18 Oct एससीओ सरकार प्रमुखों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे राजनाथ सिंह
✎ SCO में भारत 2017 से पूर्ण सदस्य है; शासनाध्यक्ष परिषद में सामान्यतः सरकार प्रमुख (प्रधानमंत्री) स्तर की भागीदारी होती है, जबकि रक्षा मंत्री SCO की अलग रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेते हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत के हित और बहुपक्षीय संगठन, मध्य एशिया और यूरेशियाई क्षेत्र) | GS Paper II — शासन और सार्वजनिक नीति (सरकारी प्रतिनिधिमंडल और विदेश नीति के संस्थागत पक्ष)
- Prelims: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) — स्थापना वर्ष 2001, मुख्यालय बीजिंग, SCO के मूल सदस्य: चीन, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान को वर्ष 2017 में पूर्ण सदस्यता मिली, क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) का मुख्यालय ताशकंद में है, SCO की परिषदें: शासनाध्यक्ष परिषद, शासनाध्यक्ष (प्रधानमंत्री) परिषद और रक्षा मंत्रियों की बैठक अलग-अलग स्तर पर होती हैं, मध्य एशिया (Central Asia) और यूरेशिया में भारत की कनेक्टिविटी और ऊर्जा सहयोग से जुड़े प्रश्न
- Essay: बहुपक्षीय मंच और वैश्विक शासन: क्या क्षेत्रीय संगठन भारत की विदेश नीति के लिए उपयोगी साधन हैं?, मध्य एशिया और यूरेशिया में भारत की सामरिक और आर्थिक भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: SCO में भारत 2017 से पूर्ण सदस्य है; शासनाध्यक्ष परिषद में सामान्यतः सरकार प्रमुख (प्रधानमंत्री) स्तर की भागीदारी होती है, जबकि रक्षा मंत्री SCO की अलग रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के ताजिकिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की शासनाध्यक्ष परिषद (Council of Heads of Government) की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने की सूचना है। यह समाचार भारत की ओर से उच्च-स्तरीय भागीदारी और SCO के बहुपक्षीय ढांचे में भारत की निरंतर सक्रियता को दर्शाता है। स्रोत में बैठक की तिथि, एजेंडा और द्विपक्षीय बैठकों का विवरण उपलब्ध नहीं है, इसलिए परीक्षा के लिए इन्हें केवल पुष्ट तथ्यों के रूप में ही याद करें। सामान्यतः शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में सदस्य देशों के प्रधानमंत्री स्तर के नेता भाग लेते हैं, इसलिए किसी अन्य मंत्री का प्रतिनिधित्व करना प्रतिनिधिमंडल के गठन और सरकार के निर्णय से जुड़ा प्रशासनिक विषय है।
पृष्ठभूमि
- शंघाई सहयोग संगठन की शुरुआत 2001 में शंघाई में हुई। इसकी जड़ें 1996 में गठित ‘शंघाई फाइव’ व्यवस्था में हैं, जिसमें सीमा-विवादों के समाधान और विश्वास-निर्माण पर बल दिया गया था।
- SCO का मूल उद्देश्य सदस्य देशों के बीच राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना, आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मिलकर निपटना तथा क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है। इसका आधार SCO चार्टर है।
- भारत ने 2017 में अस्ताना शिखर सम्मेलन के माध्यम से पूर्ण सदस्यता प्राप्त की। इससे पहले भारत को पर्यवेक्षक की स्थिति प्राप्त थी।
- भारत का मध्य एशिया के साथ संबंध ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति और ऊर्जा, परिवहन तथा सुरक्षा सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ा है, जिसमें SCO एक प्रमुख बहुपक्षीय मंच के रूप में कार्य करता है।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) क्या है?
- SCO एक स्थायी अंतर-सरकारी बहुपक्षीय संगठन है, जो मुख्यतः यूरेशिया के भू-राजनीतिक क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देता है।
- इसके सदस्य देश हैं: चीन, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस।
- SCO के निर्णय-निर्माण के प्रमुख स्तर हैं: शासनाध्यक्ष (राज्य प्रमुख) परिषद, शासनाध्यक्ष (सरकार प्रमुख) परिषद, विदेश मंत्री परिषद और रक्षा मंत्रियों की बैठक।
- क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) सदस्य देशों के बीच आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद से निपटने के लिए सूचना-आदान-प्रदान और समन्वय का कार्य करती है।
- SCO की आधिकारिक भाषाएँ चीनी और रूसी हैं, जबकि कार्य-सामग्री में अन्य भाषाओं का प्रयोग भी होता है।
- भारत के लिए SCO मध्य एशिया तक पहुँच, ऊर्जा और परिवहन सहयोग तथा पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों के साथ बहुपक्षीय संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच है।
- SCO के सदस्य देशों की संयुक्त जनसंख्या विश्व की एक बड़ी हिस्सेदारी को समेटती है, इसलिए इसे विश्व राजनीति में एक प्रभावी मंच माना जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| घटना का स्वरूप | भारत की ओर से रक्षा मंत्री का ताजिकिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation — SCO) की शासनाध्यक्ष परिषद (Council of Heads of Government — CHG) की बैठक में प्रतिनिधित्व करना है। यह एक बहुपक्षीय कूटनीतिक भागीदारी है, न कि किसी नई नीति या योजना की घोषणा। |
| संगठन का स्वरूप | SCO एक स्थायी अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 2001 में शंघाई में हुई थी। इसके मूल सदस्य चीन, कजाकिस्तान, किर्गिज़स्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान थे। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्णकालिक सदस्य बने, जबकि ईरान 2023 में और बेलारूस 2024 में इसमें शामिल हुए। |
| शासनाध्यक्ष परिषद की भूमिका | यह SCO का सरकार-प्रमुखों का मंच है, जहाँ आर्थिक सहयोग, ऊर्जा, परिवहन, कृषि और वैज्ञानिक सहयोग जैसे विषयों पर वार्षिक समीक्षा और निर्णय होते हैं। इसके निर्णय सदस्य देशों की सहमति से लिए जाते हैं। |
| ताजिकिस्तान की अध्यक्षता | SCO की अध्यक्षता सदस्य देशों के बीच घूमती है। ताजिकिस्तान का उस समय अध्यक्ष होना, मध्य एशिया में उसकी भूमिका और इस क्षेत्र के साथ भारत के संपर्कों को दर्शाता है। |
| प्रतिनिधित्व का स्तर | किसी बैठक में भारत का प्रतिनिधि प्रधानमंत्री, किसी मंत्री या किसी अन्य उच्च अधिकारी को चुना जा सकता है। यह निर्णय एजेंडा और सरकार की प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। इसलिए प्रतिनिधि के स्तर को संस्थागत नियम न समझकर सरकार का प्रशासनिक विवेक मानना चाहिए। |
| स्रोत की सीमा | इस विज्ञप्ति में शीर्षक के अतिरिक्त बैठक के एजेंडा, प्रस्तावों या द्विपक्षीय वार्ताओं का विवरण उपलब्ध नहीं है। अतः यह विश्लेषण शीर्षक और SCO से जुड़े स्थिर (static) ज्ञान पर आधारित है। |
महत्व
कूटनीतिक एवं रणनीतिक
- मध्य एशिया भारत की ‘कनेक्टिविटी’ और ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। SCO का मंच भारत को इस क्षेत्र के देशों से सीधे संवाद का अवसर देता है।
- SCO में भारत, चीन, रूस और पाकिस्तान एक साथ सदस्य हैं। इसलिए यह मंच बहुपक्षीय सहयोग के साथ-साथ भारत की संतुलित विदेश नीति को भी व्यक्त करता है।
- आतंकवाद-रोधी सहयोग के लिए SCO की क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (Regional Anti-Terrorist Structure — RATS) है, जिसका मुख्यालय ताशकंद में है। इससे सीमा-पार आतंकवाद पर सामूहिक चिंता का मंच बनता है।
आर्थिक एवं कनेक्टिविटी
- SCO सदस्य देशों के बीच व्यापार, परिवहन गलियारों और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा का मंच है। अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (International North-South Transport Corridor — INSTC) जैसी परियोजनाओं में भारत की रुचि इसी संदर्भ में देखी जाती है।
- बहुपक्षीय मंचों पर आर्थिक सहयोग के निर्णय सदस्य देशों की घरेलू नीतियों और निवेश व्यवस्थाओं को प्रभावित करते हैं, इसलिए ऐसी बैठकों के परिणाम आर्थिक संवृद्धि की दिशा से जुड़े होते हैं।
संस्थागत एवं प्रशासनिक
- SCO जैसे बहुपक्षीय संगठन में भारत का प्रतिनिधित्व यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भागीदारी का निर्णय कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।
- रक्षा मंत्री की भागीदारी से यह संकेत मिलता है कि सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषय SCO के एजेंडा में प्रमुख हैं।
चुनौतियाँ
1. सदस्य देशों के बीच हितों का अंतर
- भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव SCO की बैठकों में सहमति-निर्माण को कठिन बना सकता है।
- चीन और रूस की प्रभावी भूमिका के कारण मंच पर शक्ति-संतुलन की जटिलता बनी रहती है।
- सभी सदस्यों की प्राथमिकताएँ अलग हैं, इसलिए साझा घोषणाओं में व्यापक ठोस परिणाम कम आते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत के हित और बहुपक्षीय संस्थाएँ
2. संस्था की निर्णय-क्षमता की सीमा
- SCO सहमति-आधारित संगठन है, इसलिए इसके निर्णय बाध्यकारी नहीं होते और क्रियान्वयन सदस्य देशों की इच्छा पर निर्भर करता है।
- बजट, सचिवालय की क्षमता और सदस्यों के योगदान से जुड़ी सीमाएँ इसकी गतिविधियों को प्रभावित करती हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: अंतरराष्ट्रीय संगठन और उनकी भूमिका
3. मध्य एशिया में भारत की सीमित भौगोलिक पहुँच
- भारत और मध्य एशिया के बीच सीधा भूभागीय संपर्क सीमित है। इसी कारण परिवहन गलियारों के लिए तीसरे देशों के मार्गों पर निर्भरता रहती है।
- अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति और क्षेत्रीय अस्थिरता भी इस क्षेत्र में संपर्क-परियोजनाओं की गति को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत के पड़ोस और क्षेत्रीय संबंध
4. आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा की चुनौती
- सीमा-पार आतंकवाद, उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं।
- सदस्य देशों की आतंकवाद की परिभाषा और प्राथमिकताओं में अंतर सामूहिक कार्रवाई को कठिन बना सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा और सीमा-पार आतंकवाद
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सहमति-आधारित निर्णय | सर्वसम्मति की शर्त के कारण महत्त्वपूर्ण निर्णय धीमे पड़ सकते हैं और घोषणाएँ सामान्य हो सकती हैं। |
| भारत-पाकिस्तान संबंध | द्विपक्षीय तनाव बहुपक्षीय मंच की कार्यक्षमता और साझा एजेंडा को प्रभावित कर सकता है। |
| मध्य एशिया तक सीमित पहुँच | भूभागीय संपर्क के अभाव में परिवहन और व्यापार के लिए तीसरे देशों के मार्गों पर निर्भरता रहती है। |
| क्षेत्रीय आतंकवाद | सीमा-पार आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध साझा कार्रवाई में मतभेद की संभावना है। |
| सचिवालय और संसाधन | SCO के सचिवालय और क्षेत्रीय संरचनाओं की सीमित संस्थागत क्षमता इसके कार्यक्रमों के क्रियान्वयन को सीमित कर सकती है। |
आगे की राह
- SCO की बैठकों में भारत अपने प्रस्तावों को ठोस परियोजनाओं और समय-सीमा के साथ रखे, ताकि घोषणाएँ क्रियान्वयन में बदल सकें।
- आतंकवाद-रोधी सहयोग को RATS के माध्यम से सूचना-साझाकरण और क्षमता-निर्माण तक सीमित रखकर व्यावहारिक बनाया जाए।
- अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और मध्य एशिया के साथ व्यापार मार्गों पर सदस्य देशों के बीच तकनीकी और वित्तीय सहयोग बढ़ाया जाए।
- ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल संपर्क और कृषि जैसे गैर-राजनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता दी जाए, जहाँ सहमति बनाना अपेक्षाकृत सरल है।
- SCO सचिवालय और संबंधित संस्थाओं की कार्य-प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हो, ताकि सदस्य देशों का विश्वास मजबूत हो।
- अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया की स्थिरता पर क्षेत्रीय संवाद जारी रखा जाए, ताकि सीमा-पार जोखिम कम हो।
- भारत अपनी विदेश नीति के व्यापक ढाँचे में SCO को बहुपक्षीय मंच के रूप में देखे, जिसका उपयोग द्विपक्षीय संवाद के पूरक के रूप में किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation) · सरकार प्रमुखों की परिषद (Council of Heads of Government) · क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (Regional Anti-Terrorism Structure) · बहुपक्षीय कूटनीति (Multilateral Diplomacy) · रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) · संघ सूची (Union List) · संधि-निर्माण (Treaty-making) · अनुच्छेद 73 (Article 73) · अनुच्छेद 253 (Article 253) · अनुच्छेद 51 (Article 51) · क्षेत्रीय सुरक्षा और संपर्क (Regional Security and Connectivity) · विदेश नीति में कार्यपालिका की भूमिका (Executive Role in Foreign Policy)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 10: विदेशी देशों के साथ संबंध
अवधारणा प्रवाह
भारत SCO का पूर्णकालिक सदस्य है और मध्य एशिया में उसके हित जुड़े हैं। → शासनाध्यक्ष परिषद की वार्षिक बैठक में सदस्य देश आर्थिक, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और सुरक्षा विषयों पर चर्चा करते हैं। → भारत की ओर से उच्च-स्तरीय प्रतिनिधित्व द्वारा अपनी प्राथमिकताएँ और चिंताएँ रखी जाती हैं। → सहमति के आधार पर साझा घोषणाएँ और परियोजना-प्रस्ताव तय होते हैं। → इन निर्णयों का क्रियान्वयन SCO की संस्थाओं और सदस्य देशों की घरेलू नीतियों के माध्यम से होता है। → क्रियान्वयन से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापार और सुरक्षा-सहयोग में क्रमिक सुधार की संभावना बनती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. शंघाई सहयोग संगठन के संस्थापक सदस्यों में ताजिकिस्तान भी शामिल था।
2. शंघाई सहयोग संगठन का सचिवालय बीजिंग में स्थित है।
3. इस संगठन की क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना का मुख्यालय बिश्केक (किर्गिस्तान) में है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: 2001 में शंघाई में चीन, कज़ाखस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज़बेकिस्तान ने संगठन की स्थापना की थी। कथन 2 भी सही है, क्योंकि सचिवालय बीजिंग में है। कथन 3 गलत है, क्योंकि क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) का मुख्यालय ताशकंद (उज़बेकिस्तान) में है, न कि बिश्केक में। अतः सही कथन दो हैं।
Q2. प्रकथन (A) : भारत की ओर से शंघाई सहयोग संगठन की सरकार प्रमुखों की परिषद की बैठक में किसे प्रतिनिधित्व देना है, यह निर्णय संघ की कार्यपालिका द्वारा लिया जाता है।
कारण (R) : विदेश कार्य संघ सूची का विषय है और संविधान के अनुच्छेद 73 के अंतर्गत संघ की कार्यपालिका शक्ति उन विषयों तक विस्तृत है, जिन पर संसद को विधि बनाने की शक्ति है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :
- (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सत्य हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सत्य है, किंतु (R) असत्य है।
- (A) असत्य है, किंतु (R) सत्य है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — विदेश कार्य संघ सूची की प्रविष्टि 10 में आता है, और संधियाँ तथा समझौते करना प्रविष्टि 14 में। अनुच्छेद 73 संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार बताता है, जिससे विदेश नीति के निर्णय, जैसे किसी बहुपक्षीय बैठक में प्रतिनिधित्व, कार्यपालिका के अधीन आते हैं। अतः (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राज्य को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास करने का निर्देश देता है?
- अनुच्छेद 41
- अनुच्छेद 51
- अनुच्छेद 73
- अनुच्छेद 253
उत्तर: अनुच्छेद 51 — अनुच्छेद 51 राज्य नीति के निदेशक तत्वों (भाग IV) में आता है और अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के संवर्धन, राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण व सम्मानजनक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय विधि व संधि-बाध्यताओं के सम्मान का निर्देश देता है। अनुच्छेद 41 लोक सहायता के अधिकार से संबंधित है, अनुच्छेद 73 संघ की कार्यपालिका शक्ति से और अनुच्छेद 253 संधियों के कार्यान्वयन हेतु संसद की विधायी शक्ति से संबंधित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की विदेश नीति में बहुपक्षीय मंचों की भागीदारी को अब संरचनात्मक महत्व मिला है। शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व विभिन्न स्तरों के मंत्रियों द्वारा किया जाता रहा है। इस व्यवस्था के संवैधानिक और संस्थागत आधार का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या ऐसे प्रतिनिधित्व से भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं की प्रकृति पर कोई भिन्न प्रभाव पड़ता है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना : (1) संवैधानिक आधार : अनुच्छेद 73 के अंतर्गत संघ की कार्यपालिका शक्ति; संघ सूची की प्रविष्टि 10 (विदेश कार्य) और प्रविष्टि 14 (संधियाँ और समझौते करना); अनुच्छेद 51 (अंतरराष्ट्रीय शांति, संधि-बाध्यताओं का सम्मान) जो नीति-निदेशक के रूप में मार्गदर्शन देता है। (2) न्यायिक दृष्टिकोण : मगनभाई ईश्वरभाई पटेल बनाम भारत संघ (1970) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि संधि करना कार्यपालिका की शक्ति है, किंतु संधि के घरेलू कानून में परिवर्तन के लिए अनुच्छेद 253 के अंतर्गत संसद की विधायी शक्ति आवश्यक है; इसी से कार्यपालिका और विधायिका के संबंध की सीमा स्पष्ट होती है। (3) संस्थागत ढाँचा : विदेश मंत्रालय की भूमिका, विभिन्न मंत्रालयों के मंत्रियों का बहुपक्षीय बैठकों में प्रतिनिधित्व, तथा सरकार प्रमुखों की परिषद जैसी बैठकों में भागीदारी का व्यावहारिक स्वरूप। (4) SCO का संदर्भ : 2001 में शंघाई में स्थापना; 2002 का चार्टर; ‘शंघाई भावना’ (Shanghai Spirit); आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के विरुद्ध सहयोग; क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (ताशकंद); भारत की सदस्यता 2017 में पूर्ण सदस्य के रूप में; ईरान का 2023 में सदस्य बनना; संपर्क (connectivity) और ऊर्जा सहयोग जैसे आयाम। (5) संतुलित दृष्टिकोण : समर्थन में तर्क – रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy), क्षेत्रीय सुरक्षा और संपर्क के हित, बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था में भारत की भूमिका; आलोचना/सावधानी – सदस्य देशों के आंतरिक मतभेद, सर्वसम्मति-आधारित निर्णय की सीमाएँ, तथा द्विपक्षीय प्राथमिकताओं का बहुपक्षीय मंच पर प्रभाव। (6) दूसरा भाग : प्रतिनिधि-स्तर (मंत्री या शासनाध्यक्ष) से बैठक का राजनयिक संकेत बदलता है, पर संधि-बाध्यता तभी बनती है जब औपचारिक संधि या समझौता हो; केवल बहुपक्षीय घोषणा-पत्र सामान्यतः विधिक रूप से बाध्यकारी नहीं होते, इस अंतर को स्पष्ट करना अपेक्षित है। (7) निष्कर्ष : कार्यपालिका की लचीली भूमिका और संसदीय नियंत्रण के बीच संतुलन, तथा राष्ट्रीय हित और बहुपक्षीय प्रतिबद्धता के समन्वय पर विचार।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- India-Australia AUSTRAHIND 2026 Exercise: Key Highlights for UPSC & State PCS - October 22, 2026
- एससीओ बैठक में भारत का आतंकवाद विरोध: क्षेत्रीय सहयोग पर जोर - October 22, 2026
- SEC Directs Strict SC Order Compliance for Andhra ULB Polls - October 22, 2026

No Comments