पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने पर सीएक्यूएम की सख्त समीक्षा, तुरंत उठाये गये कदमों पर जोर

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पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने पर सीएक्यूएम की सख्त समीक्षा, तुरंत उठाये गये कदमों पर जोर

पराली जलाने से प्रदूषण नियंत्रण तकधान कटाईअक्टूबर-नवंबरपराली जलानाखेत खाली करने हेतुतापीय उलटावप्रदूषक जमावसीएक्यूएम बैठकराज्य सरकारों के साथतुरंत कार्रवाईजमीनी स्तर पर
पराली जलाने से प्रदूषण नियंत्रण तक

✎ CAQM एक सांविधिक निकाय है जो वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के राज्यों में फसल अवशेष जलाने की रोकथाम और वायु प्रदूषण के सभी प्रमुख स्रोतों के नियंत्रण के लिए अंतरराज्यीय…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — पर्यावरण (प्रदूषण नियंत्रण, सांविधिक निकाय और प्रवर्तन तंत्र)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — कृषि (फसल अवशेष प्रबंधन और कृषि-पर्यावरण समस्याएं)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन (सांविधिक निकाय, केंद्र-राज्य समन्वय और संघीय शासन)
  • Prelims: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और उसका गठन अधिनियम, 2021, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और उसके आस-पास के क्षेत्र, फसल अवशेष प्रबंधन (CRM): इन-सिटू और एक्स-सिटू विधियां, हैप्पी सीडर (Happy Seeder) — खेत में ही बुवाई की मशीन, PM2.5 और PM10 में अंतर, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP), राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP), बायोमास को-फायरिंग और ANPR प्रणाली
  • Essay: स्वच्छ वायु: नागरिक का मौलिक अधिकार या राज्य का संवैधानिक कर्तव्य?, सहकारी संघवाद और पर्यावरण शासन: बहु-राज्यीय प्रदूषण की चुनौती

त्वरित पुनरावृत्ति: CAQM एक सांविधिक निकाय है जो वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के राज्यों में फसल अवशेष जलाने की रोकथाम और वायु प्रदूषण के सभी प्रमुख स्रोतों के नियंत्रण के लिए अंतरराज्यीय समन्वय और निर्देश जारी करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने अपने अध्यक्ष की अध्यक्षता में 22 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा की सरकारों के साथ अलग-अलग समीक्षा बैठकें कीं। इनका उद्देश्य धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकना और वायु प्रदूषण के अन्य प्रमुख स्रोतों को कम करना था। पंजाब के साथ बैठक में 15.05.2026 के निर्देश संख्या 99 के अंतर्गत राज्य कार्य योजना के क्रियान्वयन, जिला-स्तरीय तैयारियों, फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की उपलब्धता और तैनाती, इन-सिटू तथा एक्स-सिटू विधियों से पराली के संग्रह व परिवहन, सैटेलाइट-आधारित फायर अलर्ट के क्षेत्रीय सत्यापन तथा ड्रोन व कम लागत वाले सेंसरों से निगरानी पर चर्चा हुई। निर्देश संख्या 92 के अंतर्गत ईंट-भट्टों में धान की पराली से बने बायोमास पेलेट या ब्रिकेट का उपयोग और थर्मल पावर प्लांटों में बायोमास को-फायरिंग के लक्ष्यों की प्रगति भी देखी गई। हरियाणा के साथ बैठक में पराली के अलावा वाहन प्रदूषण, सड़क और खुले क्षेत्रों की धूल, निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) गतिविधियों की धूल तथा औद्योगिक प्रदूषण पर व्यापक विचार हुआ। वाहनों के संबंध में ANPR प्रणाली, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) की अनिवार्यता, जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों पर कार्रवाई और एनसीआर जिलों में डीजल ऑटो रिक्शा को चरणबद्ध ढंग से हटाने की दिशा में प्रगति की समीक्षा की गई। आयोग ने समयबद्ध क्रियान्वयन, कड़े प्रवर्तन और राज्य विभागों, जिला प्रशासनों तथा प्रवर्तन एजेंसियों के बीच घनिष्ठ समन्वय पर बल दिया।

पृष्ठभूमि

  • पराली जलाना मुख्यतः अक्टूबर-नवंबर में धान की कटाई के बाद रबी की बुवाई के लिए खेत जल्दी खाली करने की आवश्यकता से जुड़ा है। इसी अवधि में हवा की गति घटने और तापमान गिरने से (तापीय उलटाव, Temperature Inversion) प्रदूषक कण सतह के पास जमा रहते हैं, जिससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का प्रदूषण गंभीर हो जाता है।
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के समन्वित प्रबंधन के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की स्थापना 2020 के अध्यादेश के माध्यम से हुई, और बाद में इसे वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 द्वारा सांविधिक स्वरूप दिया गया।
  • वायु प्रदूषण की रोकथाम के मूल ढांचे में वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 शामिल हैं। इनके अंतर्गत केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्य करते हैं, जबकि अंतरराज्यीय क्षेत्र के लिए CAQM समन्वयकारी और निर्देशात्मक भूमिका निभाता है।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) 2019 में शुरू किया गया, जिसमें गैर-प्राप्ति शहरों में कणीय पदार्थों के स्तर में कमी के लक्ष्य रखे गए। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के माध्यम से वायु गुणवत्ता के स्तर के अनुसार चरणबद्ध कार्रवाई होती है।
  • फसल अवशेष प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार की मशीनरी सहायता और राज्यों की योजनाएं चलती हैं, फिर भी खेत-स्तर पर मशीनों की समय पर उपलब्धता, आपूर्ति-श्रृंखला और किसानों की लागत-संवेदनशीलता प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) क्या है?

  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए गठित एक सांविधिक निकाय है, जिसका आधार वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 है।
  • आयोग का कार्य क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के निर्दिष्ट जिलों तक फैला है, इसलिए यह अंतरराज्यीय समन्वय की भूमिका निभाता है।
  • आयोग राज्यों को निर्देश जारी करता है, जैसे फसल अवशेष जलाने की रोकथाम के लिए राज्य कार्य योजना, ईंट-भट्टों और ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के उपयोग से संबंधित दिशा-निर्देश।
  • फसल अवशेष प्रबंधन में इन-सिटू विधि में पराली को खेत में ही मिट्टी में मिलाया या बोया जाता है, जबकि एक्स-सिटू विधि में पराली को खेत से बाहर संग्रह करके ऊर्जा या अन्य औद्योगिक उपयोग में लाया जाता है।
  • निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) गतिविधियों, सड़क-धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी आयोग के निर्देश लागू होते हैं, जिनका पालन संबंधित राज्यों के विभाग और प्रवर्तन एजेंसियां सुनिश्चित करती हैं।
  • आयोग में निगरानी के आधुनिक साधन जैसे सैटेलाइट-आधारित फायर अलर्ट, ड्रोन और कम लागत वाले सेंसर प्रयोग में लाए जाते हैं, ताकि जमीनी स्थिति का वास्तविक समय में आकलन हो सके।
  • बायोमास को-फायरिंग का अर्थ है ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले के साथ बायोमास का मिश्रित उपयोग, जिससे कोयले की खपत और फसल अवशेषों के खुले में जलने, दोनों को कम करने में मदद मिलती है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
संस्थागत ढाँचा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) वर्ष 2021 के अधिनियम के तहत गठित वैधानिक निकाय है, जो दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के समन्वित प्रबंधन के लिए उत्तरदायी है
निर्देशों की प्रकृति निर्देश संख्या 99 (15.05.2026) के अंतर्गत राज्य कार्य योजना का क्रियान्वयन होता है, जबकि निर्देश संख्या 92 ईंट-भट्टों में धान के पुआल से बने बायोमास पेलेट/ब्रिकेट के उपयोग को अनिवार्य करता है
पराली प्रबंधन की विधि धान की पराली का इन-सिटू (खेत में ही) और एक्स-सिटू (खेत के बाहर) दोनों तरीकों से संग्रह, परिवहन और उपयोग
निगरानी की तकनीक सैटेलाइट-आधारित फायर अलर्ट, जिला स्तर पर ड्रोन और कम लागत वाले सेंसर के माध्यम से आग की घटनाओं की पहचान और क्षेत्रीय सत्यापन
बहु-स्रोत नियंत्रण पराली, वाहन, सड़क और खुले क्षेत्रों की धूल, सी एंड डी गतिविधियाँ तथा औद्योगिक उत्सर्जन, सभी स्रोतों को एक साथ लक्षित करने का दृष्टिकोण
वाहन प्रदूषण उपाय ईंधन और CNG स्टेशनों पर ANPR प्रणाली से PUCC अनुपालन की जाँच, वाहनों के जीवन-समाप्ति संबंधी नियमों का पालन और NCR जिलों में डीजल ऑटो रिक्शा का चरणबद्ध बंद होना

महत्व

पर्यावरणीय एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व

  • सर्दियों में पराली जलाने से PM2.5 और PM10 के स्तर में वृद्धि होती है, जिससे श्वसन रोग और अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं
  • एनसीआर के वायु प्रदूषण में स्रोतों की बहुलता के कारण किसी एक उपाय से समाधान संभव नहीं है, इसलिए बहु-स्रोत नियंत्रण आवश्यक है

संघीय एवं प्रशासनिक महत्व

  • एनसीआर के राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) का व्यावहारिक उदाहरण है, क्योंकि प्रदूषण की प्रकृति अंतरराज्यीय होती है
  • आयोग के निर्देश संबंधित राज्यों के लिए बाध्यकारी होते हैं, जिससे नीति-निर्देश और जमीनी क्रियान्वयन के बीच सेतु बनता है

कृषि एवं ग्रामीण आजीविका से जुड़ा महत्व

  • फसल अवशेष प्रबंधन से पराली को अपशिष्ट के बजाय संसाधन के रूप में उपयोग करने की दिशा मिलती है
  • CRM मशीनरी की उपलब्धता और सेवा-केंद्र मॉडल से छोटे किसानों की लागत का बोझ कम हो सकता है

ऊर्जा एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था की दृष्टि से महत्व

  • थर्मल पावर प्लांटों में बायोमास को-फायरिंग से कोयले पर निर्भरता में आंशिक कमी और कार्बन उत्सर्जन में कमी की संभावना बनती है
  • ईंट-भट्टों में पेलेट/ब्रिकेट का उपयोग कृषि अवशेषों के मूल्य-संवर्धन और औद्योगिक ईंधन विकल्प की दिशा में कदम है

चुनौतियाँ

1. मशीनरी की समयबद्ध उपलब्धता

  • धान की कटाई का मुख्य समय सीमित होता है और उसी अवधि में CRM मशीनों की माँग अपने चरम पर होती है
  • मशीनों की उपलब्धता, तैनाती और रख-रखाव में कमी से खेत में ही पराली जलाने का विकल्प बना रहता है

2. नीति से जमीनी क्रियान्वयन तक का अंतर

  • राज्य कार्य योजना और निर्देशों के बावजूद जिला और किसान स्तर पर अनुपालन असमान रह सकता है
  • प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता और संसाधनों की सीमाएँ निगरानी की निरंतरता को प्रभावित करती हैं

3. बहु-विभागीय समन्वय की चुनौती

  • परिवहन, नगरीय विकास, उद्योग, कृषि और राजस्व जैसे कई विभाग एक ही प्रदूषण-नियंत्रण लक्ष्य से जुड़े हैं
  • केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बँटवारा न होने पर कार्रवाई में विलंब होता है

4. निगरानी तकनीक की सीमाएँ

  • सैटेलाइट फायर अलर्ट छोटे और बिखरे हुए आग के स्थानों को पूरी तरह नहीं पकड़ पाते, इसलिए क्षेत्रीय सत्यापन आवश्यक है
  • ड्रोन और कम लागत वाले सेंसरों के डेटा की गुणवत्ता, रख-रखाव और डेटा-साझाकरण की व्यवस्था पर निर्भरता रहती है

5. बायोमास आपूर्ति-श्रृंखला की आर्थिकी

  • अवशेषों का संग्रह, भंडारण और परिवहन महँगा होने से पेलेट/ब्रिकेट का व्यावसायिक मॉडल कमजोर पड़ सकता है
  • थर्मल पावर प्लांटों में को-फायरिंग के लक्ष्यों की प्राप्ति आपूर्ति की स्थिरता और मूल्य-निर्धारण पर निर्भर करती है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
मशीनरी का समय पर उपयोग कटाई के चरम समय में मशीनों की कमी से इन-सिटू प्रबंधन प्रभावित होता है
प्रवर्तन की निरंतरता निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई का असमान प्रयोग अनुपालन को कमजोर करता है
बहु-स्रोत प्रदूषण वाहन, धूल और उद्योग जैसे स्रोतों पर एक साथ नियंत्रण में विभागीय समन्वय की कमी बाधा बनती है
डेटा और निगरानी सैटेलाइट और सेंसर डेटा का सत्यापन और उपयोग न होने पर निर्णय-प्रक्रिया कमजोर रहती है
बायोमास अर्थव्यवस्था पेलेट/ब्रिकेट और को-फायरिंग की लागत तथा आपूर्ति स्थिरता पर अनिश्चितता बनी रहती है

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • फसल अवशेष प्रबंधन हेतु कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने की केंद्रीय क्षेत्र योजना (Central Sector Scheme for Promotion of Agricultural Mechanization for In-situ Management of Crop Residue)
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme)

आगे की राह

  • धान की कटाई से पहले CRM मशीनों की उपलब्धता, तैनाती और मरम्मत का समयबद्ध कैलेंडर बनाकर जिला स्तर पर उसकी नियमित समीक्षा की जाए
  • सैटेलाइट फायर अलर्ट के साथ जिला स्तर पर भू-सत्यापन को अनिवार्य प्रक्रिया बनाया जाए, ताकि आँकड़े कार्रवाई में बदल सकें
  • ड्रोन और कम लागत वाले सेंसरों के डेटा को एक केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म पर साझा कर राज्यों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय सुदृढ़ किया जाए
  • पराली के इन-सिटू और एक्स-सिटू उपयोग के लिए आपूर्ति-श्रृंखला (संग्रह, भंडारण, परिवहन) में निजी और सहकारी भागीदारों की भूमिका बढ़ाई जाए
  • ईंट-भट्टों और थर्मल पावर प्लांटों में बायोमास उपयोग के लक्ष्यों की प्रगति की नियमित सार्वजनिक निगरानी की जाए
  • वाहन प्रदूषण पर ANPR आधारित PUCC प्रवर्तन और स्वच्छ गतिशीलता विकल्पों को एक साथ आगे बढ़ाया जाए
  • सड़क-धूल नियंत्रण और C&D गतिविधियों के धूल-शमन मानकों का पालन स्थानीय निकायों की जवाबदेही के साथ सुनिश्चित किया जाए
  • राज्य कार्य योजनाओं में स्पष्ट जिम्मेदारी, समय-सीमा और प्रदर्शन-संकेतक तय कर उनका स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management) · फसल अवशेष प्रबंधन (Crop Residue Management) · इन-सिटू और एक्स-सिटू प्रबंधन · राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · अनुच्छेद 21 और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · सावधानी का सिद्धांत (Precautionary Principle) · बायोमास को-फायरिंग (Biomass Co-firing) · स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (ANPR) · सांविधिक निकाय और बाध्यकारी निर्देश · बहुकेंद्रीय शासन (Polycentric Governance)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21 — स्वच्छ पर्यावरण में जीवन का अधिकार (न्यायिक व्याख्या)
  • अनुच्छेद 48A — पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का राज्य का दायित्व
  • अनुच्छेद 51A(g) — प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मूल कर्तव्य
  • सातवीं अनुसूची, सूची II, प्रविष्टि 6 — लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता (राज्य विषय)

अवधारणा प्रवाह

धान की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों का निपटान सीमित समय और उपलब्ध मशीनरी के भीतर करना पड़ता है  →  मशीनरी की कमी या महँगे परिवहन से किसान पराली जलाने का विकल्प चुनते हैं  →  खुली आग से PM2.5 और PM10 का स्तर बढ़ता है और एनसीआर की वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुँचती है  →  CAQM राज्य कार्य योजनाओं और निर्देशों के माध्यम से CRM मशीनरी, निगरानी और प्रवर्तन को निर्देशित करता है  →  सैटेलाइट, ड्रोन और सेंसर से आग की घटनाओं की पहचान और जमीनी सत्यापन होता है  →  सत्यापित आँकड़ों के आधार पर जिला प्रशासन और प्रवर्तन एजेंसियाँ कार्रवाई करती हैं और अनुपालन सुनिश्चित होता है  →  पेलेट/ब्रिकेट और बायोमास को-फायरिंग जैसे उपयोग से अवशेषों का मूल्य-संवर्धन होकर प्रदूषण का स्रोत घटता है

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित सांविधिक निकाय है।
2. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) वर्ष 2019 में आरंभ किया गया था।
3. अनुच्छेद 48A के अंतर्गत पर्यावरण की रक्षा और उसमें सुधार करना नागरिकों का मूल कर्तव्य है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: CAQM की स्थापना वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 द्वारा हुई है। कथन 2 सही है: NCAP जनवरी 2019 में शुरू हुआ और इसमें वायु प्रदूषण में कमी के लक्ष्य निर्धारित किए गए। कथन 3 गलत है: पर्यावरण संरक्षण का मूल कर्तव्य अनुच्छेद 51A(g) में है, जबकि अनुच्छेद 48A राज्य के नीति-निदेशक तत्वों में आता है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): उत्तर भारत में शीत ऋतु के वायु प्रदूषण में धान की पराली जलाने का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
कारण (R): पराली जलाने से सूक्ष्म कणीय पदार्थ (PM) निकलते हैं और यह स्रोत उस मौसम में सक्रिय होता है जब हवाएँ और तापमान प्रदूषकों को वायुमंडल में टिकाए रखते हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है। — पराली जलाने से निकलने वाला धुआँ PM2.5 और PM10 का प्रमुख मौसमी स्रोत है। शीत ऋतु में कम तापमान, कम हवा की गति और उलटी तापीय परत (temperature inversion) प्रदूषकों को सतह के पास जमा कर देती है, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों का मिलान कीजिए:

सूची-I (संस्था/अधिनियम)
A. वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981
B. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
C. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021
D. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम

सूची-II (विशेषता)
1. NCR और आस-पास के क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता के लिए सांविधिक आयोग
2. शहर-वार पीएम (PM) में कमी के लक्ष्यों वाला ढाँचा, जो 2019 में आरंभ हुआ
3. पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक शक्तियाँ देने वाला संघीय ढाँचा कानून
4. राज्य बोर्डों की स्थापना और वायु प्रदूषण नियंत्रण का प्रावधान करने वाला कानून

सही कूट चुनिए:

  1. A-4, B-3, C-1, D-2
  2. A-3, B-4, C-2, D-1
  3. A-1, B-2, C-3, D-4
  4. A-2, B-1, C-4, D-3

उत्तर: A-4, B-3, C-1, D-2 — वायु अधिनियम, 1981 राज्य बोर्डों और वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रावधानों से जुड़ा है (4)। पर्यावरण अधिनियम, 1986 को व्यापक शक्तियों वाला संघीय कानून माना जाता है (3)। CAQM अधिनियम, 2021 NCR के लिए सांविधिक आयोग बनाता है (1), और NCAP शहर-वार लक्ष्यों वाला 2019 का ढाँचा है (2)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ फसल अवशेष जलाना उत्तर भारत में वायु प्रदूषण का मौसमी किंतु निर्णायक स्रोत है, और इसके नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग जैसी सांविधिक संस्थाओं से राज्यों के बीच समन्वय और बाध्यकारी निर्देशों के प्रवर्तन की अपेक्षा की जाती है। इस व्यवस्था में सहकारी संघवाद की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या केवल बाध्यकारी निर्देश और दंडात्मक प्रवर्तन इस समस्या के समाधान के लिए पर्याप्त हैं? अपने तर्कों के साथ उत्तर दीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर के बिंदु:
1. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 की न्यायिक व्याख्या में स्वच्छ पर्यावरण और स्वच्छ वायु का अधिकार शामिल माना गया है (MC Mehta बनाम भारत संघ के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश)। अनुच्छेद 48A (राज्य का कर्तव्य) और अनुच्छेद 51A(g) (नागरिकों का मूल कर्तव्य) पर्यावरण संरक्षण की नैतिक और नीतिगत बुनियाद हैं। राज्य सूची की प्रविष्टि 6 (लोक स्वास्थ्य) और विषय-विभाजन की सीमाओं से यह स्पष्ट होता है कि वायु प्रदूषण एक अंतर-राज्यीय विषय है, जिसके लिए समन्वित ढाँचा आवश्यक है।
2. सांविधिक और नीतिगत ढाँचा: वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 (NCR और आस-पास के क्षेत्रों के लिए बाध्यकारी निर्देश की शक्ति); राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम, 2019 (शहर-वार लक्ष्य, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी)। पूर्ववर्ती EPCA की जगह CAQM का आना संस्थागत समेकन का उदाहरण है।
3. कार्यान्वयन के उपाय: फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनरी की उपलब्धता और तैनाती, इन-सिटू और एक्स-सिटू प्रबंधन, फसल अवशेष आपूर्ति-श्रृंखला, ईंट-भट्टों में बायोमास पेलेट/ब्रिकेट का अनिवार्य उपयोग, थर्मल पावर प्लांटों में बायोमास को-फायरिंग, सैटेलाइट-आधारित फायर अलर्ट का जमीनी सत्यापन, ड्रोन और कम लागत वाले सेंसरों से निगरानी, तथा GRAP जैसे आपातकालीन उपाय।
4. विश्लेषणात्मक पक्ष: (क) सहकारी संघवाद में समन्वय बनाम राज्य क्षमता का अंतर; (ख) एलिनॉर ऑस्ट्रोम की बहुकेंद्रीय शासन (Polycentric Governance) की अवधारणा, जिसके अनुसार स्थानीय स्तर पर सहभागी निगरानी अधिक प्रभावी हो सकती है; (ग) गैैरेट हार्डिन की ‘कॉमन्स की त्रासदी’ से यह समझ कि साझा संसाधन पर व्यक्तिगत लाभ सामूहिक हानि बन जाता है; (घ) किसान की आर्थिक विवशता, मशीनरी की लागत और समय-सीमा; (ङ) प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Vellore Citizens Welfare Forum मामला, 1996) और सावधानी के सिद्धांत की भूमिका।
5. संतुलित मत: केवल दंड से किसानों पर भार बढ़ता है और अनुपालन सीमित रहता है; केवल प्रोत्साहन से निरंतरता नहीं आती। मशीनरी के लिए सब्सिडी, सहकारी या कस्टम हायरिंग केंद्र, फसल अवशेष की व्यावसायिक मांग और प्रवर्तन का संयोजन अधिक व्यावहारिक है।
6. निष्कर्ष: सहकारी संघवाद, संस्थागत स्पष्टता और जमीनी स्तर पर सहभागिता के साथ प्रवर्तन का संतुलन आवश्यक है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Haryana PCS (HPSC / HCS) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: सीएक्यूएम (कॉमन एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन) द्वारा हाल ही में पंजाब और हरियाणा में वायु प्रदूषण नियंत्रण के संदर्भ में किए गए आह्वान के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा उपाय हरियाणा सरकार द्वारा तुरंत लागू किया जाना चाहिए?

  1. A. पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और किसानों को वैकल्पिक फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना
  2. B. औद्योगिक इकाइयों को प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित करने की अनिवार्यता समाप्त करना
  3. C. सार्वजनिक परिवहन में डीजल बसों की संख्या में वृद्धि करना
  4. D. निर्माण गतिविधियों को बिना किसी नियमन के अनुमति देना

उत्तर: A. पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और किसानों को वैकल्पिक फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना — सीएक्यूएम ने पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध और वैकल्पिक प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया है।

Mains: हरियाणा में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सीएक्यूएम द्वारा सुझाए गए उपायों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करते हुए, राज्य सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतिक नीति का वर्णन कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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