अत्यंत तीव्र एल नीनो: कमजोर समुदायों की रक्षा हेतु तत्काल सहायता की पुकार

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अत्यंत तीव्र एल नीनो: कमजोर समुदायों की रक्षा हेतु तत्काल सहायता की पुकार

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अल नीनो प्रभाव चक्र

✎ अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य-पूर्वी भाग में समुद्री सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की प्राकृतिक घटना है, जो दक्षिणी दोलन से जुड़कर ENSO बनाती है; WMO सामान्य से 0.5℃ के विचलन पर इसे अल नीनो अलर्ट के रूप में घोषित करता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — पर्यावरण, आपदा प्रबंधन एवं जलवायु परिवर्तन  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — अंतरराष्ट्रीय संगठन एवं मानवीय सहायता
  • Prelims: अल नीनो (El Niño) और ला नीना (La Niña) में अंतर, ENSO (El Niño-Southern Oscillation) — वायुमंडल और महासागर की संयुक्त प्रणाली, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) — संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी, मुख्यालय जिनेवा, केंद्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष (CERF) — वर्ष 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्थापित, संयुक्त राष्ट्र मानवीय कार्य समन्वय कार्यालय (OCHA) की भूमिका, वॉकर परिसंचरण (Walker Circulation) और व्यापारिक पवनें (Trade Winds), दक्षिणी दोलन (Southern Oscillation) — दाब प्रवणता में परिवर्तन, भारतीय मानसून पर अल नीनो का सामान्य प्रभाव
  • Essay: जलवायु परिवर्तन के दौर में प्राकृतिक घटनाएँ कैसे मानवीय संकट में बदलती हैं: पूर्व चेतावनी से जीवन-रक्षा तक, विज्ञान, पूर्वानुमान और वित्तीय तैयारी — आपदा-पूर्व कार्रवाई (anticipatory action) की आवश्यकता

त्वरित पुनरावृत्ति: अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य-पूर्वी भाग में समुद्री सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की प्राकृतिक घटना है, जो दक्षिणी दोलन से जुड़कर ENSO बनाती है; WMO सामान्य से 0.5℃ के विचलन पर इसे अल नीनो अलर्ट के रूप में घोषित करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि चालू अल नीनो घटना अपनी तीव्रता में अभूतपूर्व हो सकती है। WMO के नवीनतम वैश्विक मौसमी जलवायु अद्यतन के अनुसार, नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतही तापमान में सामान्य से 3.8℃ तक की वृद्धि हो सकती है। WMO के अनुसार सामान्य से 0.5℃ का विचलन ही अल नीनो अलर्ट के लिए पर्याप्त है, इसलिए यह अनुमान पिछले अनुभवों की सीमा से कहीं आगे है। संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन राहत प्रमुख ने इसे ऐसे तूफ़ान के रूप में वर्णित किया है जो लैटिन अमेरिका, पूर्वी और दक्षिणी अफ़्रीका, एशिया और प्रशांत क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी, सूखा और बाढ़ ला सकता है। अनुमान है कि लगभग 5 करोड़ लोगों की भूख बढ़ सकती है। इसके जवाब में केंद्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष (CERF) से 11 देशों के लिए 5 करोड़ डॉलर से अधिक जारी किए गए हैं।

पृष्ठभूमि

  • अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भाग में समुद्री सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की प्राकृतिक घटना है। यह दक्षिणी दोलन के वायुमंडलीय पक्ष से जुड़कर ENSO चक्र बनाती है, जिसके दो चरण अल नीनो और ला नीना होते हैं।
  • WMO विश्व स्तर पर मौसमी पूर्वानुमान और जलवायु निगरानी का समन्वय करता है। इसके सदस्य देश अपने राष्ट्रीय मौसम विभागों के माध्यम से आँकड़े साझा करते हैं।
  • पिछली शक्तिशाली अल नीनो घटनाएँ, जैसे वर्ष 1997-98 और 2015-16, वैश्विक वर्षा, कृषि और खाद्य सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव डाल चुकी हैं। इसी अनुभव के आधार पर अब पूर्व-तैयारी पर ज़ोर दिया जा रहा है।
  • संयुक्त राष्ट्र का केंद्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष (CERF) आपदा की स्थिति में तुरंत धनराशि उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है, ताकि संकट के बढ़ने से पहले राहत कार्य शुरू हो सकें।
  • मानवीय सहायता का समन्वय संयुक्त राष्ट्र मानवीय कार्य समन्वय कार्यालय (OCHA) करता है। सोमालिया, इथियोपिया, केन्या, दक्षिणी अफ़्रीका और मध्य अमेरिका जैसे क्षेत्र पहले से ही सूखे और खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं, जिससे अल नीनो का जोखिम और बढ़ जाता है।

अल नीनो क्या है?

  • सामान्य परिस्थितियों में व्यापारिक पवनें (Trade Winds) प्रशांत महासागर की गर्म सतही जल-राशि को पश्चिम की ओर धकेलती हैं, जिससे पूर्वी प्रशांत में ठंडे जल का ऊपर उठना (upwelling) होता है।
  • अल नीनो की स्थिति में व्यापारिक पवनें कमज़ोर पड़ती हैं या उलट जाती हैं, और गर्म जल पूर्व की ओर खिसक जाता है। इससे मध्य और पूर्वी प्रशांत का सतही तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है।
  • दक्षिणी दोलन पूर्वी और पश्चिमी प्रशांत के बीच वायुमंडलीय दाब के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। जब समुद्री तापमान और वायुदाब दोनों एक साथ बदलते हैं, तब उसे ENSO घटना कहा जाता है।
  • ला नीना इसके विपरीत चरण है, जिसमें पूर्वी प्रशांत का सतही जल सामान्य से अधिक ठंडा होता है। दोनों चरण लगभग दो से सात वर्ष के अंतराल पर आते हैं, हालाँकि यह अनियमित रहता है।
  • अल नीनो के प्रभाव विश्व के कई भागों में दिखते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी अफ़्रीका और भारत के मानसून में कमी की प्रवृत्ति देखी जाती है, जबकि पेरू-इक्वाडोर जैसे क्षेत्रों में भारी वर्षा और बाढ़ आ सकती है।
  • इसकी निगरानी प्रशांत महासागर में तैरते बोयों (buoys), उपग्रह आँकड़ों और समुद्री तथा वायुमंडलीय मॉडलों से की जाती है। WMO इन्हीं आँकड़ों के आधार पर अल नीनो या ला नीना की घोषणा करता है।
  • अल नीनो के नाम का उद्गम दक्षिण अमेरिकी मछुआरों की परंपरा से माना जाता है, जो क्रिसमस के आसपास गर्म जल-धारा को इस नाम से पुकारते थे।
  • अल नीनो का सीधा असर अक्सर मानवीय संकट के रूप में सामने आता है। फसल-हानि, पशुधन की मृत्यु, जल-संकट और विस्थापन जैसी स्थितियाँ इसी से जुड़ी हैं, इसलिए पूर्व-चेतावनी और पूर्व-कार्रवाई का महत्व बढ़ जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
प्रकृति अल नीनो (El Niño) प्रशांत महासागर के मध्य-पूर्वी उष्णकटिबंधीय भाग में समुद्री सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की प्राकृतिक घटना है, जिसका असर वायुमंडलीय परिसंचरण और वर्षा के स्वरूप पर पड़ता है
प्रस्तावित तीव्रता विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization – WMO) के अनुसार नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच समुद्री सतह तापमान सामान्य से 3.8 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर जा सकता है, जबकि WMO द्वारा अल नीनो चेतावनी के लिए 0.5 डिग्री सेल्सियस की तापमान विसंगति पर्याप्त मानी जाती है
अभूतपूर्व स्थिति पिछले अल नीनो लगभग 3 डिग्री सेल्सियस की तापमान विसंगति से जुड़े थे; वर्तमान अनुमान इस सीमा से आगे है, इसलिए ऐतिहासिक आंकड़े और सांख्यिकीय मॉडल इसके प्रभाव का सीमित मार्गदर्शन दे पाते हैं
प्रभावित क्षेत्र लैटिन अमेरिका, पूर्वी एवं दक्षिणी अफ्रीका, एशिया और प्रशांत क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी, सूखा, बाढ़ और चक्रवात की आशंका व्यक्त की गई है
मानवीय प्रभाव संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार लगभग 5 करोड़ लोगों की भूख बढ़ सकती है
आर्थिक लागत अफ्रीकी विकास बैंक (African Development Bank) के अनुमान के अनुसार अफ्रीकी देशों को 10 से 20 अरब डॉलर का खर्च उठाना पड़ सकता है और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 1 से 2 प्रतिशत की गिरावट संभव है

महत्व

मानवीय और खाद्य सुरक्षा

  • लगभग 5 करोड़ लोगों पर भूख का खतरा, जो खाद्य सुरक्षा के लिए सीधी चुनौती है
  • दक्षिणी अफ्रीका में बीज वितरण और पशुधन संरक्षण को प्राथमिकता, क्योंकि इससे अगली फसल और ग्रामीण आजीविका जुड़ी है
  • मध्य अमेरिका में आजीविका की सुरक्षा के लिए तत्काल सहायता की आवश्यकता

आर्थिक प्रभाव

  • अफ्रीकी देशों पर 10 से 20 अरब डॉलर का अनुमानित व्यय, जो राजकोषीय संसाधनों पर दबाव बढ़ाएगा
  • सकल घरेलू उत्पाद में 1 से 2 प्रतिशत तक की संभावित गिरावट, विशेषतः कृषि पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में

पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी

  • WMO का वैश्विक मौसमी जलवायु अद्यतन (Global Seasonal Climate Update) समय से पहले तैयारी का आधार बनता है
  • प्रारंभिक चेतावनी से जीवन और आजीविका की रक्षा संभव है, यही इस अपील का केंद्रीय तर्क है

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वित्तपोषण

  • केंद्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष (Central Emergency Response Fund – CERF) से 50 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि 11 देशों के लिए जारी की गई
  • बहुपक्षीय तंत्र का उपयोग करके संकटग्रस्त देशों तक तेजी से संसाधन पहुँचाने का प्रयास

चुनौतियाँ

1. पूर्वानुमान की सीमा

  • असाधारण तीव्रता के कारण मौजूदा मॉडल और चार दशकों के निगरानी आंकड़े सीमा के बाहर पड़ते हैं
  • अनुमानों की अनिश्चितता के कारण समय पर और निर्णायक कार्रवाई कठिन हो जाती है

2. वित्तपोषण की समय-सीमा

  • अगले दो सप्ताह को निर्णायक माना गया है, जबकि अभी धन और आपूर्ति पूरी तरह उपलब्ध नहीं है
  • बारिश आने से पहले सहायता न पहुँचने पर मानवीय संकट गहरा सकता है

3. खाद्य और पशुधन पर संकट

  • बीज और पशुधन की सुरक्षा न होने पर अगली फसल और दूध-मांस आपूर्ति प्रभावित होती है
  • सूखे और बाढ़ से भंडारण और वितरण व्यवस्था भी बाधित होती है

4. एक साथ कई आपदाओं का खतरा

  • सूखा, बाढ़ और चक्रवात का एक ही क्षेत्र में क्रमिक या एक साथ आना राहत तंत्र पर अतिरिक्त भार डालता है
  • एक आपदा के प्रभाव दूसरी आपदा की संवेदनशीलता बढ़ा सकते हैं (जोखिम का आबशारी प्रभाव)

5. दीर्घकालिक प्रभाव

  • प्रभाव कई महीनों और संभवतः वर्षों तक बना रह सकता है
  • मानवीय तंत्र पर लगातार दबाव से अन्य संकटों के लिए संसाधनों की कमी हो सकती है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता
पूर्वानुमान की सीमा मौजूदा मॉडल सामान्यतः ज्ञात सीमा की घटनाओं पर आधारित होते हैं; असाधारण तीव्रता में अनुमान कम विश्वसनीय हो सकते हैं
निधि की समय-सीमा बारिश आने से पहले सहायता और आपूर्ति पहुँचाना आवश्यक है; देरी से मानवीय संकट गहरा सकता है
खाद्य और पशुधन बीज वितरण और पशु संरक्षण में कमी से फसल चक्र और ग्रामीण आजीविका दोनों प्रभावित होंगे
एक साथ कई आपदाएँ सूखा, बाढ़ और चक्रवात का एक साथ आना राहत तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डालता है
अवसंरचना की संवेदनशीलता कमजोर समुदायों के घर, जल स्रोत और सड़कें कम सुरक्षित होने से जोखिम बढ़ता है

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • केंद्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष (Central Emergency Response Fund – CERF)

आगे की राह

  • पूर्वानुमान-आधारित कार्रवाई (Anticipatory Action) को अपनाना, ताकि चेतावनी मिलते ही पूर्व-निर्धारित सहायता स्वतः सक्रिय हो जाए
  • बारिश से पहले बीज वितरण, पशु संरक्षण और खाद्य भंडार की व्यवस्था को प्राथमिकता देना
  • आपदा राहत कोषों का समय पर वितरण सुनिश्चित करना और पूर्व-आवंटन की व्यवस्था विकसित करना
  • जल भंडारण, सिंचाई और सूखा-प्रतिरोधी फसल किस्मों का विस्तार करना
  • बहु-खतरा (Multi-hazard) आपदा योजना तैयार करना और स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण करना
  • मौसम संस्थानों और क्षेत्रीय देशों के बीच आंकड़ों का साझाकरण और समन्वय बढ़ाना
  • सबसे कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा और खाद्य सहायता की व्यवस्था सुदृढ़ करना
  • पूर्वानुमान की अनिश्चितता को स्पष्ट रूप से संप्रेषित करना, ताकि नीति निर्माता और समुदाय समय रहते तैयारी कर सकें

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अल नीनो · जलवायु परिवर्तन · मानवीय संकट · आपदा जोखिम न्यूनीकरण · प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली · खाद्य सुरक्षा · कृषि पर प्रभाव · सतत विकास लक्ष्य · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · जलवायु अनुकूलन · कमजोर समुदाय · वैश्विक मौसम विज्ञान संगठन

अवधारणा प्रवाह

प्रशांत महासागर के मध्य-पूर्वी भाग में समुद्री सतह तापमान का असामान्य रूप से बढ़ना  →  वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव और वर्षा के स्वरूप का अस्त-व्यस्त होना  →  विभिन्न क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी, सूखा, बाढ़ और चक्रवात की घटनाएँ  →  फसल और पशुधन पर प्रभाव से खाद्य असुरक्षा और आजीविका का संकट  →  मानवीय आवश्यकता बढ़ने पर CERF जैसे कोषों से त्वरित वित्तपोषण  →  समय पर सहायता न पहुँचने पर संकट गहराना और दीर्घकालिक आर्थिक-सामाजिक नुकसान

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल नीनो प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में समुद्री सतह के तापमान में वृद्धि से संबंधित एक मौसमी घटना है।
2. एक शक्तिशाली अल नीनो घटना से विश्व के विभिन्न हिस्सों में सूखे, बाढ़ और अत्यधिक गर्मी जैसी चरम मौसमी घटनाएँ हो सकती हैं।
3. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) 0.5°C से अधिक के प्रशांत महासागर की सतह के तापमान विसंगति को अल नीनो चेतावनी के लिए पर्याप्त मानता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। अल नीनो एक आवधिक जलवायु पैटर्न है जो पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान के असामान्य रूप से गर्म होने की विशेषता है। कथन 2 सही है। अल नीनो के कारण वैश्विक मौसम पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा और बाढ़ तथा अन्य क्षेत्रों में सूखा और गर्मी बढ़ जाती है। कथन 3 भी सही है। WMO द्वारा अल नीनो की घोषणा के लिए 0.5°C से अधिक की समुद्री सतह तापमान विसंगति को एक महत्वपूर्ण मानदंड माना जाता है।

Q2. अल नीनो के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. अल नीनो भारत में मानसून की वर्षा को मजबूत करता है।
2. अल नीनो का नाम स्पेनिश शब्द ‘लिटिल बॉय’ से लिया गया है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: केवल 2 — कथन 1 गलत है। अल नीनो आमतौर पर भारत में मानसून की वर्षा को कमजोर करता है, जिससे सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कथन 2 सही है। ‘अल नीनो’ एक स्पेनिश शब्द है जिसका अर्थ ‘लिटिल बॉय’ या ‘क्राइस्ट चाइल्ड’ है, जिसका नाम पेरू के मछुआरों ने क्रिसमस के आसपास होने वाली इस घटना के नाम पर रखा था।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अल नीनो घटना के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक मानवीय संकट पर इसके परिणामों का विश्लेषण कीजिए। इन प्रभावों को कम करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** अल नीनो (El Niño) की संक्षिप्त परिभाषा और हालिया समाचारों में इसकी अभूतपूर्व तीव्रता का उल्लेख।
2. **अल नीनो के बढ़ते प्रभाव:**
* **चरम मौसमी घटनाएँ:** सूखे, बाढ़, अत्यधिक गर्मी और चक्रवातों की बढ़ती आवृत्ति व तीव्रता।
* **खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव:** कृषि उत्पादन में कमी, फसल खराब होना, पशुधन का नुकसान, जिससे भूख और कुपोषण में वृद्धि।
* **आर्थिक परिणाम:** GDP में गिरावट, विशेषकर विकासशील देशों में, बुनियादी ढांचे को नुकसान।
* **मानवीय संकट:** विस्थापन, जल संकट, स्वास्थ्य आपात स्थिति (जैसे जल-जनित रोग)।
* **क्षेत्रीय भेद्यता:** लैटिन अमेरिका, पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका, एशिया तथा प्रशांत क्षेत्र पर विशेष प्रभाव का उल्लेख।
3. **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका:**
* **धन और संसाधन जुटाना:** संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों जैसे संगठनों द्वारा आपातकालीन सहायता और लचीलापन (resilience) निर्माण के लिए धन का प्रावधान।
* **ज्ञान और प्रौद्योगिकी साझाकरण:** जलवायु मॉडलिंग, पूर्वानुमान और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान।
* **क्षमता निर्माण:** कमजोर देशों को आपदा प्रबंधन और अनुकूलन रणनीतियों में सहायता।
* **समन्वित प्रतिक्रिया:** मानवीय सहायता के लिए वैश्विक समन्वय तंत्र।
4. **प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की भूमिका:**
* **जीवन और आजीविका की सुरक्षा:** सटीक मौसम पूर्वानुमान और समय पर चेतावनी से लोगों को तैयारी करने और सुरक्षित स्थानों पर जाने में मदद मिलती है।
* **नुकसान कम करना:** कृषि, जल संसाधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में पूर्व-खाली उपाय करने में सहायक।
* **नीति निर्माण:** सरकारों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) रणनीतियों और अनुकूलन योजनाओं को विकसित करने में मार्गदर्शन।
* **WMO की भूमिका:** वैश्विक मौसमी जलवायु अपडेट और अल नीनो की निगरानी में इसकी केंद्रीय भूमिका।
5. **निष्कर्ष:** अल नीनो के बढ़ते खतरों के सामने वैश्विक एकजुटता, पूर्व-खाली कार्रवाई और सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को प्राप्त करने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: news.un.org


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