एससीओ बैठक में भारत का आतंकवाद विरोध: क्षेत्रीय सहयोग पर जोर

एससीओ बैठक में भारत का आतंकवाद विरोध: क्षेत्रीय सहयोग पर जोर

एससीओ बैठक में भारत का आतंकवाद विरोध: क्षेत्रीय सहयोग पर जोर

एससीओ: आतंकवाद नीति में भारत vs चीनभारतचीनआतंकवाद नीतिसीमा-पार आतंकवाद पर जोरआंतरिक सुरक्षा पर ध्यान2025 में वक्तव्यसीमा-पार आतंकवाद शामिल नहीं होने पर विसहमति का समर्थनमंच पर दृष्टिकोणबहुपक्षीय सहयोग की माँगराष्ट्रीय हितों को प्राथमिकतासुरक्षा सहयोगव्यावहारिक कार्रवाई की आवश्यकताराजनीतिक सहमति पर जोर
एससीओ: आतंकवाद नीति में भारत vs चीन

✎ आर्थिक एकीकरण और संपर्क परियोजनाएँ स्थिर सुरक्षा वातावरण पर निर्भर हैं, और शंघाई सहयोग संगठन की प्रभावशीलता सर्वसम्मति के साथ आतंकवाद पर साझा व्यावहारिक कार्रवाई से तय होती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (International Relations): क्षेत्रीय संगठन, भारत के पड़ोस और मध्य एशिया से संबंधित मंच  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — आंतरिक सुरक्षा: सीमा-पार आतंकवाद, आतंकी वित्तपोषण और आतंकवाद-रोधी सहयोग की व्यवस्थाएँ  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — अर्थव्यवस्था: अवसंरचना और संपर्क परियोजनाएँ (INSTC, चाबहार) तथा उनकी सुरक्षा-निर्भरता
  • Prelims: शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation – SCO): स्थापना 2001, मुख्यालय बीजिंग में, क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (Regional Anti-Terrorist Structure – RATS), मुख्यालय ताशकंद में, शंघाई आतंकवाद, पृथकतावाद और उग्रवाद विरोधी सम्मेलन, 2001, अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (International North-South Transport Corridor – INSTC), चाबहार बंदरगाह: ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (Financial Action Task Force – FATF) और आतंकी वित्तपोषण पर उसकी भूमिका, संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2(4): बल प्रयोग और क्षेत्रीय अखंडता के विरुद्ध धमकी पर रोक, सर्वसम्मति आधारित निर्णय प्रक्रिया और उसकी सीमाएँ
  • Essay: विकास के लिए स्थिर सुरक्षा वातावरण कितना अनिवार्य है? आर्थिक एकीकरण और सीमा-पार आतंकवाद के संदर्भ में विवेचना कीजिए।, क्षेत्रीय संगठनों की प्रभावशीलता सर्वसम्मति और साझा सुरक्षा हितों के बीच संतुलन पर किस प्रकार निर्भर करती है?

त्वरित पुनरावृत्ति: आर्थिक एकीकरण और संपर्क परियोजनाएँ स्थिर सुरक्षा वातावरण पर निर्भर हैं, और शंघाई सहयोग संगठन की प्रभावशीलता सर्वसम्मति के साथ आतंकवाद पर साझा व्यावहारिक कार्रवाई से तय होती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत के रक्षा मंत्री ने ताजिकिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की शासनाध्यक्षों की परिषद की बैठक में संबोधित करते हुए आतंकवाद, विशेषकर सीमा-पार आतंकवाद, का मुद्दा फिर उठाया। उनका तर्क था कि क्षेत्रीय सहयोग तभी सार्थक हो सकता है जब सभी देश आतंकवाद के प्रति समान और चयनरहित दृष्टिकोण अपनाएँ। ऑपरेशन सिंदूर (2025) के बाद बहुपक्षीय मंचों पर यह विषय भारत की नीति का निरंतर हिस्सा बना हुआ है। इसी संदर्भ में यह भी उल्लेखनीय है कि 2025 में चीन के किंगदाओ में हुई शंघाई सहयोग संगठन की रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने संयुक्त वक्तव्य का समर्थन नहीं किया था, क्योंकि उसमें सीमा-पार आतंकवाद की चिंताएँ पर्याप्त रूप से शामिल नहीं थीं। लेख का मूल विचार यह है कि व्यापार, संपर्क और विकास की परियोजनाएँ तभी फलीभूत होंगी जब उनके लिए स्थिर सुरक्षा परिवेश उपलब्ध हो, और इसके लिए संगठन को आतंकवाद के विरुद्ध व्यावहारिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

पृष्ठभूमि

  • शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में शंघाई में हुई। इसकी जड़ें 1996 में बने शंघाई पाँच (Shanghai Five) समूह में हैं। भारत और पाकिस्तान 2017 के अस्ताना शिखर सम्मेलन में पूर्ण सदस्य बने।
  • 2001 का शंघाई आतंकवाद, पृथकतावाद और उग्रवाद विरोधी सम्मेलन संगठन का प्रारंभिक सुरक्षा-दस्तावेज़ है, जबकि क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) सदस्य देशों के बीच खुफिया सूचना और समन्वय का कार्य करती है।
  • भारत और ईरान, रूस ने 2000 में सेंट पीटर्सबर्ग में अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। 2016 में भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच परिवहन और पारगमन समझौता हुआ, जिसके तहत चाबहार बंदरगाह के विकास को गति मिली।
  • 2025 में पहलगाम हमले और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सुरक्षा नीति में सीमा-पार आतंकवाद को बहुपक्षीय मंचों पर उठाने की प्रवृत्ति को और मज़बूत किया।
  • वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की स्थापना 1989 में हुई थी। यह आतंकी वित्तपोषण और धन-शोधन पर मानक तय करता है, और इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक प्रमुख आधार है।

शंघाई सहयोग संगठन और आतंकवाद-रोधी सहयोग क्या है?

  • शंघाई सहयोग संगठन एक स्थायी अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक संपर्क के क्षेत्रों में काम करता है। इसका औपचारिक चार्टर 2002 में अपनाया गया और यह 2003 से लागू हुआ।
  • संगठन के निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। इसलिए किसी एक सदस्य की असहमति भी किसी प्रस्ताव या संयुक्त वक्तव्य को रोक सकती है। यही कारण है कि सदस्य देशों के बीच सुरक्षा-हितों में मतभेद सीधे संगठन की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं।
  • आतंकवाद-रोधी सहयोग का ढाँचा क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) के माध्यम से चलता है। इसमें खुफिया सूचना का आदान-प्रदान, आतंकी गतिविधियों की पहचान और सदस्य देशों के सक्षम प्राधिकारियों के बीच समन्वय शामिल है।
  • आतंकवाद के विरुद्ध व्यावहारिक सहयोग के चार प्रमुख आयाम माने जाते हैं: खुफिया सूचना का साझाकरण, आतंकी वित्तपोषण पर रोक, भर्ती नेटवर्क का विघटन और आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह से वंचित करना।
  • संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांत अंतरराष्ट्रीय संबंधों का आधार हैं। संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2(4) किसी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल की धमकी या प्रयोग पर रोक लगाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा भारत, ईरान, रूस और अन्य देशों को जोड़ने वाला बहुविध परिवहन नेटवर्क है। चाबहार बंदरगाह इसके और भारत की मध्य एशिया नीति के लिए महत्वपूर्ण बिंदु है।
  • आर्थिक गलियारों के लिए पूर्वानुमेय सीमाएँ, निवेशकों के लिए कानून का शासन और परिवहन मार्गों में हिंसा या बाधा का अभाव आवश्यक है। इसलिए संपर्क परियोजनाओं का दीर्घकालिक लाभ सुरक्षा स्थिरता पर निर्भर करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
संगठन का स्वरूप शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation – SCO) एक बहुपक्षीय मंच है, जिसमें सुरक्षा, व्यापार, संपर्क और सांस्कृतिक सहयोग जैसे विषय शामिल हैं। इसके निर्णय सामान्यतः सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
मंत्री-स्तरीय संवाद शासनाध्यक्षों की परिषद (Council of Heads of Government) की बैठक में भारत ने आतंकवाद को क्षेत्रीय सहयोग की केंद्रीय चुनौती के रूप में रखा। इससे बहुपक्षीय मंच पर भारत की नीतिगत स्थिति स्पष्ट हुई।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद का संदर्भ ऑपरेशन सिंदूर (2025) के बाद भारत ने सीमा-पार आतंकवाद का मुद्दा बार-बार बहुपक्षीय मंचों पर उठाया है। यह भारत की सुरक्षा-नीति के अंतरराष्ट्रीय आयाम को दर्शाता है।
संपर्क परियोजनाएँ अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (International North-South Transport Corridor – INSTC) और चाबहार बंदरगाह मध्य एशिया को व्यापक बाज़ारों से जोड़ने का माध्यम हैं। इनकी सफलता सुरक्षा और संप्रभुता के सम्मान पर निर्भर है।
आतंकवाद-विरोधी ढाँचा SCO का क्षेत्रीय आतंकवाद-विरोधी ढाँचा (Regional Anti-Terrorist Structure – RATS), ताशकंद में स्थित है। यह खुफिया सूचना के आदान-प्रदान और आतंकवाद-विरोधी सहयोग का प्रमुख तंत्र है।

महत्व

सुरक्षा-संबंधी महत्व

  • सीमा-पार आतंकवाद को उसके स्रोत पर रोकने के लिए बहुपक्षीय सहमति आवश्यक है, क्योंकि आतंकवादी नेटवर्क देशों की सीमाओं के पार काम करते हैं।
  • आतंक-वित्तपोषण, भर्ती-तंत्र और सुरक्षित पनाहगाहों के विरुद्ध संयुक्त कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता की बुनियाद बनती है।
  • आतंकवाद को चयनात्मक रूप से देखने से सहयोग की विश्वसनीयता घटती है, इसलिए समान दृष्टिकोण का महत्व बढ़ जाता है।

आर्थिक एवं संपर्क-संबंधी महत्व

  • आर्थिक गलियारों के लिए पूर्वानुमेय सीमाएँ, कानून के शासन में विश्वास और बाधा-मुक्त परिवहन आवश्यक हैं।
  • INSTC और चाबहार बंदरगाह मध्य एशिया को भारत के बाज़ारों और ईरान के रास्ते खाड़ी व यूरेशियाई क्षेत्र से जोड़ने की संभावना रखते हैं।
  • क्षेत्रीय व्यापार और निवेश का विस्तार तभी टिकाऊ होगा जब माल, पूँजी और लोगों की आवाजाही सुरक्षित हो।

कूटनीतिक एवं संस्थागत महत्व

  • SCO जैसे मंच पर मतभेदों के बावजूद संवाद बनाए रखना क्षेत्रीय संस्थाओं की प्रासंगिकता के लिए आवश्यक है।
  • संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान का सिद्धांत बहुपक्षीय सहयोग की वैधता का आधार है।

चुनौतियाँ

1. सदस्य देशों के परस्पर-विरोधी सामरिक हित

  • SCO के सदस्य देशों की सुरक्षा-प्राथमिकताएँ और रणनीतिक हित एक जैसे नहीं हैं, जिससे साझा दृष्टिकोण बनाना कठिन होता है।
  • 2025 में रक्षा मंत्रियों की बैठक के संयुक्त वक्तव्य पर भारत की आपत्ति इसी मतभेद का उदाहरण है, क्योंकि प्रारूप में सीमा-पार आतंकवाद पर भारत की चिंताएँ पर्याप्त रूप से शामिल नहीं थीं।

2. आतंकवाद की परिभाषा और चयनात्मक दृष्टिकोण

  • यदि आतंकवाद को किसी एक घटना या क्षेत्र तक सीमित कर दिया जाए, तो उसके स्रोत और नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई कठिन हो जाती है।
  • ‘चयनात्मक’ दृष्टिकोण से सहयोग की विश्वसनीयता कमज़ोर होती है और सदस्य देशों के बीच अविश्वास बढ़ता है।

3. सर्वसम्मति-आधारित निर्णय-प्रक्रिया की सीमाएँ

  • सर्वसम्मति का नियम किसी एक देश को प्रस्ताव रोकने की शक्ति देता है, जिससे संगठन की सामूहिक कार्रवाई धीमी पड़ती है।
  • असहमति के मुद्दों को अलग रखकर केवल तकनीकी सहयोग आगे बढ़ाने की कोशिश से संस्थागत प्रभाव सीमित रहता है।

4. सुरक्षा और आर्थिक सहयोग का अंतर्संबंध

  • संपर्क परियोजनाएँ अस्थिर सीमाओं और हिंसा के बीच टिक नहीं पातीं, इसलिए आर्थिक एजेंडे के लिए सुरक्षा वातावरण पूर्वशर्त है।
  • संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान के बिना गलियारा-आधारित सहयोग विवादों में उलझ सकता है।

5. आतंक-वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों पर प्रभावी कार्रवाई

  • आतंकवादी संगठनों को धन, हथियार और भर्ती-तंत्र के लिए सीमाओं के पार सहायता मिलती है, जिसे रोकने के लिए समन्वित वित्तीय और खुफिया तंत्र चाहिए।
  • सदस्य देशों के बीच कानूनी और प्रशासनिक मानकों में अंतर से सूचना-साझेदारी और प्रत्यर्पण जैसी प्रक्रियाएँ धीमी पड़ती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सर्वसम्मति का नियम एक देश की आपत्ति से साझा वक्तव्य या कार्ययोजना रुक सकती है, जिससे सामूहिक कार्रवाई कमज़ोर होती है।
आतंकवाद की परिभाषा घटनाओं और क्षेत्रों के आधार पर भेद करने से सहयोग की नैतिक और राजनयिक विश्वसनीयता घटती है।
सीमा-पार आतंकवाद आतंकवादी नेटवर्क सीमाओं के पार सक्रिय रहते हैं, इसलिए केवल राष्ट्रीय स्तर के उपाय पर्याप्त नहीं होते।
संपर्क परियोजनाओं की अनिश्चितता सुरक्षा-जोखिम और राजनीतिक मतभेद से INSTC और चाबहार जैसी परियोजनाओं में निवेश और समय-सारिणी प्रभावित होती है।
संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता गलियारा-आधारित सहयोग के लिए इन सिद्धांतों का सम्मान अनिवार्य है, अन्यथा परियोजनाएँ विवादों में फँस सकती हैं।

आगे की राह

  • आतंकवाद-विरोधी सहयोग को सभी प्रकार के आतंकवाद पर समान रूप से लागू करने के लिए SCO के भीतर स्पष्ट साझा सिद्धांत तय किए जाएँ।
  • क्षेत्रीय आतंकवाद-विरोधी ढाँचा (RATS) के माध्यम से खुफिया सूचना-साझेदारी और समन्वित जाँच-तंत्र को संस्थागत रूप दिया जाए।
  • आतंक-वित्तपोषण के विरुद्ध वित्तीय खुफिया इकाइयों के बीच नियमित आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कार्रवाई कार्य-बल (FATF) के मानकों के अनुरूप निगरानी को मज़बूत किया जाए।
  • सुरक्षित पनाहगाहों और भर्ती-नेटवर्क की पहचान के लिए सदस्य देशों के बीच साझा डेटाबेस और समयबद्ध सूचना-प्रणाली विकसित की जाए।
  • संपर्क परियोजनाओं को सुरक्षा-मूल्यांकन और संप्रभुता-सम्मत अनुबंधों के ढाँचे में आगे बढ़ाया जाए, ताकि निवेशकों का विश्वास बना रहे।
  • सुरक्षा-विवादों को अलग रखकर व्यापार, संस्कृति और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग के समानांतर मार्ग खुले रखे जाएँ।
  • द्विपक्षीय संवाद और बहुपक्षीय मंच के बीच समन्वय बढ़ाया जाए, ताकि मतभेद संस्थागत प्रक्रिया को न रोकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) · क्षेत्रीय सहयोग · सीमापार आतंकवाद (Cross-border Terrorism) · आतंकवाद-वित्तपोषण (Terror Financing) · सर्वसम्मति सिद्धांत (Principle of Consensus) · संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता (Sovereignty and Territorial Integrity) · अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) · चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) · संपर्क-व्यवस्था (Connectivity) · सुरक्षित पनाहगाह (Safe Havens) · आर्थिक गलियारे और सुरक्षा वातावरण · अनुच्छेद 51 और अंतरराष्ट्रीय शांति

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का संवर्धन
  • अनुच्छेद 253: अंतरराष्ट्रीय संधियों के कार्यान्वयन हेतु विधि-निर्माण
  • सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 14: विदेशी संधियों और समझौतों में प्रवेश

अवधारणा प्रवाह

सीमा-पार आतंकवाद और पहलगाम हमले (2025) जैसी घटनाओं से भारत की सुरक्षा-चिंताएँ बढ़ीं।  →  भारत ने SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद को उसके स्रोत पर संबोधित करने की माँग रखी।  →  सदस्य देशों के परस्पर-विरोधी हितों और सर्वसम्मति-नियम के कारण साझा वक्तव्य पर मतभेद उभरे, जैसे 2025 की रक्षा मंत्रियों की बैठक में।  →  सुरक्षा-वातावरण अस्थिर रहने से संपर्क परियोजनाओं (INSTC, चाबहार) और आर्थिक सहयोग पर असर पड़ता है।  →  सुरक्षा, संपर्क और व्यापार को जोड़कर खुफिया-साझेदारी, आतंक-वित्तपोषण-रोध और पनाहगाह-विरोधी कार्रवाई को व्यावहारिक सहयोग में बदलने की आवश्यकता है।  →  सर्वसम्मति के भीतर साझा सिद्धांतों और संस्थागत तंत्रों के सुदृढ़ होने से क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक संवृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. SCO के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. SCO के निर्णय सदस्य देशों की सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
2. SCO की क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (Regional Anti-Terrorist Structure) का मुख्यालय बीजिंग में है।
3. भारत और पाकिस्तान वर्ष 2017 में SCO के पूर्ण सदस्य बने।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. उपर्युक्त सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: SCO में निर्णय सर्वसम्मति से होते हैं, इसीलिए मतभेद होने पर संयुक्त वक्तव्य अटक सकता है। कथन 2 गलत है: RATS का मुख्यालय ताशकंद (उज़्बेकिस्तान) में है, जबकि SCO सचिवालय बीजिंग में है। कथन 3 सही है: दोनों देश 2017 के अस्ताना शिखर सम्मेलन में पूर्ण सदस्य बने।

Q2. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): चाबहार बंदरगाह भारत को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक ऐसा मार्ग उपलब्ध कराता है, जो पाकिस्तान के क्षेत्र से होकर नहीं गुजरता।
कारण (R): चाबहार ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित है।
उपर्युक्त के संदर्भ में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।

  1. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
  2. A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
  3. A सही है, परंतु R गलत है
  4. A गलत है, परंतु R सही है

उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — चाबहार ईरान के मकरान तट पर, ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित है, इसलिए वह पाकिस्तान के भू-भाग से होकर गुजरे बिना मध्य एशिया तक पहुँच देता है। तटीय स्थिति ही इस मार्ग-विकल्प का आधार है, अतः R, A की सही व्याख्या करता है। INSTC और चाबहार दोनों भारत की संपर्क-नीति के प्रमुख घटक हैं।

Q3. निम्नलिखित संस्थाओं/प्रावधानों को उनकी विशेषताओं से सुमेलित कीजिए:
स्तंभ I
A. SCO की क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS)
B. संविधान का अनुच्छेद 253
C. वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF)
D. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1267

स्तंभ II
1. आतंकवाद-वित्तपोषण और धन-शोधन रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय करने वाली वैश्विक संस्था
2. संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों और निर्णयों को लागू करने हेतु विधि बनाने की शक्ति देने वाला प्रावधान
3. अल-कायदा और संबद्ध व्यक्तियों/संस्थाओं की सूची से जुड़ी प्रतिबंध समिति का आधार
4. ताशकंद में स्थित सुरक्षा संरचना

सही सुमेलन चुनिए:

  1. A-4, B-2, C-1, D-3
  2. A-2, B-4, C-3, D-1
  3. A-4, B-3, C-1, D-2
  4. A-1, B-2, C-4, D-3

उत्तर: A-4, B-2, C-1, D-3 — RATS का मुख्यालय ताशकंद में है (A-4)। अनुच्छेद 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों के क्रियान्वयन हेतु विधि बनाने की शक्ति देता है (B-2)। FATF आतंकवाद-वित्तपोषण के मानक तय करता है (C-1)। प्रस्ताव 1267 अल-कायदा से जुड़े प्रतिबंधों से संबंधित है (D-3)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सीमापार आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक कार्रवाई के बिना क्षेत्रीय आर्थिक संपर्क और व्यापार के लक्ष्य पूरे नहीं हो सकते, यह तर्क बहुपक्षीय मंचों पर कितना टिकता है? SCO जैसे मंच में सर्वसम्मति-आधारित निर्णय-प्रक्रिया से आतंकवाद पर साझा दृष्टिकोण बनाने की चुनौतियों की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। इसके साथ यह भी बताइए कि यदि सदस्य देश सुरक्षा-मुद्दों को संवाद से अलग रखते हैं, तो संपर्क-परियोजनाओं की दीर्घकालिक व्यवहार्यता पर क्या प्रभाव पड़ेगा। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर संरचना: (1) भूमिका: हालिया घटनाक्रम, जहाँ भारत के रक्षा मंत्री ने SCO शासनाध्यक्षों की सरकार-प्रमुख बैठक (ताजिकिस्तान) में सीमापार आतंकवाद का मुद्दा उठाया, और 2025 में SCO रक्षा मंत्रियों की किंगदाओ बैठक में संयुक्त वक्तव्य पर भारत की असहमति; संदर्भ में ऑपरेशन सिंदूर (2025) और पहलगाम हमला (2025)। (2) SCO का संस्थागत ढाँचा: वर्ष 2001 में शंघाई में स्थापना; मूल सदस्य चीन, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान; भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य; ईरान 2023 में और बेलारूस 2024 में सदस्य बने; सचिवालय बीजिंग में, RATS ताशकंद में; 2001 का शंघाई आतंकवाद-रोधी कन्वेंशन। सर्वसम्मति सिद्धांत की व्याख्या और उसका प्रभाव। (3) आतंकवाद पर वैश्विक ढाँचा: UAPA, 1967 और NIA अधिनियम, 2008 (घरेलू); PMLA, 2002 (वित्तपोषण); संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1267 (1999) और 1373 (2001); FATF के मानक; लंबित व्यापक अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद कन्वेंशन (CCIT)। (4) विश्लेषण का पहला भाग (आलोचनात्मक परीक्षण): सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को जोड़ने का तर्क, जिसमें निवेशकों को कानून के शासन का भरोसा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान और सीमा-पार परिवहन में व्यवधान-मुक्त स्थिति की आवश्यकता। (5) विश्लेषण का दूसरा भाग: संपर्क-परियोजनाएँ, जैसे INSTC (2000 के दशक में बहुपक्षीय समझौते से स्थापित; भारत, ईरान, रूस सहित) और चाबहार बंदरगाह, जो मध्य एशिया को बड़े बाज़ारों से जोड़ने की क्षमता रखते हैं, पर उनकी दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुरक्षा-वातावरण पर निर्भर। (6) संतुलित दृष्टिकोण: सहयोग को पूरी तरह निलंबित करने का तर्क बनाम सुरक्षा-मुद्दों को संवाद का केंद्र बनाने का तर्क; सदस्य देशों के भिन्न सामरिक हितों की वास्तविकता; सर्वसम्मति का लाभ (सबकी भागीदारी) और हानि (निर्णय का अवरुद्ध होना)। (7) आगे की राह: आतंकवाद-वित्तपोषण पर साझा तंत्र, खुफिया-साझेदारी, भर्ती-नेटवर्क और सुरक्षित पनाहगाहों पर कार्रवाई; सदस्य देशों के बीच विश्वास-निर्माण; अनुच्छेद 51 (अंतरराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा) की भावना के अनुरूप बहुपक्षीय सहयोग। (8) निष्कर्ष: विवेकपूर्ण स्थिति, जिसमें आतंकवाद पर स्पष्ट सिद्धांत और आर्थिक सहयोग दोनों साथ चलें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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