02 Oct एसईसीएल के गांधी जयंती अभियान ने स्वच्छता ही सेवा 2026 को किया समाप्त
✎ स्वच्छता ही सेवा अभियान जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जबकि विशेष अभियान 6 सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, ई-कचरा और अभिलेख प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है, जो स्वच्छ भारत अभियान के व्यापक…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, नागरिक चार्टर | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन
- Prelims: स्वच्छता ही सेवा अभियान, गांधी जयंती, विशेष अभियान 6, ई-कचरा प्रबंधन, अपशिष्ट पृथक्करण, कोल इंडिया लिमिटेड, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), स्वच्छ भारत अभियान
- Essay: स्वच्छता: व्यक्तिगत दायित्व से राष्ट्रीय आंदोलन तक, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सामुदायिक भागीदारी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: स्वच्छता ही सेवा अभियान जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जबकि विशेष अभियान 6 सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, ई-कचरा और अभिलेख प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है, जो स्वच्छ भारत अभियान के व्यापक लक्ष्यों का समर्थन करते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कोयला मंत्रालय के अंतर्गत साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चले ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान का गांधी जयंती के अवसर पर समापन किया। इस अभियान के तहत छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में SECL के परिचालन क्षेत्रों में व्यापक स्वच्छता गतिविधियाँ संचालित की गईं, जिसमें 10 लाख वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र की सफाई की गई। इसके साथ ही, ‘विशेष अभियान 6’ का कार्यान्वयन चरण भी शुरू हो गया है, जिसका मुख्य फोकस ई-कचरा प्रबंधन और अभिलेखों के कुशल प्रबंधन पर है।
पृष्ठभूमि
- गांधी जयंती (2 अक्टूबर) को भारत में स्वच्छता और सामाजिक उत्थान के कार्यक्रमों से जोड़ा जाता है, जो महात्मा गांधी के स्वच्छता के दर्शन को दर्शाता है।
- स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) को 2 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत को स्वच्छ और खुले में शौच से मुक्त बनाना था।
- ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान स्वच्छ भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
- यह अभियान विभिन्न सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और नागरिकों को स्वच्छता गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है।
- विशेष अभियान समय-समय पर सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में स्वच्छता, कबाड़ निपटान और अभिलेख प्रबंधन में सुधार के लिए चलाए जाते हैं।
- ई-कचरा (E-waste) प्रबंधन वर्तमान समय में एक बड़ी पर्यावरणीय चुनौती है, जिसके सुरक्षित निपटान और पुनर्चक्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्वच्छता ही सेवा अभियान और विशेष अभियान 6
- स्वच्छता ही सेवा अभियान: यह एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन है जिसका उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। यह महात्मा गांधी की जयंती के आसपास केंद्रित होता है।
- अवधि: ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया गया था।
- गतिविधियाँ: इसमें नुक्कड़ नाटक, विद्यालयों में प्रतियोगिताएँ, श्रमदान और स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम शामिल थे, जिनमें कर्मचारी, श्रमिक, विद्यार्थी और स्थानीय समुदाय ने भाग लिया।
- SECL की भूमिका: साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में अपने परिचालन क्षेत्रों में 55 से अधिक इकाइयों में 10 लाख वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र की सफाई की।
- विशेष अभियान 6: यह 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाला एक अभियान है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में स्वच्छता, स्थान का अधिकतम उपयोग, कबाड़ का निपटान और अभिलेख प्रबंधन में सुधार करना है।
- ई-कचरा प्रबंधन: विशेष अभियान 6 का एक प्रमुख फोकस ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
- अभिलेख प्रबंधन: इस अभियान के तहत भौतिक और ई-फाइलों की समीक्षा, बंद करने और हटाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे कार्यस्थल में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
- लक्ष्य: SECL ने विशेष अभियान 6 के तहत 225 स्थलों पर लगभग 40 लाख वर्ग फुट क्षेत्र की सफाई और 3,300 मीट्रिक टन कबाड़ के निपटान का लक्ष्य रखा है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान | गांधी जयंती के अवसर पर साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) द्वारा आयोजित, 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चला। |
| व्यापक स्वच्छता गतिविधियाँ | SECL के परिचालन क्षेत्रों में 55 से अधिक स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों और 10 लाख वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र की सफाई की गई। |
| सामुदायिक भागीदारी | नुक्कड़ नाटक, विद्यालयों में प्रतियोगिताएँ, श्रमदान और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों, श्रमिकों, विद्यार्थियों और स्थानीय समुदाय को शामिल किया गया। |
| विशेष अभियान 6 का शुभारंभ | स्वच्छता ही सेवा के समापन के साथ ही 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले विशेष अभियान 6 का कार्यान्वयन चरण शुरू हुआ। |
| ई-कचरा प्रबंधन पर विशेष बल | विशेष अभियान 6 में ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर विशेष ध्यान दिया गया है। |
| अभिलेख प्रबंधन और कबाड़ निपटान | अभियान के तहत 40 लाख वर्ग फुट क्षेत्र की सफाई, 3,300 मीट्रिक टन कबाड़ का निपटान, और 500 भौतिक व 7,000 ई-फाइलों की समीक्षा का लक्ष्य। |
महत्व
पर्यावरण संरक्षण
- यह अभियान कार्यस्थलों और आसपास के समुदायों में स्वच्छता को बढ़ावा देकर पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी को बढ़ाता है।
- ई-कचरे के प्रभावी प्रबंधन पर विशेष जोर पर्यावरण प्रदूषण को कम करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहायक है।
सामाजिक भागीदारी और जागरूकता
- सामुदायिक भागीदारी, जैसे नुक्कड़ नाटक और विद्यालय प्रतियोगिताएँ, स्वच्छता को एक सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करती हैं।
- यह अभियान नागरिकों में स्वच्छता के प्रति सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सुशासन और दक्षता
- अभिलेख प्रबंधन और लंबित मामलों में कमी लाने का लक्ष्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाता है।
- कार्यस्थलों पर स्थान का अधिकतम उपयोग और कबाड़ का निपटान एक स्वच्छ और सुव्यवस्थित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देता है।
गांधीवादी मूल्यों का संवर्धन
- गांधी जयंती के अवसर पर अभियान का समापन महात्मा गांधी के स्वच्छता और ‘स्वच्छ भारत’ के आदर्शों को श्रद्धांजलि देता है।
- यह जनभागीदारी के माध्यम से सामाजिक सुधार के गांधीवादी सिद्धांत को पुष्ट करता है।
चुनौतियाँ
1. व्यवहार परिवर्तन की निरंतरता
- अभियानों के बाद भी स्वच्छता के प्रति जनमानस में स्थायी व्यवहार परिवर्तन बनाए रखना एक चुनौती है।
- लोगों को लगातार जागरूक करना और उन्हें सक्रिय रूप से शामिल करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, शासन
2. कचरा प्रबंधन अवसंरचना
- विशेषकर ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान के लिए पर्याप्त और आधुनिक अवसंरचना की आवश्यकता है।
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में ऐसी सुविधाओं का अभाव एक बड़ी बाधा हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, अवसंरचना
3. संसाधनों का आवंटन और निगरानी
- स्वच्छता अभियानों के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों का आवंटन सुनिश्चित करना।
- कार्यान्वयन की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन तंत्र का अभाव लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा डाल सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, सार्वजनिक प्रशासन
4. अंतर-विभागीय समन्वय
- विभिन्न सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और स्थानीय निकायों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना।
- स्वच्छता एक बहुआयामी मुद्दा है जिसके लिए एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, सार्वजनिक प्रशासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| स्थायी व्यवहार परिवर्तन | अभियान-आधारित गतिविधियों के बाद स्वच्छता आदतों को बनाए रखने में कठिनाई। |
| ई-कचरा निपटान | ई-कचरे के सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल निपटान के लिए विशेषज्ञता और सुविधाओं की कमी। |
| संसाधन उपलब्धता | स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की निरंतर आवश्यकता। |
| सामुदायिक स्वामित्व | स्थानीय समुदायों में स्वच्छता कार्यक्रमों के प्रति दीर्घकालिक स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना। |
| अभिलेखों का डिजिटलीकरण | भौतिक फाइलों से ई-फाइलों में संक्रमण और उनके प्रभावी प्रबंधन में तकनीकी और प्रशिक्षण संबंधी चुनौतियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission)
आगे की राह
- स्वच्छता अभियानों को केवल एक घटना के बजाय एक सतत प्रक्रिया के रूप में संचालित किया जाए, जिसमें नियमित निगरानी और मूल्यांकन शामिल हो।
- ई-कचरा प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों और अवसंरचना में निवेश बढ़ाया जाए, जिसमें संग्रह, पृथक्करण और पुनर्चक्रण शामिल हों।
- स्थानीय निकायों और समुदायों को स्वच्छता कार्यक्रमों की योजना और कार्यान्वयन में अधिक अधिकार और संसाधन दिए जाएँ ताकि स्वामित्व की भावना विकसित हो।
- विद्यालयों और महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को शामिल कर प्रारंभिक स्तर से ही जागरूकता बढ़ाई जाए।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को बढ़ावा दिया जाए ताकि स्वच्छता अवसंरचना और सेवाओं में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता का लाभ उठाया जा सके।
- डिजिटल अभिलेख प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ किया जाए और कर्मचारियों को उनके प्रभावी उपयोग के लिए नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
- स्वच्छता के क्षेत्र में नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रोत्साहित किया जाए तथा उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए एक मंच प्रदान किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छता ही सेवा अभियान · गांधी जयंती · सामुदायिक भागीदारी · कचरा प्रबंधन · ई-कचरा निपटान · विशेष अभियान 6 · सतत विकास लक्ष्य · स्वच्छ भारत अभियान · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम · पर्यावरण संरक्षण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51क (छ)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा का कर्तव्य’}
अवधारणा प्रवाह
स्वच्छता अभियान का शुभारंभ → सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता → व्यापक स्वच्छता और अपशिष्ट निपटान → ई-कचरा और अभिलेख प्रबंधन पर जोर → स्वच्छता और दक्षता में सुधार → पर्यावरण संरक्षण और सुशासन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अभियान केवल शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता गतिविधियों पर केंद्रित था।
2. इस अभियान का समापन गांधी जयंती के अवसर पर हुआ।
3. विशेष अभियान 6 के तहत ई-कचरा प्रबंधन पर विशेष बल दिया गया है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि अभियान छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में एसईसीएल के परिचालन क्षेत्रों में संचालित किया गया था, जिसमें ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्र भी शामिल हो सकते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि अभियान का समापन गांधी जयंती (2 अक्टूबर 2026) पर हुआ। कथन 3 सही है क्योंकि विशेष अभियान 6 में ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर विशेष बल दिया गया है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के कार्यान्वयन से संबंधित है?
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- आवास और शहरी कार्य मंत्रालय
- जल शक्ति मंत्रालय
- कोयला मंत्रालय
उत्तर: कोयला मंत्रालय — प्रस्तुत समाचार के अनुसार, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) कोयला मंत्रालय के अंतर्गत कोल इंडिया लिमिटेड की एक सहायक कंपनी है, जिसने ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का समापन किया। अतः, कोयला मंत्रालय इस अभियान के कार्यान्वयन से संबंधित है।
Q3. अभिकथन (A): ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे अभियान सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कारण (R): ये अभियान नुक्कड़ नाटक, विद्यालयों में प्रतियोगिताएँ और श्रमदान जैसी गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाते हैं।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि ऐसे अभियान सामुदायिक जुड़ाव को प्रोत्साहित करते हैं। कारण (R) भी सही है क्योंकि ये गतिविधियाँ लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करती हैं और उन्हें अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करती हैं, जिससे सामुदायिक भागीदारी बढ़ती है। इस प्रकार, कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा चलाए जा रहे ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे अभियानों के महत्व का परीक्षण कीजिए। ये अभियान किस प्रकार पर्यावरणीय स्थिरता और सामुदायिक कल्याण में योगदान करते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का संक्षिप्त परिचय और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की इसमें भूमिका। गांधी जयंती के संदर्भ का उल्लेख।
2. **अभियानों का महत्व:**
* **स्वच्छता जागरूकता:** जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देना।
* **कार्यस्थल स्वच्छता:** कार्यालयों और परिचालन क्षेत्रों में स्वच्छता मानकों में सुधार।
* **कचरा प्रबंधन:** ठोस और ई-कचरे के उचित निपटान पर जोर।
* **रिकॉर्ड प्रबंधन:** फाइलों के डिजिटलीकरण और अनावश्यक फाइलों को हटाने से दक्षता में वृद्धि।
* **नैतिक दायित्व:** महात्मा गांधी के स्वच्छता दर्शन को आगे बढ़ाना।
3. **पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान:**
* **प्रदूषण नियंत्रण:** कचरे के उचित निपटान से भूमि, जल और वायु प्रदूषण में कमी।
* **संसाधन संरक्षण:** कबाड़ और ई-कचरे के पुनर्चक्रण/पुनः उपयोग को बढ़ावा देना।
* **हरित पहल:** कंपनियों के परिचालन में पर्यावरणीय मानकों का समावेश।
* **सतत विकास लक्ष्य (SDGs):** SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) और SDG 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन) में योगदान।
4. **सामुदायिक कल्याण में योगदान:**
* **स्वास्थ्य सुधार:** स्वच्छ वातावरण से बीमारियों में कमी।
* **सामुदायिक जुड़ाव:** स्थानीय समुदायों, कर्मचारियों और छात्रों को शामिल करके सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) का निर्वहन।
* **जागरूकता कार्यक्रम:** नुक्कड़ नाटक, प्रतियोगिताएं आदि के माध्यम से शिक्षा और व्यवहार परिवर्तन।
* **जीवन की गुणवत्ता:** स्वच्छ परिवेश से नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार।
5. **चुनौतियाँ और सुझाव (संक्षेप में):** निरंतरता बनाए रखना, फंडिंग, निगरानी तंत्र।
6. **निष्कर्ष:** इन अभियानों की समग्र सकारात्मक भूमिका और भविष्य के लिए इनकी प्रासंगिकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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