संसदीय कार्य मंत्री ने 2026 में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत श्रमदान किया

संसदीय कार्य मंत्री ने 2026 में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत श्रमदान किया

संसदीय कार्य मंत्री ने 2026 में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत श्रमदान किया

स्वच्छता अभियान प्रक्रियास्वच्छ भारत मिशन शुरू2 अक्टूबर 2014स्वच्छता ही सेवा अभियावार्षिक जन आंदोलनएक दिन – एक घंटा – एक जनभागीदारी पहलअपशिष्ट प्रबंधन सुधारठोस एवं तरल अपशिष्टस्वच्छ भारत लक्ष्य प्रODF भारत
स्वच्छता अभियान प्रक्रिया

✎ स्वच्छता ही सेवा अभियान स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक जन आंदोलन है, जो जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देता है और महात्मा गांधी की जयंती से पहले आयोजित किया जाता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ  |  GS Paper III — पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण
  • Prelims: स्वच्छता ही सेवा अभियान, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), खुले में शौच मुक्त (ODF), अपशिष्ट प्रबंधन, जनभागीदारी
  • Essay: स्वच्छता: एक राष्ट्रीय कर्तव्य और सामाजिक परिवर्तन का उत्प्रेरक, जनभागीदारी से जन आंदोलन: भारत के विकास की कुंजी

त्वरित पुनरावृत्ति: स्वच्छता ही सेवा अभियान स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक जन आंदोलन है, जो जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देता है और महात्मा गांधी की जयंती से पहले आयोजित किया जाता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

संसदीय कार्य मंत्री ने ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026’ के तहत ‘एक दिन – एक घंटा – एक साथ श्रमदान’ पहल का नेतृत्व किया। यह पहल महात्मा गांधी की जयंती से पूर्व देशव्यापी स्वच्छता अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्वच्छ भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना है।

पृष्ठभूमि

  • स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission – SBM) की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को की गई थी, जिसका लक्ष्य गांधीजी के ‘स्वच्छ भारत’ के सपने को साकार करना था।
  • इस मिशन के दो मुख्य घटक हैं: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)।
  • मिशन का प्राथमिक उद्देश्य खुले में शौच मुक्त (Open Defecation Free – ODF) भारत प्राप्त करना, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करना और स्वच्छता के प्रति लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना है।
  • स्वच्छता ही सेवा (Swachhata Hi Seva – SHS) अभियान स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक वार्षिक जन आंदोलन है, जो महात्मा गांधी की जयंती से पहले आयोजित किया जाता है, ताकि स्वच्छता के महत्व पर जोर दिया जा सके और नागरिकों को श्रमदान के लिए प्रेरित किया जा सके।
  • इस अभियान के माध्यम से सरकार जनभागीदारी को बढ़ावा देकर स्वच्छता को एक सामूहिक जिम्मेदारी बनाने का प्रयास करती है।
  • मिशन ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

स्वच्छता ही सेवा अभियान क्या है?

  • स्वच्छता ही सेवा (SHS) अभियान स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन है, जिसे प्रतिवर्ष महात्मा गांधी की जयंती से पहले आयोजित किया जाता है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाना और नागरिकों को स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करना है।
  • यह अभियान ‘स्वच्छता’ को ‘सेवा’ के रूप में देखता है, जहां प्रत्येक नागरिक देश को स्वच्छ रखने में अपना योगदान देता है।
  • अभियान के दौरान विभिन्न प्रकार की स्वच्छता गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जिनमें श्रमदान, जागरूकता कार्यक्रम, साफ-सफाई अभियान और अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित पहल शामिल हैं।
  • ‘एक दिन – एक घंटा – एक साथ श्रमदान’ इस अभियान का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसमें नागरिकों को एक निश्चित दिन पर एक घंटे के लिए स्वच्छता गतिविधियों में सामूहिक रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
  • यह पहल सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देती है और लोगों में अपने परिवेश को स्वच्छ रखने की भावना पैदा करती है।
  • अभियान का लक्ष्य केवल भौतिक स्वच्छता प्राप्त करना नहीं है, बल्कि लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना और स्वच्छता को एक स्थायी आदत बनाना भी है।
  • यह स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें खुले में शौच मुक्त स्थिति बनाए रखना और ठोस एवं तरल अपशिष्ट का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना शामिल है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
स्वच्छता ही सेवा अभियान यह महात्मा गांधी की जयंती से पहले स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने का एक राष्ट्रव्यापी अभियान है।
एक दिन – एक घंटा – एक साथ श्रमदान यह अभियान के तहत एक विशेष पहल है, जिसमें नागरिक एक साथ मिलकर एक घंटे का श्रमदान करते हैं।
सामुदायिक भागीदारी यह पहल नागरिकों, सरकारी अधिकारियों और विभिन्न संगठनों को स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल करती है।
स्वच्छता के प्रति जागरूकता इसका उद्देश्य लोगों में स्वच्छता के महत्व और इसके स्थायी प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण- II यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है, जिसमें खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति को बनाए रखना और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह अभियान स्वच्छता को एक सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करता है, जिससे सामुदायिक भावना और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा मिलता है।
  • यह नागरिकों में अपने परिवेश को स्वच्छ रखने की आदत विकसित करता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
  • यह महात्मा गांधी के स्वच्छता के दर्शन को पुनर्जीवित करता है, जो सामाजिक उत्थान और आत्म-निर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है।

पर्यावरणीय महत्व

  • ठोस और तरल अपशिष्ट के उचित प्रबंधन को बढ़ावा देकर यह अभियान पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में मदद करता है।
  • यह प्लास्टिक कचरे के निपटान और पुनर्चक्रण के महत्व पर जोर देता है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।
  • स्वच्छता गतिविधियों के माध्यम से, यह प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और एक स्वच्छ पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में योगदान देता है।

शासनिक महत्व

  • यह अभियान सरकार की जन-केंद्रित नीतियों को दर्शाता है, जहाँ नागरिक सीधे शासन प्रक्रियाओं में शामिल होते हैं।
  • यह विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय को मजबूत करता है, जिससे प्रभावी नीति कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है।
  • यह स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) जैसे बड़े कार्यक्रमों की सफलता के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है, जिससे शासन की दक्षता बढ़ती है।

चुनौतियाँ

1. व्यवहार परिवर्तन में निरंतरता

  • लोगों की आदतों और व्यवहार में स्थायी बदलाव लाना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि जागरूकता अक्सर अस्थायी होती है।
  • श्रमदान जैसे आयोजनों के बाद भी दैनिक जीवन में स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखना कठिन होता है।

2. बुनियादी ढाँचे का अभाव

  • कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पर्याप्त अपशिष्ट संग्रह, प्रसंस्करण और निपटान सुविधाओं की कमी है।
  • शौचालयों के रखरखाव और पानी की उपलब्धता भी एक चुनौती बनी हुई है, खासकर सार्वजनिक स्थानों पर।

3. निगरानी और प्रवर्तन

  • स्वच्छता मानदंडों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई का अभाव एक समस्या है।
  • स्थानीय निकायों की क्षमता और संसाधनों की कमी भी प्रवर्तन में बाधा डालती है।

4. संसाधनों की कमी

  • स्वच्छता कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की उपलब्धता एक सतत चुनौती है।
  • विशेष रूप से अपशिष्ट प्रबंधन प्रौद्योगिकियों और कुशल कर्मियों की कमी महसूस की जाती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
स्थायी व्यवहार परिवर्तन केवल अभियानों से नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में स्वच्छता को आदत बनाना।
अपशिष्ट प्रबंधन का बुनियादी ढाँचा ठोस और तरल अपशिष्ट के कुशल संग्रह, प्रसंस्करण और निपटान की कमी।
जनभागीदारी की निरंतरता अभियान के बाद भी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को बनाए रखना।
वित्तीय और तकनीकी संसाधन स्वच्छता कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त धन और आधुनिक तकनीकों की उपलब्धता।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में असमानता स्वच्छता सुविधाओं और जागरूकता के स्तर में क्षेत्रीय भिन्नताएँ।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण- II (Swachh Bharat Mission (Grameen) Phase-II)

आगे की राह

  • स्वच्छता शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाना ताकि बचपन से ही स्वच्छता के मूल्यों को आत्मसात किया जा सके।
  • अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों और बुनियादी ढाँचे में निवेश बढ़ाना, जिसमें अपशिष्ट से ऊर्जा (Waste-to-Energy) संयंत्र और पुनर्चक्रण (Recycling) सुविधाएँ शामिल हों।
  • स्थानीय निकायों को स्वच्छता कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अधिक वित्तीय स्वायत्तता और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
  • स्वच्छता चैंपियंस और सामुदायिक नेताओं को पहचान कर उन्हें पुरस्कृत करना, ताकि दूसरों को भी प्रेरित किया जा सके।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को बढ़ावा देना ताकि स्वच्छता क्षेत्र में नवाचार और दक्षता लाई जा सके।
  • स्वच्छता मानदंडों के उल्लंघन के लिए प्रभावी प्रवर्तन तंत्र स्थापित करना और नियमित निगरानी सुनिश्चित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्वच्छता ही सेवा अभियान · स्वच्छ भारत अभियान · सामुदायिक सहभागिता · जन आंदोलन · सतत विकास लक्ष्य · खुले में शौच मुक्त स्थिति · अपशिष्ट प्रबंधन · स्वच्छता अवसंरचना · व्यवहारिक परिवर्तन · अंतर-मंत्रालयी समन्वय

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}

अवधारणा प्रवाह

स्वच्छता ही सेवा अभियान की शुरुआत  →  एक दिन – एक घंटा – एक साथ श्रमदान पहल  →  सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता में वृद्धि  →  अपशिष्ट प्रबंधन और सार्वजनिक स्वच्छता में सुधार  →  स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. स्वच्छता ही सेवा अभियान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अभियान केवल शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
2. इसका उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाना है।
3. यह स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण) और स्वच्छ भारत अभियान (शहरी) दोनों का एक घटक है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि स्वच्छता ही सेवा अभियान शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देता है। कथन 2 सही है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाना है। कथन 3 सही है क्योंकि यह स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण) और स्वच्छ भारत अभियान (शहरी) दोनों के तहत एक महत्वपूर्ण पहल है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के कार्यान्वयन से सीधे तौर पर जुड़ा है?

  1. ग्रामीण विकास मंत्रालय
  2. आवास और शहरी कार्य मंत्रालय
  3. जल शक्ति मंत्रालय
  4. उपर्युक्त सभी

उत्तर: उपर्युक्त सभी — स्वच्छता ही सेवा अभियान स्वच्छ भारत अभियान का एक हिस्सा है, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल और स्वच्छता विभाग) और शहरी क्षेत्रों में आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। ग्रामीण विकास मंत्रालय भी ग्रामीण स्वच्छता पहलों में सहायक भूमिका निभाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ स्वच्छता ही सेवा अभियान, स्वच्छ भारत अभियान की सफलता में किस प्रकार योगदान देता है? भारत में स्वच्छता लक्ष्यों को प्राप्त करने में सामुदायिक सहभागिता के महत्व का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: स्वच्छता ही सेवा अभियान का संक्षिप्त परिचय और स्वच्छ भारत अभियान के साथ इसका संबंध।
2. स्वच्छता ही सेवा का योगदान: स्वच्छ भारत अभियान के लक्ष्यों (जैसे खुले में शौच मुक्त स्थिति, अपशिष्ट प्रबंधन) को प्राप्त करने में ‘स्वच्छता ही सेवा’ की भूमिका का वर्णन करें। इसमें जनभागीदारी, व्यवहारिक परिवर्तन और जागरूकता बढ़ाने जैसे पहलुओं को शामिल करें।
3. सामुदायिक सहभागिता का महत्व: स्वच्छता लक्ष्यों को प्राप्त करने में सामुदायिक सहभागिता (जन आंदोलन, स्वामित्व की भावना, स्थानीय समाधान, निरंतरता) के महत्व पर विस्तार से चर्चा करें। उदाहरणों के साथ समझाएं कि कैसे यह सरकारी प्रयासों को पूरक बनाता है।
4. चुनौतियाँ और आगे का मार्ग: सामुदायिक सहभागिता को बनाए रखने में आने वाली चुनौतियों (जैसे व्यवहारिक परिवर्तन की निरंतरता, संसाधनों की कमी) का उल्लेख करें और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव दें।
5. निष्कर्ष: स्वच्छता ही सेवा और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से एक ‘स्वच्छ भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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