28 Sep पाकिस्तान द्वारा 28 सितंबर से SCO राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक की मेजबानी
✎ शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक प्रमुख यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन है, जिसमें भारत भी एक पूर्ण सदस्य है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- Prelims: शंघाई सहयोग संगठन (SCO), SCO सदस्य देश, SCO शिखर सम्मेलन, क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS), भारत और SCO, बहुपक्षीय संगठन
- Essay: क्षेत्रीय सहयोग और वैश्विक भू-राजनीति में बहुपक्षीय संगठनों की भूमिका, भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक प्रमुख यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन है, जिसमें भारत भी एक पूर्ण सदस्य है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
पाकिस्तान 28 सितंबर से शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्रीय समन्वयकों की तीन दिवसीय बैठक की मेजबानी कर रहा है। यह बैठक पाकिस्तान की SCO परिषद के राष्ट्राध्यक्षों की अध्यक्षता (2026-27 के लिए) के तहत एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक जुड़ाव है और आगामी उच्च-स्तरीय बैठकों तथा गतिविधियों के समन्वय में सहायता करेगी। पाकिस्तान 2027 में संगठन के शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी करेगा।
पृष्ठभूमि
- शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन है, जिसकी स्थापना 2001 में शंघाई में हुई थी।
- इसके संस्थापक सदस्य चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान थे।
- भारत और पाकिस्तान 2017 में SCO के पूर्ण सदस्य बने, जिससे संगठन का विस्तार हुआ।
- ईरान 2023 में इसका नवीनतम पूर्ण सदस्य बना।
- SCO का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच विश्वास और सद्भाव को मजबूत करना, क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है।
- यह संगठन क्षेत्रीय आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद का मुकाबला करने पर विशेष ध्यान देता है।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) क्या है?
- SCO एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है।
- यह दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन है, जो यूरेशिया के लगभग 60% क्षेत्र, दुनिया की आबादी के 40% और वैश्विक GDP के 30% से अधिक को कवर करता है।
- इसके मुख्य उद्देश्यों में सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास और अच्छे पड़ोसी संबंधों को मजबूत करना, क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना तथा आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद का मुकाबला करना शामिल है।
- SCO का एक महत्वपूर्ण अंग क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में समन्वय स्थापित करना है।
- संगठन के भीतर आर्थिक सहयोग, ऊर्जा, परिवहन, संस्कृति और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ावा दिया जाता है।
- SCO के निर्णय राष्ट्राध्यक्षों की परिषद (Council of Heads of State) द्वारा लिए जाते हैं, जो संगठन का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है।
- भारत के लिए SCO मध्य एशिया तक पहुंच बनाने, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने और चीन तथा रूस के साथ संबंधों को संतुलित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| SCO राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक | पाकिस्तान की अध्यक्षता में आगामी उच्च-स्तरीय बैठकों और गतिविधियों के समन्वय के लिए प्रारंभिक मंच। |
| पाकिस्तान की अध्यक्षता (2026-27) | शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शीर्ष-स्तरीय विचार-विमर्श का नेतृत्व, अगस्त 2027 में शिखर सम्मेलन की मेजबानी। |
| अध्यक्षता का विषय | “विजन को कार्य में बदलना: कनेक्टिविटी, नवाचार और साझा समृद्धि” (Turning Vision into Action: Connectivity, Innovation and Shared Prosperity)। |
| प्राथमिकता वाले क्षेत्र | अधिक कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना, नवाचार को बढ़ावा देना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना और लोगों से लोगों के बीच संपर्क मजबूत करना। |
| सदस्य देशों के साथ सहयोग | प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और SCO के भीतर सहयोग को मजबूत करने के लिए सभी सदस्य देशों और SCO सचिवालय के साथ मिलकर काम करना। |
महत्व
क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता
- SCO क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है।
- इसकी बैठकें सदस्य देशों के बीच विश्वास निर्माण और साझा चुनौतियों पर सहयोग के लिए अवसर प्रदान करती हैं।
भू-राजनीतिक महत्व
- SCO मध्य एशिया, दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया के बड़े भू-भाग को कवर करता है, जो इसे वैश्विक भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाता है।
- यह विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद करता है।
आर्थिक और कनेक्टिविटी
- SCO के माध्यम से सदस्य देश व्यापार, निवेश और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में सहयोग बढ़ा सकते हैं।
- कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने पर जोर क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत के लिए निहितार्थ
- भारत SCO का एक पूर्ण सदस्य है और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- SCO बैठकों में भागीदारी भारत को मध्य एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान करने का अवसर देती है।
चुनौतियाँ
1. सदस्य देशों के बीच मतभेद
- SCO के भीतर कुछ सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय मुद्दे और भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता सहयोग को बाधित कर सकती है।
- सर्वसम्मति से निर्णय लेने की प्रक्रिया विभिन्न राष्ट्रीय हितों के कारण धीमी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत और उसके पड़ोसी-संबंध
2. आतंकवाद और उग्रवाद
- क्षेत्र में आतंकवाद और उग्रवाद एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिसके लिए सदस्य देशों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता है।
- सीमा पार आतंकवाद से निपटने में राजनीतिक इच्छाशक्ति और सूचना साझाकरण में चुनौतियाँ आ सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: आतंकवाद की चुनौतियाँ
3. आर्थिक एकीकरण में बाधाएँ
- सदस्य देशों के बीच व्यापार बाधाएँ, बुनियादी ढाँचे की कमी और विभिन्न आर्थिक प्रणालियाँ पूर्ण आर्थिक एकीकरण में बाधा डालती हैं।
- कनेक्टिविटी परियोजनाओं के वित्तपोषण और कार्यान्वयन में चुनौतियाँ आ सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: क्षेत्रीय व्यापार समझौते
4. बाहरी शक्तियों का प्रभाव
- क्षेत्र में बाहरी शक्तियों की बढ़ती उपस्थिति और उनके भू-राजनीतिक हित SCO की एकजुटता और निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं।
- सदस्य देशों के बीच रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भू-राजनीतिक घटनाक्रम
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भू-राजनीतिक तनाव | सदस्य देशों के बीच ऐतिहासिक और वर्तमान विवाद सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं। |
| सुरक्षा चुनौतियाँ | आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और सीमा पार अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटना। |
| आर्थिक असमानताएँ | सदस्य देशों के बीच आर्थिक विकास के स्तर में अंतर, जो साझा आर्थिक परियोजनाओं को जटिल बना सकता है। |
| बुनियादी ढाँचा विकास | कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तपोषण और कार्यान्वयन क्षमता की कमी। |
| पारदर्शिता और जवाबदेही | संगठन के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता। |
आगे की राह
- सदस्य देशों के बीच विश्वास बहाली और कूटनीतिक संवाद को बढ़ावा देना।
- आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझाकरण और संयुक्त अभियानों को मजबूत करना।
- व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए व्यापार बाधाओं को कम करना और आर्थिक सहयोग समझौतों को लागू करना।
- बेहतर कनेक्टिविटी के लिए बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में निवेश बढ़ाना और क्षेत्रीय परिवहन गलियारों का विकास करना।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना ताकि आपसी समझ बढ़ सके।
- SCO के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सदस्य देशों के बीच सर्वसम्मति और सामूहिक कार्रवाई पर जोर देना।
- क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए एक समावेशी और सहकारी दृष्टिकोण अपनाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) · क्षेत्रीय सहयोग · भू-राजनीतिक महत्व · भारत की भूमिका · आतंकवाद विरोधी तंत्र · आर्थिक एकीकरण · बहुपक्षीय मंच · मध्य एशिया · कनेक्टिविटी · ऊर्जा सुरक्षा · सांस्कृतिक आदान-प्रदान · सुरक्षा सहयोग
अवधारणा प्रवाह
पाकिस्तान SCO की अध्यक्षता ग्रहण करता है। → राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक की मेजबानी करता है। → आगामी SCO बैठकों और गतिविधियों का समन्वय होता है। → अध्यक्षता के विषय और प्राथमिकताओं पर चर्चा होती है। → क्षेत्रीय सहयोग और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने का प्रयास होता है। → अगस्त 2027 में SCO शिखर सम्मेलन की तैयारी होती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. SCO की स्थापना 2001 में शंघाई में हुई थी।
2. भारत और पाकिस्तान 2017 में SCO के पूर्ण सदस्य बने।
3. SCO का मुख्य उद्देश्य मध्य एशिया में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। SCO की स्थापना 2001 में शंघाई में हुई थी और भारत तथा पाकिस्तान 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने। कथन 3 भी सही है, SCO का एक प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, स्थिरता और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है, विशेषकर मध्य एशिया क्षेत्र में।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा देश शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का पूर्ण सदस्य नहीं है?
- चीन
- रूस
- ईरान
- तुर्कमेनिस्तान
उत्तर: तुर्कमेनिस्तान — तुर्कमेनिस्तान SCO का पूर्ण सदस्य नहीं है। यह एक तटस्थ देश है और SCO में पर्यवेक्षक या संवाद भागीदार के रूप में भी शामिल नहीं है। चीन, रूस और ईरान SCO के पूर्ण सदस्य हैं (ईरान 2023 में पूर्ण सदस्य बना)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के उद्देश्यों और संरचना का विश्लेषण कीजिए। भारत के लिए इस संगठन का क्या महत्व है, चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की संक्षिप्त पृष्ठभूमि और स्थापना का उल्लेख।
2. SCO के उद्देश्य: सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, ऊर्जा सुरक्षा आदि जैसे प्रमुख उद्देश्यों का विस्तृत वर्णन।
3. SCO की संरचना: राष्ट्राध्यक्षों की परिषद, शासनाध्यक्षों की परिषद, विदेश मंत्रियों की परिषद, राष्ट्रीय समन्वयकों की परिषद, क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (RATS) और SCO सचिवालय जैसी प्रमुख संस्थाओं का उल्लेख।
4. भारत के लिए SCO का महत्व: मध्य एशियाई देशों तक पहुंच, ऊर्जा सुरक्षा, कनेक्टिविटी परियोजनाओं में भागीदारी (जैसे अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा), आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने में सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता में भूमिका, चीन और रूस के साथ संबंधों का प्रबंधन, बहुपक्षीय कूटनीति का मंच आदि बिंदुओं पर चर्चा।
5. निष्कर्ष: भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीतियों के संदर्भ में SCO की प्रासंगिकता पर संक्षिप्त टिप्पणी।
स्रोत: orissapost.com
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