कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बाल हिरासत मामलों में ‘पेरेंटिंग टाइम’ शब्द अपनाने का आदेश दिया

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बाल हिरासत मामलों में 'पेरेंटिंग टाइम' शब्द अपनाने का आदेश दिया

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बाल हिरासत मामलों में ‘पेरेंटिंग टाइम’ शब्द अपनाने का आदेश दिया

विजिटेशन बनाम पैरेंटिंग टाइमविजिटेशनपैरेंटिंग टाइमअर्थआगंतुक जैसा संबंधमाता-पिता का अधिकार एवं दायित्वमनोवैज्ञानिक प्रभावबच्चे को 'अतिथि' जैसा महसूसबच्चे को दोनों माता-पिता का महत्वन्यायिक भाषा में प्रयोगपारंपरिक शब्दनया निर्देशित शब्दमाता-पिता की भूमिकासीमित अधिकारसमान दायित्वबच्चे का कल्याणगौणप्राथमिक
विजिटेशन बनाम पैरेंटिंग टाइम

✎ कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बाल अभिरक्षा मामलों में 'विजिटेशन' के स्थान पर 'पैरेंटिंग टाइम' शब्द का उपयोग करने का निर्देश दिया है, ताकि माता-पिता के बच्चे के जीवन में अभिन्न भूमिका को मान्यता दी जा सके।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय: बच्चों से संबंधित मुद्दे; न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली  |  GS Paper II — शासन: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप
  • Prelims: बाल अभिरक्षा (Child Custody), पैरेंटिंग टाइम (Parenting Time), विजिटेशन (Visitation), परिवार न्यायालय (Family Courts), अभिभावक और वार्ड मामले (Guardians and Wards Cases), उच्च न्यायालय के निर्देश (High Court Directives)
  • Essay: बदलते सामाजिक परिवेश में न्यायिक शब्दावली का महत्व, बच्चों के सर्वोत्तम हित: कानूनी और सामाजिक परिप्रेक्ष्य

त्वरित पुनरावृत्ति: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बाल अभिरक्षा मामलों में ‘विजिटेशन’ के स्थान पर ‘पैरेंटिंग टाइम’ शब्द का उपयोग करने का निर्देश दिया है, ताकि माता-पिता के बच्चे के जीवन में अभिन्न भूमिका को मान्यता दी जा सके।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सभी परिवार न्यायालयों और अभिभावक एवं वार्ड (G&WC) मामलों से संबंधित न्यायालयों को बाल अभिरक्षा (Child Custody) के मामलों में ‘विजिटेशन’ (Visitation) के स्थान पर ‘पैरेंटिंग टाइम’ (Parenting Time) शब्द का प्रयोग करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि कोई भी माता-पिता अपने बच्चे के जीवन में मात्र ‘आगंतुक’ नहीं होता। यह निर्णय न्यायिक कार्यवाही में उपयोग की जाने वाली भाषा में सुधार लाने और बच्चों के साथ माता-पिता के संबंध को अधिक मानवीय रूप से मान्यता देने के उद्देश्य से लिया गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में बाल अभिरक्षा के मामले मुख्य रूप से अभिभावक और वार्ड अधिनियम, 1890 (Guardians and Wards Act, 1890) और हिंदू अल्पसंख्यक एवं संरक्षकता अधिनियम, 1956 (Hindu Minority and Guardianship Act, 1956) जैसे कानूनों द्वारा शासित होते हैं।
  • पारिवारिक विवादों के कारण बच्चों की अभिरक्षा का निर्धारण न्यायालयों द्वारा किया जाता है, जिसमें बच्चे के सर्वोत्तम हित (Best Interest of the Child) को सर्वोपरि रखा जाता है।
  • अक्सर, गैर-अभिरक्षक माता-पिता (Non-Custodial Parent) को बच्चे से मिलने के लिए ‘विजिटेशन राइट्स’ (Visitation Rights) दिए जाते थे, जिसमें ‘विजिटेशन’ शब्द का प्रयोग किया जाता था।
  • न्यायालयों में उपयोग की जाने वाली शब्दावली का बच्चों और माता-पिता के मन पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है।
  • विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने समय-समय पर बाल अभिरक्षा के मामलों में बच्चे के कल्याण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।
  • यह निर्देश न्यायिक प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील और बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बाल अभिरक्षा (Child Custody) और संबंधित अवधारणाएँ

  • बाल अभिरक्षा से तात्पर्य बच्चे की देखभाल, पालन-पोषण और उसके कल्याण से संबंधित सभी निर्णय लेने के अधिकार और जिम्मेदारी से है।
  • यह आमतौर पर तब प्रासंगिक होता है जब माता-पिता अलग हो जाते हैं या तलाक लेते हैं, और न्यायालय यह तय करता है कि बच्चा किसके साथ रहेगा और दूसरा माता-पिता बच्चे से कैसे मिल पाएगा।
  • न्यायालय का प्राथमिक विचार हमेशा बच्चे का सर्वोत्तम हित होता है, जिसमें उसकी शारीरिक, भावनात्मक, शैक्षिक और नैतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाता है।
  • अभिरक्षा दो प्रकार की हो सकती है: ‘एकल अभिरक्षा’ (Sole Custody), जहाँ एक माता-पिता के पास सभी अधिकार होते हैं, और ‘संयुक्त अभिरक्षा’ (Joint Custody), जहाँ दोनों माता-पिता के पास साझा अधिकार और जिम्मेदारियाँ होती हैं।
  • ‘पैरेंटिंग टाइम’ शब्द का प्रयोग अब गैर-अभिरक्षक माता-पिता द्वारा बच्चे के साथ बिताए गए समय को संदर्भित करने के लिए किया जाएगा, जो ‘विजिटेशन’ की तुलना में अधिक सकारात्मक और सम्मानजनक है।
  • यह बदलाव इस बात को मान्यता देता है कि दोनों माता-पिता बच्चे के जीवन का अभिन्न अंग हैं और कोई भी माता-पिता ‘मेहमान’ नहीं होता।
  • परिवार न्यायालय (Family Courts) परिवार न्यायालय अधिनियम, 1984 (Family Courts Act, 1984) के तहत स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य विवाह और पारिवारिक मामलों से संबंधित विवादों का शीघ्र निपटान करना है।
  • अभिभावक और वार्ड मामले (Guardians and Wards Cases) उन मामलों को संदर्भित करते हैं जहाँ न्यायालय किसी बच्चे के लिए कानूनी अभिभावक नियुक्त करता है, जो बच्चे की संपत्ति और/या व्यक्ति की देखभाल करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
शब्द ‘पैरेंटिंग टाइम’ का उपयोग यह मान्यता देता है कि कोई भी माता-पिता अपने बच्चे के जीवन में केवल ‘विज़िटर’ नहीं होते हैं, बल्कि उनका एक स्थायी और महत्वपूर्ण स्थान होता है।
न्यायिक भाषा में सुधार न्यायालयीन कार्यवाही में उपयोग की जाने वाली भाषा को अधिक मानवीय और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक कदम।
गैर-अभिरक्षक माता-पिता की भूमिका गैर-अभिरक्षक माता-पिता (non-custodial parent) के बच्चे के साथ बिताए गए समय को ‘पैरेंटिंग टाइम’ के रूप में परिभाषित करके उनकी भूमिका को सशक्त करता है।
बच्चों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव यह सुनिश्चित करता है कि बच्चे अपने माता-पिता के संबंध को ‘विज़िटर’ शब्द के माध्यम से न समझें, जिससे उनके मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
पारिवारिक न्यायालयों को निर्देश सभी पारिवारिक न्यायालयों (family courts) और अभिभावक एवं वार्ड मामलों (Guardians and Wards cases) से संबंधित न्यायालयों को इस नए शब्दावली का पालन करने का निर्देश।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह निर्णय माता-पिता और बच्चों के बीच संबंधों की संवेदनशीलता को स्वीकार करता है, विशेषकर तलाक या अलगाव के मामलों में।
  • यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण को प्राथमिकता देता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे दोनों माता-पिता के साथ अपने संबंध को महत्वपूर्ण समझें।
  • यह समाज में माता-पिता की भूमिका के प्रति एक अधिक सकारात्मक और समावेशी दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है, जहाँ दोनों माता-पिता बच्चे के जीवन का अभिन्न अंग होते हैं।

कानूनी एवं न्यायिक महत्व

  • यह न्यायिक प्रक्रिया में उपयोग की जाने वाली भाषा को अधिक मानवीय और बच्चे-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है।
  • यह उच्च न्यायालयों (High Courts) द्वारा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के माध्यम से न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) का एक उदाहरण है, जहाँ न्यायालय सामाजिक परिवर्तनों के अनुरूप शब्दावली को अद्यतन कर रहे हैं।
  • यह अन्य राज्यों के न्यायालयों के लिए भी एक मिसाल कायम कर सकता है, जिससे पूरे देश में बाल अभिरक्षा (child custody) मामलों में समान शब्दावली अपनाने की संभावना बढ़ सकती है।

पारिवारिक संबंधों पर प्रभाव

  • यह गैर-अभिरक्षक माता-पिता को अपने बच्चों के जीवन में अधिक सक्रिय और सम्मानित भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
  • यह माता-पिता के बीच संघर्ष को कम करने में मदद कर सकता है, क्योंकि ‘पैरेंटिंग टाइम’ शब्द ‘विज़िटेशन’ की तुलना में कम नकारात्मक अर्थ रखता है।
  • यह बच्चों को अपने माता-पिता के अलगाव के बावजूद दोनों के साथ एक स्वस्थ संबंध बनाए रखने में मदद करता है।

चुनौतियाँ

1. शब्दावली परिवर्तन का कार्यान्वयन

  • सभी अधीनस्थ न्यायालयों (subordinate courts) और न्यायिक अधिकारियों द्वारा नई शब्दावली को प्रभावी ढंग से अपनाने और लागू करने में समय लग सकता है।
  • पुरानी शब्दावली के उपयोग की आदत को बदलना एक चुनौती हो सकती है, जिसके लिए निरंतर प्रशिक्षण और जागरूकता की आवश्यकता होगी।

2. जन जागरूकता का अभाव

  • आम जनता और कानूनी पेशेवरों के बीच इस शब्दावली परिवर्तन के महत्व और निहितार्थों के बारे में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक होगा।
  • यदि माता-पिता और वकील इस बदलाव से अवगत नहीं हैं, तो वे अनजाने में पुरानी शब्दावली का उपयोग जारी रख सकते हैं।

3. वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन

  • केवल शब्दावली बदलने से बाल अभिरक्षा मामलों के अंतर्निहित मुद्दों का समाधान नहीं होगा; वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए दीर्घकालिक अध्ययन की आवश्यकता होगी।
  • यह सुनिश्चित करना कि यह परिवर्तन माता-पिता के अधिकारों और बच्चों के सर्वोत्तम हितों के बीच संतुलन बनाए रखता है, एक सतत चुनौती हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
न्यायिक शब्दावली में परिवर्तन अधीनस्थ न्यायालयों में एकरूपता और त्वरित कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
कानूनी पेशेवरों का प्रशिक्षण वकीलों और न्यायाधीशों को नई शब्दावली के उपयोग के लिए संवेदनशील बनाना और प्रशिक्षित करना।
जनता की समझ आम जनता और विशेषकर संघर्षरत माता-पिता को इस बदलाव के महत्व से अवगत कराना।
शब्दावली से परे के मुद्दे केवल शब्दावली बदलने से बाल अभिरक्षा के गहरे भावनात्मक और कानूनी मुद्दों का समाधान नहीं होगा।

आगे की राह

  • न्यायिक अधिकारियों और कानूनी पेशेवरों के लिए कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि नई शब्दावली के उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
  • उच्च न्यायालय द्वारा जारी परिपत्र (circular) का सभी अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
  • जनता के बीच, विशेषकर तलाक या अलगाव से गुजर रहे माता-पिता के बीच, ‘पैरेंटिंग टाइम’ के महत्व के बारे में जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
  • कानूनी सहायता सेवाओं (legal aid services) के माध्यम से माता-पिता को इस बदलाव और उनके अधिकारों के बारे में जानकारी प्रदान की जाए।
  • बाल अभिरक्षा मामलों में बच्चों के सर्वोत्तम हित (best interest of the child) को सर्वोपरि रखने के लिए अन्य कानूनी और नीतिगत सुधारों पर विचार किया जाए।
  • इस शब्दावली परिवर्तन के दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन किया जाए ताकि इसके सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों का मूल्यांकन किया जा सके।
  • अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों को भी इसी तरह के निर्देश जारी करने पर विचार करना चाहिए ताकि पूरे देश में एकरूपता लाई जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

बाल अभिरक्षा · पारिवारिक न्यायालय · न्यायिक शब्दावली · उच्च न्यायालय के निर्देश · बाल कल्याण · गैर-अभिरक्षक माता-पिता के अधिकार · न्यायिक सुधार · कानूनी भाषा का महत्व · बाल मनोविज्ञान · संविधान के अनुच्छेद 21

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 226’, ‘note’: ‘उच्च न्यायालयों की रिट जारी करने की शक्ति’}

अवधारणा प्रवाह

कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा ‘विज़िटेशन’ शब्द पर आपत्ति  →  ‘विज़िटेशन’ शब्द का नकारात्मक अर्थ और बच्चे पर प्रभाव  →  न्यायालय द्वारा ‘पैरेंटिंग टाइम’ शब्द का निर्देश  →  सभी पारिवारिक न्यायालयों को नए शब्द का उपयोग करने का आदेश  →  माता-पिता की भूमिका को सम्मान देना और बच्चे का कल्याण सुनिश्चित करना  →  न्यायिक भाषा में सुधार और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत में बाल अभिरक्षा (Child Custody) से संबंधित मामले मुख्य रूप से परिवार न्यायालयों (Family Courts) द्वारा निपटाए जाते हैं।
2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 बच्चों के गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की सुरक्षा करता है, जिसमें माता-पिता दोनों का स्नेह प्राप्त करने का अधिकार भी शामिल है।
3. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हाल ही में ‘विजिटेशन’ (Visitation) शब्द के स्थान पर ‘पेरेंटिंग टाइम’ (Parenting Time) शब्द का उपयोग करने का निर्देश दिया है ताकि गैर-अभिरक्षक माता-पिता को बच्चे के जीवन में मात्र ‘आगंतुक’ के रूप में न देखा जाए।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। परिवार न्यायालय अधिनियम, 1984 के तहत परिवार न्यायालयों की स्थापना की गई है जो विवाह और परिवार से संबंधित मामलों, जिनमें बाल अभिरक्षा भी शामिल है, का निपटारा करते हैं।
कथन 2 सही है। अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जिसकी व्याख्या सर्वोच्च न्यायालय ने गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार के रूप में की है। इसमें बच्चों के लिए स्वस्थ वातावरण और माता-पिता दोनों के साथ संबंध बनाए रखने का अधिकार भी शामिल है, जब तक कि यह बच्चे के सर्वोत्तम हित में न हो।
कथन 3 सही है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने यह निर्देश दिया है, जैसा कि समाचार में उल्लिखित है, ताकि न्यायिक शब्दावली में सुधार किया जा सके और माता-पिता के महत्व को रेखांकित किया जा सके।

Q2. अभिकथन (A): कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ‘विजिटेशन’ शब्द के स्थान पर ‘पेरेंटिंग टाइम’ शब्द का उपयोग करने का निर्देश दिया है।
कारण (R): ‘विजिटेशन’ शब्द यह संकेत देता है कि एक माता-पिता बच्चे के जीवन का हिस्सा है जबकि दूसरा केवल ‘आगंतुक’ है, जो बच्चे के मनोविज्ञान पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, जैसा कि समाचार में बताया गया है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने यह निर्देश दिया है। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है। न्यायालय ने स्वयं यह टिप्पणी की है कि ‘विजिटेशन’ शब्द एक माता-पिता को बच्चे के जीवन में ‘आगंतुक’ के रूप में प्रस्तुत करता है, जिससे बच्चे के मन में गलत धारणा बन सकती है। ‘पेरेंटिंग टाइम’ शब्द माता-पिता दोनों की भूमिका को समान रूप से महत्वपूर्ण दर्शाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ न्यायिक शब्दावली में सुधार की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए, विशेष रूप से बाल अभिरक्षा (Child Custody) के मामलों में ‘विजिटेशन’ के स्थान पर ‘पेरेंटिंग टाइम’ जैसे शब्दों के उपयोग के संदर्भ में। इस तरह के बदलाव बच्चों के मनोविज्ञान और माता-पिता के अधिकारों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** न्यायिक शब्दावली के महत्व और हाल ही में कर्नाटक उच्च न्यायालय के ‘पेरेंटिंग टाइम’ संबंधी निर्देश का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **न्यायिक शब्दावली में सुधार की आवश्यकता:**
* कानूनी भाषा की जटिलता और आम जनता पर इसका प्रभाव।
* संवेदनशील मामलों, जैसे बाल अभिरक्षा, में शब्दों के मनोवैज्ञानिक प्रभाव।
* न्याय प्रणाली को अधिक मानवीय और बाल-केंद्रित बनाने की आवश्यकता।
3. **’विजिटेशन’ से ‘पेरेंटिंग टाइम’ में बदलाव का विश्लेषण:**
* **’विजिटेशन’ की समस्या:** यह शब्द गैर-अभिरक्षक माता-पिता को ‘आगंतुक’ के रूप में प्रस्तुत करता है, जिससे उनकी भूमिका गौण प्रतीत होती है।
* **’पेरेंटिंग टाइम’ का महत्व:** यह माता-पिता दोनों की भूमिका को समान रूप से महत्वपूर्ण दर्शाता है, बच्चे के जीवन में दोनों के स्थायी संबंध को स्वीकार करता है।
4. **बच्चों के मनोविज्ञान पर प्रभाव:**
* **सकारात्मक प्रभाव:** बच्चे को यह समझने में मदद करता है कि उसके दोनों माता-पिता उसके जीवन का अभिन्न अंग हैं, जिससे अलगाव का आघात कम होता है। आत्म-सम्मान और पहचान के विकास में सहायक।
* **नकारात्मक प्रभाव (यदि ‘विजिटेशन’ जारी रहे):** बच्चे में असुरक्षा की भावना, एक माता-पिता के प्रति अलगाव या उपेक्षा का भाव।
5. **माता-पिता के अधिकारों पर प्रभाव:**
* गैर-अभिरक्षक माता-पिता के गरिमापूर्ण अधिकार को मान्यता।
* दोनों माता-पिता को बच्चे के पालन-पोषण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करना।
* कानूनी प्रक्रियाओं में अधिक समानता और सम्मान का भाव।
6. **निष्कर्ष:** न्यायिक शब्दावली में ऐसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलावों की आवश्यकता पर बल, जो न केवल कानूनी प्रक्रिया को सुगम बनाते हैं बल्कि मानवीय मूल्यों और बाल कल्याण को भी बढ़ावा देते हैं। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बच्चों के सर्वोत्तम हित को सर्वोपरि रखने में ऐसे बदलावों की भूमिका।

स्रोत: The Hindu

Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा बाल संरक्षण मामलों में ‘पेरेंटिंग टाइम’ शब्दावली के प्रयोग का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. A. माता-पिता के अधिकारों को कानूनी रूप से सीमित करना
  2. B. बच्चे के सर्वोत्तम हितों को प्राथमिकता देना और समान parenting के महत्व को स्थापित करना
  3. C. केवल पिता को विशेष अधिकार प्रदान करना
  4. D. न्यायालयों में मामलों की संख्या कम करना

उत्तर: B. बच्चे के सर्वोत्तम हितों को प्राथमिकता देना और समान parenting के महत्व को स्थापित करना — कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ‘पेरेंटिंग टाइम’ शब्दावली का प्रयोग बच्चे के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए समान parenting के महत्व को स्थापित करने के लिए किया है।

Mains: कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा बाल संरक्षण मामलों में ‘पेरेंटिंग टाइम’ शब्दावली के प्रयोग से संबंधित आदेश के सामाजिक एवं कानूनी निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए। इसके अतिरिक्त, इस परिवर्तन के माध्यम से बच्चों के अधिकारों की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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