सुप्रीम कोर्ट का पटाखों पर फैसला: पूर्ण प्रतिबंध नहीं, समय-सीमा तय करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट का पटाखों पर फैसला: पूर्ण प्रतिबंध नहीं, समय-सीमा तय करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट का पटाखों पर फैसला: पूर्ण प्रतिबंध नहीं, समय-सीमा तय करने का निर्देश

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✎ सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार करते हुए, धार्मिक भावनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है, जिसके लिए सरकार को समय-सीमा और ग्रीन पटाखों के मानकों को तय करना होगा।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, शासन प्रणाली और सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — पर्यावरण और आपदा प्रबंधन
  • Prelims: सर्वोच्च न्यायालय, पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA), वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), बेरियम साल्ट, ग्रीन पटाखे, अनुच्छेद 21
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन, न्यायिक सक्रियता और नीति निर्माण में उसकी भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार करते हुए, धार्मिक भावनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है, जिसके लिए सरकार को समय-सीमा और ग्रीन पटाखों के मानकों को तय करना होगा।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन 24 घंटे आतिशबाजी की अनुमति भी नहीं दी है। न्यायालय ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को पटाखों में बेरियम की जांच, डेसिबल स्तर तय करने और फायर टेस्ट के लिए समय दिया है। यह निर्णय धार्मिक भावनाओं, स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन स्थापित करने के महत्व को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में पटाखों से होने वाला वायु प्रदूषण (Air Pollution) विशेष रूप से दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान एक गंभीर चिंता का विषय रहा है।
  • दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI) अक्सर ‘बहुत खराब’ या ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाता है, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियां बढ़ जाती हैं।
  • विभिन्न नागरिक संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है, जबकि पटाखा निर्माताओं और कुछ धार्मिक समूहों ने इस पर आपत्ति जताई है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई निर्देश जारी किए हैं, जिनमें ग्रीन पटाखों (Green Crackers) के उपयोग की अनुमति और पटाखों की बिक्री व उपयोग के लिए समय-सीमा निर्धारित करना शामिल है।
  • ग्रीन पटाखे वे पटाखे होते हैं जिनमें हानिकारक रसायनों का उपयोग कम किया जाता है और वे कम प्रदूषण फैलाते हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (CSIR-NEERI) के सहयोग से विकसित किया गया है।
  • न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर यह भी कहा है कि यदि दिल्ली-NCR के शहरों को स्वच्छ हवा का अधिकार है, तो अन्य शहरों के लोगों को भी यह अधिकार मिलना चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय का पटाखों पर दृष्टिकोण

  • सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है, यह मानते हुए कि यह लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है।
  • हालांकि, न्यायालय ने 24 घंटे आतिशबाजी की अनुमति भी नहीं दी है, क्योंकि इससे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।
  • न्यायालय ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को पटाखों में बेरियम (Barium) की मात्रा की जांच करने, उनके डेसिबल (Decibel) स्तर को निर्धारित करने और फायर टेस्ट (Fire Test) आयोजित करने का निर्देश दिया है।
  • अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने ‘नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंट ग्रीन क्रैकर्स’ (Next-Generation Joint Green Crackers) को सीमित और शर्तों के साथ छूट देने का प्रस्ताव रखा है।
  • ये विशेष ग्रीन पटाखे CSIR-NEERI के सहयोग से विकसित किए गए हैं और इनमें उत्सर्जन कम करने के लिए बेरियम साल्ट की मात्रा घटाई गई है।
  • इन पटाखों को केवल लाइसेंस प्राप्त निर्माताओं द्वारा ही बनाया जा सकता है और उन्हें निर्धारित शोर सीमा (125 dB(AI)/145 dB(C) पीक) तथा उत्सर्जन व सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।
  • न्यायालय ने पिछले साल भी दिल्ली और NCR में ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी थी, लेकिन यह छूट परंपराओं और पर्यावरण व स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की शर्तों के साथ दी गई थी।
  • यह दृष्टिकोण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) के तहत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार और अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार) के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं धार्मिक भावनाओं और त्योहारों के उत्सव को ध्यान में रखना।
24 घंटे आतिशबाजी की अनुमति नहीं पर्यावरण, स्वास्थ्य और जन-सुविधा के बीच संतुलन स्थापित करना।
समय-सीमा का निर्धारण पटाखों के उपयोग के लिए एक विनियमित ढाँचा प्रदान करना, जिससे प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
ग्रीन पटाखों को सीमित छूट पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देना और प्रदूषण को कम करना।
बेरियम की जांच और डेसिबल स्तर पटाखों में हानिकारक रसायनों और अत्यधिक शोर को नियंत्रित करना, जिससे स्वास्थ्य जोखिम कम हों।

महत्व

पर्यावरण और स्वास्थ्य

  • पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण (Air Pollution) और ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकेगा।
  • ग्रीन पटाखों को बढ़ावा देने से पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक और टिकाऊ प्रथाओं को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे दीर्घकालिक पर्यावरणीय लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता मिलेगी।

सामाजिक और सांस्कृतिक

  • धार्मिक भावनाओं और त्योहारों के उत्सव के अधिकार को बनाए रखते हुए, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के बीच एक नाजुक संतुलन स्थापित किया गया है।
  • यह निर्णय विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक प्रथाओं का सम्मान करते हुए, आधुनिक पर्यावरणीय चिंताओं को संबोधित करने का प्रयास करता है।

शासन और नियामक

  • यह निर्णय केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को पटाखों के विनियमन और परीक्षण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करता है, जिससे प्रभावी प्रवर्तन संभव होगा।
  • न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के माध्यम से नीति निर्माण में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है, जहाँ जनहित और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन साधा जाता है।

चुनौतियाँ

1. प्रवर्तन और निगरानी

  • निर्धारित समय-सीमा और ग्रीन पटाखों के उपयोग संबंधी नियमों का प्रभावी ढंग से प्रवर्तन सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी, विशेषकर त्योहारों के दौरान।
  • अवैध पटाखों की बिक्री और उपयोग को रोकना तथा यह सुनिश्चित करना कि केवल लाइसेंस प्राप्त निर्माता ही निर्धारित मानकों का पालन करें।

2. जन जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन

  • जनता को ग्रीन पटाखों के लाभों और पारंपरिक पटाखों के हानिकारक प्रभावों के बारे में शिक्षित करना तथा उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना।
  • धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं को पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों के साथ सामंजस्य बिठाना।

3. प्रौद्योगिकी और नवाचार

  • CSIR-NEERI जैसे संस्थानों द्वारा विकसित ग्रीन पटाखों की उपलब्धता और लागत को सुनिश्चित करना, ताकि वे आम जनता के लिए सुलभ हों।
  • पटाखा उद्योग को पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करना।

4. अंतर-राज्यीय समन्वय

  • विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पटाखों के विनियमन और प्रवर्तन में एकरूपता सुनिश्चित करना, क्योंकि प्रदूषण का प्रभाव क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहता।
  • राज्यों के बीच मानकों और नीतियों के समन्वय में चुनौतियाँ आ सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वायु प्रदूषण पटाखों से निकलने वाले हानिकारक कण (PM2.5, PM10) और गैसें (SO2, NO2) श्वसन संबंधी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती हैं।
ध्वनि प्रदूषण अत्यधिक शोर से हृदय रोग, तनाव, नींद में खलल और बच्चों व बुजुर्गों में सुनने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
हानिकारक रसायन पटाखों में बेरियम (Barium) जैसे भारी धातुओं का उपयोग पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
अपशिष्ट प्रबंधन पटाखों के उपयोग के बाद बड़ी मात्रा में उत्पन्न होने वाला कचरा (Waste) और उसके निपटान की चुनौती।
अवैध निर्माण और बिक्री बिना लाइसेंस वाले निर्माताओं द्वारा असुरक्षित और हानिकारक पटाखों का उत्पादन तथा बिक्री, जिससे सुरक्षा और नियामक चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।

आगे की राह

  • पटाखों के उपयोग के लिए एक स्पष्ट और राष्ट्रीय स्तर पर लागू होने वाली समय-सीमा निर्धारित की जाए, जिसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सख्ती से लागू किया जा सके।
  • ग्रीन पटाखों के उत्पादन, बिक्री और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू की जाएँ तथा उनकी उपलब्धता और वहनीयता सुनिश्चित की जाए।
  • पटाखों में हानिकारक रसायनों, विशेषकर बेरियम, के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और इसके स्थान पर सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए।
  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (Pollution Control Boards) को पटाखों के डेसिबल स्तर और उत्सर्जन मानकों की निगरानी के लिए सशक्त किया जाए तथा उल्लंघनकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
  • जन जागरूकता अभियान चलाए जाएँ जो पटाखों से होने वाले स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में जनता को शिक्षित करें तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्सवों को बढ़ावा दें।
  • पटाखा उद्योग को अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए ताकि कम प्रदूषणकारी और सुरक्षित पटाखे विकसित किए जा सकें।
  • अवैध पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर कड़ी निगरानी रखी जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पटाखा प्रतिबंध · पर्यावरण प्रदूषण · वायु गुणवत्ता सूचकांक · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन · ग्रीन पटाखे · बेरियम साल्ट · ध्वनि प्रदूषण · जन स्वास्थ्य · धार्मिक स्वतंत्रता · न्यायिक सक्रियता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार)
  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन (राज्य का कर्तव्य)
  • अनुच्छेद 51A(g): पर्यावरण की रक्षा और सुधार (नागरिक का मौलिक कर्तव्य)

अवधारणा प्रवाह

पटाखों का उपयोग  →  वायु और ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि  →  नागरिकों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव  →  पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव  →  न्यायिक हस्तक्षेप और नियामक आवश्यकता  →  संतुलनकारी निर्णय और समय-सीमा का निर्धारण  →  ग्रीन पटाखों को प्रोत्साहन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
2. ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम प्रदूषणकारी होते हैं क्योंकि इनमें बेरियम साल्ट की मात्रा कम होती है।
3. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत स्थापित एक सांविधिक संगठन है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। कथन 2 सही है। ग्रीन पटाखे CSIR-NEERI के सहयोग से विकसित किए गए हैं और इनमें बेरियम साल्ट की मात्रा कम होती है, जिससे उत्सर्जन कम होता है। कथन 3 सही है। CPCB जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत स्थापित किया गया था, लेकिन इसे पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत भी शक्तियाँ और कार्य सौंपे गए हैं, जिससे यह एक सांविधिक संगठन है।

Q2. अभिकथन (A): सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है।
कारण (R): पूर्ण प्रतिबंध से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और यह व्यवहार्य नहीं है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है, यह कहते हुए कि यह संभव नहीं है और इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होंगी। इसलिए, अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पटाखों के उपयोग पर सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के आलोक में, धार्मिक स्वतंत्रता और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का संदर्भ: पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध से इनकार, लेकिन 24 घंटे की अनुमति नहीं, समय निर्धारण का निर्देश।
धार्मिक स्वतंत्रता का संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 25-28 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार।
पर्यावरण संरक्षण का संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार), अनुच्छेद 48A (राज्य का कर्तव्य), अनुच्छेद 51A(g) (नागरिकों का कर्तव्य)।
संतुलन स्थापित करने की चुनौतियाँ: धार्मिक भावनाओं का सम्मान बनाम जन स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पटाखों का नकारात्मक प्रभाव (वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, बेरियम साल्ट का उत्सर्जन)।
न्यायिक सक्रियता की भूमिका: न्यायालय द्वारा विभिन्न निर्णयों के माध्यम से संतुलन बनाने का प्रयास (जैसे ग्रीन पटाखों की अनुमति, समय सीमा तय करना)।
सरकार और नियामक निकायों की भूमिका: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), CSIR-NEERI की भूमिका, ‘नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंट ग्रीन क्रैकर्स’ का विकास।
आगे की राह: प्रौद्योगिकी का उपयोग (ग्रीन पटाखे), जन जागरूकता, प्रभावी विनियमन और प्रवर्तन।

स्रोत: bhaskar.com


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