हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम में 24 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए 1,158 एकड़ निजी भूमि अधिग्रहण करेगी

हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम में 24 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए 1,158 एकड़ निजी भूमि अधिग्रहण करेगी

हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम में 24 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए 1,158 एकड़ निजी भूमि अधिग्रहण करेगी

Map of Haryana, Gurugram, Manesar highlighted on the map of India — गुरुग्राम 24 मीटर सड़क अधिग्रहण हरियाणा
मानचित्र: हरियाणा में गुरुग्राम-मानेसर शहरी परिसर के सेक्टर 58 से 115 तक 24 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए भूमि अधिग्रहण

✎ हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम में सड़कों के लिए भूमि अधिग्रहण का निर्णय भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत सार्वजनिक उद्देश्य हेतु भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और न्यायिक सक्रियता की भूमिका को दर्शाता है, जो शहरी नियोजन और…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, संविधान और राजव्यवस्था  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा विकास
  • Prelims: भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013, हरियाणा विकास और शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम, 1975, हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDR), बाह्य विकास शुल्क (EDC), न्यायिक सक्रियता, शहरी नियोजन
  • Essay: शहरीकरण और अवसंरचना विकास की चुनौतियाँ, न्यायपालिका की भूमिका: शासन में जवाबदेही सुनिश्चित करना

त्वरित पुनरावृत्ति: हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम में सड़कों के लिए भूमि अधिग्रहण का निर्णय भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत सार्वजनिक उद्देश्य हेतु भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और न्यायिक सक्रियता की भूमिका को दर्शाता है, जो शहरी नियोजन और अवसंरचना विकास में महत्वपूर्ण है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा फटकार लगाए जाने के बाद, हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम-मानेसर शहरी परिसर के सेक्टर 58 से 115 तक 24 मीटर चौड़ी आंतरिक सड़कों के निर्माण के लिए 1,157.22 एकड़ निजी भूमि का अनिवार्य अधिग्रहण करने की योजना बनाई है। यह कदम शहर में लंबे समय से लंबित कनेक्टिविटी समस्या को हल करने के लिए उठाया गया है, जिस पर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से जवाबदेही मांगी थी।

पृष्ठभूमि

  • गुरुग्राम के सेक्टर 58 से 115 तक 24 मीटर सड़क संरेखण (road alignment) के लिए कुल 1,836.6 एकड़ भूमि की आवश्यकता है।
  • आवश्यक भूमि का 63.01% (1,157.22 एकड़) निजी भूमि है जिसका अब अनिवार्य अधिग्रहण किया जाएगा।
  • शेष 31.28% (574.4 एकड़) भूमि लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों के अंतर्गत आती है, जहाँ डेवलपर्स को सड़कें बनाकर सरकार को सौंपनी होती हैं।
  • 104.98 एकड़ भूमि सरकार को हस्तांतरणीय विकास अधिकार (Transferable Development Rights – TDR) प्रमाणपत्रों के माध्यम से प्राप्त हुई है।
  • उच्च न्यायालय ने एक दशक से अधिक समय पहले परियोजनाओं के लिए लाइसेंस दिए जाने के बावजूद सड़कों की कमी पर चिंता व्यक्त की थी, जिसके कारण घर खरीदार धनवापसी की मांग कर रहे थे और प्रभावित सोसायटियों में रहने से हतोत्साहित हो रहे थे।
  • ऐतिहासिक रूप से, आंतरिक 24 मीटर सड़कें बाह्य विकास शुल्क (External Development Charges – EDC) के अंतर्गत नहीं आती थीं, जिससे इनके लिए निजी भूमि अधिग्रहण हेतु कोई समान तंत्र नहीं था।

भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 और शहरी नियोजन

  • भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013) भारत में भूमि अधिग्रहण को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है।
  • यह अधिनियम सार्वजनिक उद्देश्य के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया, उचित मुआवजे का निर्धारण, और प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के प्रावधानों को निर्धारित करता है।
  • अधिनियम के तहत, भूमि अधिग्रहण से पहले सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (Social Impact Assessment) अनिवार्य है, ताकि परियोजना के संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सके।
  • हरियाणा विकास और शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम, 1975 (Haryana Development and Regulation of Urban Areas Act, 1975) राज्य में शहरी क्षेत्रों के विकास और विनियमन से संबंधित है, जिसमें डेवलपर्स पर सड़कों के निर्माण की बाध्यता भी शामिल है।
  • हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDR) एक ऐसा तंत्र है जिसके तहत भूमि मालिक अपनी भूमि के विकास अधिकारों को बेच सकते हैं, विशेषकर जब उनकी भूमि सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाती है।
  • बाह्य विकास शुल्क (EDC) डेवलपर्स से लिया जाने वाला शुल्क है जिसका उपयोग मास्टर सेक्टर सड़कों और अन्य बाहरी बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए किया जाता है।
  • न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के तहत, उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय को यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि सरकारें कानून के अनुसार कार्य करें और नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन न करें।
  • शहरी नियोजन (Urban Planning) में सड़कों, आवास, सार्वजनिक उपयोगिताओं और अन्य बुनियादी ढाँचे का व्यवस्थित विकास शामिल है ताकि शहरों में रहने की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
भूमि अधिग्रहण का दायरा गुरुग्राम-मानेसर शहरी परिसर के सेक्टर 58 से 115 तक 1,157.22 एकड़ निजी भूमि का अधिग्रहण।
सड़क का प्रकार 24 मीटर चौड़ी आंतरिक सड़कें, जो विभिन्न सेक्टरों को जोड़ेंगी।
अधिग्रहण का कारण पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा कनेक्टिविटी समस्याओं पर राज्य सरकार को फटकार के बाद।
अधिग्रहण अधिनियम भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013) के तहत अनिवार्य अधिग्रहण।
समस्या की जड़ आंतरिक 24 मीटर सड़कों को ऐतिहासिक रूप से बाहरी विकास शुल्क (External Development Charges – EDC) के तहत कवर नहीं किया गया था।

महत्व

शहरी नियोजन और विकास

  • यह कदम गुरुग्राम जैसे तेजी से बढ़ते शहरी केंद्रों में बुनियादी ढाँचे के विकास में न्यायिक हस्तक्षेप के महत्व को दर्शाता है।
  • यह सुनिश्चित करेगा कि शहरी क्षेत्रों में आवश्यक कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हों, जिससे निवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।

आर्थिक प्रभाव

  • बेहतर सड़क संपर्क से रियल एस्टेट बाजार में विश्वास बढ़ेगा, जिससे संपत्ति के मूल्य स्थिर होंगे और नए निवेश आकर्षित होंगे।
  • यह उन घर खरीदारों की समस्याओं का समाधान करेगा जो सड़कों की कमी के कारण रिफंड मांग रहे थे या प्रभावित सोसायटियों में रहने से हतोत्साहित थे।

कानूनी और प्रशासनिक जवाबदेही

  • उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप सरकार और संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से परियोजनाओं को पूरा करने के लिए जवाबदेह बनाता है।
  • यह भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रभावी कार्यान्वयन पर भी प्रकाश डालता है।

चुनौतियाँ

1. भूमि अधिग्रहण में देरी

  • भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में अक्सर कानूनी चुनौतियाँ और सामाजिक विरोध होते हैं, जिससे परियोजना में और देरी हो सकती है।
  • उचित मुआवजे और पुनर्वास को सुनिश्चित करना एक जटिल कार्य है, जिसमें पर्याप्त वित्तीय और प्रशासनिक संसाधनों की आवश्यकता होती है।

2. वित्तीय बोझ

  • इतनी बड़ी मात्रा में भूमि का अधिग्रहण राज्य सरकार पर एक महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ डालेगा, खासकर मुआवजे के भुगतान के संबंध में।
  • बाहरी विकास शुल्क (EDC) के तहत आंतरिक सड़कों को कवर न करने की पिछली नीति ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है।

3. समन्वय और कार्यान्वयन

  • विभिन्न सरकारी विभागों (जैसे DTCP और HSVP) और निजी डेवलपर्स के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र और स्पष्ट समय-सीमा का अभाव एक बाधा बन सकता है।

4. शहरी नियोजन की कमियाँ

  • गुरुग्राम में सड़कों के नियोजन और वित्तपोषण के तरीके में निहित समस्याएँ भविष्य में ऐसी ही चुनौतियों को जन्म दे सकती हैं।
  • अस्थायी समाधानों (जैसे अनौपचारिक मार्ग) पर निर्भरता ने दीर्घकालिक समस्याओं को जन्म दिया है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भूमि अधिग्रहण की धीमी गति परियोजनाओं में देरी और लागत में वृद्धि।
डेवलपर्स की जवाबदेही लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों के भीतर सड़कों के निर्माण और हस्तांतरण में डेवलपर्स की विफलता।
वित्तीय तंत्र का अभाव आंतरिक सड़कों के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु EDC जैसे समर्पित तंत्र की कमी।
न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए न्यायालयों पर अत्यधिक निर्भरता।
अस्थायी समाधानों पर निर्भरता अनौपचारिक पहुंच मार्गों के कारण दीर्घकालिक कनेक्टिविटी समस्याओं का उत्पन्न होना।

आगे की राह

  • भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पूरा करना।
  • शहरी नियोजन नीतियों की समीक्षा करना ताकि आंतरिक सड़कों के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु एक स्थायी वित्तीय तंत्र (जैसे EDC का विस्तार) स्थापित किया जा सके।
  • डेवलपर्स के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करना और हरियाणा विकास और शहरी क्षेत्रों का विनियमन अधिनियम, 1975 (Haryana Development and Regulation of Urban Areas Act, 1975) के तहत उनकी जिम्मेदारियों को सख्ती से लागू करना।
  • परियोजना के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करना, जिसमें विशिष्ट समय-सीमा और जवाबदेही मानदंड शामिल हों।
  • भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए शहरी मास्टर प्लान में सड़कों और अन्य बुनियादी ढाँचे के लिए भूमि अधिग्रहण की योजना को प्रारंभिक चरण में ही एकीकृत करना।
  • नागरिकों की शिकायतों के निवारण के लिए एक प्रभावी प्रणाली स्थापित करना और उन्हें परियोजना की प्रगति के बारे में नियमित रूप से सूचित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भूमि अधिग्रहण · उचित मुआवजा अधिनियम · शहरी नियोजन · न्यायिक सक्रियता · आधारभूत संरचना विकास · हरियाणा विकास और शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम · हस्तांतरणीय विकास अधिकार · बाह्य विकास शुल्क · सार्वजनिक-निजी भागीदारी · शहरीकरण चुनौतियाँ · भूमि सुधार · राजस्व प्रशासन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 300A’, ‘note’: ‘संपत्ति का अधिकार’}

अवधारणा प्रवाह

गुरुग्राम में आंतरिक सड़कों की कमी  →  पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप  →  राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण का निर्णय  →  भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 का उपयोग  →  शहरी कनेक्टिविटी में सुधार और निवासियों को लाभ

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013) केवल निजी भूमि के अधिग्रहण से संबंधित है।
2. हरियाणा विकास और शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम, 1975 (Haryana Development and Regulation of Urban Areas Act, 1975) के तहत, डेवलपर्स को लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों के भीतर सड़कों का निर्माण करना अनिवार्य है।
3. बाह्य विकास शुल्क (External Development Charges – EDC) का उपयोग आमतौर पर आंतरिक सड़कों के अधिग्रहण के लिए किया जाता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई भी नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि अधिनियम निजी भूमि के अधिग्रहण के साथ-साथ पुनर्वास और पुनर्स्थापन के प्रावधान भी करता है। कथन 2 सही है, डेवलपर्स को अपनी लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में सड़कें बनानी होती हैं। कथन 3 गलत है, बाह्य विकास शुल्क का उपयोग आमतौर पर मास्टर सेक्टर सड़कों के लिए किया जाता था, आंतरिक सड़कों के लिए नहीं।

Q2. अभिकथन (A): पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरुग्राम में सड़कों की कमी के कारण हरियाणा सरकार की खिंचाई की है।
कारण (R): सड़कों की कमी के कारण घर खरीदारों को रिफंड की मांग करनी पड़ रही है और लोग प्रभावित सोसायटियों में रहने से हतोत्साहित हो रहे हैं।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, जैसा कि समाचार में बताया गया है कि उच्च न्यायालय ने सरकार को फटकार लगाई है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि सड़कों की कमी के कारण घर खरीदारों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप किया। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013) के प्रमुख प्रावधानों की चर्चा कीजिए। शहरी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने में यह अधिनियम कितना प्रभावी रहा है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (LARR Act, 2013) का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और पूर्ववर्ती अधिनियम से भिन्नता।
2. **अधिनियम के प्रमुख प्रावधान (लगभग 100-120 शब्द):**
* **उचित मुआवजा:** बाजार मूल्य का 2 से 4 गुना तक मुआवजा।
* **पुनर्वास और पुनर्स्थापन:** प्रभावित परिवारों के लिए व्यापक पैकेज, जिसमें रोजगार, घर, भत्ता आदि शामिल हैं।
* **सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA):** सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) परियोजनाओं और निजी कंपनियों के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले अनिवार्य।
* **किसानों की सहमति:** निजी कंपनियों के लिए 80% और PPP परियोजनाओं के लिए 70% प्रभावित परिवारों की सहमति अनिवार्य।
* **खाद्य सुरक्षा:** बहु-फसली सिंचित भूमि के अधिग्रहण पर प्रतिबंध, विशेष परिस्थितियों में ही अनुमति।
* **भूमि बैंक:** बंजर भूमि के अधिग्रहण को प्राथमिकता।
* **त्वरित प्रक्रिया:** कुछ मामलों में त्वरित अधिग्रहण का प्रावधान।
* **विवाद समाधान:** भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्राधिकरण की स्थापना।
3. **शहरी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में चुनौतियों का समाधान करने में प्रभावशीलता (लगभग 100-120 शब्द):**
* **सकारात्मक प्रभाव:**
* किसानों और भूमि मालिकों को बेहतर मुआवजा और पुनर्वास मिला है।
* सामाजिक प्रभाव आकलन से परियोजनाओं की योजना बेहतर हुई है।
* पारदर्शिता बढ़ी है, जिससे मनमाने अधिग्रहण पर रोक लगी है।
* न्यायिक समीक्षा और नागरिक समाज की भूमिका बढ़ी है।
* **चुनौतियाँ और सीमाएँ:**
* **लागत में वृद्धि:** मुआवजे की उच्च दर से परियोजनाओं की लागत बढ़ी है, जिससे सरकार और डेवलपर्स पर वित्तीय बोझ पड़ा है। (वर्तमान समाचार में हरियाणा सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण की लागत का उल्लेख)
* **अधिग्रहण में देरी:** सहमति प्राप्त करने और SIA प्रक्रियाओं में लगने वाले समय के कारण परियोजनाओं में विलंब होता है। (गुरुग्राम की सड़कों के निर्माण में देरी का उदाहरण)
* **कार्यान्वयन की समस्याएँ:** पुनर्वास और पुनर्स्थापन पैकेजों के प्रभावी कार्यान्वयन में अभी भी चुनौतियाँ हैं।
* **भूमि की उपलब्धता:** शहरी क्षेत्रों में भूमि की कमी और उच्च मूल्य के कारण अधिग्रहण कठिन हो गया है।
* **न्यायिक हस्तक्षेप:** कई बार न्यायिक सक्रियता के कारण भी परियोजनाओं में देरी होती है, जैसा कि गुरुग्राम मामले में देखा गया।
4. **निष्कर्ष:** अधिनियम ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को अधिक मानवीय और न्यायसंगत बनाया है, लेकिन शहरी आधारभूत संरचना के संदर्भ में इसकी अपनी चुनौतियाँ हैं। प्रभावी कार्यान्वयन और नीतिगत सुधारों के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है, ताकि विकास और न्याय के बीच संतुलन स्थापित हो सके।

स्रोत: The Indian Express

Haryana PCS (HPSC / HCS) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम में 24 मीटर चौड़ी सड़कों के निर्माण हेतु निजी भूमि अधिग्रहण के संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश के पश्चात् कितने एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा?

  1. 1,158 एकड़
  2. 1,200 एकड़
  3. 1,000 एकड़
  4. 1,300 एकड़

उत्तर: 1,158 एकड़ — उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार गुरुग्राम में 24 मीटर चौड़ी सड़कों के निर्माण हेतु 1,158 एकड़ निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।

Mains: गुरुग्राम में 24 मीटर चौड़ी सड़कों के निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों तथा उनके समाधान के उपायों पर चर्चा कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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