29 Sep ओडिशा के 74 और तटीय गांवों को मिला सुनामी तैयार गांव का दर्जा

✎ 'सुनामी-तैयार' कार्यक्रम यूनेस्को-आईओसी की एक पहल है जिसका उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सुनामी के प्रति लचीलेपन का निर्माण करना है, जिसमें ओडिशा भारत का पहला राज्य है जिसने इस कार्यक्रम के तहत समुदायों को तैयार किया…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भारत एवं विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल) | GS Paper III — आपदा एवं आपदा प्रबंधन
- Prelims: सुनामी-तैयार कार्यक्रम, यूनेस्को-आईओसी, भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS), ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (OSDMA), राष्ट्रीय सुनामी तैयार बोर्ड (NTRB), आपदा जोखिम न्यूनीकरण
- Essay: आपदा प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी की भूमिका, जलवायु परिवर्तन और तटीय समुदायों की सुभेद्यता
त्वरित पुनरावृत्ति: ‘सुनामी-तैयार’ कार्यक्रम यूनेस्को-आईओसी की एक पहल है जिसका उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सुनामी के प्रति लचीलेपन का निर्माण करना है, जिसमें ओडिशा भारत का पहला राज्य है जिसने इस कार्यक्रम के तहत समुदायों को तैयार किया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ओडिशा के 74 और तटीय गाँवों को यूनेस्को-अंतरसरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (UNESCO-IOC) के ‘सुनामी-तैयार’ (Tsunami Ready) कार्यक्रम के तहत ‘सुनामी-तैयार’ घोषित किया गया है। इसके साथ ही, राज्य में ऐसे गाँवों की कुल संख्या 100 हो गई है। यह घोषणा राष्ट्रीय सुनामी तैयार बोर्ड (NTRB) और ओडिशा सरकार की एक बैठक में तटीय गाँवों के क्षेत्र सत्यापन के बाद की गई। यह उपलब्धि भारत के आपदा प्रबंधन प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, विशेषकर तटीय क्षेत्रों में सुनामी के खतरे को कम करने की दिशा में।
पृष्ठभूमि
- भारत में 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा है, जो इसे सुनामी सहित विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है।
- 2004 की हिंद महासागर सुनामी ने भारत सहित कई देशों में भारी तबाही मचाई थी, जिसके बाद आपदा प्रबंधन और पूर्व चेतावनी प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा।
- भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) हिंद महासागर सुनामी पूर्व चेतावनी प्रणाली (IOTWMS) के तहत सुनामी बुलेटिन जारी करने के लिए जिम्मेदार है।
- ओडिशा सरकार ने 381 तटीय गाँवों और बस्तियों को सुनामी-प्रवण के रूप में चिन्हित किया है और उन्हें चरणबद्ध तरीके से इस कार्यक्रम के तहत तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
- 2019 में, ओडिशा के गंजम जिले के वेंकटरायपुर (बॉक्सिपल्ली) और जगतसिंहपुर जिले के नोलियासाही को ‘सुनामी-तैयार’ गाँव के रूप में मान्यता मिली थी।
- 2024 में, 24 और गाँवों को इस कार्यक्रम के तहत मान्यता मिली थी, और अब 74 और गाँवों को शामिल किया गया है।
‘सुनामी-तैयार’ कार्यक्रम क्या है?
- यह यूनेस्को के अंतरसरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (Intergovernmental Oceanographic Commission – IOC) द्वारा शुरू की गई एक सामुदायिक प्रदर्शन-आधारित पहल है।
- इसका उद्देश्य सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिक संस्थानों, सामुदायिक नेताओं और आपातकालीन प्रबंधन प्राधिकरणों के बीच सहयोग के माध्यम से सुनामी की तैयारी को मजबूत करना है।
- यह कार्यक्रम जागरूकता, तैयारी और समय पर प्रतिक्रिया के माध्यम से जीवन, आजीविका और संपत्ति की रक्षा करने में सक्षम लचीले समुदायों को विकसित करना चाहता है।
- यह हिंद महासागर क्षेत्र के 22 देशों में लागू किया जा रहा है, जिसमें भारत भी शामिल है।
- कार्यक्रम के तहत, राष्ट्रीय सुनामी तैयार बोर्ड (NTRB) सुनामी जागरूकता, तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र का आकलन करने के लिए क्षेत्र सत्यापन करता है।
- मान्यता प्राप्त करने के लिए, समुदायों को सुनामी के खतरों को समझना, सुनामी के जोखिमों का आकलन करना, सुनामी की चेतावनी प्राप्त करना, सुनामी की प्रतिक्रिया योजनाओं को विकसित करना और सुनामी की तैयारी का अभ्यास करना जैसे 12 संकेतकों को पूरा करना होता है।
- यह कार्यक्रम आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework) के लक्ष्यों के अनुरूप है, जो आपदाओं के प्रति समुदायों की सुभेद्यता को कम करने पर जोर देता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| समुदाय-आधारित पहल | यह कार्यक्रम सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, जिससे आपदा प्रबंधन में जमीनी स्तर की भागीदारी सुनिश्चित होती है। |
| तटीय गाँवों की पहचान | ओडिशा सरकार ने 381 तटीय गाँवों और बस्तियों को सुनामी-संभावित के रूप में पहचाना है, जो चरणबद्ध तरीके से तैयारी के प्रयासों को निर्देशित करता है। |
| UNESCO-IOC ‘सुनामी रेडी’ कार्यक्रम | यह एक वैश्विक पहल है जिसका उद्देश्य सुनामी की तैयारी को मजबूत करना और लचीले समुदायों का निर्माण करना है। |
| राष्ट्रीय सुनामी रेडी बोर्ड (NTRB) | यह बोर्ड तटीय गाँवों में सुनामी जागरूकता, तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र का क्षेत्र सत्यापन करता है। |
| भारत की अग्रणी भूमिका | भारत हिंद महासागर क्षेत्र में ‘सुनामी रेडी’ कार्यक्रम को लागू करने वाला पहला देश बन गया है, जिसमें ओडिशा पहला राज्य है जिसने समुदायों को इसके तहत तैयार किया है। |
महत्व
आपदा जोखिम न्यूनीकरण
- यह पहल तटीय समुदायों में सुनामी के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे जीवन और संपत्ति की सुरक्षा होती है।
- यह आपदा प्रबंधन के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है, जिससे प्रतिक्रिया के बजाय तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानक
- UNESCO-IOC कार्यक्रम के तहत मान्यता भारत को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ संरेखित करती है।
- यह हिंद महासागर क्षेत्र में सुनामी तैयारी के लिए एक मॉडल स्थापित करता है।
समुदाय का सशक्तिकरण
- स्थानीय समुदायों को सुनामी के खतरों के बारे में शिक्षित और प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे वे प्रारंभिक चेतावनी और निकासी में प्रभावी ढंग से भाग ले सकें।
- यह समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन को मजबूत करता है, जिससे स्थानीय स्तर पर लचीलापन बढ़ता है।
शासन और नीति
- यह कार्यक्रम आपदा प्रबंधन नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन को दर्शाता है।
- यह राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय को बढ़ावा देता है।
चुनौतियाँ
1. जागरूकता और शिक्षा का निरंतर रखरखाव
- समुदायों में सुनामी जागरूकता और तैयारी के स्तर को समय के साथ बनाए रखना एक चुनौती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सुनामी दुर्लभ हैं।
- नियमित अभ्यास और शिक्षा कार्यक्रम आवश्यक हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जानकारी अद्यतित रहे और नई पीढ़ियों तक पहुंचे।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन, सामाजिक मुद्दे
2. बुनियादी ढांचे का विकास और रखरखाव
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, निकासी मार्ग और आश्रय स्थलों जैसे आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण और रखरखाव महत्वपूर्ण है।
- तटीय क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले खतरों को देखते हुए इस बुनियादी ढांचे की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन, अवसंरचना
3. संसाधन जुटाना
- कार्यक्रम के विस्तार और निरंतरता के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की आवश्यकता होती है।
- राज्य और केंद्र सरकारों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से निरंतर समर्थन महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन, शासन
4. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- समुद्र के स्तर में वृद्धि और चरम मौसम की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति सुनामी तैयारी प्रयासों को जटिल बना सकती है।
- जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन को सुनामी तैयारी रणनीतियों में एकीकृत करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| दीर्घकालिक जागरूकता | समुदायों में सुनामी तैयारी के प्रति जागरूकता और तत्परता के स्तर को लगातार बनाए रखना। |
| बुनियादी ढांचे की स्थिरता | तटीय क्षेत्रों में प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और निकासी सुविधाओं का निर्माण और दीर्घकालिक रखरखाव। |
| संसाधनों की उपलब्धता | कार्यक्रम के विस्तार और निरंतरता के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों को सुरक्षित करना। |
| जलवायु परिवर्तन का एकीकरण | बढ़ते समुद्र के स्तर और चरम मौसम की घटनाओं के प्रभावों को सुनामी तैयारी रणनीतियों में शामिल करना। |
| अंतिम मील तक पहुंच | दूरस्थ और सबसे कमजोर तटीय बस्तियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचना और उन्हें तैयार करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- UNESCO-Intergovernmental Oceanographic Commission (IOC) Tsunami Ready Recognition Programme
आगे की राह
- तटीय समुदायों में सुनामी जागरूकता और निकासी अभ्यासों को नियमित रूप से आयोजित करना ताकि तैयारी का स्तर बना रहे।
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और निकासी मार्गों सहित तटीय बुनियादी ढांचे को मजबूत और अद्यतन करना।
- समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन समितियों को सशक्त बनाना और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण और संसाधन प्रदान करना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, जैसे समुद्र के स्तर में वृद्धि, को सुनामी तैयारी योजनाओं में एकीकृत करना।
- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग को मजबूत करना ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं और तकनीकी सहायता का आदान-प्रदान किया जा सके।
- शेष सुनामी-संभावित गाँवों को चरणबद्ध तरीके से ‘सुनामी रेडी’ कार्यक्रम के तहत तैयार करने के प्रयासों में तेजी लाना।
- आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए बहु-खतरा दृष्टिकोण अपनाना, जिसमें सुनामी के साथ-साथ अन्य तटीय खतरों को भी शामिल किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आपदा प्रबंधन · सुनामी तैयारी · समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन · राष्ट्रीय सुनामी तैयारी बोर्ड · यूनेस्को-आईओसी सुनामी रेडी कार्यक्रम · तटीय भेद्यता · प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली · आपदा न्यूनीकरण · सतत विकास · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 256: संघ द्वारा राज्यों को निर्देश देने की शक्ति
- अनुच्छेद 257: कुछ मामलों में राज्यों पर संघ का नियंत्रण
अवधारणा प्रवाह
तटीय गाँव सुनामी-संभावित के रूप में पहचाने गए → UNESCO-IOC ‘सुनामी रेडी’ कार्यक्रम के तहत तैयारी → NTRB द्वारा क्षेत्र सत्यापन और मूल्यांकन → गाँवों को ‘सुनामी रेडी’ घोषित किया गया → समुदायों में सुनामी जागरूकता और प्रतिक्रिया तंत्र मजबूत हुए → जीवन और संपत्ति की सुरक्षा में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यूनेस्को-आईओसी सुनामी रेडी रिकॉग्निशन प्रोग्राम का उद्देश्य सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिक संस्थानों और सामुदायिक नेताओं के बीच सहयोग के माध्यम से सुनामी की तैयारी को मजबूत करना है।
2. भारत हिंद महासागर क्षेत्र में सुनामी रेडी कार्यक्रम को लागू करने वाला पहला देश है।
3. ओडिशा भारत का पहला राज्य है जिसने इस कार्यक्रम के तहत समुदायों को तैयार किया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग के माध्यम से सुनामी की तैयारी को मजबूत करना है। कथन 2 सही है क्योंकि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में इस कार्यक्रम को लागू करने वाला पहला देश बना। कथन 3 भी सही है क्योंकि ओडिशा भारत का पहला राज्य है जिसने इस कार्यक्रम के तहत समुदायों को तैयार किया है।
Q2. राष्ट्रीय सुनामी तैयारी बोर्ड (NTRB) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- यह केवल सुनामी जागरूकता कार्यक्रमों के लिए धन उपलब्ध कराता है।
- यह तटीय गांवों में सुनामी तैयारी, प्रतिक्रिया तंत्र और जागरूकता का क्षेत्र सत्यापन करता है।
- यह केवल सुनामी के बाद राहत कार्यों का समन्वय करता है।
- यह भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।
उत्तर: यह तटीय गांवों में सुनामी तैयारी, प्रतिक्रिया तंत्र और जागरूकता का क्षेत्र सत्यापन करता है। — राष्ट्रीय सुनामी तैयारी बोर्ड (NTRB) तटीय गांवों में सुनामी जागरूकता, तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र का क्षेत्र सत्यापन करता है, जैसा कि ओडिशा के मामले में किया गया। यह केवल धन उपलब्ध कराने या राहत कार्यों तक सीमित नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ आपदा प्रबंधन में समुदाय-आधारित दृष्टिकोण के महत्व पर चर्चा करें। राष्ट्रीय सुनामी तैयारी बोर्ड (NTRB) और यूनेस्को-आईओसी सुनामी रेडी कार्यक्रम जैसे कार्यक्रमों के संदर्भ में, भारत में तटीय आपदाओं के प्रति लचीलापन बढ़ाने में इसकी भूमिका का मूल्यांकन करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** आपदा प्रबंधन में समुदाय-आधारित दृष्टिकोण को परिभाषित करें और इसके महत्व पर संक्षिप्त प्रकाश डालें। (लगभग 20 शब्द)
2. **समुदाय-आधारित दृष्टिकोण का महत्व:** निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तार करें:
* स्थानीय ज्ञान और क्षमता का उपयोग।
* प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की प्रभावशीलता।
* तत्काल प्रतिक्रिया और निकासी में सहायता।
* पुनर्निर्माण और पुनर्वास में सक्रिय भागीदारी।
* स्थानीय स्वामित्व और संवेदनशीलता।
* लागत-प्रभावशीलता। (लगभग 80 शब्द)
3. **भारत में तटीय आपदाओं के प्रति लचीलापन बढ़ाने में भूमिका:**
* **राष्ट्रीय सुनामी तैयारी बोर्ड (NTRB):** इसकी भूमिका बताएं (क्षेत्र सत्यापन, तैयारी का आकलन, स्थानीय समुदायों के साथ बातचीत) और यह कैसे समुदाय-आधारित तैयारी को बढ़ावा देता है। ओडिशा के उदाहरण का उल्लेख करें।
* **यूनेस्को-आईओसी सुनामी रेडी कार्यक्रम:** इस कार्यक्रम के उद्देश्यों (जागरूकता, तैयारी, समय पर प्रतिक्रिया के माध्यम से जीवन, आजीविका और संपत्ति की सुरक्षा) और इसकी वैश्विक प्रासंगिकता पर चर्चा करें। भारत और विशेष रूप से ओडिशा की सफलता का उल्लेख करें (पहला देश/राज्य)।
* **इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्राप्त परिणाम:** सुनामी-प्रवण गांवों की पहचान, समुदायों की तैयारी, जागरूकता में वृद्धि, प्रतिक्रिया तंत्र का सुदृढ़ीकरण। (लगभग 100 शब्द)
4. **चुनौतियाँ और आगे का रास्ता:** समुदाय-आधारित दृष्टिकोण को लागू करने में आने वाली कुछ चुनौतियों (जैसे जागरूकता की कमी, संसाधनों की कमी, समन्वय) और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव (जैसे क्षमता निर्माण, नियमित अभ्यास, प्रौद्योगिकी का उपयोग) पर संक्षिप्त चर्चा करें। (लगभग 30 शब्द)
5. **निष्कर्ष:** आपदा प्रबंधन में समुदाय-आधारित दृष्टिकोण की अनिवार्यता और तटीय क्षेत्रों के लिए इसके दीर्घकालिक लाभों को दोहराते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें। (लगभग 20 शब्द)
स्रोत: orissapost.com
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हाल ही में ओडिशा सरकार द्वारा ‘सुनामी तैयार’ घोषित किए गए 74 तटीय गांवों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A. ये गांव ‘सुनामी तैयार’ प्रमाणीकरण प्राप्त करने वाले देश के पहले तटीय गांव हैं।
- B. ओडिशा सरकार ने इन गांवों को ‘सुनामी तैयार’ घोषित करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के साथ समझौता किया है।
- C. ‘सुनामी तैयार’ प्रमाणीकरण प्राप्त करने के लिए गांवों को सुनामी के प्रति संवेदनशीलता, तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है।
- D. ओडिशा में कुल मिलाकर 100 से अधिक गांवों को ‘सुनामी तैयार’ घोषित किया जा चुका है।
उत्तर: C. ‘सुनामी तैयार’ प्रमाणीकरण प्राप्त करने के लिए गांवों को सुनामी के प्रति संवेदनशीलता, तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। — ओडिशा सरकार द्वारा 74 तटीय गांवों को ‘सुनामी तैयार’ घोषित किया गया है, जिसमें सुनामी के प्रति संवेदनशीलता, तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता का मूल्यांकन शामिल है।
Mains: ओडिशा में ‘सुनामी तैयार’ गांवों की अवधारणा और इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए, राज्य में सुनामी जोखिम न्यूनीकरण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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