3. प्रशिक्षण की अवधि 3 महीने से 12 महीने तक हो सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि DDU-GKY ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत एक केंद्र प्रायोजित योजना है। कथन 2 गलत है क्योंकि इसका उद्देश्य गरीब ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है, न कि शहरी गरीब युवाओं को। कथन 3 सही है क्योंकि प्रशिक्षण की अवधि 3 महीने से 12 महीने तक की होती है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।

Q2. दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के कार्यान्वयन में निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषताएँ शामिल हैं?
1. यह राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप पाठ्यक्रम प्रदान करती है।
2. इसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का उपयोग किया जाता है।
3. इसका प्राथमिक लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में सतत रोजगार क्षमता सुनिश्चित करना है।
सही विकल्प का चयन कीजिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — DDU-GKY राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप पाठ्यक्रम प्रदान करती है (कथन 1 सही)। यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) में कौशल प्रशिक्षण आयोजित करती है (कथन 2 सही)। इसका मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों की सतत रोजगार क्षमता सुनिश्चित करना है (कथन 3 सही)। इसलिए, सभी तीनों विशेषताएँ शामिल हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है? इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: DDU-GKY का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें इसका उद्देश्य (गरीब ग्रामीण युवाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रशिक्षण) और यह किस मंत्रालय के तहत आती है, शामिल हो।
मुख्य भाग 1: DDU-GKY की भूमिका और महत्व। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल करें:
• ग्रामीण गरीबी उन्मूलन और आजीविका संवर्धन।
• राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप प्रशिक्षण।
• सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का उपयोग।
• सतत रोजगार क्षमता सुनिश्चित करना।
• ग्रामीण-शहरी प्रवास को कम करने में योगदान।
• समावेशी विकास को बढ़ावा देना।
मुख्य भाग 2: कार्यान्वयन में चुनौतियाँ। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल करें:
• ग्रामीण युवाओं को संगठित करने और प्रेरित करने में कठिनाई।
• प्रशिक्षण की गुणवत्ता और उद्योग की मांग के बीच अंतर।
• परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (PIA) की क्षमता और जवाबदेही।
• प्रशिक्षण के बाद रोजगार प्लेसमेंट और उसकी निरंतरता सुनिश्चित करना।
• राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा लक्ष्य आवंटन और बैच शुरू करने में देरी।
• निगरानी और मूल्यांकन तंत्र की प्रभावशीलता।
मुख्य भाग 3: संभावित समाधान। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल करें:
• मांग-आधारित कौशल मैपिंग और पाठ्यक्रम डिजाइन।
• PIA की क्षमता निर्माण और सख्त निगरानी।
• राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ नियमित समीक्षा और समन्वय।
• उद्योग के साथ मजबूत संबंध स्थापित करना।
• प्रशिक्षण के बाद परामर्श और सहायता प्रदान करना।
• डिजिटल प्लेटफॉर्म (जैसे DDU-GKY पोर्टल) का प्रभावी उपयोग।
निष्कर्ष: DDU-GKY के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें, जिसमें इसके सफल कार्यान्वयन से ग्रामीण भारत में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की संभावनाओं पर जोर दिया गया हो।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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