भुवनेश्वर और पुरी को मिला स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन में मॉडल शहर का दर्जा

भुवनेश्वर और पुरी को मिला स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन में मॉडल शहर का दर्जा

भुवनेश्वर और पुरी को मिला स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन में मॉडल शहर का दर्जा

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Waste-to-Value System

✎ 'प्रगति 50' पहल स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत 50 शहरों को मॉडल स्वच्छता शहरों में बदलने के लिए आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें ठोस अपशिष्ट और उपयोग किए गए जल के प्रबंधन पर…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन  |  GS Paper III — पर्यावरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन
  • Prelims: स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), PRAGATI 50 पहल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोग किए गए जल का प्रबंधन, शहरी स्थानीय निकाय
  • Essay: स्वच्छता और सतत् शहरी विकास: भारत के लिए एक अनिवार्य मार्ग, नागरिक भागीदारी और सुशासन: शहरी परिवर्तन के उत्प्रेरक

त्वरित पुनरावृत्ति: ‘प्रगति 50’ पहल स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत 50 शहरों को मॉडल स्वच्छता शहरों में बदलने के लिए आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें ठोस अपशिष्ट और उपयोग किए गए जल के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) की ‘प्रगति 50’ (PRAGATI 50) पहल के तहत देश भर के 50 शहरों में भुवनेश्वर और पुरी को शहरी स्वच्छता और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करने के प्रयासों के लिए चुना गया है। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) के अंतर्गत आती है और इसका उद्देश्य चयनित शहरों को मॉडल स्वच्छता शहरों में बदलना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ, शहरी स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।
  • स्वच्छ भारत मिशन (SBM) की शुरुआत 2014 में हुई थी, जिसका लक्ष्य देश को स्वच्छ बनाना था।
  • स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) को 2021 में ‘कचरा मुक्त शहरों’ के दृष्टिकोण के साथ लॉन्च किया गया था, जिसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और उपयोग किए गए जल के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया।
  • शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies – ULBs) शहरी स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • ओडिशा सरकार अपशिष्ट-से-मूल्य (waste-to-value) पहलों में सक्रिय रूप से शामिल रही है, जिसमें संपीड़ित बायो-गैस (Compressed Bio-Gas – CBG) संयंत्रों की स्थापना और अपशिष्ट-से-चारकोल पहल शामिल हैं।
  • नागरिक भागीदारी को शहरी स्वच्छता कार्यक्रमों की सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है।

‘प्रगति 50’ पहल क्या है?

  • ‘प्रगति 50’ पहल आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) के तहत शुरू की गई है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य देश के 50 चयनित शहरों को मॉडल स्वच्छता शहरों में बदलना है।
  • इन शहरों का चयन 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से किया गया है, ताकि वे अन्य शहरी केंद्रों के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं के मॉडल के रूप में कार्य कर सकें।
  • यह पहल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोग किए गए जल के प्रबंधन, स्वच्छता, साफ-सफाई और नागरिक भागीदारी में हस्तक्षेपों के त्वरित कार्यान्वयन पर केंद्रित है।
  • इसमें लक्षित निगरानी, संरचित सहायता और कार्यान्वयन में तेजी लाने पर जोर दिया जाएगा।
  • चयनित शहरों में प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (Key Performance Indicators – KPIs) के विरुद्ध प्रगति की निगरानी की जाएगी।
  • भुवनेश्वर और पुरी जैसे शहरों का चयन उनकी रणनीतिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए किया गया है, जिससे वे इस पहल के तहत अपनी स्वच्छता प्रणालियों को और मजबूत कर सकेंगे।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
PRAGATI 50 पहल आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) की यह पहल ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0’ के तहत 50 शहरों को मॉडल स्वच्छता शहर में बदलने का लक्ष्य रखती है।
भुवनेश्वर और पुरी का चयन ओडिशा के इन दो प्रमुख शहरी केंद्रों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोग किए गए जल प्रबंधन और स्वच्छता में उत्कृष्ट प्रयासों के लिए चुना गया है। भुवनेश्वर राज्य की राजधानी है, जबकि पुरी एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक स्थल है।
केंद्रित निगरानी और सहायता चयनित शहरों में हस्तक्षेपों के त्वरित कार्यान्वयन के लिए MoHUA द्वारा संरचित सहायता और गहन निगरानी प्रदान की जाएगी।
अपशिष्ट-से-मूल्य पहल ओडिशा में संपीड़ित बायो-गैस (CBG) संयंत्रों की स्थापना और अपशिष्ट-से-चारकोल पहलों के माध्यम से अपशिष्ट का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।
नागरिक भागीदारी स्वच्छता प्रणालियों को मजबूत करने और अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार के लिए नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देना इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

महत्व

शासन और शहरी विकास

  • PRAGATI 50 पहल शहरी स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल स्थापित करती है।
  • यह पहल शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) की क्षमता निर्माण और उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने में सहायक होगी।
  • केंद्र और राज्य के बीच समन्वय (MoHUA और ओडिशा के आवास एवं शहरी विकास विभाग के बीच) सहकारी संघवाद का एक उदाहरण है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य

  • वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता में सुधार से शहरी प्रदूषण कम होगा, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • अपशिष्ट-से-मूल्य (Waste-to-Value) पहल, जैसे CBG संयंत्र, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद करते हैं।
  • बेहतर स्वच्छता व्यवस्था से जल जनित बीमारियों का प्रसार रुकेगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा।

आर्थिक और सामाजिक

  • मॉडल स्वच्छता शहरों के रूप में भुवनेश्वर और पुरी की पहचान पर्यटन को बढ़ावा दे सकती है, खासकर पुरी जैसे धार्मिक स्थलों के लिए।
  • अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में निवेश और नई तकनीकों के उपयोग से रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  • नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देने से समुदाय में स्वामित्व की भावना विकसित होगी और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

चुनौतियाँ

1. वित्तीय स्थिरता और संसाधन जुटाना

  • शहरी स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • शहरी स्थानीय निकायों की सीमित वित्तीय क्षमता अक्सर बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लागू करने में बाधा डालती है।

2. तकनीकी विशेषज्ञता और क्षमता निर्माण

  • वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उन्नत तकनीकों और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जो सभी शहरी स्थानीय निकायों के पास उपलब्ध नहीं होती है।
  • कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण महत्वपूर्ण है ताकि नई तकनीकों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

3. नागरिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन

  • अपशिष्ट पृथक्करण और स्वच्छता प्रथाओं को अपनाने के लिए नागरिकों के व्यवहार में बदलाव लाना एक सतत चुनौती है।
  • समुदाय को शामिल करना और उन्हें स्वच्छता पहलों का हिस्सा बनाना अक्सर मुश्किल होता है, खासकर घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में।

4. भूमि अधिग्रहण और बुनियादी ढांचा

  • अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों और लैंडफिल साइटों के लिए उपयुक्त भूमि का अधिग्रहण शहरी क्षेत्रों में एक बड़ी चुनौती है।
  • अपशिष्ट संग्रह, परिवहन और प्रसंस्करण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास, विशेष रूप से मौजूदा शहरी क्षेत्रों में, जटिल हो सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अपशिष्ट पृथक्करण घरों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में स्रोत पर अपशिष्ट को अलग करने में निरंतरता की कमी।
अनौपचारिक क्षेत्र का एकीकरण अपशिष्ट बीनने वालों और अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली में प्रभावी ढंग से एकीकृत करने में चुनौतियाँ।
प्रौद्योगिकी का अनुकूलन स्थानीय परिस्थितियों और अपशिष्ट संरचना के अनुरूप उपयुक्त और लागत प्रभावी प्रौद्योगिकियों का चयन और कार्यान्वयन।
कानूनी प्रवर्तन स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना और उल्लंघनकर्ताओं पर जुर्माना लगाना।
अपशिष्ट-से-ऊर्जा परियोजनाओं की व्यवहार्यता अपशिष्ट-से-ऊर्जा परियोजनाओं की उच्च प्रारंभिक लागत और दीर्घकालिक परिचालन व्यवहार्यता सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (SBM-U 2.0)
  • PRAGATI 50 पहल

आगे की राह

  • शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता और क्षमता को मजबूत करना ताकि वे स्वच्छता परियोजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन जुटा सकें।
  • वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए तकनीकी विशेषज्ञता का विकास करना।
  • नागरिकों, स्वयं सहायता समूहों और निजी क्षेत्र को स्वच्छता पहलों में सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए जागरूकता अभियान और प्रोत्साहन योजनाएं शुरू करना।
  • अपशिष्ट-से-मूल्य परियोजनाओं, जैसे CBG संयंत्र और अपशिष्ट-से-चारकोल पहल, को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत समर्थन और निवेश को आकर्षित करना।
  • अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना जिसमें स्रोत पर पृथक्करण, कुशल संग्रह, परिवहन और वैज्ञानिक प्रसंस्करण शामिल हो।
  • स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक मजबूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित करना, जिसमें प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPIs) के आधार पर नियमित समीक्षा शामिल हो।
  • अन्य शहरों के लिए सफल मॉडल के रूप में कार्य करने के लिए भुवनेश्वर और पुरी में प्राप्त अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं का दस्तावेजीकरण और प्रसार करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 · PRAGATI 50 पहल · शहरी स्वच्छता · अपशिष्ट प्रबंधन · ठोस अपशिष्ट प्रबंधन · उपयोग किए गए जल का प्रबंधन · नागरिक भागीदारी · मॉडल स्वच्छता शहर · अपशिष्ट-से-मूल्य पहल · संपीड़ित बायो-गैस (CBG) संयंत्र

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व
  • अनुच्छेद 243G: पंचायतों की शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व

अवधारणा प्रवाह

शहरीकरण में वृद्धि  →  अपशिष्ट उत्पादन में वृद्धि  →  स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौती  →  स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 और PRAGATI 50 जैसी पहलें  →  वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और मॉडल शहरों का विकास  →  बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसका उद्देश्य भारत के सभी शहरों को ‘कचरा मुक्त’ बनाना है।
2. यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और उपयोग किए गए जल के प्रबंधन पर केंद्रित है।
3. PRAGATI 50 पहल SBM-U 2.0 के तहत शुरू की गई है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि SBM-U 2.0 का एक प्रमुख लक्ष्य सभी शहरों को कचरा मुक्त बनाना है। कथन 2 भी सही है, क्योंकि यह मिशन ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और उपयोग किए गए जल के प्रबंधन पर विशेष ध्यान देता है। कथन 3 भी सही है, PRAGATI 50 पहल आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा SBM-U 2.0 के तहत ही शुरू की गई है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय PRAGATI 50 पहल से संबंधित है?

  1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
  2. आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA)
  3. जल शक्ति मंत्रालय
  4. ग्रामीण विकास मंत्रालय

उत्तर: आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) — PRAGATI 50 पहल आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य चयनित शहरों को मॉडल स्वच्छता शहरों में बदलना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ शहरी स्वच्छता और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार के लिए ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0’ के तहत ‘PRAGATI 50’ पहल के महत्व का परीक्षण करें। यह पहल भारत में शहरी शासन और नागरिक भागीदारी को कैसे सुदृढ़ कर सकती है? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में पहले PRAGATI 50 पहल का परिचय दें, जिसमें इसके उद्देश्य और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के साथ इसके संबंध को स्पष्ट किया जाए। इसके बाद, शहरी स्वच्छता और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन में इसके महत्व का विस्तार से परीक्षण करें, जिसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोग किए गए जल के प्रबंधन और अपशिष्ट-से-मूल्य जैसी पहलों पर इसके प्रभाव को शामिल किया जाए। दूसरे भाग में, यह विश्लेषण करें कि यह पहल शहरी शासन (शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका, निगरानी तंत्र) और नागरिक भागीदारी (जन जागरूकता, व्यवहार परिवर्तन) को कैसे सुदृढ़ कर सकती है। ओडिशा के भुवनेश्वर और पुरी जैसे शहरों के उदाहरणों का उल्लेख करें और निष्कर्ष में इसके व्यापक प्रभावों पर प्रकाश डालें।

स्रोत: orissapost.com

Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: ओडिशा सरकार द्वारा ‘स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन’ के क्षेत्र में ‘भुवनेश्वर-पुरी’ को राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित करने का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

  1. A. राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना
  2. B. शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ बनाना
  3. C. औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करना
  4. D. कृषि उत्पादन में वृद्धि करना

उत्तर: B. शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ बनाना — भुवनेश्वर-पुरी को राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित करने का उद्देश्य राज्य के प्रमुख शहरों में स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ बनाना है।

Mains: ओडिशा राज्य लोक सेवा आयोग (ओपीएससी) द्वारा आयोजित ओएएस मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन-IV (नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिक्षमता) के संदर्भ में, ‘भुवनेश्वर-पुरी को स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित करने’ की पहल के सफल कार्यान्वयन हेतु आवश्यक नैतिक मूल्यों एवं प्रशासनिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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