10 Oct ब्रिक्स की एकजुटता परीक्षा: वैश्विक व्यवस्था में बढ़ता विखंडन
✎ BRICS एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने और वैश्विक शासन संस्थानों में सुधार के लिए प्रतिबद्ध उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण समूह है, जिसकी प्रासंगिकता हालिया शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से अपनाई गई 'नई दिल्ली…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — अर्थव्यवस्था
- Prelims: BRICS, नई दिल्ली घोषणा, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, ब्रेटन वुड्स संस्थान, स्थानीय मुद्रा व्यापार, वैश्विक शासन सुधार
- Essay: बदलती वैश्विक व्यवस्था में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका, बहुपक्षीय संस्थानों का भविष्य और भारत की स्थिति
त्वरित पुनरावृत्ति: BRICS एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने और वैश्विक शासन संस्थानों में सुधार के लिए प्रतिबद्ध उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण समूह है, जिसकी प्रासंगिकता हालिया शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से अपनाई गई ‘नई दिल्ली घोषणा’ से परिलक्षित हुई है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन ने एक खंडित विश्व व्यवस्था में BRICS की प्रासंगिकता और एकजुटता पर बहस छेड़ दी है। शिखर सम्मेलन की नई दिल्ली घोषणा को सदस्य देशों के विविध विचारों को समेटने में एक बड़ी उपलब्धि माना गया है, जो वैश्विक शासन, व्यापार, वित्त, ऊर्जा, जलवायु, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर आम सहमति को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है।
- इसकी स्थापना 2006 में BRIC के रूप में हुई थी और 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह BRICS बन गया।
- यह समूह वैश्विक आबादी का लगभग 41%, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 24% और विश्व व्यापार का 16% प्रतिनिधित्व करता है।
- BRICS का मुख्य उद्देश्य वैश्विक आर्थिक और वित्तीय संरचना में सुधार करना तथा विकासशील देशों की आवाज़ को मजबूत करना है।
- हालिया शिखर सम्मेलन में 11 सदस्य देशों के बीच सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणा’ को अपनाया गया, जिसमें वैश्विक शासन सुधार और बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
- घोषणा में स्थानीय मुद्रा व्यापार, अंतर-संचालनीय सीमा-पार भुगतान प्रणालियों और संयुक्त राष्ट्र (UN) तथा अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में सुधार का समर्थन किया गया।
BRICS क्या है?
- BRICS पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका – का एक अंतर-सरकारी संगठन है।
- इसका गठन वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर सहयोग को बढ़ावा देने तथा विकासशील देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया गया था।
- BRICS देश वैश्विक मंच पर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (multipolar world order) के प्रबल समर्थक हैं, जो पश्चिमी प्रभुत्व वाली व्यवस्था को चुनौती देता है।
- यह समूह वैश्विक शासन संस्थानों, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और ब्रेटन वुड्स संस्थानों (Bretton Woods institutions) जैसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तथा विश्व बैंक में सुधार की वकालत करता है।
- BRICS ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (Contingent Reserve Arrangement – CRA) जैसे अपने स्वयं के वित्तीय संस्थान स्थापित किए हैं, जो सदस्य देशों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।
- हाल ही में, BRICS ने अपने विस्तार की प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें कई नए देशों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे इसकी वैश्विक पहुंच और प्रभाव बढ़ सकता है।
- समूह व्यापार, निवेश, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| नई दिल्ली घोषणा | 11-सदस्यीय समूह के विविध विचारों को समेटने में प्रमुख उपलब्धि। |
| स्थानीय मुद्रा व्यापार और अंतर-संचालित सीमा पार भुगतान प्रणालियाँ | वैश्विक वित्तीय प्रणाली में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने का प्रयास। |
| वैश्विक शासन सुधार | संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में विकासशील देशों की अधिक प्रतिनिधित्व की मांग। |
| BRICS आर्थिक भागीदारी रणनीति 2030 | समूह के भीतर आर्थिक सहयोग और एकीकरण को बढ़ावा देना। |
| कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग | आर्थिक विकास, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और सतत विकास को गति देने की क्षमता को पहचानना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने और अंतर-संचालित सीमा पार भुगतान प्रणालियों को विकसित करने का प्रस्ताव, जो वैश्विक व्यापार में विविधता ला सकता है और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम कर सकता है।
- BRICS आर्थिक भागीदारी रणनीति 2030 और ग्लोबल वैल्यू चेन एक्शन प्लान 2026-2030 का समर्थन, समूह के भीतर आर्थिक सहयोग और एकीकरण को मजबूत करेगा।
सामरिक महत्व
- वैश्विक संस्थानों में सुधार की मांग, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र और ब्रेटन वुड्स संस्थानों में, जो उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती आवाज को दर्शाता है।
- बहु-ध्रुवीयता को बढ़ावा देने और संवाद, कूटनीति तथा राजनीतिक समाधानों पर जोर देने का संदेश, जो एक खंडित विश्व व्यवस्था में स्थिरता लाने का प्रयास है।
- पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और गाजा में मानवीय पहुंच का समर्थन, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत के लिए महत्व
- भारत की अध्यक्षता में सर्वसम्मत घोषणा को अपनाना, BRICS के भीतर और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा तथा प्रभाव का प्रमाण है।
- वैश्विक शासन सुधार और बहुपक्षवाद को मजबूत करने के भारत के प्रयासों को BRICS मंच से समर्थन मिलता है।
चुनौतियाँ
1. आंतरिक तनाव और असंतुलन
- BRICS समूह के भीतर सदस्य देशों के हितों और प्राथमिकताओं में भिन्नता, एक साथ कार्य करने की क्षमता को सीमित करती है।
- विभिन्न आर्थिक आकार और विकास स्तर वाले देशों के बीच संतुलन स्थापित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, समूह और उनकी संरचना
2. वैश्विक शासन सुधार में बाधाएँ
- संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधारों के लिए मौजूदा शक्तियों से प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है।
- सर्वसम्मत निर्णय लेने की आवश्यकता सुधारों को धीमा कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, समूह और उनकी संरचना
3. खंडित विश्व व्यवस्था का प्रभाव
- भू-राजनीतिक तनाव और विभिन्न देशों के बीच बढ़ते मतभेद, BRICS के सदस्य देशों के बीच समन्वय को जटिल बनाते हैं।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और व्यापार पैटर्न में व्यवधान समूह के आर्थिक लक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत के हित पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव
4. स्थानीय मुद्रा व्यापार का कार्यान्वयन
- स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय भुगतान प्रणाली विकसित करना तकनीकी और नियामक चुनौतियों से भरा है।
- मुद्रा विनिमय दरों में अस्थिरता और पूंजी नियंत्रण जैसे मुद्दे कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सदस्य देशों के हित | आंतरिक मतभेद और भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं में भिन्नता। |
| वैश्विक संस्थानों में सुधार | मौजूदा शक्तियों का प्रतिरोध और सर्वसम्मत निर्णय लेने की आवश्यकता। |
| स्थानीय मुद्रा व्यापार | तकनीकी और नियामक चुनौतियाँ, मुद्रा अस्थिरता। |
| बहु-ध्रुवीयता का संवर्धन | एक खंडित विश्व व्यवस्था में समन्वय स्थापित करने की कठिनाई। |
| कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शासन | नैतिक और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ, संसाधनों तक असमान पहुंच। |
आगे की राह
- BRICS सदस्य देशों के बीच विश्वास निर्माण और संवाद को मजबूत करना, ताकि आंतरिक मतभेदों को कम किया जा सके।
- स्थानीय मुद्रा व्यापार और अंतर-संचालित भुगतान प्रणालियों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप और समय-सीमा विकसित करना।
- संयुक्त राष्ट्र और ब्रेटन वुड्स संस्थानों में सुधारों के लिए एक ठोस और एकीकृत प्रस्ताव प्रस्तुत करना।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शासन पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए एक समावेशी ढांचा तैयार करना, जिसमें सभी सदस्य देशों की भागीदारी हो।
- जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसे साझा वैश्विक चुनौतियों पर व्यावहारिक और ठोस समाधानों पर ध्यान केंद्रित करना।
- विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने और बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए अन्य समान विचारधारा वाले समूहों के साथ सहयोग करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
BRICS शिखर सम्मेलन · नई दिल्ली घोषणा · बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था · वैश्विक शासन सुधार · स्थानीय मुद्रा व्यापार · ब्रेटन वुड्स संस्थाएँ · सतत विकास · कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन · विकासशील देश · अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली · नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली · संयुक्त राष्ट्र सुधार
अवधारणा प्रवाह
BRICS शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मत घोषणा → वैश्विक शासन सुधार और बहु-ध्रुवीयता पर जोर → स्थानीय मुद्रा व्यापार और भुगतान प्रणालियों का प्रस्ताव → आंतरिक तनाव और वैश्विक खंडन का सामना → BRICS की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता की परीक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 18वां BRICS शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।
2. नई दिल्ली घोषणा में वैश्विक शासन सुधार और स्थानीय मुद्रा व्यापार जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है।
3. BRICS समूह ब्रेटन वुड्स संस्थाओं में सुधार का समर्थन नहीं करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि 18वां BRICS शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में 12-13 सितंबर, 2026 को आयोजित किया गया था। कथन 2 भी सही है क्योंकि घोषणा में वैश्विक शासन सुधार, स्थानीय मुद्रा व्यापार, वित्त, ऊर्जा, जलवायु, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और कृषि जैसे विषय शामिल थे। कथन 3 गलत है क्योंकि BRICS समूह ब्रेटन वुड्स संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने का समर्थन करता है।
Q2. अभिकथन (A): BRICS समूह उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के लिए एक मजबूत आवाज की आवश्यकता पर बल देता है।
कारण (R): वैश्विक संस्थाएं अब समकालीन आर्थिक और जनसांख्यिकीय वास्तविकता को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती हैं।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि BRICS का उद्देश्य वैश्विक मंच पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को मजबूत करना है। कारण (R) भी सही है क्योंकि BRICS का मानना है कि वर्तमान वैश्विक संस्थाएं, जैसे कि संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली, अब दुनिया की बदलती आर्थिक और जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती हैं, जिससे विकासशील देशों के लिए अधिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता होती है। इसलिए, R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ BRICS समूह की ‘नई दिल्ली घोषणा’ वैश्विक शासन सुधार और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने में इसकी प्रासंगिकता को कैसे दर्शाती है? चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: BRICS समूह का संक्षिप्त परिचय और नई दिल्ली घोषणा का संदर्भ।
2. नई दिल्ली घोषणा के प्रमुख बिंदु: वैश्विक शासन सुधार, स्थानीय मुद्रा व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में सुधार, संयुक्त राष्ट्र में अधिक प्रतिनिधित्व, ब्रेटन वुड्स संस्थाओं में सुधार, नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली का समर्थन।
3. बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा: उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को मजबूत करना, संवाद और कूटनीति पर जोर, पश्चिम एशिया में शांति का समर्थन।
4. BRICS की प्रासंगिकता: विकासशील देशों के हितों का प्रतिनिधित्व, वैश्विक चुनौतियों (ऊर्जा, स्वास्थ्य, जलवायु, खाद्य सुरक्षा) पर सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शासन पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।
5. चुनौतियाँ और सीमाएँ: आंतरिक तनाव और असंतुलन, सर्वसम्मति प्राप्त करने में कठिनाइयाँ (हालांकि नई दिल्ली घोषणा में सर्वसम्मति एक उपलब्धि थी)।
6. निष्कर्ष: BRICS की भूमिका का मूल्यांकन और भविष्य की संभावनाएँ।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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