जयशंकर और टस्क की बैठक: मोदी-टस्क वार्ता से पहले भारत-पोलैंड संबंधों की दिशा तय

जयशंकर और टस्क की बैठक: मोदी-टस्क वार्ता से पहले भारत-पोलैंड संबंधों की दिशा तय

जयशंकर और टस्क की बैठक: मोदी-टस्क वार्ता से पहले भारत-पोलैंड संबंधों की दिशा तय

भारत-पोलैंड संबंध विकासरणनीतिक साझेदारी2024 वारसॉविदेश मंत्री बैठकजयशंकर-टस्कप्रधानमंत्री वार्तामोदी-टस्कव्यापार मंचनई दिल्ली-बेंगलुरुसंयुक्त परियोजनाएँरक्षा, अंतरिक्षयूरोप नीतिसुदृढ़
भारत-पोलैंड संबंध विकास

✎ पोलैंड, नाटो और यूरोपीय संघ का सदस्य होने के कारण भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी भारत की यूरोप-नीति में रक्षा विनिर्माण, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत और यूरोप के साथ द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय संबंध, भारत-यूरोपीय संघ संबंध)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (विनिर्माण, विदेशी व्यापार, रक्षा उत्पादन) और विज्ञान-प्रौद्योगिकी (अंतरिक्ष, उभरती प्रौद्योगिकियाँ, नवीकरणीय ऊर्जा)
  • Prelims: रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) और इसका राजनयिक अर्थ, नाटो (NATO) और यूरोपीय संघ (European Union) की सदस्यता वाले देश के रूप में पोलैंड की स्थिति, रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors) और रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भूमिका, IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorization Centre) की भूमिका, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) का मुख्यालय, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता की स्थिति, विदेश मंत्री (External Affairs Minister) और प्रधानमंत्री की भूमिका में अंतर
  • Essay: बहु-संरेखण के दौर में भारत की विदेश नीति: रणनीतिक स्वायत्तता और साझेदारियों का विविधीकरण, रक्षा विनिर्माण और आर्थिक सहयोग: विदेशी साझेदारी से आत्मनिर्भरता तक

त्वरित पुनरावृत्ति: पोलैंड, नाटो और यूरोपीय संघ का सदस्य होने के कारण भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी भारत की यूरोप-नीति में रक्षा विनिर्माण, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

पोलैंड के प्रधानमंत्री (Prime Minister) डोनाल्ड टस्क तीन दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुँचे। इस यात्रा से पहले विदेश मंत्री (External Affairs Minister) एस. जयशंकर ने उनसे मुलाकात की और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होनी थी, जिसमें रक्षा विनिर्माण, व्यापार, उभरती प्रौद्योगिकियाँ, अंतरिक्ष अनुसंधान और नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित रहेगा। वार्ता में यूक्रेन-रूस संघर्ष और भारत-यूरोपीय संघ संबंधों जैसे क्षेत्रीय तथा वैश्विक सुरक्षा मुद्दों की समीक्षा भी शामिल है। पोलैंड के वित्त एवं अर्थव्यवस्था मंत्री आंद्रेज डोमान्स्की और उच्च-स्तरीय व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल भी साथ हैं। नई दिल्ली और बेंगलुरु में भारत-पोलैंड व्यापार मंच आयोजित होंगे। यह यात्रा वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की वारसॉ यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने की पृष्ठभूमि में हो रही है।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वारसॉ यात्रा के दौरान भारत-पोलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर उन्नत किया गया था।
  • पोलैंड नाटो (NATO) और यूरोपीय संघ (European Union) दोनों का सदस्य है, इसलिए उसके साथ सहयोग भारत की यूरोप नीति का भी हिस्सा है।
  • भारत में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा औद्योगिक गलियारों जैसी पहलें चल रही हैं, जिनसे संयुक्त उत्पादन और तकनीक-हस्तांतरण के अवसर बनते हैं।

रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) क्या है?

  • रणनीतिक साझेदारी दो देशों के बीच दीर्घकालिक और बहु-आयामी सहयोग का ढाँचा है, जिसमें राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, तकनीकी और सांस्कृतिक क्षेत्र शामिल होते हैं।
  • यह केवल व्यापारिक समझौता नहीं होता; इसमें नियमित उच्च-स्तरीय संवाद, संस्थागत तंत्र और साझा रणनीतिक हितों की पहचान होती है।
  • भारत विभिन्न देशों के साथ अलग-अलग स्तरों की साझेदारियाँ रखता है, जिनमें व्यापक रणनीतिक साझेदारी और रणनीतिक साझेदारी जैसे स्तर शामिल हैं।
  • रक्षा क्षेत्र में ऐसी साझेदारी का अर्थ अक्सर संयुक्त अनुसंधान, सह-उत्पादन और रक्षा उपकरणों के विनिर्माण में सहयोग से होता है।
  • भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र का नियमन और प्रोत्साहन IN-SPACe द्वारा होता है, जो निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष गतिविधियों में अवसर देता है।
  • अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) की स्थापना भारत और फ्रांस की पहल से हुई, और इसका मुख्यालय गुरुग्राम (हरियाणा) में है।
  • विदेश मंत्री (External Affairs Minister) देश की विदेश नीति को लागू करने के प्रमुख मंत्री होते हैं, जबकि शीर्ष-स्तरीय वार्ता और अंतिम राजनीतिक निर्णय प्रायः प्रधानमंत्री के स्तर पर होते हैं।
  • ऐसी साझेदारियों का मूल्यांकन इस आधार पर होता है कि वे व्यापार, निवेश, तकनीक-हस्तांतरण और सुरक्षा सहयोग में कितना ठोस परिणाम देती हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
यात्रा का स्वरूप पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की तीन दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा, जिसमें राजनयिक वार्ता, व्यापार मंच और उद्योग संवाद शामिल हैं
विदेश मंत्री की भूमिका विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा प्रधानमंत्री से भेंट, जो प्रधानमंत्री स्तर की द्विपक्षीय वार्ता से पहले की राजनयिक तैयारी का हिस्सा है
रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वारसॉ यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंध इसी स्तर तक उन्नत हुए थे; यह यात्रा उसी ढाँचे को गति देने के लिए है
चर्चा के प्रमुख क्षेत्र रक्षा विनिर्माण, व्यापार, उभरती प्रौद्योगिकियाँ, अंतरिक्ष अनुसंधान और नवीकरणीय ऊर्जा, जिससे आर्थिक और तकनीकी सहयोग का व्यापक दायरा स्पष्ट होता है
बहुपक्षीय परिप्रेक्ष्य रूस-यूक्रेन संघर्ष और भारत-यूरोपीय संघ (India-EU) संबंधों की समीक्षा से पता चलता है कि पोलैंड का यूरोपीय संघ का सदस्य होना द्विपक्षीय वार्ता को क्षेत्रीय आयाम भी देता है
व्यावसायिक मंच नई दिल्ली और बेंगलुरु में भारत-पोलैंड व्यापार मंच, जिनमें सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष क्षेत्र के हितधारक शामिल होंगे, निजी निवेश और तकनीकी साझेदारी की संभावनाएँ खोलते हैं

महत्व

आर्थिक महत्व

  • व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ाने के लिए व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति से दोनों देशों के उद्योग जगत को सीधा संपर्क मिलता है
  • वित्त एवं अर्थव्यवस्था मंत्री अंद्रेज्ज डोमांस्की की साथ उपस्थिति से आर्थिक सहयोग को नीतिगत समर्थन मिलने का संकेत मिलता है
  • पोलैंड यूरोपीय संघ का सदस्य है, इसलिए उसके साथ संबंध यूरोपीय बाज़ार तक पहुँच के एक मार्ग के रूप में भी देखे जाते हैं

रक्षा और सामरिक महत्व

  • रक्षा विनिर्माण में सहयोग से उत्पादन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त विकास की संभावनाओं पर विचार होता है, जो मेक इन इंडिया की नीतिगत दिशा से संगत है
  • यूरोप के मध्य भाग में एक विश्वसनीय साझेदार के साथ संबंध भारत की यूरोप-नीति को संतुलित और बहुआयामी बनाते हैं

तकनीकी और वैज्ञानिक महत्व

  • उभरती प्रौद्योगिकियों और अंतरिक्ष अनुसंधान पर सहयोग से अनुसंधान एवं विकास के संयुक्त कार्यक्रमों की संभावना बढ़ती है
  • सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के हितधारकों से संवाद भारत की डिजिटल और सेवा निर्यात क्षमता के लिए उपयोगी है

ऊर्जा और पर्यावरणीय महत्व

  • नवीकरणीय ऊर्जा पर चर्चा पोलैंड के ऊर्जा संक्रमण की आवश्यकताओं और भारत की स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के बीच संभावित साझेदारी का क्षेत्र बनती है

चुनौतियाँ

1. रणनीतिक साझेदारी को ठोस परियोजनाओं में बदलने की चुनौती

  • उच्च-स्तरीय घोषणाओं और वास्तविक निवेश या संयुक्त परियोजनाओं के बीच अंतर अक्सर बना रहता है
  • साझेदारी के दायरे के बावजूद व्यापार में संरचनात्मक असंतुलन और बाज़ार पहुँच की सीमाएँ बनी रह सकती हैं

2. यूरोपीय संघ के नियामक ढाँचे से जुड़ी बाधाएँ

  • यूरोपीय संघ के मानक, कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) जैसी व्यवस्थाएँ भारतीय निर्यात की लागत और अनुपालन को प्रभावित करती हैं
  • भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में व्यापार वार्ताएँ जटिल होने के कारण पोलैंड जैसे सदस्य देश के माध्यम से सीधी पहुँच की सीमाएँ भी सामने आती हैं

3. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और निर्यात नियंत्रण

  • उन्नत रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण में अंतरराष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाएँ बाधा बन सकती हैं
  • बौद्धिक संपदा अधिकारों और संयुक्त उत्पादन के समझौतों पर सहमति बनाना समय-साध्य प्रक्रिया है

4. रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच सामरिक संतुलन

  • यूरोपीय सुरक्षा परिदृश्य में पोलैंड की प्राथमिकताएँ और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति के हित हमेशा एक जैसे नहीं होते
  • बहुध्रुवीय विश्व में दोनों देशों को विभिन्न गठबंधनों के बीच संतुलन साधना पड़ता है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
व्यापार असंतुलन द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा बढ़ाने के बावजूद निर्यात-आयात संतुलन और बाज़ार पहुँच की शर्तें चुनौती बनी रह सकती हैं
यूरोपीय संघ के मानक पर्यावरणीय और तकनीकी मानकों का अनुपालन भारतीय उत्पादकों के लिए अतिरिक्त लागत पैदा कर सकता है
प्रौद्योगिकी और निर्यात नियंत्रण संवेदनशील रक्षा और अंतरिक्ष तकनीकों के हस्तांतरण पर अंतरराष्ट्रीय नियम सीमाएँ तय करते हैं
परियोजना क्रियान्वयन रक्षा विनिर्माण और ऊर्जा परियोजनाओं में समयसीमा, वित्तपोषण और नौकरशाही प्रक्रियाएँ विलंब का कारण बन सकती हैं
सामरिक अपेक्षाएँ रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के दृष्टिकोण में अंतर से सहयोग की गति प्रभावित हो सकती है

आगे की राह

  • रणनीतिक साझेदारी के तहत रक्षा विनिर्माण में संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए
  • भारत-पोलैंड व्यापार मंचों के निष्कर्षों को समयबद्ध कार्य योजना में बदलकर निवेश प्रस्तावों की निगरानी की जाए
  • सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं और शैक्षणिक आदान-प्रदान को संस्थागत रूप दिया जाए
  • नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा संक्रमण में प्रौद्योगिकी साझेदारी से हरित निवेश के अवसरों की पहचान की जाए
  • यूरोपीय संघ के मानकों और कार्बन सीमा समायोजन जैसे नियमों के अनुपालन में भारतीय निर्यातकों की क्षमता बढ़ाई जाए
  • भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के व्यापक ढाँचे में पोलैंड को एक सेतु के रूप में उपयोग करते हुए क्षेत्रीय संवाद को मज़बूत किया जाए
  • द्विपक्षीय समझौतों के कार्यान्वयन के लिए संस्थागत तंत्र और नियमित समीक्षा बैठकों की व्यवस्था की जाए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

रणनीतिक साझेदारी · भारत-पोलैंड संबंध · रक्षा विनिर्माण · मेक इन इंडिया · प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment, FDI) · रक्षा औद्योगिक गलियारे · भारत-यूरोपीय संघ संबंध · रणनीतिक स्वायत्तता · अंतरिक्ष क्षेत्र और IN-SPACe · नवीकरणीय ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन · आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण · रूस-यूक्रेन संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का संवर्धन, राज्य की विदेश नीति का निर्देशक सिद्धांत
  • अनुच्छेद 253: अंतरराष्ट्रीय संधियों के क्रियान्वयन हेतु संसद की विधायी शक्ति

अवधारणा प्रवाह

वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री की वारसॉ यात्रा से द्विपक्षीय संबंध रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत हुए  →  इस उन्नत ढाँचे के आधार पर प्रधानमंत्री टस्क की भारत यात्रा और विदेश मंत्री की राजनयिक भेंट हुई  →  विदेश मंत्री की भेंट के बाद प्रधानमंत्री स्तर की द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा पर चर्चा होगी  →  वार्ता के समानांतर नई दिल्ली और बेंगलुरु में व्यापार मंच आयोजित होंगे, जिनमें उद्योग और निवेश के प्रस्ताव सामने आएँगे  →  इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन से रक्षा विनिर्माण, अंतरिक्ष और सूचना प्रौद्योगिकी में संयुक्त परियोजनाओं की संभावना बनेगी  →  अंततः ये परियोजनाएँ भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के व्यापक ढाँचे में योगदान देकर भारत की बहुआयामी विदेश नीति को सुदृढ़ करेंगी

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पोलैंड यूरोपीय संघ (European Union) और नाटो (NATO) दोनों का सदस्य है।
2. पोलैंड की मुद्रा यूरो (Euro) है और वह यूरोज़ोन का हिस्सा है।
3. पोलैंड की सीमा यूक्रेन से लगती है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: पोलैंड यूरोपीय संघ और नाटो, दोनों का सदस्य है। कथन 2 गलत है: पोलैंड की मुद्रा ज़्लोटी (złoty) है, यूरो नहीं, इसलिए वह यूरोज़ोन का हिस्सा नहीं है। कथन 3 सही है: पोलैंड की पूर्वी सीमा यूक्रेन से लगती है। अतः सही उत्तर ‘केवल दो’ है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): भारत में रक्षा क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को भारतीय साझेदारों के साथ संयुक्त उद्यम बनाकर सह-उत्पादन (co-production) की दिशा में प्रोत्साहित किया जाता है।
कारण (R): सरकार ने रक्षा विनिर्माण में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा स्वचालित मार्ग (automatic route) के अंतर्गत 74 प्रतिशत तक निर्धारित की है।

उपर्युक्त के संदर्भ में सही विकल्प चुनिए:

  1. (A) सही है और (R) उसकी सही व्याख्या है
  2. (A) सही है, किंतु (R) उसकी सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है

उत्तर: (A) सही है और (R) उसकी सही व्याख्या है — रक्षा विनिर्माण में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 2020 में बढ़ाकर स्वचालित मार्ग से 74 प्रतिशत की गई, जिससे विदेशी कंपनियों के लिए भारत में संयुक्त उद्यम और सह-उत्पादन का मार्ग खुला। अतः (R) (A) की सही व्याख्या है। ‘मेक इन इंडिया’ नीति इसी दिशा को पुष्ट करती है।

Q3. वारसॉ (Warsaw) किस नदी के तट पर स्थित है?

  1. डेन्यूब (Danube)
  2. विस्चुला (Vistula)
  3. ओडर (Oder)
  4. नीपर (Dnieper)

उत्तर: विस्चुला (Vistula) — वारसॉ, पोलैंड की राजधानी है और विस्चुला (Vistula) नदी के तट पर बसी है। डेन्यूब मध्य और दक्षिण-पूर्वी यूरोप से, ओडर पोलैंड की पश्चिमी सीमा के निकट से और नीपर यूक्रेन-बेलारूस क्षेत्र से होकर बहती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ वर्ष 2024 में भारत-पोलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किए जाने के बाद रक्षा विनिर्माण, व्यापार और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग का दायरा बढ़ा है। भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में रक्षा विनिर्माण सहयोग की संभावनाओं और सीमाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या यह सहयोग भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को भी गहरा कर सकता है? अपने तर्कों के साथ उत्तर दीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: 1. पृष्ठभूमि: वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की वारसॉ यात्रा से द्विपक्षीय संबंध रणनीतिक साझेदारी बने; पोलैंड यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य है; अक्टूबर 2026 में प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली और बेंगलुरु में व्यापार मंच आयोजित हुए।
2. रक्षा विनिर्माण का नीतिगत ढांचा: मेक इन इंडिया (Make in India); रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा स्वचालित मार्ग से 74 प्रतिशत (2020); रक्षा औद्योगिक गलियारे (उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु, 2018 के बजट में घोषित); सकारात्मक स्वदेशी सूची (Positive Indigenous Lists); रक्षा नवाचार हेतु iDEX (2018); रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP 2020)।
3. अंतरिक्ष और उभरती प्रौद्योगिकियां: IN-SPACe (2020) की भूमिका; निजी क्षेत्र की भागीदारी; बेंगलुरु का IT और अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र।
4. नवीकरणीय ऊर्जा: अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance, 2015) के माध्यम से बहुपक्षीय ढांचा और द्विपक्षीय सहयोग की संभावना।
5. भारत-यूरोपीय संघ आयाम: भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (EU-India Trade and Technology Council, 2022); पोलैंड का EU के भीतर प्रभाव; रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में यूरोपीय सुरक्षा समीकरण।
6. सहयोग के पक्ष: पूंजी और प्रौद्योगिकी का प्रवाह, निर्यात बाज़ार का विस्तार, आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण, स्वदेशी उत्पादन क्षमता में वृद्धि।
7. सीमाएं और चिंताएं: प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की शर्तें, निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाएं, व्यापार असंतुलन, बाज़ार पहुंच की बाधाएं, और रणनीतिक स्वायत्तता बनाम गठबंधन निर्भरता का प्रश्न।
8. संतुलित निष्कर्ष: सहयोग की गहराई नीतिगत निरंतरता, घरेलू क्षमता-निर्माण और अनुबंधों के वास्तविक क्रियान्वयन पर निर्भर है; स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के लक्ष्य के साथ सहयोग को संतुलित करना आवश्यक है।

स्रोत: orissapost.com


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