07 Oct ओडिशा में MMJM मिशन: पीवीटीजी परिवारों को सरकारी मंजूरी का इंतजार

✎ मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन-2 ओडिशा सरकार की एक पहल है जिसका लक्ष्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) की आजीविका को कृषि, हस्तशिल्प और स्वरोजगार के माध्यम से सशक्त बनाना है, जिसका पूरा वित्तपोषण राज्य सरकार द्वारा किया…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय (कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ) | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था (समावेशी विकास और संबंधित मुद्दे)
- Prelims: विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs), मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन (MMJM), जनजातीय उप-योजना (TSP), सूक्ष्म परियोजना एजेंसी (MPA), राज्य-स्तरीय संचालन समिति, आजीविका विविधीकरण
- Essay: भारत में जनजातीय समुदायों का सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और समाधान, समावेशी विकास और हाशिए पर पड़े समुदायों का उत्थान
त्वरित पुनरावृत्ति: मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन-2 ओडिशा सरकार की एक पहल है जिसका लक्ष्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) की आजीविका को कृषि, हस्तशिल्प और स्वरोजगार के माध्यम से सशक्त बनाना है, जिसका पूरा वित्तपोषण राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ओडिशा सरकार का मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन-2 (MMJM-2), जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) से संबंधित परिवारों को सशक्त बनाना और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है, अपने परिचालन दिशानिर्देशों की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है। राज्य मंत्रिमंडल ने इस मिशन को 1 अगस्त को मंजूरी दी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन के लिए दिशानिर्देशों का इंतजार है।
पृष्ठभूमि
- भारत में जनजातीय समुदाय सामाजिक-आर्थिक रूप से सबसे वंचित वर्गों में से एक हैं, जिन्हें अक्सर गरीबी, निरक्षरता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) जनजातीय समुदायों के भीतर सबसे अधिक संवेदनशील वर्ग हैं, जिनकी पहचान उनकी घटती या स्थिर जनसंख्या, निम्न साक्षरता दर, पूर्व-कृषि प्रौद्योगिकी स्तर और दूरस्थ निवास स्थान के आधार पर की जाती है।
- भारत सरकार और राज्य सरकारें जनजातीय समुदायों, विशेषकर PVTGs के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाएँ और कार्यक्रम चलाती रही हैं।
- इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करना, शिक्षा तक पहुँच बढ़ाना, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करना और उनकी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना है।
- ओडिशा में बड़ी संख्या में जनजातीय आबादी निवास करती है, जिसमें कई PVTG समूह भी शामिल हैं, जो राज्य सरकार के लिए उनके विकास को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण बनाता है।
मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन-2 (MMJM-2) क्या है?
- मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन-2 (MMJM-2) ओडिशा सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के परिवारों को सशक्त बनाना है।
- यह मिशन 19 जिलों में 134 जनजातीय उप-योजना (TSP) और सूक्ष्म परियोजना एजेंसी (MPA) ब्लॉकों में 8 लाख से अधिक जनजातीय परिवारों को कवर करने का प्रस्ताव करता है।
- मिशन का कुल परिव्यय 2,995 करोड़ रुपये है, जिसे 60 महीनों की अवधि में खर्च किया जाएगा, और इसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
- MMJM-2 मुख्य रूप से कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, पशुपालन, रेशम उत्पादन और वन-आधारित गतिविधियों के माध्यम से जनजातीय परिवारों की आजीविका को मजबूत करने पर केंद्रित है।
- यह पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, हथकरघा और अन्य गैर-कृषि गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा, साथ ही स्वरोजगार और छोटे उद्यमों के लिए सहायता प्रदान करेगा।
- मिशन के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए एक राज्य-स्तरीय संचालन समिति (State-level Steering Committee) का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के सचिव करेंगे।
- जिला स्तर पर, एक जिला-स्तरीय संचालन समिति (District-level Steering Committee) मुख्य कार्यान्वयन और निगरानी एजेंसी के रूप में कार्य करेगी, जो जिला-स्तरीय योजनाएँ तैयार करेगी और विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करेगी।
- मिशन का अंतिम लक्ष्य जनजातीय परिवारों की आय में वृद्धि करना, उनकी आजीविका में विविधता लाना और उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| लक्षित समूह | विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTGs) के परिवारों का समग्र उत्थान। |
| कवरेज | 19 ज़िलों के 134 जनजातीय उप-योजना (TSP) और सूक्ष्म परियोजना एजेंसी (MPA) ब्लॉकों में 8 लाख से अधिक जनजातीय परिवार। |
| वित्तीय परिव्यय | 60 महीनों में 2,995 करोड़ रुपये, जिसका पूरा ख़र्च राज्य सरकार वहन करेगी। |
| मुख्य फोकस | कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, पशुपालन, रेशम उत्पादन और वन-आधारित गतिविधियों के माध्यम से आजीविका सुदृढ़ीकरण। |
| अन्य गतिविधियाँ | पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, हथकरघा और अन्य ग़ैर-कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देना, स्वरोज़गार और छोटे उद्यमों को सहायता। |
| निगरानी तंत्र | राज्य-स्तरीय संचालन समिति और ज़िला-स्तरीय संचालन समिति द्वारा कार्यान्वयन और निगरानी। |
महत्व
सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण
- यह मिशन विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के परिवारों की आजीविका को मज़बूत करके और उनके जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करके उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास करता है।
- स्वरोज़गार और छोटे उद्यमों को बढ़ावा देने से जनजातीय समुदायों में उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ेगी।
समावेशी विकास
- यह मिशन जनजातीय समुदायों को विकास की मुख्यधारा में लाने में मदद करेगा, जिससे समावेशी विकास (Inclusive Development) के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
- विभिन्न कृषि और ग़ैर-कृषि गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने से आजीविका के अवसरों में विविधता आएगी, जिससे इन समुदायों की आर्थिक सुदृढ़ता बढ़ेगी।
संस्कृति और परंपरा का संरक्षण
- पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और हथकरघा को बढ़ावा देने से जनजातीय समुदायों की अनूठी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा और उन्हें आर्थिक मूल्य भी मिलेगा।
- यह उनके पारंपरिक ज्ञान और कौशल को पुनर्जीवित करने में मदद करेगा, जिससे सांस्कृतिक पहचान मज़बूत होगी।
शासन और कार्यान्वयन
- राज्य और ज़िला स्तर पर संचालन समितियों की स्थापना प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी सुनिश्चित करेगी, जिससे मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद मिलेगी।
- विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा और संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा।
चुनौतियाँ
1. कार्यान्वयन में देरी
- परिचालन दिशानिर्देशों को अंतिम मंज़ूरी मिलने में देरी से ज़मीनी स्तर पर मिशन के रोलआउट में विलंब हो रहा है, जिससे लक्षित लाभार्थियों तक लाभ पहुँचने में देरी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास प्रक्रियाएँ
2. संसाधनों का प्रभावी उपयोग
- मिशन के लिए आवंटित 2,995 करोड़ रुपये के प्रभावी और कुशल उपयोग को सुनिश्चित करना एक चुनौती होगी, ताकि भ्रष्टाचार और लीकेज को रोका जा सके।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, वित्तीय प्रबंधन
3. जागरूकता और पहुँच
- दूरदराज़ के PVTG परिवारों तक मिशन के लाभों के बारे में जानकारी पहुँचाना और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना एक चुनौती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ कनेक्टिविटी कम है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, जनजातीय कल्याण
4. स्थानीय अनुकूलन
- विभिन्न PVTG समुदायों की विशिष्ट आवश्यकताओं और पारंपरिक प्रथाओं के अनुसार योजनाओं को अनुकूलित करना ताकि वे वास्तव में प्रभावी हों, एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: जनजातीय मामले, स्थानीय शासन
5. समन्वय और अभिसरण
- विभिन्न विभागों और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय और अभिसरण (Convergence) सुनिश्चित करना ताकि संसाधनों का दोहराव न हो और अधिकतम प्रभाव प्राप्त किया जा सके।
यूपीएससी लिंक: शासन, अंतर-विभागीय समन्वय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| दिशानिर्देशों की मंज़ूरी | परिचालन दिशानिर्देशों को अंतिम मंज़ूरी मिलने में देरी से मिशन के ज़मीनी स्तर पर कार्यान्वयन में विलंब हो रहा है। |
| निगरानी और मूल्यांकन | मिशन की प्रगति की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन सुनिश्चित करना ताकि लक्षित उद्देश्यों की प्राप्ति हो सके और सुधार के क्षेत्रों की पहचान की जा सके। |
| क्षमता निर्माण | जनजातीय परिवारों को कृषि, बागवानी और अन्य आजीविका गतिविधियों में प्रशिक्षित करने और उनकी क्षमता निर्माण (Capacity Building) की आवश्यकता। |
| बाज़ार संपर्क | जनजातीय उत्पादों के लिए बाज़ार संपर्क (Market Linkages) स्थापित करना ताकि उन्हें उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके। |
| भूमि अधिकार और वन उत्पाद | वन-आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए जनजातीय समुदायों के भूमि अधिकारों और लघु वन उत्पादों (Minor Forest Produce) तक पहुँच सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन-2 (Mukhyamantri Janajati Jeevika Mission-2 – MMJM)
आगे की राह
- परिचालन दिशानिर्देशों को त्वरित मंज़ूरी देकर मिशन का ज़मीनी स्तर पर शीघ्र कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
- जनजातीय समुदायों के बीच मिशन के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ ताकि उनकी अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
- विभिन्न PVTG समुदायों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय स्तर पर योजनाओं को अनुकूलित किया जाए।
- कृषि, बागवानी, पशुपालन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में जनजातीय परिवारों के लिए कौशल विकास और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ।
- जनजातीय उत्पादों के लिए उचित बाज़ार संपर्क और मूल्य श्रृंखला (Value Chain) विकसित की जाए ताकि उन्हें उनके उत्पादों का अधिकतम लाभ मिल सके।
- मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए राज्य और ज़िला स्तरीय समितियों को मज़बूत किया जाए, और नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएँ।
- अन्य संबंधित सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के साथ अभिसरण को बढ़ावा दिया जाए ताकि संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके और समग्र प्रभाव बढ़े।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन (MMJM) · विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) · जनजातीय विकास · आजीविका संवर्धन · कृषि आधारित गतिविधियाँ · गैर-कृषि गतिविधियाँ · स्व-रोज़गार · राज्य स्तरीय संचालन समिति · जिला स्तरीय योजना · जनजातीय उप-योजना (TSP) · सूक्ष्म परियोजना एजेंसी (MPA) · समावेशी विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘राज्य के कमज़ोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 244’, ‘note’: ‘अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन’}
- {‘article’: ‘पाँचवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के अलावा अन्य राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित प्रावधान’}
- {‘article’: ‘छठी अनुसूची’, ‘note’: ‘असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित प्रावधान’}
अवधारणा प्रवाह
PVTG परिवारों की कमज़ोर आजीविका → आर्थिक सशक्तिकरण की आवश्यकता → MMJM-2 मिशन की परिकल्पना → कृषि, हस्तशिल्प आदि पर ध्यान → आजीविका विविधीकरण और आय वृद्धि → सामाजिक-आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान में ‘विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs)’ शब्द को परिभाषित किया गया है।
2. PVTGs को मुख्य रूप से उनकी घटती या स्थिर जनसंख्या, निम्न साक्षरता दर और पूर्व-कृषि प्रौद्योगिकी स्तरों के आधार पर पहचाना जाता है।
3. ओडिशा राज्य में भारत के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में सबसे अधिक PVTGs हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। भारत के संविधान में ‘विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs)’ शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है। कथन 2 सही है। PVTGs को उनकी घटती या स्थिर जनसंख्या, निम्न साक्षरता दर, पूर्व-कृषि प्रौद्योगिकी स्तर और आर्थिक रूप से पिछड़ेपन के आधार पर पहचाना जाता है। कथन 3 गलत है। ओडिशा में 13 PVTGs हैं, लेकिन ओडिशा में भारत के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में सबसे अधिक PVTGs नहीं हैं; यह संख्या ओडिशा में 13 है, जबकि ओडिशा में 62 जनजातीय समूह हैं।
Q2. मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन (MMJM) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य जनजातीय परिवारों की आजीविका में सुधार करना है।
- यह विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) पर केंद्रित एक राज्य सरकार की पहल है।
- यह केवल कृषि और बागवानी गतिविधियों के माध्यम से जनजातीय आजीविका को बढ़ावा देता है।
- इस मिशन का क्रियान्वयन केवल ग्राम पंचायत स्तर पर किया जाएगा।
उत्तर: यह विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) पर केंद्रित एक राज्य सरकार की पहल है। — मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन (MMJM) ओडिशा सरकार की एक पहल है, जो विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के परिवारों को सशक्त बनाने और उनके जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करने पर केंद्रित है। इसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। यह कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, पशुपालन, रेशम उत्पादन और वन-आधारित गतिविधियों के साथ-साथ पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और गैर-कृषि गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) की पहचान और उनके सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन (MMJM) जैसे कार्यक्रम इन चुनौतियों का समाधान करने में किस प्रकार सहायक हो सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: PVTGs की संक्षिप्त परिभाषा और उनकी पहचान का आधार (ढेबर आयोग, 1973; बाद में 1975 में भारत सरकार द्वारा)।
2. PVTGs की पहचान के मानदंड: घटती/स्थिर जनसंख्या, निम्न साक्षरता, पूर्व-कृषि प्रौद्योगिकी, आर्थिक पिछड़ापन।
3. PVTGs के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियाँ: भौगोलिक अलगाव, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच का अभाव, भूमि अलगाव, आजीविका के पारंपरिक साधनों का क्षरण, शोषण, सांस्कृतिक पहचान का खतरा, प्रशासनिक उपेक्षा।
4. मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन (MMJM) का संदर्भ: मिशन के उद्देश्य (आजीविका संवर्धन, आय वृद्धि, आत्मनिर्भरता), लक्षित समूह (PVTGs), प्रमुख गतिविधियाँ (कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, पशुपालन, रेशम उत्पादन, वन-आधारित गतिविधियाँ, पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, गैर-कृषि गतिविधियाँ, स्व-रोज़गार)।
5. MMJM कैसे चुनौतियों का समाधान कर सकता है: आजीविका विविधीकरण से आर्थिक सुरक्षा, कौशल विकास से स्व-रोज़गार, पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण, स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय से बेहतर पहुँच, समग्र विकास पर ध्यान।
6. निष्कर्ष: PVTGs के समावेशी विकास के लिए ऐसे कार्यक्रमों का महत्व और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता।
स्रोत: orissapost.com
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: ओडिशा सरकार की ‘मुख्यमंत्री जनजातीय विकास मिशन (MMJM)’ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस मिशन का उद्देश्य विशेष रूप से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) परिवारों को आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। 2. मिशन के अंतर्गत PVTG परिवारों को आवास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच सुनिश्चित की जाएगी। 3. मिशन को लागू करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — केंद्र सरकार द्वारा MMJM मिशन के लिए 100% वित्तीय सहायता प्रदान करने का उल्लेख नहीं है। अन्य दोनों कथन मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप हैं।
Mains: ओडिशा सरकार द्वारा ‘मुख्यमंत्री जनजातीय विकास मिशन (MMJM)’ के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) परिवारों के विकास हेतु उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए। साथ ही, इस मिशन के सफल क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों एवं उनके समाधान के उपायों पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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