28 Sep ज़ोन प्रणाली आदेश-2025 पर रोक की मांग: APGEA ने उठाए सवाल
✎ अनुच्छेद 371-D आंध्र प्रदेश के लिए विशेष प्रावधान करता है, जिससे राष्ट्रपति क्षेत्रीय प्रणाली के माध्यम से सार्वजनिक रोजगार और शिक्षा में क्षेत्रीय समानता सुनिश्चित कर सकें, लेकिन इन प्रावधानों को मौलिक अधिकारों के अनुरूप होना…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और मूल संरचना | GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ | GS Paper II — विभिन्न घटकों के बीच शक्ति पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थाएँ
- Prelims: अनुच्छेद 371-D, राष्ट्रपति आदेश, क्षेत्रीय प्रणाली, राज्य पुनर्गठन, मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 14, 15, 16, 19), अखिल भारतीय सेवाएँ
- Essay: भारतीय संघवाद: चुनौतियाँ और समाधान, संवैधानिक प्रावधानों का क्रियान्वयन और नागरिकों के अधिकार
त्वरित पुनरावृत्ति: अनुच्छेद 371-D आंध्र प्रदेश के लिए विशेष प्रावधान करता है, जिससे राष्ट्रपति क्षेत्रीय प्रणाली के माध्यम से सार्वजनिक रोजगार और शिक्षा में क्षेत्रीय समानता सुनिश्चित कर सकें, लेकिन इन प्रावधानों को मौलिक अधिकारों के अनुरूप होना चाहिए।
यह खबर चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एसोसिएशन (APGEA) ने राष्ट्रपति आदेश-2025 को तत्काल निलंबित करने की मांग की है, जो क्षेत्रीय प्रणाली (Zonal System) से संबंधित है। एसोसिएशन का दावा है कि यह आदेश सेवारत कर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं के रोजगार की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
पृष्ठभूमि
- क्षेत्रीय प्रणाली को अविभाजित आंध्र प्रदेश में क्षेत्रीय आंदोलनों के बाद संविधान में अनुच्छेद 371-D को शामिल करके लागू किया गया था।
- अनुच्छेद 371-D राष्ट्रपति को राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के लिए सार्वजनिक रोजगार और शिक्षा के संबंध में विशेष प्रावधान करने का अधिकार देता है।
- इस प्रावधान का उद्देश्य राज्य के पिछड़े क्षेत्रों के लोगों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना और क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना था।
- राज्य के विभाजन के बाद, APGEA ने मौजूदा क्षेत्रीय प्रणाली को जारी रखने की आवश्यकता पर सवाल उठाया है और 2025 के आदेश के संवैधानिक आधार की समीक्षा की मांग की है।
- एसोसिएशन ने राज्य-स्तरीय कैडर पदों को मल्टी-जोन पदों में बदलने और कुछ ग्रुप-I पदों को मल्टी-जोन कैडर में शामिल करने पर चिंता व्यक्त की है।
- कर्मचारी संघों ने अमरावती और विशाखापत्तनम में स्थानीय निवासियों के लिए नौकरियों के आरक्षण पर भी आपत्ति जताई है, क्योंकि इससे अन्य क्षेत्रों के उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
अनुच्छेद 371-D और क्षेत्रीय प्रणाली
- अनुच्छेद 371-D भारतीय संविधान का एक विशेष प्रावधान है जो आंध्र प्रदेश राज्य के लिए लागू होता है।
- यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के लिए सार्वजनिक रोजगार और शिक्षा के मामलों में विशेष प्रावधान करने का अधिकार देता है।
- इन प्रावधानों का उद्देश्य राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के बीच समानता सुनिश्चित करना और रोजगार तथा शैक्षिक अवसरों में क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना है।
- राष्ट्रपति आदेश के माध्यम से, राज्य को विभिन्न क्षेत्रों (Zones) में विभाजित किया जा सकता है, और इन क्षेत्रों के निवासियों के लिए कुछ पदों पर आरक्षण या प्राथमिकता दी जा सकती है।
- यह प्रणाली स्थानीय उम्मीदवारों को उनके संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे राज्य के भीतर क्षेत्रीय असमानताओं को कम किया जा सके।
- हालांकि, इस तरह के प्रावधानों को संविधान के मौलिक अधिकारों, विशेष रूप से अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), अनुच्छेद 15 (धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध), अनुच्छेद 16 (लोक नियोजन के विषय में अवसर की समानता) और अनुच्छेद 19 (स्वतंत्रता का अधिकार) के अनुरूप होना चाहिए।
- राष्ट्रपति आदेश-2025, जो क्षेत्रीय प्रणाली में बदलाव लाता है, राज्य-स्तरीय कैडर पदों को मल्टी-जोन पदों में परिवर्तित करता है और कुछ ग्रुप-I पदों को मल्टी-जोन कैडर में शामिल करता है, जिस पर विवाद उत्पन्न हुआ है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राष्ट्रपति आदेश-2025 | आंध्र प्रदेश में क्षेत्रीय प्रणाली (Zonal System) को लागू करने से संबंधित नवीनतम आदेश। |
| क्षेत्रीय प्रणाली का उद्देश्य | क्षेत्रीय आंदोलनों के बाद आंध्र प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के निवासियों के लिए रोजगार और शैक्षिक अवसरों में समानता सुनिश्चित करना। |
| अनुच्छेद 371-D का समावेश | क्षेत्रीय प्रणाली को संवैधानिक आधार प्रदान करता है, जिससे राष्ट्रपति को राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान करने की शक्ति मिलती है। |
| राज्य-स्तरीय कैडर से मल्टी-ज़ोन कैडर में परिवर्तन | कुछ पदों को राज्य-स्तरीय से मल्टी-ज़ोन में बदलने का प्रस्ताव, जिससे कर्मचारियों की पदोन्नति और वरिष्ठता प्रभावित हो सकती है। |
| स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षण | अमरावती और विशाखापत्तनम जैसे क्षेत्रों में स्थानीय निवासियों के लिए नौकरियों के आरक्षण का प्रस्ताव, जिससे अन्य क्षेत्रों के उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह आदेश आंध्र प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के निवासियों के बीच रोजगार के अवसरों के वितरण को प्रभावित करता है, जिससे सामाजिक समानता और क्षेत्रीय संतुलन पर असर पड़ सकता है।
- स्थानीय बनाम गैर-स्थानीय निवासियों के बीच रोजगार के अवसरों को लेकर संभावित विवाद उत्पन्न हो सकते हैं, जिससे सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है।
प्रशासनिक महत्व
- यह आदेश राज्य सरकार के कर्मचारियों की सेवा शर्तों, वरिष्ठता और पदोन्नति को सीधे प्रभावित करता है, जिससे प्रशासनिक स्थिरता और कर्मचारियों के मनोबल पर असर पड़ सकता है।
- राज्य-स्तरीय कैडर से मल्टी-ज़ोन कैडर में पदों के परिवर्तन से प्रशासनिक संरचना और भर्ती प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं।
संवैधानिक महत्व
- यह मामला अनुच्छेद 371-D के तहत राष्ट्रपति की शक्तियों और इसके तहत जारी आदेशों की संवैधानिक वैधता की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे में आता है।
- यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 15 (भेदभाव का निषेध), 16 (सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता) और 19 (स्वतंत्रता का अधिकार) के साथ इसकी अनुकूलता पर सवाल उठाता है।
चुनौतियाँ
1. रोजगार के अवसर और योग्यता
- राज्य-स्तरीय कैडर पदों को मल्टी-ज़ोन पदों में बदलने से मेधावी बेरोजगार उम्मीदवारों के लिए रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
- कुछ ग्रुप-I पदों को मल्टी-ज़ोन कैडर में शामिल करने से उन उम्मीदवारों के लिए चिंताएँ बढ़ सकती हैं जो पहले राज्य-स्तरीय कैडर के लिए पात्र थे।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान: मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्व
2. कर्मचारियों के अधिकार और सेवा शर्तें
- यह आदेश 1975 के राष्ट्रपति आदेश के तहत नियुक्त कर्मचारियों की वरिष्ठता, पदोन्नति और अर्जित सेवा अधिकारों पर इसके निहितार्थों के बारे में अनिश्चितता पैदा करता है।
- कर्मचारी संघों का मानना है कि यह आदेश सेवारत कर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं दोनों की रोजगार संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था: संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ
3. संवैधानिक वैधता और न्यायिक समीक्षा
- नए जिला, ज़ोन और मल्टी-ज़ोन कैडर बनाने के संवैधानिक आधार पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
- अनुच्छेद 371-D के तहत स्थानीय वरीयताओं और भौगोलिक प्रतिबंधों के आवेदन पर स्पष्टता की कमी है, जिससे न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना बढ़ जाती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान: न्यायिक समीक्षा, अनुच्छेद 371-D
4. क्षेत्रीय असमानताएँ
- अमरावती और विशाखापत्तनम में स्थानीय निवासियों के लिए नौकरियों के आरक्षण से अन्य क्षेत्रों के उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय असमानताएँ बढ़ सकती हैं।
- यह प्रणाली राज्य के भीतर विभिन्न क्षेत्रों के बीच असंतोष को जन्म दे सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: क्षेत्रीय असमानताएँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राज्य-स्तरीय से मल्टी-ज़ोन कैडर | सेवा में कार्यरत कर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित होने की आशंका। |
| ग्रुप-I पदों का समावेश | पहले राज्य-स्तरीय कैडर में वर्गीकृत कुछ ग्रुप-I पदों को मल्टी-ज़ोन कैडर में शामिल करने पर सवाल। |
| स्थानीय आरक्षण | अमरावती और विशाखापत्तनम में स्थानीय निवासियों के लिए नौकरियों के आरक्षण से अन्य क्षेत्रों के उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित। |
| 1975 के आदेश के तहत नियुक्त कर्मचारी | वरिष्ठता, पदोन्नति और अर्जित सेवा अधिकारों पर 2025 के आदेश के निहितार्थों पर स्पष्टता की कमी। |
| नए कैडर का संवैधानिक आधार | नए जिला, ज़ोन और मल्टी-ज़ोन कैडर बनाने के संवैधानिक आधार पर सवाल। |
| मौलिक अधिकारों से संगतता | अनुच्छेद 14, 15, 16 और 19 के साथ नए सिस्टम की संगतता का आकलन करने की मांग। |
आगे की राह
- सरकार को राष्ट्रपति आदेश-2025 के कार्यान्वयन से पहले एक विशेषज्ञ-स्तरीय समीक्षा करनी चाहिए।
- कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाने चाहिए।
- सभी हितधारकों, विशेषकर कर्मचारी संघों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ व्यापक परामर्श किया जाना चाहिए।
- नए कैडर संरचनाओं और स्थानीय वरीयताओं के संवैधानिक आधार पर स्पष्टता प्रदान की जानी चाहिए।
- अनुच्छेद 371-D के तहत स्थानीय वरीयताओं और भौगोलिक प्रतिबंधों के आवेदन की विस्तृत व्याख्या की जानी चाहिए।
- यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नया आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 19 के अनुरूप हो।
- कर्मचारियों की वरिष्ठता, पदोन्नति और अर्जित सेवा अधिकारों पर आदेश के निहितार्थों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अनुच्छेद 371-D · क्षेत्रीय प्रणाली · राष्ट्रपति आदेश · राज्य पुनर्गठन · संवैधानिक संशोधन · रोजगार के अवसर · समानता का अधिकार · संघवाद · न्यायिक समीक्षा · स्थानीय प्राथमिकताएँ
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 371-D’, ‘note’: ‘आंध्र प्रदेश के लिए विशेष प्रावधान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 14’, ‘note’: ‘कानून के समक्ष समानता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 15’, ‘note’: ‘धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव का निषेध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 16’, ‘note’: ‘सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19’, ‘note’: ‘स्वतंत्रता का अधिकार’}
अवधारणा प्रवाह
क्षेत्रीय आंदोलन और अनुच्छेद 371-D का समावेश → राष्ट्रपति आदेश-2025 द्वारा क्षेत्रीय प्रणाली का कार्यान्वयन → राज्य-स्तरीय पदों का मल्टी-ज़ोन में परिवर्तन → कर्मचारी संघों द्वारा आदेश का विरोध → रोजगार के अवसरों और संवैधानिक वैधता पर चिंताएँ → सरकार से समीक्षा और स्पष्टीकरण की मांग → न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. अनुच्छेद 371-D आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के लिए विशेष प्रावधानों से संबंधित है।
2. राष्ट्रपति आदेश-2025 का उद्देश्य क्षेत्रीय प्रणाली (zonal system) को समाप्त करना है।
3. क्षेत्रीय प्रणाली का उद्देश्य राज्य के भीतर विभिन्न क्षेत्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 371-D आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए विशेष प्रावधान करता है, जिसमें शिक्षा और रोजगार के अवसर शामिल हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि राष्ट्रपति आदेश-2025 क्षेत्रीय प्रणाली को समाप्त करने के बजाय उसमें बदलाव करता है। कथन 3 सही है क्योंकि क्षेत्रीय प्रणाली का मूल उद्देश्य राज्य के भीतर विभिन्न क्षेत्रों के लिए रोजगार और शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करना था।
Q2. अभिकथन (A): आंध्र प्रदेश सरकार कर्मचारी संघ (APGEA) ने राष्ट्रपति आदेश-2025 के कार्यान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
कारण (R): APGEA का मानना है कि यह आदेश सेवारत कर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं के रोजगार की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि APGEA ने राष्ट्रपति आदेश-2025 पर रोक लगाने की मांग की है। कारण (R) भी सही है क्योंकि APGEA की मुख्य चिंता यही है कि यह आदेश कर्मचारियों और युवाओं के रोजगार के अवसरों को प्रभावित करेगा। इस प्रकार, R, A का सही स्पष्टीकरण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371-D के तहत क्षेत्रीय प्रणाली की अवधारणा की व्याख्या कीजिए। आंध्र प्रदेश में हालिया राष्ट्रपति आदेश-2025 के संदर्भ में, इस प्रणाली से संबंधित प्रमुख चिंताओं और संवैधानिक निहितार्थों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में निम्नलिखित बिंदु शामिल होने चाहिए:
1. **अनुच्छेद 371-D का परिचय:** भारतीय संविधान में इसके शामिल होने का संदर्भ (क्षेत्रीय आंदोलनों के बाद), इसका उद्देश्य (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोगों के लिए शिक्षा और रोजगार में समान अवसर सुनिश्चित करना) और इसकी मुख्य विशेषताएं (राष्ट्रपति को राज्य के विभिन्न हिस्सों के लिए विशेष प्रावधान करने की शक्ति)।
2. **क्षेत्रीय प्रणाली (Zonal System) की व्याख्या:** यह कैसे काम करती है, इसका उद्देश्य क्या है, और यह राज्य के भीतर विभिन्न क्षेत्रों के लिए नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में स्थानीय वरीयताओं को कैसे निर्धारित करती है।
3. **राष्ट्रपति आदेश-2025 का संदर्भ:** यह आदेश क्या प्रस्तावित करता है (राज्य-स्तरीय कैडर पदों को बहु-क्षेत्रीय पदों में परिवर्तित करना, कुछ ग्रुप-I पदों को शामिल करना, अमरावती और विशाखापत्तनम में स्थानीय निवासियों के लिए नौकरियों का आरक्षण)।
4. **प्रमुख चिंताएँ और संवैधानिक निहितार्थ:**
* **रोजगार के अवसर:** सेवारत कर्मचारियों की वरिष्ठता, पदोन्नति और अर्जित सेवा अधिकारों पर प्रभाव। बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं पर प्रभाव।
* **संवैधानिक आधार:** नए जिला, क्षेत्र और बहु-क्षेत्रीय कैडर बनाने का संवैधानिक आधार। अनुच्छेद 371-D के तहत स्थानीय वरीयताओं और भौगोलिक प्रतिबंधों के आवेदन पर स्पष्टता की कमी।
* **मौलिक अधिकारों का उल्लंघन:** अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध), अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता) और अनुच्छेद 19 (स्वतंत्रता का अधिकार) के साथ नए सिस्टम की अनुकूलता पर चिंताएँ।
* **संघवाद और राज्य पुनर्गठन:** राज्य के भीतर क्षेत्रीय संतुलन और प्रशासनिक दक्षता पर प्रभाव।
5. **निष्कर्ष:** इन चिंताओं को दूर करने के लिए एक विशेषज्ञ-स्तरीय समीक्षा की आवश्यकता और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों का महत्व। न्यायिक समीक्षा की संभावना का उल्लेख।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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