14 Oct डब्लूपीआई मुद्रास्फीति सितंबर में 11.39% हुई: कारण और प्रभाव
✎ सितंबर 2026 में WPI मुद्रास्फीति 11.39 प्रतिशत (अगस्त: 9.92) रही; ईंधन एवं बिजली 25.85, विनिर्मित उत्पाद 9.76 (श्रृंखला-उच्च), खाद्य 8.66 प्रतिशत; यह लागत-जनित, आयातित दबाव (होर्मुज बाधा) है; खुदरा मुद्रास्फीति 5.54 प्रतिशत और…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था: मुद्रास्फीति, मौद्रिक नीति, राजकोषीय प्रभाव | GS Paper III — ऊर्जा सुरक्षा एवं आयात-निर्भरता | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध: पश्चिम एशिया संकट का भारत पर प्रभाव
- Prelims: थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और उसका आधार वर्ष 2011-12, आर्थिक सलाहकार का कार्यालय, DPIIT, WPI के तीन प्रमुख समूह: प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन एवं बिजली, विनिर्मित उत्पाद, मौद्रिक नीति समिति (MPC) और RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZA, रेपो दर और आधार बिंदु (bps), लागत-जनित मुद्रास्फीति (Cost-push inflation), आयातित मुद्रास्फीति (Imported inflation), होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण: 4 प्रतिशत, ±2 प्रतिशत का सहनशीलता बैंड, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955
- Essay: आपूर्ति-जनित मुद्रास्फीति के दौर में मौद्रिक नीति की सीमाएँ, वैश्विक भू-राजनीतिक संकट और भारत की आर्थिक सुरक्षा: ऊर्जा एवं उर्वरक निर्भरता की चुनौती
त्वरित पुनरावृत्ति: सितंबर 2026 में WPI मुद्रास्फीति 11.39 प्रतिशत (अगस्त: 9.92) रही; ईंधन एवं बिजली 25.85, विनिर्मित उत्पाद 9.76 (श्रृंखला-उच्च), खाद्य 8.66 प्रतिशत; यह लागत-जनित, आयातित दबाव (होर्मुज बाधा) है; खुदरा मुद्रास्फीति 5.54 प्रतिशत और MPC ने रेपो दर 25 आधार बिंदु बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत की।
यह खबर चर्चा में क्यों?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा 14 अक्टूबर 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index – WPI) पर आधारित मुद्रास्फीति (Inflation) सितंबर 2026 में बढ़कर 11.39 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 9.92 प्रतिशत थी। खाद्य सूचकांक में मुद्रास्फीति 7.05 प्रतिशत से बढ़कर 8.66 प्रतिशत, विनिर्मित उत्पादों में 8.37 प्रतिशत से बढ़कर 9.76 प्रतिशत (श्रृंखला का उच्चतम स्तर) तथा ईंधन एवं बिजली में 22.93 प्रतिशत से बढ़कर 25.85 प्रतिशत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार इस वृद्धि का मुख्य कारण पश्चिम एशिया युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी है, जिससे कच्चे तेल और उर्वरक की वैश्विक कीमतें बढ़ीं। इसी बीच खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर में 23 माह के उच्चतम स्तर 5.54 प्रतिशत पर पहुँच गई और RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने पिछले सप्ताह नीतिगत दर 25 आधार बिंदु बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दी।
पृष्ठभूमि
- WPI वस्तुओं की थोक स्तर पर कीमतों में परिवर्तन मापता है। इसे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) का आर्थिक सलाहकार कार्यालय हर माह लगभग 14 तारीख को जारी करता है। इसका वर्तमान आधार वर्ष 2011-12 है।
- समाचार के अनुसार WPI इस वित्त वर्ष की शुरुआत से ही ऊपर की ओर बढ़ रहा है। इसका कारण पश्चिम एशिया का युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा है, जिसके रास्ते भारत का अधिकांश कच्चा तेल आयात होता है।
- भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का अधिकांश भाग आयात करता है। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय कीमतों या आपूर्ति मार्ग में बाधा का असर घरेलू ईंधन, परिवहन लागत और विनिर्माण लागत पर तेज़ी से पड़ता है।
- पेट्रोलियम उत्पाद उर्वरक, रसायन, प्लास्टिक और परिवहन जैसे क्षेत्रों में आगत (Input) का काम करते हैं। इसलिए ऊर्जा और उर्वरक की कीमतों में वृद्धि खाद्य तथा विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में भी फैल जाती है। इसे द्वितीयक प्रभाव (Spillover effect) कहते हैं।
- भारत में मौद्रिक नीति का संचालन लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढाँचे के अंतर्गत होता है। इसमें खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) का लक्ष्य 4 प्रतिशत है और सहनशीलता बैंड ±2 प्रतिशत का है। यह व्यवस्था RBI अधिनियम, 1934 में 2016 के संशोधन से लागू हुई।
- सितंबर 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति 5.54 प्रतिशत रही, जो बैंड के भीतर है, पर इसमें ऊपर की ओर दबाव दिख रहा है। इसी पृष्ठभूमि में MPC ने रेपो दर बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत की।
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और थोक मुद्रास्फीति क्या है?
- WPI उत्पादकों या थोक विक्रेताओं के स्तर पर वस्तुओं की औसत कीमतों में परिवर्तन मापता है। मुद्रास्फीति दर इसी सूचकांक में वर्ष-दर-वर्ष प्रतिशत परिवर्तन से निकाली जाती है।
- WPI में तीन प्रमुख समूह हैं: प्राथमिक वस्तुएँ (खाद्य वस्तुएँ, गैर-खाद्य वस्तुएँ, खनिज, कच्चा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस), ईंधन एवं बिजली, और विनिर्मित उत्पाद। 2011-12 श्रृंखला में विनिर्मित उत्पादों का भार सबसे अधिक (लगभग 64 प्रतिशत) है।
- WPI में सेवाएँ शामिल नहीं हैं और यह खुदरा उपभोक्ता द्वारा चुकाई गई कीमत नहीं मापता। इसके विपरीत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) खुदरा कीमतें मापता है, जिसे सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) का राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) जारी करता है। CPI में खाद्य का भार अधिक है और सेवाएँ भी शामिल हैं।
- सितंबर 2026 में WPI मुद्रास्फीति (11.39 प्रतिशत) खुदरा मुद्रास्फीति (5.54 प्रतिशत) से काफ़ी ऊँची है। यह अंतर दर्शाता है कि उत्पादकों की लागत में हुई वृद्धि अभी पूरी तरह उपभोक्ता कीमतों तक नहीं पहुँची है। आगे चलकर खुदरा कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, हालाँकि यह पारेषण बाज़ार संरचना और माँग की स्थिति पर निर्भर करता है।
- यह मुख्यतः लागत-जनित मुद्रास्फीति (Cost-push inflation) का उदाहरण है, क्योंकि कारण आपूर्ति पक्ष का आघात है, माँग की अधिकता नहीं। वैश्विक कारणों से आई कीमत वृद्धि ‘आयातित मुद्रास्फीति’ भी कहलाती है।
- आपूर्ति-जनित मुद्रास्फीति में रेपो दर बढ़ाने की प्रभावशीलता सीमित होती है। यह उपाय माँग घटाकर कीमतों को ठंडा करता है, पर तेल या उर्वरक की आपूर्ति बाधा को दूर नहीं करता। इसके साथ यह मुद्रास्फीति की अपेक्षाओं को स्थिर रखने में सहायक होता है। 25 आधार बिंदु का अर्थ 0.25 प्रतिशत अंक है।
- सरकार की ओर से प्रयुक्त होने वाले उपायों में ईंधन पर उत्पाद शुल्क/कर में समायोजन, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत भंडारण सीमा, बफर स्टॉक से खाद्य वस्तुओं की बिक्री, आयात शुल्क में परिवर्तन और उर्वरक सब्सिडी शामिल हैं। इनकी राजकोषीय लागत होती है, जिससे राजकोषीय घाटे पर दबाव पड़ सकता है।
- दीर्घकालिक समाधान ऊर्जा स्रोतों और आपूर्तिकर्ता देशों का विविधीकरण, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू उर्वरक उत्पादन में वृद्धि हैं, ताकि बाह्य आघातों के प्रति संवेदनशीलता घटे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) · आपूर्ति-जनित (लागत-जनित) मुद्रास्फीति · उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) · लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण · मौद्रिक नीति समिति और रेपो दर · पारगमन प्रभाव (Pass-through) · द्वितीयक प्रभाव और मुद्रास्फीतिजन्य अपेक्षाएँ · होर्मुज जलडमरूमध्य और ऊर्जा सुरक्षा · राजकोषीय–मौद्रिक समन्वय · उर्वरक सब्सिडी और खाद्य मूल्य · आयातित मुद्रास्फीति · कोर मुद्रास्फीति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. WPI का संकलन और प्रकाशन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) का आर्थिक सलाहकार कार्यालय करता है।
2. WPI में वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं की कीमतें भी शामिल की जाती हैं।
3. WPI की टोकरी में विनिर्मित उत्पादों का भारांश सबसे अधिक है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: WPI का संकलन DPIIT के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा किया जाता है। कथन 2 गलत है: WPI केवल वस्तुओं की कीमतें मापता है, सेवाएँ इसमें शामिल नहीं हैं। कथन 3 सही है: आधार वर्ष 2011-12 की श्रृंखला में विनिर्मित उत्पादों का भारांश लगभग 64% है, जो प्राथमिक वस्तुओं और ईंधन एवं विद्युत से अधिक है।
Q2. अभिकथन (A): भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति रेपो दर संबंधी निर्णयों में मुख्यतः WPI के बजाय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की मुद्रास्फीति को आधार बनाती है।
कारण (R): RBI अधिनियम, 1934 के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित मुद्रास्फीति लक्ष्य (4% ±2%) CPI-आधारित है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सही है, किंतु R गलत है
- A गलत है, किंतु R सही है
उत्तर: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है — लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढाँचे में लक्ष्य CPI (संयुक्त) पर आधारित है, जो आम उपभोक्ता द्वारा वहन की गई कीमतों को दर्शाता है। इसी कारण मौद्रिक नीति समिति के निर्णयों का मुख्य आधार CPI है। WPI एक महत्त्वपूर्ण संकेतक अवश्य है, पर वह नीतिगत लक्ष्य नहीं है।
Q3. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) किन दो जलक्षेत्रों को जोड़ता है?
- लाल सागर और अदन की खाड़ी
- फ़ारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी
- भूमध्य सागर और लाल सागर
- काला सागर और भूमध्य सागर
उत्तर: फ़ारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी — होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान (मुसंदम प्रायद्वीप) के बीच स्थित है और फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। खाड़ी देशों के कच्चे तेल और LNG का बड़ा भाग इसी मार्ग से गुजरता है। लाल सागर–अदन की खाड़ी को बाब-अल-मंदेब जोड़ता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सितंबर 2026 में WPI मुद्रास्फीति 11.39% तथा CPI मुद्रास्फीति 5.54% दर्ज की गई। WPI और CPI के बीच इस अंतर के कारणों की व्याख्या कीजिए। साथ ही, यह भी परखिए कि पश्चिम एशिया संकट से उपजी आपूर्ति-जनित मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में केवल रेपो दर की वृद्धि कहाँ तक प्रभावी हो सकती है। (15 Marks)
रूपरेखा: भूमिका: आँकड़े दें। WPI 9.92% (अगस्त) से 11.39% (सितंबर), ईंधन एवं विद्युत 25.85%, विनिर्मित उत्पाद 9.76% (श्रृंखला का उच्चतम), खाद्य सूचकांक 8.66%; CPI 5.54% (23 माह का उच्चतम); रेपो दर 25 आधार बिंदु बढ़ाकर 5.50%।
भाग 1 – अंतर के कारण: (क) भारांश में अंतर। WPI में ईंधन एवं विद्युत का भारांश लगभग 13% और विनिर्मित उत्पादों का लगभग 64% है, जबकि CPI में खाद्य का भारांश अधिक है और सेवाएँ भी शामिल हैं (आधार वर्ष WPI 2011-12)। (ख) WPI उत्पादक/थोक स्तर की कीमतें मापता है, जबकि CPI खुदरा कीमतें। WPI में कर शामिल नहीं होते, जबकि CPI में खुदरा मार्जिन और कर सम्मिलित होते हैं। (ग) खुदरा ईंधन कीमतें प्रशासित या कर-समायोजित होने से कच्चे तेल के झटके पूरी तरह उपभोक्ता तक नहीं पहुँचते, यानी पारगमन अधूरा रहता है। (घ) लागत-वृद्धि का खुदरा कीमतों में विलंबित पारगमन; इससे CPI पर आगे दबाव संभव है।
भाग 2 – मौद्रिक नीति की प्रभावशीलता: संस्थागत ढाँचा बताएँ। RBI अधिनियम की धारा 45ZB (मौद्रिक नीति समिति: 6 सदस्य, 3 RBI के, 3 बाहरी; टकराव में गवर्नर का निर्णायक मत), धारा 45ZA (लक्ष्य 4% ±2%), धारा 45ZN (लगातार तीन तिमाही लक्ष्य-विफलता पर सरकार को रिपोर्ट), पटेल समिति (2014) की अनुशंसा।
पक्ष: द्वितीयक प्रभावों और मुद्रास्फीतिजन्य अपेक्षाओं को थामना, विश्वसनीयता, रुपये पर दबाव कम करना।
सीमाएँ: आपूर्ति-जनित झटके पर माँग-प्रबंधन उपकरण कम असर करते हैं, दरवृद्धि से निवेश और संवृद्धि की कीमत चुकानी पड़ती है; कोर मुद्रास्फीति पर नज़र रखना आवश्यक।
पूरक उपाय: राजकोषीय–मौद्रिक समन्वय, कच्चे तेल के स्रोतों का विविधीकरण, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, उत्पाद शुल्क में समायोजन, उर्वरक सब्सिडी का प्रबंधन, खाद्य बफर स्टॉक एवं खुले बाज़ार में बिक्री, आपूर्ति शृंखला सुधार, नवीकरणीय ऊर्जा एवं हरित हाइड्रोजन के माध्यम से ऊर्जा आत्मनिर्भरता।
निष्कर्ष: संतुलित, समन्वित और दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधार पर आधारित उत्तर दें।
स्रोत: orissapost.com
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