जीएसटी सुधारों से अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल, वैश्विक चुनौतियों का सामना होगा आसान

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जीएसटी सुधारों से अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल, वैश्विक चुनौतियों का सामना होगा आसान

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GST सुधारों का प्रभाव

✎ GST सुधारों का लक्ष्य व्यापार सुगमता बढ़ाना, कर अनुपालन में सुधार करना और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक संवृद्धि को गति देना है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।  |  GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व; संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ; स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ।
  • Prelims: GST परिषद, वस्तु एवं सेवा कर (GST), राजकोषीय संघवाद, इनपुट टैक्स क्रेडिट, व्यापार सुगमता
  • Essay: भारत में आर्थिक सुधारों की दिशा और दशा, राजकोषीय संघवाद: चुनौतियाँ और अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: GST सुधारों का लक्ष्य व्यापार सुगमता बढ़ाना, कर अनुपालन में सुधार करना और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक संवृद्धि को गति देना है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, 57वीं GST परिषद (GST Council) की बैठक संपन्न हुई, जिसमें करदाताओं और व्यवसायों के लिए कई सुधारों की घोषणा की गई। इन सुधारों का उद्देश्य GST व्यवस्था में अनुपालन को बेहतर बनाना, पंजीकरण की कठिनाइयों को दूर करना, रिफंड में देरी को कम करना और विवादों के दौरान उत्पीड़न को रोकना है। इन ‘नेक्स्ट-जेन GST’ सुधारों को वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) की गति को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पृष्ठभूमि

  • GST परिषद ने पिछले वर्ष सितंबर में अपनी 56वीं बैठक में GST कर स्लैब को युक्तिसंगत बनाया था, जिसमें 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो-स्लैब संरचना के साथ-साथ ‘सिन’ और लक्जरी वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की विशेष ‘डी-मेरिट’ दर लागू की गई थी।
  • GST भारत में 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया एक अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) है, जिसने केंद्र और राज्यों द्वारा लगाए गए कई अप्रत्यक्ष करों को प्रतिस्थापित किया।
  • यह ‘एक राष्ट्र, एक कर’ (One Nation, One Tax) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक समान बाजार बनाना है।
  • GST परिषद, संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत गठित एक संवैधानिक निकाय है, जो GST से संबंधित सभी महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए जिम्मेदार है। इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री अध्यक्ष होते हैं और सभी राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य होते हैं।
  • GST के तहत, करदाताओं को इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit – ITC) का लाभ मिलता है, जिससे कर पर कर (Tax on Tax) के प्रभाव को समाप्त किया जा सकता है।
  • GST सुधारों का लक्ष्य व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) को बढ़ाना और कर अनुपालन को सरल बनाना है, विशेषकर छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए।

वस्तु एवं सेवा कर (GST) क्या है?

  • वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax – GST) भारत में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाने वाला एक व्यापक, बहु-स्तरीय, गंतव्य-आधारित कर है।
  • यह मूल्य वर्धित कर (Value Added Tax – VAT) के सिद्धांत पर कार्य करता है, जहाँ उत्पादन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में केवल जोड़े गए मूल्य पर कर लगाया जाता है।
  • GST के तहत, 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो-स्लैब संरचना है, साथ ही कुछ वस्तुओं पर शून्य प्रतिशत कर भी लगता है और कुछ विशेष वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की उच्च दरें लागू होती हैं।
  • यह केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए कई अप्रत्यक्ष करों, जैसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, राज्य VAT, प्रवेश कर आदि को समाहित करता है।
  • GST का प्रशासन GST परिषद द्वारा किया जाता है, जो केंद्र और राज्यों के बीच एक सहकारी संघीय (Cooperative Federalism) ढाँचे का प्रतिनिधित्व करती है।
  • GST के प्रमुख घटकों में केंद्रीय GST (CGST), राज्य GST (SGST), एकीकृत GST (IGST) और केंद्र शासित प्रदेश GST (UTGST) शामिल हैं।
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) एक महत्वपूर्ण विशेषता है, जो व्यवसायों को वस्तुओं या सेवाओं की खरीद पर भुगतान किए गए कर को अपनी अंतिम कर देयता से घटाने की अनुमति देती है।
  • GST का उद्देश्य कर आधार को व्यापक बनाना, कर अनुपालन में सुधार करना और भारतीय अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पंजीकरण प्रक्रिया का सरलीकरण नियमित परिवर्तनों (जैसे नए कार्यालय जोड़ना) की स्वचालित स्वीकृति से व्यवसायों के लिए अनुपालन आसान होगा।
तेजी से कर वापसी स्वीकृति अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन की गई; 90% वापसी 3 दिन में स्वीकृत। छोटे व्यवसायों के लिए कार्यशील पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
इनपुट टैक्स क्रेडिट का विस्तार कर्मचारियों के स्वास्थ्य और जीवन बीमा जैसे खर्चों को शामिल किया गया, जिससे व्यवसायों को अधिक कर लाभ मिलेगा।
गिरफ्तारी की शक्ति समाप्त GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति समाप्त की गई, जिससे व्यवसायों को उत्पीड़न से राहत मिलेगी।
अभियोजन सीमा में वृद्धि अपराधों के लिए अभियोजन सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की गई, छोटे मामलों में कानूनी कार्यवाही से बचाव।
छोटे व्यवसायों के लिए राहत राज्य-वार व्यावसायिक स्थान स्थापित किए बिना देश भर में विस्तार की अनुमति, एक एकीकृत बाजार को बढ़ावा।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • GST अनुपालन को सरल बनाने से व्यवसायों पर बोझ कम होगा, जिससे व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) बढ़ेगी।
  • तेजी से कर वापसी से विशेषकर छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए कार्यशील पूंजी (Working Capital) की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे उनकी तरलता (Liquidity) में सुधार होगा।
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) के दायरे का विस्तार उत्पादन लागत को कम करने में मदद करेगा, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
  • प्रक्रियागत सुधारों से आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और भारत की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) की गति बनी रहेगी, खासकर वैश्विक चुनौतियों के समय में।

शासनिक महत्व

  • GST परिषद (GST Council) द्वारा किए गए ये सुधार करदाताओं की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं, जैसे पंजीकरण में कठिनाई और विवादों के दौरान उत्पीड़न, को संबोधित करते हैं।
  • अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति को हटाना और अभियोजन सीमा को बढ़ाना कर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) को बढ़ावा देगा।
  • यह सुधार करदाताओं और कर अधिकारियों के बीच विश्वास बनाने में मदद करेंगे, जिससे स्वैच्छिक अनुपालन (Voluntary Compliance) में वृद्धि हो सकती है।

सामाजिक महत्व

  • छोटे व्यवसायों के लिए देश भर में विस्तार की सुविधा से क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और रोजगार सृजन (Employment Generation) को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
  • उपभोक्ता मांग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने से समग्र आर्थिक कल्याण में सुधार हो सकता है।

चुनौतियाँ

1. GST अनुपालन की जटिलता

  • GST प्रणाली की शुरुआत के बाद से, विभिन्न नियमों और प्रक्रियाओं के कारण अनुपालन एक चुनौती रहा है, विशेषकर छोटे व्यवसायों के लिए।
  • विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नियमों और व्याख्याओं से अंतर-राज्यीय व्यापार में कठिनाइयाँ आती हैं।

2. कर वापसी में देरी

  • व्यवसायों, विशेषकर निर्यातकों को, इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी में देरी का सामना करना पड़ा है, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी प्रभावित होती है।
  • यह समस्या अक्सर छोटे व्यवसायों के लिए अधिक गंभीर होती है, जो तरलता की कमी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

3. कर अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न

  • करदाताओं ने पंजीकरण, निरीक्षण और विवादों के दौरान अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न की शिकायतें की हैं।
  • यह व्यापार करने में आसानी को बाधित करता है और निवेश के माहौल को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

4. राजस्व संग्रह और कर आधार का विस्तार

  • GST के तहत राजस्व संग्रह को स्थिर करना और कर आधार (Tax Base) का विस्तार करना एक सतत चुनौती है।
  • कर चोरी और लीकेज को रोकना अभी भी महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पंजीकरण प्रक्रिया पहले जटिल और समय लेने वाली थी, जिससे नए व्यवसायों को कठिनाई होती थी।
कर वापसी देरी से होती थी, जिससे व्यवसायों की कार्यशील पूंजी अटक जाती थी।
विवादों के दौरान उत्पीड़न कर अधिकारियों द्वारा अनुचित व्यवहार की शिकायतें थीं, जिससे व्यापारिक माहौल प्रभावित होता था।
इनपुट टैक्स क्रेडिट का दायरा पहले सीमित था, जिससे व्यवसायों को कुछ खर्चों पर कर लाभ नहीं मिल पाता था।
गिरफ्तारी की शक्ति GST अधिकारियों के पास गिरफ्तारी की शक्ति का दुरुपयोग होने की आशंका थी।
छोटे व्यवसायों के लिए विस्तार प्रत्येक राज्य में व्यावसायिक स्थान स्थापित करने की आवश्यकता से अखिल भारतीय विस्तार बाधित होता था।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • वस्तु एवं सेवा कर (GST)

आगे की राह

  • GST परिषद को करदाताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर GST प्रणाली में निरंतर सुधार और सरलीकरण जारी रखना चाहिए।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग करके अनुपालन प्रक्रियाओं को और स्वचालित और सुव्यवस्थित किया जाना चाहिए, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम हो।
  • कर अधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए ताकि वे नए नियमों और प्रक्रियाओं को समझ सकें और करदाताओं के साथ बेहतर व्यवहार कर सकें।
  • छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए विशेष सहायता और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए ताकि वे GST प्रणाली का पूरी तरह से लाभ उठा सकें।
  • राजस्व संग्रह को बढ़ाने और कर चोरी को रोकने के लिए डेटा विश्लेषण और जोखिम-आधारित मूल्यांकन (Risk-Based Assessment) का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए।
  • राज्यों के बीच GST नियमों की एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए GST परिषद को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए ताकि एक सच्चा एकीकृत बाजार बन सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

GST परिषद · वस्तु एवं सेवा कर · राजकोषीय संघवाद · आर्थिक संवृद्धि · कर सुधार · पंजीकरण प्रक्रिया · इनपुट टैक्स क्रेडिट · व्यापार सुगमता · राजस्व संग्रह · डिजिटल अर्थव्यवस्था

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 279A’, ‘note’: ‘GST परिषद का गठन और कार्य’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246A’, ‘note’: ‘GST पर कानून बनाने की शक्ति’}

अवधारणा प्रवाह

GST परिषद द्वारा प्रक्रियागत सुधारों की घोषणा  →  व्यवसायों के लिए अनुपालन में आसानी  →  कार्यशील पूंजी की उपलब्धता में सुधार  →  व्यापार करने में आसानी में वृद्धि  →  आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन  →  भारत की संवृद्धि गति का स्थायित्व

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. GST परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं।
2. GST परिषद में केवल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
3. GST परिषद की सिफारिशें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के लिए बाध्यकारी होती हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। GST परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं। कथन 2 गलत है। GST परिषद में केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। कथन 3 गलत है। GST परिषद की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं, बल्कि अनुशंसनात्मक होती हैं, हालांकि व्यवहार में उनका पालन किया जाता है।

Q2. GST व्यवस्था के तहत ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (Input Tax Credit) से क्या अभिप्राय है?

  1. यह एक प्रकार का कर है जो आयातित वस्तुओं पर लगाया जाता है।
  2. यह वह कर है जो उपभोक्ता को वस्तुओं और सेवाओं की खरीद पर चुकाना होता है।
  3. यह वह कर है जो एक पंजीकृत व्यक्ति द्वारा वस्तुओं या सेवाओं की खरीद पर चुकाया जाता है और जिसे उसके आउटपुट टैक्स दायित्व के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है।
  4. यह वह प्रोत्साहन है जो सरकार निर्यातकों को देती है।

उत्तर: यह वह कर है जो एक पंजीकृत व्यक्ति द्वारा वस्तुओं या सेवाओं की खरीद पर चुकाया जाता है और जिसे उसके आउटपुट टैक्स दायित्व के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है। — इनपुट टैक्स क्रेडिट का अर्थ है कि जब कोई पंजीकृत व्यक्ति वस्तुएं या सेवाएं खरीदता है, तो वह उस पर चुकाए गए GST को अपने अंतिम उत्पादों या सेवाओं पर लगने वाले GST के विरुद्ध समायोजित कर सकता है। यह दोहरे कराधान से बचाता है और करों के ‘कैस्केडिंग प्रभाव’ (Cascading Effect) को समाप्त करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था में हालिया सुधारों का विश्लेषण कीजिए। ये सुधार भारत में व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: GST और इसके उद्देश्यों का संक्षिप्त परिचय। हालिया 57वीं GST परिषद की बैठक में घोषित सुधारों का उल्लेख।
2. हालिया सुधारों का विश्लेषण:
क. पंजीकरण प्रक्रिया का सरलीकरण (जैसे स्वचालित स्वीकृति)।
ख. रिफंड प्रक्रिया में तेजी (जैसे 10 दिन में पावती, 3 दिन में 90% रिफंड)।
ग. इनपुट टैक्स क्रेडिट का विस्तार (जैसे कर्मचारियों के स्वास्थ्य/जीवन बीमा पर)।
घ. उत्पीड़न में कमी (जैसे गिरफ्तारी की शक्ति हटाना, अभियोजन सीमा बढ़ाना, छोटे विवादों को वापस लेना)।
ङ. छोटे व्यवसायों के लिए राहत (जैसे अंतर-राज्यीय विस्तार की सुगमता)।
3. व्यापार सुगमता पर प्रभाव:
क. अनुपालन लागत में कमी।
ख. कार्यशील पूंजी की उपलब्धता में सुधार।
ग. कानूनी विवादों और उत्पीड़न में कमी।
घ. एकल एकीकृत बाजार के वादे को पूरा करना।
ङ. छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए अनुकूल माहौल।
4. आर्थिक संवृद्धि पर प्रभाव:
क. उपभोक्ता मांग में वृद्धि (कम कर स्लैब के कारण)।
ख. निवेश को प्रोत्साहन।
ग. वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता में वृद्धि।
घ. औपचारिक अर्थव्यवस्था का विस्तार।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह: संभावित चुनौतियाँ (जैसे कार्यान्वयन), और निरंतर सुधारों की आवश्यकता पर संक्षिप्त चर्चा।
6. निष्कर्ष: सुधारों के महत्व और भारत की आर्थिक यात्रा में उनके योगदान पर सकारात्मक टिप्पणी।

स्रोत: The Indian Express


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