2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभा: ‘सबकी योजना, सबका विकास’ अभियान शुरू

2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभा: 'सबकी योजना, सबका विकास' अभियान शुरू

2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभा: ‘सबकी योजना, सबका विकास’ अभियान शुरू

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ग्राम सभा से विकास तक

✎ ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था की आधारशिला है, जो प्रत्यक्ष लोकतंत्र और सहभागी शासन को बढ़ावा देती है, और 'सबकी योजना, सबका विकास' अभियान के माध्यम से स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान – महत्वपूर्ण प्रावधान, संघवाद, स्थानीय स्वशासन  |  GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू, ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग
  • Prelims: ग्राम सभा, पंचायती राज संस्थाएँ, 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, पीपुल्स प्लान कैंपेन (PPC), सबकी योजना, सबका विकास, गांधी जयंती, स्थानीय स्वशासन, विकेंद्रीकृत योजना
  • Essay: भारत में सहभागी शासन और स्थानीय स्वशासन की भूमिका, ग्राम स्वराज की अवधारणा और उसके समकालीन निहितार्थ

त्वरित पुनरावृत्ति: ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था की आधारशिला है, जो प्रत्यक्ष लोकतंत्र और सहभागी शासन को बढ़ावा देती है, और ‘सबकी योजना, सबका विकास’ अभियान के माध्यम से स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर, पूरे भारत में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इन ग्राम सभाओं में शासन सुधारों पर चर्चा की जाएगी। यह पहल स्थानीय स्तर पर योजना निर्माण और विकास प्रक्रियाओं में नागरिकों की भागीदारी को बढ़ाने पर केंद्रित है, जिससे जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण और समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।

पृष्ठभूमि

  • भारत में स्थानीय स्वशासन (Local Self-Governance) की अवधारणा महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ के दर्शन से गहराई से जुड़ी हुई है, जिसका उद्देश्य गाँवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है।
  • 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 (73rd Constitutional Amendment Act, 1992) ने पंचायती राज संस्थाओं (Panchayati Raj Institutions – PRIs) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया, जिससे ग्रामीण स्थानीय निकायों को अधिक शक्तियाँ और जिम्मेदारियाँ मिलीं।
  • ग्राम सभा (Gram Sabha) को इस अधिनियम के तहत पंचायती राज व्यवस्था की आधारशिला के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो ग्राम स्तर पर प्रत्यक्ष लोकतंत्र का प्रतीक है।
  • यह अनिवार्य है कि ग्राम पंचायतें अपनी विकास योजनाओं को ग्राम सभा के माध्यम से तैयार करें, ताकि स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को शामिल किया जा सके।
  • ‘सबकी योजना, सबका विकास’ अभियान एक वार्षिक अभ्यास है जिसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों के लिए समावेशी और सहभागी ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (Gram Panchayat Development Plans – GPDPs) तैयार करना है।
  • यह अभियान विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को एकीकृत करने तथा उन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनाने में मदद करता है, जिससे संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होता है।

ग्राम सभा और ‘सबकी योजना, सबका विकास’ अभियान

  • ग्राम सभा: यह पंचायती राज व्यवस्था में सबसे निचला और सबसे महत्वपूर्ण स्तर है। यह ग्राम पंचायत के क्षेत्र में रहने वाले सभी पंजीकृत मतदाताओं से मिलकर बनी होती है। यह एक स्थायी निकाय है और ग्राम पंचायत के लिए निर्णय लेने वाली प्राथमिक संस्था है।
  • कार्य और शक्तियाँ: ग्राम सभा के पास ग्राम पंचायत के बजट को मंजूरी देने, वार्षिक खातों की समीक्षा करने, विकास कार्यक्रमों के लाभार्थियों का चयन करने और ग्राम पंचायत के कार्यों की निगरानी करने की शक्ति होती है। यह सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) के लिए एक मंच भी प्रदान करती है।
  • 73वाँ संविधान संशोधन: इस संशोधन ने ग्राम सभा को संवैधानिक दर्जा दिया और इसे स्थानीय स्वशासन की रीढ़ के रूप में स्थापित किया। यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र और विकेंद्रीकृत शासन (Decentralized Governance) को बढ़ावा देता है।
  • ‘सबकी योजना, सबका विकास’ अभियान: यह भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक अभियान है जिसका उद्देश्य ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) को सहभागी और पारदर्शी तरीके से तैयार करना है।
  • उद्देश्य: इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदायों को उनकी अपनी विकास योजनाओं को तैयार करने में सक्रिय रूप से शामिल करना है, जिससे विकास प्रक्रिया अधिक समावेशी और जवाबदेह बन सके।
  • योजना प्रक्रिया: इस अभियान के तहत, ग्राम सभाएँ अपनी स्थानीय जरूरतों, संसाधनों और प्राथमिकताओं की पहचान करती हैं। विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी और स्वयं सहायता समूह (Self-Help Groups) भी इस प्रक्रिया में सहयोग करते हैं।
  • परिणाम: यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन, संसाधनों के कुशल उपयोग और स्थानीय स्तर पर शासन में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
विशेष ग्राम सभाएँ गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर पूरे भारत में आयोजित, स्थानीय स्वशासन और सामुदायिक भागीदारी पर जोर।
पीपल्स प्लान कैंपेन 2026-27 ‘सबकी योजना, सबका विकास’ का शुभारंभ स्थानीय स्तर पर विकासात्मक योजनाओं के निर्माण और कार्यान्वयन में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना।
परिवर्तनकारी शासन सुधारों पर चर्चा ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने और जमीनी स्तर पर शासन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए विचारों और रणनीतियों पर विचार-विमर्श।
विकेंद्रीकृत योजना ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप योजनाएँ बनाना।
सामुदायिक भागीदारी विकास प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों, विशेषकर कमजोर वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना।

महत्व

शासन

  • यह पहल विकेंद्रीकृत शासन (Decentralised Governance) को मजबूत करती है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया जमीनी स्तर तक पहुँचती है।
  • ग्राम सभाओं के माध्यम से नागरिकों की सीधी भागीदारी सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों को बढ़ावा देती है, जैसे पारदर्शिता और जवाबदेही।
  • यह स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय संसाधनों और ज्ञान का उपयोग करने में मदद करता है, जिससे अधिक प्रभावी और टिकाऊ विकास होता है।

सामाजिक

  • ‘सबकी योजना, सबका विकास’ अभियान समावेशी विकास (Inclusive Development) को बढ़ावा देता है, यह सुनिश्चित करता है कि समाज के सभी वर्गों, विशेषकर हाशिए पर पड़े लोगों की आवाज सुनी जाए।
  • यह सामुदायिक एकजुटता और सामाजिक पूंजी के निर्माण में सहायक है, क्योंकि लोग अपने गाँवों के विकास के लिए मिलकर काम करते हैं।
  • महिलाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करके सामाजिक न्याय (Social Justice) को बढ़ावा मिलता है।

आर्थिक

  • स्थानीय स्तर पर योजना निर्माण से संसाधनों का बेहतर आवंटन होता है, जिससे आर्थिक दक्षता बढ़ती है।
  • ग्राम पंचायतों द्वारा कार्यान्वित योजनाएँ स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकती हैं।
  • बुनियादी ढाँचे के विकास और सेवाओं की उपलब्धता में सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर ऊपर उठता है।

चुनौतियाँ

1. जागरूकता और भागीदारी का अभाव

  • कई ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभाओं के महत्व और उनके अधिकारों के बारे में जागरूकता की कमी है।
  • महिलाओं और कमजोर वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना अभी भी एक चुनौती है, क्योंकि सामाजिक बाधाएँ मौजूद हैं।

2. क्षमता निर्माण की कमी

  • ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के पास अक्सर प्रभावी योजना बनाने और उसे लागू करने के लिए आवश्यक कौशल और प्रशिक्षण का अभाव होता है।
  • तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन की कमी भी योजनाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।

3. संसाधनों की कमी

  • ग्राम पंचायतों के पास अक्सर वित्तीय संसाधनों की कमी होती है, जिससे उन्हें अपनी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में बाधा आती है।
  • मानव संसाधनों और बुनियादी ढाँचे की कमी भी एक बड़ी चुनौती है।

4. राजनीतिक हस्तक्षेप

  • स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हस्तक्षेप ग्राम सभाओं की स्वायत्तता और निष्पक्ष कामकाज को प्रभावित कर सकता है।
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया में बाहरी दबाव भी एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
ग्राम सभाओं में कम उपस्थिति निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी हितधारकों की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो पाती।
महिलाओं और कमजोर वर्गों की सीमित भागीदारी सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं के कारण इन वर्गों की आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती है।
योजना निर्माण में तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव ग्राम पंचायतें अक्सर प्रभावी और टिकाऊ योजनाएँ बनाने के लिए आवश्यक तकनीकी ज्ञान से वंचित रहती हैं।
वित्तीय स्वायत्तता की कमी राज्य सरकारों पर निर्भरता के कारण ग्राम पंचायतों की वित्तीय स्वतंत्रता सीमित होती है, जिससे योजनाओं का कार्यान्वयन प्रभावित होता है।
जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी निधियों के उपयोग और योजनाओं के कार्यान्वयन में अनियमितताओं की संभावना बनी रहती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • पीपल्स प्लान कैंपेन ‘सबकी योजना, सबका विकास’
  • ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP)

आगे की राह

  • ग्राम सभाओं के महत्व और उनके अधिकारों के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।
  • महिलाओं और कमजोर वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए।
  • ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम और प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए जाएँ।
  • ग्राम पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन और तकनीकी सहायता प्रदान की जाए ताकि वे प्रभावी योजनाएँ बना सकें और उन्हें लागू कर सकें।
  • ग्राम सभाओं की बैठकों को नियमित और पारदर्शी बनाया जाए, जिसमें निर्णयों और कार्यवाहियों का उचित रिकॉर्ड रखा जाए।
  • जवाबदेही तंत्र को मजबूत किया जाए और सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) को बढ़ावा दिया जाए ताकि निधियों के दुरुपयोग को रोका जा सके।
  • सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके ग्राम पंचायतों के कामकाज में दक्षता और पारदर्शिता लाई जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ग्राम सभा · पंचायती राज · स्थानीय स्वशासन · पीपल्स प्लान कैंपेन · सबकी योजना, सबका विकास · गांधी जयंती · सतत विकास लक्ष्य · विकेन्द्रीकृत नियोजन · ग्राम पंचायत विकास योजना · सहभागी लोकतंत्र

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 40’, ‘note’: ‘ग्राम पंचायतों का संगठन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243A’, ‘note’: ‘ग्राम सभा की शक्तियाँ और कार्य’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘ग्यारहवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय’}

अवधारणा प्रवाह

विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन  →  परिवर्तनकारी शासन सुधारों पर चर्चा  →  पीपल्स प्लान कैंपेन का शुभारंभ  →  स्थानीय स्तर पर योजना निर्माण में भागीदारी  →  ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) का कार्यान्वयन  →  विकेंद्रीकृत शासन और समावेशी विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 243-A ग्राम सभा को परिभाषित करता है।
2. ग्राम सभा की शक्तियाँ राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
3. ‘सबकी योजना, सबका विकास’ अभियान का उद्देश्य ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयार करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 243-A ग्राम सभा की शक्तियों और कार्यों से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 243 ग्राम सभा को परिभाषित करता है। कथन 2 सही है। ग्राम सभा की शक्तियाँ और कार्य राज्य विधानमंडल द्वारा कानून बनाकर निर्धारित किए जाते हैं। कथन 3 सही है। ‘सबकी योजना, सबका विकास’ अभियान का मुख्य उद्देश्य सहभागी नियोजन प्रक्रिया के माध्यम से ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयार करना है।

Q2. अभिकथन (A): 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन महात्मा गांधी के ग्राम स्वशासन के दर्शन को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
कारण (R): महात्मा गांधी ने ग्राम स्वराज की अवधारणा का समर्थन किया था, जिसमें गाँवों को आत्मनिर्भर और लोकतांत्रिक इकाइयों के रूप में देखा गया था।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है। महात्मा गांधी का ग्राम स्वशासन का दर्शन ग्राम स्वराज पर आधारित था, जिसमें गाँवों को आत्मनिर्भर और लोकतांत्रिक इकाइयों के रूप में सशक्त बनाने पर जोर दिया गया था। 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन इसी दर्शन को आगे बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर सहभागी लोकतंत्र को मजबूत करने का एक प्रयास है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से ‘ग्राम स्वशासन’ के महात्मा गांधी के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में ग्राम सभा की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। ‘पीपल्स प्लान कैंपेन’ जैसे अभियान इस दिशा में कैसे योगदान करते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वशासन’ के दर्शन का संक्षिप्त परिचय और पंचायती राज संस्थाओं में ग्राम सभा के महत्व का उल्लेख।
2. **ग्राम सभा की भूमिका:**
* **संवैधानिक प्रावधान:** अनुच्छेद 243-A के तहत ग्राम सभा की शक्तियों और कार्यों का उल्लेख।
* **लोकतांत्रिक आधार:** प्रत्यक्ष लोकतंत्र, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका।
* **योजना निर्माण:** ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के निर्माण में इसकी केंद्रीय भूमिका।
* **सामाजिक न्याय:** कमजोर वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
* **निगरानी:** ग्राम पंचायत के कार्यों और वित्तीय प्रबंधन पर निगरानी।
3. **चुनौतियाँ और सीमाएँ (समालोचनात्मक पक्ष):**
* **कम भागीदारी:** विशेषकर महिलाओं और हाशिए के वर्गों की।
* **जागरूकता का अभाव:** अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति।
* **पंचायती राज संस्थाओं पर निर्भरता:** ग्राम पंचायत द्वारा एजेंडा तय करना।
* **राजनीतिक हस्तक्षेप:** स्थानीय राजनीति का प्रभाव।
* **निर्णयों का कार्यान्वयन:** ग्राम सभा के निर्णयों को लागू करने में चुनौतियाँ।
4. **’पीपल्स प्लान कैंपेन’ का योगदान:**
* **सहभागी नियोजन:** ‘सबकी योजना, सबका विकास’ के माध्यम से ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) को समावेशी बनाना।
* **क्षमता निर्माण:** ग्राम सभा सदस्यों और निर्वाचित प्रतिनिधियों को सशक्त करना।
* **सतत विकास लक्ष्य (SDGs) का स्थानीयकरण:** स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास लक्ष्यों को एकीकृत करना।
* **जवाबदेही बढ़ाना:** ग्राम पंचायतों को ग्राम सभा के प्रति अधिक जवाबदेह बनाना।
* **संसाधनों का प्रभावी उपयोग:** स्थानीय संसाधनों के बेहतर नियोजन में मदद करना।
5. **निष्कर्ष:** ग्राम सभा को सशक्त करने और महात्मा गांधी के ग्राम स्वशासन के सपने को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासों, जागरूकता और प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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