एससीओ सरकार प्रमुखों की बैठक: रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म करने का आह्वान किया

एससीओ सरकार प्रमुखों की बैठक: रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म करने का आह्वान किया

एससीओ सरकार प्रमुखों की बैठक: रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म करने का आह्वान किया

आतंकवाद-रोधी सहयोग प्रक्रियाआतंकवाद पारिस्थितिकी तवित्त, भर्ती, विचारधाराSCO स्थापना2001, मध्य एशियाRATS स्थापना2001, सहयोग ढाँचासर्वसम्मति निर्माणसदस्य देशों मेंसमन्वित कार्रवाईवित्तीय, सीमा, डिजिटलदीर्घकालिक प्रभावविधि, विकास
आतंकवाद-रोधी सहयोग प्रक्रिया

✎ शंघाई सहयोग संगठन में आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग का कानूनी आधार 2001 का शंघाई कन्वेंशन है और इसका क्रियान्वयन तंत्र क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS), ताशकंद है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (क्षेत्रीय संगठन और भारत की भूमिका)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — आंतरिक सुरक्षा (आतंकवाद और उसका मुकाबला)
  • Prelims: शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation – SCO) — स्थापना वर्ष 2001, सचिवालय बीजिंग में, क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (Regional Anti-Terrorist Structure – RATS) — मुख्यालय ताशकंद (उज़्बेकिस्तान), आतंकवाद, पृथकतावाद और उग्रवाद के विरुद्ध शंघाई कन्वेंशन, 2001, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1373 (2001) — आतंकवाद के वित्तपोषण की रोकथाम से संबंधित बाध्यकारी दायित्व, संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति, 2006, गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (Unlawful Activities (Prevention) Act – UAPA), प्रस्तावित व्यापक अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी कन्वेंशन (Comprehensive Convention on International Terrorism – CCIT), शंघाई सहयोग संगठन में भारत और पाकिस्तान की पूर्ण सदस्यता (2017), ईरान (2023) और बेलारूस (2024) की पूर्ण सदस्यता
  • Essay: आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक सुरक्षा बनाम राष्ट्रीय संप्रभुता: क्षेत्रीय सहयोग की सीमाएँ और संभावनाएँ, आतंकवाद का वित्तपोषण, विचारधारा और सीमा-पार नेटवर्क: समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता

त्वरित पुनरावृत्ति: शंघाई सहयोग संगठन में आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग का कानूनी आधार 2001 का शंघाई कन्वेंशन है और इसका क्रियान्वयन तंत्र क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS), ताशकंद है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

आतंकवादी पारिस्थितिकी तंत्र से आशय उस समग्र व्यवस्था से है जिसमें आतंकी संगठनों का वित्तपोषण, भर्ती और प्रशिक्षण, विचारधारा का प्रसार, हथियारों की आपूर्ति, सुरक्षित पनाहगाह और सीमा-पार आवाजाही शामिल होती है।

पृष्ठभूमि

  • शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में हुई थी। इसकी पृष्ठभूमि में मध्य एशिया में सीमा-विवादों के समाधान और सीमा-क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग का अनुभव था। इसी क्रम में आतंकवाद-रोधी सहयोग इसका केंद्रीय विषय बना।
  • 2001 के शंघाई कन्वेंशन में आतंकवाद, पृथकतावाद और उग्रवाद को एक साथ परिभाषित कर उनके विरुद्ध सहयोग का ढाँचा तय किया गया। इसी के आधार पर क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) की स्थापना हुई।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1373 (2001) के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों के विरुद्ध ठोस उपायों की माँग तेज़ हुई। क्षेत्रीय संगठनों के आतंकवाद-रोधी प्रयास इसी वैश्विक ढाँचे के पूरक माने जाते हैं।
  • शंघाई सहयोग संगठन का विस्तार हुआ है और इसमें भारत तथा पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने। सदस्यता के विस्तार से सामूहिक सुरक्षा के दायरे और उसकी चुनौतियाँ, दोनों बढ़ी हैं।
  • भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध व्यापक अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन (CCIT) के प्रस्ताव पर लंबे समय से बल दिया है, ताकि आतंकवाद की स्पष्ट परिभाषा और उसके सभी रूपों के विरुद्ध एक साझा कानूनी ढाँचा बन सके।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) क्या है?

  • शंघाई सहयोग संगठन एक स्थायी अंतरसरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 2001 में शंघाई में हुई थी। इसके संस्थापक सदस्य चीन, रूस, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान थे।
  • भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने, जबकि ईरान 2023 और बेलारूस 2024 में पूर्ण सदस्य बने। संगठन का सचिवालय बीजिंग में है।
  • सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय राज्य प्रमुखों की परिषद है। शासनाध्यक्षों की परिषद (Council of Heads of Government) सरकारों के प्रमुखों की वार्षिक बैठक है, जो आर्थिक और व्यापारिक सहयोग के साथ-साथ व्यापक सहयोग के एजेंडे की समीक्षा करती है।
  • सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक भी होती है, जिसमें सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग के विषय उठते हैं।
  • क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) ताशकंद में स्थित है और यह खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण तथा समन्वय के लिए काम करती है।
  • संगठन के निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं, इसलिए सदस्य देशों के बीच राजनीतिक सहमति इसकी कार्यक्षमता की मुख्य कसौटी है।
  • आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग का दायरा केवल सैन्य या खुफिया स्तर तक सीमित नहीं है। वित्तीय निगरानी, सीमा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और कट्टरपंथ-रोधी उपाय भी इसमें आते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मंच शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation – SCO) की शासनाध्यक्ष स्तर की परिषद की सरकार प्रमुखों की बैठक (Council of Heads of Government) में यह संदेश दिया गया, जो सदस्य देशों के सरकार प्रमुखों के बीच नीतिगत समन्वय का प्रमुख मंच है।
मुख्य संदेश आतंकवाद से निपटने के लिए केवल आतंकी हमलों पर प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं है। आतंकवाद के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem), जिसमें वित्तपोषण, भर्ती, प्रशिक्षण और वैचारिक प्रचार शामिल हैं, को लक्ष्य बनाना होगा।
संस्थागत आधार आतंकवाद-विरोधी सहयोग के लिए SCO में क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (Regional Anti-Terrorist Structure – RATS) कार्यरत है, जिसका मुख्यालय ताशकंद में है। यह सूचना-आदान-प्रदान और समन्वय का ढांचा है।
कानूनी आधार SCO का आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के विरुद्ध क्षेत्रीय सम्मेलन (2001) सदस्य देशों के सहयोग का मूल दस्तावेज़ है। इसका उद्देश्य सीमा-पार आतंकवाद और उसके संगठनात्मक ढांचे पर अंकुश लगाना है।
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ यह संदेश संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति (United Nations Global Counter-Terrorism Strategy) की भावना के अनुरूप है, जो आतंकवाद के विरुद्ध बहुपक्षीय और समन्वित दृष्टिकोण पर बल देती है।

महत्व

सुरक्षा और रणनीतिक महत्व

  • क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सदस्य देशों के बीच सूचना साझा करना, आतंकी नेटवर्क की पहचान और सीमा प्रबंधन में समन्वय आवश्यक है।
  • आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र को लक्ष्य बनाने का आह्वान नीति-स्तर पर ‘केवल आतंकी व्यक्तियों’ से आगे बढ़कर वित्त और विचारधारा के स्रोतों पर केंद्रित दृष्टिकोण की ओर संकेत करता है।
  • मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के बीच की सुरक्षा-संवेदनशील भौगोलिक पट्टी में सामूहिक प्रतिक्रिया क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

कूटनीतिक महत्व

  • बहुपक्षीय मंच पर आतंकवाद के विरुद्ध साझा भाषा विकसित करना वैश्विक सहमति निर्माण की दिशा में योगदान देता है।
  • SCO जैसे मंचों पर आतंकवाद-विरोधी प्रस्ताव सदस्य देशों की संप्रभुता और सहमति के आधार पर ही आगे बढ़ते हैं, इसलिए सर्वसम्मति की प्रक्रिया का महत्व बढ़ जाता है।

नीतिगत और शासन संबंधी महत्व

  • आतंकवाद-वित्तपोषण पर नियंत्रण के लिए वित्तीय खुफिया इकाइयों और धन-शोधन निवारण ढांचे के बीच अंतर्राष्ट्रीय समन्वय आवश्यक है।
  • कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार पर रोक के लिए डिजिटल मंचों की निगरानी और विधिक ढांचे में सुधार की आवश्यकता रेखांकित होती है।

चुनौतियाँ

1. सीमा-पार आतंकवाद और संप्रभुता का प्रश्न

  • सीमा-पार गतिविधियों से निपटने में सदस्य देशों के बीच राजनीतिक विश्वास की कमी सहयोग की गति को सीमित करती है।
  • किसी देश की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के बीच संतुलन बनाना एक जटिल चुनौती है।

2. आतंकवाद के वित्तपोषण का जटिल जाल

  • हवाला, अवैध व्यापार और क्रिप्टो परिसंपत्तियों के माध्यम से धन के प्रवाह को पहचानना कठिन होता है।
  • धन-शोधन निवारण और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (Financial Action Task Force – FATF) के मानदंडों का सदस्य देशों द्वारा असमान अनुपालन समन्वय में बाधा है।

3. कट्टरपंथ और डिजिटल प्रचार

  • इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं का कट्टरपंथीकरण तेज़ी से हो रहा है।
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल निगरानी के बीच संतुलन बनाना नीतिगत चुनौती है।

4. क्षेत्रीय असमानता और सामाजिक कारण

  • बेरोज़गारी, शिक्षा की कमी और सीमांत क्षेत्रों में अवसरों का अभाव आतंकी भर्ती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाते हैं।
  • केवल सुरक्षा-केंद्रित उपाय दीर्घकालिक समाधान नहीं दे पाते, इसलिए विकास और सुरक्षा के बीच समन्वय आवश्यक है।

5. सदस्य देशों के बीच हितों में अंतर

  • सदस्य देशों की भू-राजनीतिक प्राथमिकताएँ और सुरक्षा-चिंताएँ भिन्न हैं, जिससे साझा कार्ययोजना पर सहमति कठिन होती है।
  • सर्वसम्मति पर आधारित निर्णय प्रक्रिया में निर्णय धीमे हो सकते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सीमा-पार आतंकवाद सीमा-पार नेटवर्क की पहचान, प्रत्यर्पण और कानूनी कार्रवाई में अंतर-देशीय समन्वय की कमी।
आतंकवाद का वित्तपोषण अवैध वित्तीय प्रवाह और गैर-औपचारिक धन-हस्तांतरण प्रणालियों पर सीमित नियंत्रण।
डिजिटल कट्टरपंथ ऑनलाइन प्रचार और भर्ती के लिए एन्क्रिप्टेड मंचों का उपयोग, जिससे निगरानी कठिन होती है।
सर्वसम्मति की बाध्यता सदस्य देशों के बीच मतभेद के कारण ठोस कार्ययोजना के क्रियान्वयन में विलंब।
मानवाधिकार और विधि का शासन आतंकवाद-रोधी कार्रवाई में मानवाधिकार मानदंडों के अनुपालन का प्रश्न।

आगे की राह

  • आतंकवाद-वित्तपोषण की पहचान के लिए सदस्य देशों की वित्तीय खुफिया इकाइयों के बीच रियल-टाइम सूचना-आदान-प्रदान की व्यवस्था सुदृढ़ की जाए।
  • क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) की भूमिका को डेटा-साझाकरण और क्षमता-निर्माण के माध्यम से और प्रभावी बनाया जाए।
  • धन-शोधन निवारण और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) के मानदंडों के अनुपालन को सदस्य देशों में समान रूप से लागू करने पर बल दिया जाए।
  • ऑनलाइन कट्टरपंथ से निपटने के लिए डिजिटल मंचों के साथ पारदर्शी समन्वय और उपयोगकर्ता-जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।
  • सीमा-पार अपराध और आतंकवाद पर संयुक्त प्रशिक्षण और अनुभव-साझाकरण कार्यक्रम बढ़ाए जाएँ।
  • कट्टरपंथ की रोकथाम के लिए सीमांत क्षेत्रों में शिक्षा, रोज़गार और सामुदायिक सहभागिता के कार्यक्रम सुनिश्चित किए जाएँ।
  • आतंकवाद-रोधी कार्रवाई में मानवाधिकार और विधि के शासन के मानदंडों को नीति-निर्माण का अभिन्न अंग बनाया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation – SCO) · सीमापार आतंकवाद (Cross-border Terrorism) · आतंकवाद का पारिस्थितिकी तंत्र (Terrorism Ecosystem) · क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (Regional Anti-Terrorist Structure – RATS) · आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक (Counter-Terrorism Financing) · संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 1373 (UNSC Resolution 1373) · वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति (UN Global Counter-Terrorism Strategy) · शंघाई आतंकवाद, पृथकतावाद और उग्रवाद-रोधी कन्वेंशन (Shanghai Convention on Combating Terrorism, Separatism and Extremism) · गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 – UAPA) · राष्ट्रीय जाँच एजेंसी अधिनियम, 2008 (National Investigation Agency Act, 2008) · संप्रभुता बनाम बहुपक्षीय सहयोग (Sovereignty vs Multilateral Cooperation) · सहकारी सुरक्षा (Cooperative Security)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना।
  • अनुच्छेद 253: अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों के क्रियान्वयन हेतु संसद की विधायी शक्ति।

अवधारणा प्रवाह

सीमा-पार आतंकवाद और उसके संगठनात्मक ढांचे से उत्पन्न क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौती।  →  SCO के सदस्य देशों द्वारा आतंकवाद-विरोधी सहयोग पर सहमति और क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) का उपयोग।  →  आतंकवाद के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र, विशेषकर वित्तपोषण, भर्ती और वैचारिक प्रचार, को लक्ष्य बनाने का सामूहिक निर्णय।  →  वित्तीय खुफिया, सीमा-प्रबंधन और डिजिटल निगरानी के माध्यम से राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई।  →  आतंकवाद-रोधी उपायों के दीर्घकालिक प्रभाव हेतु सामाजिक-आर्थिक विकास और विधि के शासन के साथ संतुलन।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना वर्ष 2001 में शंघाई में हुई थी।
2. क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) का मुख्यालय ताशकंद में स्थित है।
3. ईरान वर्ष 2001 में शंघाई सहयोग संगठन का पूर्ण सदस्य बन गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: SCO की स्थापना 2001 में शंघाई में हुई थी। कथन 2 सही है: RATS का मुख्यालय ताशकंद (उज़्बेकिस्तान) में है और यह 2001 के आतंकवाद-रोधी ढाँचे से जुड़ा है। कथन 3 गलत है: ईरान 2023 में पूर्ण सदस्य बना, 2001 में नहीं; भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने थे।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन संविधान के अनुच्छेद 253 के संदर्भ में सही है?
अभिकथन (A): भारतीय संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों को प्रभावी बनाने के लिए राज्य सूची के विषयों पर भी विधि बनाने की शक्ति प्राप्त है।
कारण (R): अनुच्छेद 253 संसद को भारत के पूरे क्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए ऐसी विधि बनाने की शक्ति देता है जो किसी अंतरराष्ट्रीय संधि या समझौते को लागू करने के लिए आवश्यक हो।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों को प्रभावी बनाने के लिए विधि बनाने की विशेष शक्ति देता है, भले ही विषय राज्य सूची में हो। इसी कारण अभिकथन और कारण दोनों सही हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

Q3. निम्नलिखित स्तंभों का सही मिलान कीजिए:
स्तंभ I: A. गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) B. राष्ट्रीय जाँच एजेंसी अधिनियम C. क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS)
स्तंभ II: 1. वर्ष 1967 2. वर्ष 2008 3. ताशकंद में मुख्यालय
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:

  1. A-1, B-2, C-3
  2. A-2, B-1, C-3
  3. A-1, B-3, C-2
  4. A-3, B-2, C-1

उत्तर: A-1, B-2, C-3 — UAPA मूल रूप से 1967 में अधिनियमित हुआ था। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी अधिनियम 2008 में पारित हुआ, जिसके बाद NIA का गठन हुआ। RATS का मुख्यालय ताशकंद में है, जो SCO की आतंकवाद-रोधी संरचना के रूप में कार्य करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ आतंकवाद को उसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र, जिसमें वित्तपोषण, भर्ती, सुरक्षित ठिकाने और वैचारिक समर्थन शामिल हैं, के स्तर पर समाप्त करने के लिए बहुपक्षीय सहयोग अनिवार्य माना जाता है। शंघाई सहयोग संगठन जैसे क्षेत्रीय मंचों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि राष्ट्रों की संप्रभुता की चिंताएँ ऐसे सहयोग की प्रभावशीलता को किस प्रकार सीमित करती हैं और इन सीमाओं को दूर करने के लिए कौन-से व्यावहारिक उपाय संभव हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: 1) परिचय: आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र की अवधारणा, अर्थात वित्तपोषण, हथियार और रसद आपूर्ति, भर्ती, सुरक्षित ठिकाने, वैचारिक प्रचार और सीमापार गतिविधियों की परस्पर निर्भरता। 2) सहयोग का संस्थागत ढाँचा: SCO की स्थापना 2001 में शंघाई में; शंघाई आतंकवाद, पृथकतावाद और उग्रवाद-रोधी कन्वेंशन (2001); RATS (ताशकंद) द्वारा खुफिया सूचना साझाकरण और समन्वय; SCO चार्टर (2002)। 3) वैश्विक ढाँचा: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 1373 (2001) जो अध्याय VII के अंतर्गत बाध्यकारी है; वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति (2006); FATF की भूमिका वित्तीय प्रवाह रोकने में; संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तावित व्यापक अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी कन्वेंशन (CCIT) का अब तक अपनाया न जाना, जिसका एक कारण ‘आतंकवाद’ की सर्वमान्य परिभाषा पर मतभेद है। 4) भारत के घरेलू ढाँचे का संदर्भ: UAPA, 1967 (2019 के संशोधन सहित व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान); NIA अधिनियम, 2008; अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने हेतु संविधान का अनुच्छेद 253 और संघ सूची की प्रविष्टि 14। 5) समालोचना: सहयोग की सीमाएँ, जैसे संप्रभुता और अनुच्छेद 51 में निहित अंतरराष्ट्रीय विधि के प्रति सम्मान का सिद्धांत; सदस्य देशों के बीच विश्वास की कमी; ‘आतंकवाद’ की परिभाषा और ‘स्वतंत्रता सेनानी बनाम आतंकवादी’ जैसे विवाद; खुफिया सूचना के साझाकरण में गोपनीयता की समस्या; दोहरे मानदंडों की शिकायत। 6) संतुलित दृष्टिकोण: कार्यात्मक सहयोग (सूचना साझाकरण, प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास) बनाम राजनीतिक सहमति की कठिनाई; सहकारी सुरक्षा (Cooperative Security) का तर्क। 7) निष्कर्ष व सुझाव: सूचना-आधारित समन्वय को सुदृढ़ करना, वित्तीय निगरानी को FATF मानकों से जोड़ना, CCIT पर वार्ता पुनर्जीवित करना और विधिक संप्रभुता के भीतर कार्य करने वाला व्यावहारिक सहयोग विकसित करना।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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